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तेरी चूत लाजवाब तेरा कोई नही जवाब

antarvasna, desi kahani

नमस्कार दोस्तो | कुछ नया मालूम करना कुछ सीखने के लिहाज़ से बढ़िया होता है | मैंने अपने बचपन में कुछ नया सीखने के उद्देश्य से बाहर के शहरों में रहना शुरु किया था | मैं किराये के मकान में रहता हूँ मैं अपने घर का दूसरे नंबर का लड़का हूँ मतलब मुझे मिलाकर हम लोग तीन भाई है | मैं अपने जीवन में तरक्की करने की कोशिश करने की खातिर बाहर के शहरो में रहने लगा | किराये के मकान में पडोस में एक लड़का रहता था | वह अक्सर एक लड़की को देखता रहता था | शुरु में वह लड़का मेरा दोस्त नहीं था | रास्ते में घूमते हुए मैंने उसे सिगरेट पीते हुए देखा और उसने मुझे बुलाया फिर उसने मुझ से पूछा तुम क्या नये आये हो इस शहर में | मैंने उत्तर दिया हाँ | वह लड़का अक्सर दरवाजे पर खडा हो कर लड़की की तरफ घूरा करता था | वह इतना सुन्दर था जैसे कोई मूर्ती हो | उसे छेडने के लिए मैंने बात करते हुए उस्से कहा तुम पड़ोस के मकान वाली लड़की को घूरते हो क्या ?

वह शर्मा गया और बात घुमा दी | उसने मुझे बात करते हुए बताया वह उस लड़की को घूरता इसलिये था क्योकि वह उसकी गर्लफ्रेंड रह चुकी थी लेकिन अब वह किसी और से शादी करने जा रही थी | वह शादी कर के रायपुर जाने वाली थी | वह अब उसका फ़ोन नहीं उठाती थी क्योकि अगर वह उसका फोन उठाती तो वे दोनो पकड़ जाते | कोई न पकड पाए इसलिए फोन का नम्बर मिटाने में ही फायदा था | वैसे उसकी शादी के बाद भी कुछ बदलने वाला नही था | वह उससे मिलने के लिए रायपुर जाने के लिए भी तैयार था | वह पड़ोस में थी और दूर नहीं थी इसलिए वह दरवाजे पर रहकर उसकी घर की तरफ ही लगा रहता था | कुछ महीने बाद उस लड़की की शादी हो गयी और वह रायपुर चली गयी | उस के लिए वह रायपुर भी गया | उस लड़की की शादी होने से पहले वह उसकी चूत ले चूका था | उसने उसकी चुदाई अपने ही कमरे में की थी | चुदाई के लिए उसने एक दोस्त का घर अपनाया था | चुदाई लम्बी थी इसलिये वह दोस्त के घर पहले पहुंचा और बाद में वह लड़की वहां आई | उसने चूत लेते हुए उसे गिफ्ट भी दिया था ऐसा उसने मुझे बताया |

उसने गिफ्ट में एक महंगी सी अंगूठी दी थी | उसका गिफ्ट देने का सिलसिला चलता रहता था | शादी होने से पहेले वह उसे अलग – अलग गिफ्ट दे चूका था और इसमें उसका काफी खर्चा हुआ था | वह रोज नहा धो कर तैयार हो जाता था और उसके कार्य छेत्र में चाला जाता था | कार्य छेत्र से कार्य करने के बाद हम लोग एकजुट होते थे और दुनिया भर का ज्ञान लेते थे | मैं कुछ ज्ञान की जानकारी उसे देता था और वह भी मुझे कुछ ज्ञान देता था | हम रविवार के दिन दारू की महफिल जमाते थे और दारु पीते हुए अपनी आप बीती सुनाते थे | हम रोज दारु नहीं पीते थे क्योकि मैं भी बाहर कुछ सिखने के लिए आया हुआ था और उसे भी उसके बूढ़े घर वालो को पालना था | उस दोस्त के ऊपर जिम्मेदारी थी और उसे निभाने के लिए रोजाना कार्य छेत्र जाना पडता था | उसका जिम्मेदारी लेना और निभाना मुझ पर एक सार्थक प्रभाव डालती थी | दोस्तो, वह शालीन बन्दा था |

