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वह चुदाई जिसे आज तक ना भूल सका

Antarvasna, desi kahani: मैं अपने भैया की दोस्त की शादी में गया हुआ था और उस शादी में मुझे काफी अकेला सा महसूस हो रहा था। भैया ने हीं मुझे कहा था कि तुम मेरे साथ चलो इसलिए मैं उस दिन भैया के साथ उनके दोस्त की शादी में चला गया मैं काफी अकेला महसूस कर रहा था। भैया अपने दोस्तों के साथ ही थे लेकिन उसी समारोह के दौरान जब मेरी नजर सुहानी पर पड़ी तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे कि सुहानी से मुझे बात करनी चाहिए। उस दिन तो मेरी सुहानी से कोई भी बात नहीं हुई लेकिन मैंने उसे फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी सुहानी के बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं जानता था लेकिन हम दोनों की फेसबुक चैट के माध्यम से अब बात होने लगी थी। मुझे सुहानी के बारे में धीरे-धीरे पता चलने लगा था सुहानी ने भी मुझसे मेरे बारे में पूछा तो मैंने उसे बताया कि मैं अभी अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहा हूं सुहानी भी कॉलेज में ही पड़ती थी।

मैंने एक दिन सुहानी से उसका नंबर मांगा तो उसने मुझे मना कर दिया और कहा कि नहीं मैं तुम्हें अपना नंबर नहीं दे सकती। सुहानी ने मुझे अपना नंबर देने से मना कर दिया था लेकिन मैं चाहता था कि किसी भी प्रकार से मैं सुहानी का नंबर ले लूँ। मैंने सुहानी का नंबर लेने की बहुत कोशिश की लेकिन सुहानी ने अपना नंबर मुझे दिया ही नहीं परंतु एक दिन सुहानी ने मुझे अपना नंबर दे दिया और उसके बाद मैं सुहानी से फोन पर ही बात करने लगा था। पहली बार जब हम दोनों की फोन पर बातें हुई तो मुझे काफी अनकंफरटेबल सा लग रहा था मेरे दिल की धड़कन बहुत ज्यादा तेज हो गई थी मुझे लग रहा था कि मैं सुहानी से बात नहीं कर पाऊंगा लेकिन मैंने सुहानी से बात की। सुहानी और मेरे बीच बहुत ही अच्छा रिलेशन बन चुका था सुहानी और मैं एक दूसरे को काफी पसंद करने लगे थे जिस वजह से मैं सुहानी से मिलना चाहता था।

