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सुहाना सफ़र जिंदगी का पहली बार

desi kahani, hindi sex stories हाय दोस्तों मै रॉकी हूं, मेरी उम्र लगभग २२ वर्ष है | मैं दिखने में हैंडसम, गोरा और ऊँचे कद का मालिक हूं | आज मैं अपनी कहानी आप से शेयर करने वाला हूं, जो हकीकत घटना पर आधारित है, जिसे पढ़ कर आप को भी मजा आ जायेगा | बात उन दिनों की है जब मै कॉलेज में पढाई कर रहा था | मै कॉलेज में अपनी पर्सनालिटी को लेकर कभी भी गंभीर नहीं था परन्तु मुझे मेरे दोस्त बताते थे कि मेरे क्लास की लड़कियों के अलावा कॉलेज कि कई लड़कियां मुझमें दिलचस्पी लेती हैं | मेरा ध्यान पढाई के अलावा और किसी बात में नहीं जाता था | समय से कॉलेज जाना और घर वापस आना यही मेरा रूटीन था | ज्यादा हुआ तो खाली समय में दोस्तों के साथ कुछ हंसी-मजाक कर लिया करता था |

एक दिन मैं कॉलेज पंहुचने में थोडा लेट हो गया तो मुझे दंडस्वरुप मैडम ने क्लास से बाहर निकल जाने का आदेश दे दिया | मैं अपना मन मार कर कॉलेज के गार्डन में चला गया और वही पेड़-पौंधों कि छाव में बैठ कर खुद को लेट होने पर कोस रहा था | तभी मुझे एहसास हुआ कि कोई मुझे चुपके से देख रहा है, मैंने अपनी बाई ओर देखा तो बस देखता ही रह गया, क्योंकि वहां पर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की बैठी थी | खूबसूरत इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इतनी सुन्दर लड़की मैंने आज तक अपने कॉलेज में नहीं देखी थी | उसकी बड़ी-बड़ी नशीली आखें मुझे अपनी तरफ बुलाती सी लग रही थीं | मैंने झेंपते हुए उससे पूंछा कि क्या आप भी मेरी तरह कॉलेज देर से पहुंची हैं | तो उसने हाँ में अपना सर हिला दिया और बताया कि आज मेरा कॉलेज में पहला दिन था इसलिए समय का ध्यान ही नहीं रहा और बीस मिनट की देरी होने पर मैडम ने क्लास में नहीं घुसने दिया फिर गार्डन में आना पड़ा | मेरा दिल उससे बातें करना चाह रहा था इसलिए मैं उससे इजाजत लेकर उसके पास जा कर बैठ गया | उसने बताया कि उसका नाम शालिनी है और वह इस शहर में अपनी बड़ी बहन के पास रहकर पढाई करने आई है | उसकी बड़ी बहन सरकारी अस्पताल में स्टाफ नर्स है और अभी उनकी भी शादी नहीं हुई है | मुझसे बातें करते हुए अचानक उसका दुपट्टा उसके कंधे से नीचे लुढ़क गया | जैसा कि मैंने आपको पहले ही बताया था कि मैंने पहली बार इतनी खूबसूरत लड़की को देखा था, तो दोस्तों उसके सीने से जब दुपट्टा गिर गया तो उसने भी दुपट्टा उठाया नहीं शायद मुझसे बात करने की बेख्याली में भूल गई थी और मै उसके सीने से अपनी नजरें हटा नहीं पा रहा था | उसके ब्रेस्ट मानो उसकी ब्रा से बाहर निकलने को बेताब हो रहे हों | कॉलेज के सफ़ेद ड्रेस में वो गज़ब कि लग रही थी, मैंने किसी प्रकार अपनी उमड़ती भावनावों पर कंट्रोल किया और शालिनी से कहा कि मैं रॉकी हूँ और कॉलेज में पीजी का स्टूडेंट हूं जब भी कोई काम हो तो मुझे याद कर लेना | मेरी बात समाप्त होने से पहले ही उसने कहा कि अरे मै भी तो पीजी कर रही हूं और इत्तेफाक से हमारे सब्जेक्ट भी एक ही निकल गए | बातों ही बातों में कब दोपहर से शाम हो गई पता ही नहीं चला | लेकिन इतना तो तय था कि हम दोनों ही अभी घर जाना नहीं चाहते थे | उठते समय मैंने अपना हाथ उसकी तरफ बढाया तो उसने भी झट से अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया | मुझे तो मानो मेरी मुराद मिल गई हो | मैंने भी झटके से उसे खड़े हो कर अपनी तरफ जोर से खीच लिया, लड़खड़ाते हुए वह मेरे सीने से चिपक गई | हम दोनों को मानो करंट सा लग गया हो, ऐसा इसलिए था क्योंकि हम दोनों ही पहली बार किसी लड़के या लड़की के संपर्क में आये थे | मैंने उसे जोर से भीच लिया था और उसने भी खुद को जैसे मेरे हवाले कर दिया हो | उसके ब्रेस्ट की गर्मी मेरी हार्ट बीट को बढाने लगी थी | मेरे होंठ उसके लब को चूसने लगे हम दोनों ही एक दूसरे  में समा जाने कि कोशिश करने लगे, मेरे मुंह से शालिनी आई लव यू-शालिनी आई लव यू के शब्द निकल रहे थे उसने भी अपने आप को समर्पित कर दिया था |