सच कहूँ तो उसकी शालीनता से ही सब कुछ पाया था उसने | वह उसके अपने बनाये हुए घर में रहता था | उसने अपने पैसे से पहले जमीन खरीदी और उस पर घर तैयार किया | इतना कुछ उसने उसकी दम पर किया था | लेकिन अगर एक प्रबन्धन में रहकर कुछ किया जाये तो सब कुछ सरल होता है | प्रबंधन आपको लक्ष्य हासिल करने में भी एक एहम भूमिका निभाती है | जो लोग प्रबंधन का महत्व समझते है वह लोग उनके जीवन में सफलता की ओर बढते रहते है | सफल होने के लिए रूपए की आवश्यकता नही है लेकिन आपको प्रबंधन का महत्व मालूम है तो आप सब कुछ सरलता से पा सकते है | उसकी जीवन शैली ने मुझे बहुत कुछ सिखा दिया था और अब मैं उसकी जानकारी की बदौलत एक मैंनेजर बन गाया हूँ |

मैंने अपना शहर छोड़ा और यहाँ आया तो अब मुझे लगता है मैंने सही फैसला लिया था | चलो अब मैं आपको उस शहर का परिचय देता हूँ जहाँ में रहता था | दरसल मैं पुणे में रहता था | पुणे के लोग अपने आप में मस्त रहते है | यह शहर रहेस्सों का शहर क्योकि यहाँ पर कारखाने कई है | अगर तरक्की पाना है तो पुणे एक शानदार जगह है | पुणे में रहने वाले बहुत खुस मिजाज के होते है | संपन्न जगह होने के कारण यहाँ के लोग खुशहाली में उनका जीवन बीताते है | और तो और यहाँ का वातावरण घूमने के लिहाज से काफी शानदार है इसलिए इस से बहतर स्थान कही नहीं है | पुणे में मेरे पहचान के कुछ परिचित रहते है लेकिन मैंने अलग से कुछ और व्यवस्था की थी ताकि मेरी वजह से कोई परेशान नहीं हो | परिचितो ने भी मेरे लिए उनके यहाँ रुकने की व्यवस्था की थी परुन्तु मैंने उन्हे मना कर दिया | जब मुझे एक रहीस दोस्त मिल गया था तो मुझे किसी अन्य की आवश्यता नहीं थी | उस रहीस दोस्त ने भी मुझे उसके यहाँ रहने का बुलावा दिया था | लेकिन मैंने उसे भी मना कर दिया |

पुणे में मैंनेजर बन जाने पर मैंने एक पार्टी का व्यवस्था की | उस पार्टी में मैंने अपने सब ख़ास मित्रो और पुणे के दोस्त की गर्लफ्रेंड को भी बुलाया था | हम सब ने पार्टी एन्जॉय की | ये कोई आम पार्टी की तरह नहीं थी इस पार्टी के लिए मैंने अत्याधिक खर्च भी किया था | जब सब लोग चले गए तब उस दिन पार्टी समाप्त होने के बाद मेरा पुणे वाले दोस्त ने मुझे फिर उसकी पुणे वाली गर्लफ्रेंड की चुदाई के किस्से सुनाये | उस वक्त वह दारु पिया हुआ था और मैं भी दारू के नशे में था | उसकी खुशी का ठिकाना नही था वह पूरी पार्टी में दारु पीकर ऐसे घूम रहा था जैसे वह मैंनेजर हो | उसे मैंने एक बड़ी दारु कि बोतल दी थी जो काफी महंगी थी | उसने उसकी पुरानी गर्लफ्रेंड की चुदाई के किस्से सुनाते हुए कहा की उसने उसकी चुदाई एक दिन उसके घर में की थी | लड़की के घर वाले बाहर गए हुए थे सिर्फ उसकी चाची थी | उसकी चाची किसी वजह से सोई हुई थी और जब मुझे ये मालूम चला तो मैं छत में चड़कर उसके घर में चला गया | मैंने उसे उसी के कमरे में बन्द कर लिया |