मैंने एक दिन सुहानी से मिलने की बात कही तो वह मुझे कहने लगी कि संजीव मैं तुमसे शायद नहीं मिल पाऊंगी क्योंकि पापा का ट्रांसफर लखनऊ से हो चुका है। मैंने उससे कहा लेकिन तुम्हारे पापा का ट्रांसफर कहां हुआ है तो वह मुझे कहने लगी कि पापा का ट्रांसफर चंडीगढ़ हो चुका है इसलिए मैं तुमसे शायद अब ना मिल पाऊं। मैंने उससे कहा लेकिन चंडीगढ़ जाने से पहले तो तुम मुझसे एक बार मिल सकती हो सुहानी कहने लगी कि हां मैं तुमसे एक बार तो मिलना चाहती हूं और जब उस दिन हम लोग मिले तो मुझे सुहानी से मिलकर बहुत ही अच्छा लगा। मैंने उससे कहा कि यह हमारी पहली ही मुलाकात है जब हम दोनों एक दूसरे से मिल रहे हैं क्योंकि सुहानी अपना कॉलेज खत्म होने के बाद सीधा ही घर चली जाया करती थी इसलिए उससे मेरी मुलाकात हो नहीं पाती थी। अब वह लोग भी चंडीगढ़ जाने की तैयारी कर चुके थे सुहानी और उसका परिवार अब चंडीगढ़ शिफ्ट हो चुके थे और जब वह लोग चंडीगढ़ शिफ्ट हो गए तो उसके बाद मेरी सुहानी से सिर्फ फोन पर ही बातें होती थी। मेरा कॉलेज भी अब खत्म हो चुका था और सुहानी का कॉलेज भी कंप्लीट हो चुका था सुहानी भी चंडीगढ़ में जॉब करने लगी थी और मैं भी लखनऊ में जॉब की तलाश में था लेकिन मेरे पापा ने मुझे मेरे मामा जी के पास काम करने के लिए भेज दिया और मैं उनके साथ ही काम करने लगा। पापा चाहते थे कि मैं मामा के साथ ही काम करूं और उसके बाद मैं भी अपना कोई काम शुरू कर लूँ इसलिए मैं अपने मामा जी की दुकान पर काम करने लगा। उनकी दुकान पर काम करते हुए मुझे करीब दो महीने हो चुके थे मैं सुहानी से बात ही कर पाता था हम लोगों की मुलाकात उसके बाद हो ही नहीं पाई मैं सुहानी से कहता कि सुहानी मुझे तुमसे मिलना है लेकिन हम एक दूसरे से मिल ही नहीं पाए हम लोगों की फोन पर ही बातें होती रही। एक दिन मैंने सुहानी से कहा कि मैं तुमसे मिलने के लिए चंडीगढ़ आ रहा हूं तो वह मुझे कहने लगी कि नहीं राजीव तुम चंडीगढ़ अभी मत आना। उसने मुझे आने से मना कर दिया मुझे नहीं पता था कि सुहानी मुझसे क्यों यह सब छुपाने की कोशिश कर रही है लेकिन जब मुझे इस बारे में पता चला कि सुहानी की सगाई हो चुकी है तो मैं बहुत दुखी हो चुका था लेकिन मैं फिर भी अनजान बनने की कोशिश कर रहा। सुहानी को लगा कि शायद मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता लेकिन उसे नहीं मालूम था कि मुझे अब सब कुछ पता चल चुका है मैं पूरी तरीके से टूट चुका था मैं सोचने लगा उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया सुहानी को मेरे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था।

मेरे पास किसी भी बात का कोई जवाब नहीं था और ना ही सुहानी के पास इस बात का जवाब था। मैं जब भी सुहानी से मिलने की बात कहता तो वह मुझे हमेशा टालने की कोशिश करती और कहती कि मैं तुमसे अभी नहीं मिल सकती हूं। मैं अंदर ही अंदर घुटने लगा था और मैं बहुत सोचने लगा था, मैं इस बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगा था जिस वजह से मेरा काम पर भी ध्यान नहीं रहता था कई बार मामाजी मुझे कहते कि राजीव बेटा तुम काम पर क्यों ध्यान नहीं देते हो। मेरे पास किसी भी बात का कोई जवाब नहीं था मेरे मन में तो सिर्फ यही चल रहा था कि किसी प्रकार से मैं सुहानी से मुलाकात कर लूं लेकिन मैं सुहानी से मिल नहीं पाया। मैंने यह बात तो सोच ली थी कि मैं किसी भी तरीके से सुहानी से मिलने के लिए जाऊंगा और मै चंडीगढ़ चला गया। मैने सुहानी को यह बात नहीं बताई थी जब उस दिन सुहानी ने मुझे देखा तो वह हैरान रह गई। उसने मुझे कहा तुम यहां अचानक से आ गए तो मैंने उससे कहा कि बस ऐसे ही मैं किसी काम से यहां आया हुआ था तो सोचा कि तुम से भी मिल लूं।