कुछ देर उसकी पप्पी लेने के बाद जब मैंने उसके यहाँ किसी चीज के गिरने की आवाज सुनी तो मैंने उसे बाहर का गेट बंद करने को कहा | वह गेट बंद करके आई और मैंने उसकी फ्राक उतार दिया और उसकी चड्डी उतारकर मैंने उसे चोद दिया पर उससे पहले भी बहुत कुछ हुआ | सबसे पहले जैसे ही उसको मैंने नंगा किया उसके बाद मैंने अपने भी कपडे उतार दिए | उसके बाद मेरा नंगा बदन देख कर वो मुझसे लिपट गयी और मुझे यहाँ वहां चूमने लगी | कभी वो मेरे बालों को सहलाते हुए मेरी गर्दन को चूमती तोकभी मेरे लंड को छूते हुए मेरे सीने पे चूमती | मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और उसकी इस हरकत से मैं बहुत खुश हो रहा था | उसके बाद मैंने भी उसे बिस्तर पर गिरा दिया और उसको पागलों की तरह चूमने लगा | उसके बाद तो जैसे मुझमे जोश की आंधी दौड़ रही थी और मैं उसके पेट पर और उसकी नाभि पर चुम्बन पे चुम्बन दिए जा रहा था | मैं उसके स्तन को कस के मसल रहा था और वो सिसकियाँ ले रही थी | मुझे नही पटा था ऐसा क्यों हो रहा है पर वो और मैं दोनों चुदाई के नशे में बेहोश थे | उसके बाद उसने मेरे को आगे पीछे करना शुरू कर दिया अपने हाथसे और मेरी गांड को रगड़ने लगी | हम दोनों एक दूदरे के ऊपर ६९ में आ गया | मैंने उसकी चूत का स्वाद लेना सही समझा और उसने मेरे लंड का | हम दोनों ने काफी देर तक एक दुसरे को चूसा और चाटा |

उसके बाद मैंने उसके दूध को चूसना शुरू किया और उसके निप्पल को चूस चूस के लाल कर दिया | वो तड़पने लगी चुदाई के लिए और उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे लंड पर अपनी चूत सेट करने का बाद वो उस पर ऊपर नीचे होने लगी | मुझे भी मज़ा आने लगा और करीब 15 मिनट तक ऐसे ही चुदाई हुई | उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसी गांड में अपना लंड घुसा दिया और वो चिल्लाने लगी | उसकी गांड काफी टाइट थी पर मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा और उसको चोदना चालु किया | मैं उसकी गांड ज्यादा देर तक नही चोद पाया और उसकी गांड के अन्दर ही अपना मुट्ठ गिरा दिया | इर हम अलग हुए और एक दुसरे से चिपक कर लेट गए |

कुछ देर बाद छत के रास्ते मैं भाग आया | लेकिन और नही चोदा वरना अगर पकड जाते तो बदनामी होती | चोदने से पहले कोई एक ख़ास जगह चुनो और वहां ले जा कर चोदो | चोदना है तो कुछ ख़ास व्यवस्था किया करो | जैसे पहले एक वीरान जगह पर आप पहुँचो और आपके बाद लड़की आये | इसके बाद ही आप लड़की को चोदे | अगर आप पकड़ने वाली जगह में चोदोगे तो अवस्य पकड जाओगे | उस लडके ने सुनाया कि उसने उस लडकी को कैसे चोदा था | जब वो लडकी की चुदाई कर रहा था तब उसने उस लडकी के कपड़े को पहले उतार दिया | तो चुदाई हमेशा अच्छे से करो नही तो बिगाड़ सकती है बात | आज भी वो लड़की मेरे दोस्त से चुदने को बेकरार रहती है और इसका एक मुख्या कारण है उसकी शालीनता और उसका जोश | लम्बे समय तक जिसने चुदाई की है लड़की उसके हाथ से कभी नही निकली है | अगर निकली भी है तो चुदाई का हक बस उसी इंसान को होता है | तो अपने दोस्त की कहानी तो सेट है पर साले ने मेरा लंड खड़ा करवा दिया था | मेरी कोई दोस्त है नही इसलिए मुझे मुट्ठ मार्के ही काम चलाना पड़ता है | खैर अब मैं मेनेजर हु और अपने पास पैसा भी है और इसके सहारे बनाऊंगा किसी को अपना मुरीद और चोदुंगा उसकी चूत को जी भर के जब भी मुझे मौका मिलेगा |

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