सुहानी मुझसे मिलकर बिल्कुल भी खुश नहीं थी मैंने सुहानी से कहा कि क्या कुछ देर हम लोग साथ में बैठ सकते हैं। सुहानी ने कहा हां क्यों नहीं हम लोग उस दिन एक पार्क मे चले गए हम लोग जब पार्क में गए तो सुहानी और मैं साथ मे ही थे। मैं सुहानी से बात कर के बहुत ही खुश हो रहा था हालांकि मुझे पता था कि सुहानी से मेरा अब किसी भी प्रकार का कोई रिश्ता नहीं रह सकता लेकिन उसके बावजूद भी मैं इस बात से ही खुश था। सुहानी और मैं साथ में बैठे हुए थे मैंने उसको किस कर लिया वह मुझे कहने लगी तुम यह सब क्या कर रहे हो? मैंने सुहानी को कहा क्या मैं तुम्हें किस भी नहीं कर सकता हूं। वह मुझे कहने लगी नहीं उसने मुझे कहा कि मेरी शादी होने वाली है। मैंने उससे कहा यदि तुम्हारी शादी होने वाली है तो तुमने मुझे धोखे मे क्यों रखा और तुमने मुझसे क्यों झूठ बोला। सुहानी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था वह मुझसे ना जाने कितने ही झूठ बोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका झूठा पकड़ा जा चुका था इसलिए सुहानी के पास अब कोई और रास्ता ही नहीं बचा था। उसने मुझसे कहा मैं तुमसे माफी मांगती हूं तुम अब मेरी जिंदगी से चले जाओ। मैंने उससे कहा मैं तुम्हारी जिंदगी से चला जाऊंगा मुझे पता है कि तुमने मेरे साथ गलत किया और मैं उस दिन वहां से चला गया। शाम के वक्त सुहानी ने मुझे फोन किया जिस होटल में मैं रुका हुआ था उस होटल में सुहानी मुझसे मिलने के लिए आई। वह मुझे कहने लगी राजीव मुझे माफ कर दो मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था क्योंकि मेरे पापा और मम्मी चाहते थे मैं सोहन से शादी कर लूं। मैंने उसे कुछ नहीं कहा मैने सुहानी के होठों को चूम लिया। जब मैंने सुहानी के होठों को किस किया तो वह गर्म होने लगी थी मैंने उसकी चूतडो को पकड़ना शुरू किया मैने उसकी चूतड़ों को दबाया तो मुझे मजा आने लगा था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाल दिया और सुहानी के मुंह पर लगाया।

वह मेरे लंड को चूसने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था मैंने सुहानी के बदन से उसके कपड़े उतार दिए थे। मैंने सुहानी के बदन से उसके कपड़े उतारे तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था। उसकी चूत पर मैंने अपनी उंगली को लगाया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को लगाया। जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया तो उसकी चूत से पानी बहुत ज्यादा बाहर की तरफ को निकल रहा था। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी क्या यह सब ठीक है? मैंने उससे कहा सुहानी जो तुमने मेरे साथ किया वह सब ठीक था। वह मेरा साथ दे रही थी मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया था क्योंकि हम दोनों की सहमति से यह संबध बन रहा था इसलिए उसे भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी। मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो मुझे बहुत ही मजा आता वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी। अब ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था और ना ही वह अपने आपको रोक पा रही थी।

हम दोनों एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे उसने मुझे कहा मुझे तुम्हारे साथ बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने उसके दोनों पैरों को पूरी तरीके से खोल लिया और मैं उसे धक्के मारता तो उसकी चूत पर मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था। उसकी चूत मे मेरा लंड जाता तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। वह बिल्कुल भी नहीं रह पा रही थी इसलिए उसने मेरी कमर पर अपने नाखूनों के निशान भी मार दिए थे। मैंने देखा उसकी चूत से बहुत ज्यादा खून बाहर निकाल रहा है इसलिए वह बिल्कुल भी नहीं रह पा रही थी। वह मुझे कहने लगी मैं बिल्कुल भी नहीं रह पा रही हूं तुम अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर गिरा दो। मैने अपने वीर्य को सुहानी की चूत मे गिरा दिया और उसकी गर्मी को मैने मिटा दिया। उसके बाद ना तो मुझे कभी सुहानी मिली और ना ही उसका मुझे कभी कोई फोन आया।

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