हम दोनों एक दूसरे में खो चुके थे, तभी शालिनी ने मुझे जोर से हिलाते हुए कहा रॉकी होश में आओ क्या यहीं सब कुछ करने का इरादा है, देखो छुट्टी हो चुकी है और सब गार्डन कि तरफ ही आ रहे हैं | चलो अब हम भी चलते हैं | मैंने कहा शालिनी मैं तो भूल ही गया था कि हम अभी कॉलेज में हैं लेकिन अब से पहले मेरी जिन्दगी में इस तरह कि ख़ुशी कभी भी नहीं आई थी | उसने कहा, रॉकी मेरा भी यही हाल है, इस अनजान शहर में तुम जैसा साथी पाकर मै बहुत खुश हूं | अब चलते हैं कल फिर मिलेंगे | हम दोनों ने एक दूसरे के मोबाइल नंबर लिए और चल दिए | चलते समय मैंने एक बार फिर शालिनी को अपनी बाँहों में भर कर उसके होंठो का लम्बा चुम्बन लिया और उससे कहा कि चलो मैं तुम्हे घर तक छोड़ देता हूं | शालिनी ने हाँ में सिर हिलाया और हम मोटरसाइकल में बैठ कर चल दिए | शालिनी के चिपक कर बैठने से मेरे गाड़ी कि स्पीड बढ़ ही नहीं पा रही थी | तभी शालिनी ने कहा कि क्या बात है आज मुझे घर तक पहुँचाओगे या यू ही धीरे-धीरे चलते रहोगे | बातों-बातों में हम शालिनी के घर पंहुच गए | दरवाजे पर ही शालिनी कि बड़ी बहन इंतजार करती हुई दिखाई दी | शालिनी झट से गाड़ी से उतर कर बोली दीदी यह रॉकी है मेरे कॉलेज में मेरे ही साथ पढ़ता है | मैंने भी नमस्ते के लिए अपना सिर झुका दिया तो उसकी दीदी ने भी दिलचस्प मुस्कान के साथ अपना सिर हिला दिया |

घर पंहुच कर मै सीधे अपने बेडरूम में चला गया और जा कर बिस्तर पर लेट गया | मै शालिनी के खयालों में खोया हुआ था, तभी मम्मी कि आवाज आई रॉकी ओ रॉकी उठ आज क्या बात है खाना नहीं खायेगा क्या ? मै झट से उठ कर खाना खाया और फिर अपने रूम में आ गया | मैंने शालिनी को फोन लगाया तो उसे जैसे मेरे ही फोन का इंतजार था, उसने झट से फोन उठाया और कहा रॉकी मुझे मालूम था तुम जरूर फोन करोगे | मैंने कहा शालिनी मैंने जबसे तुम्हे देखा है मेरे शरीर में अजीब सी बेचैनी हो रही है, शालिनी ने कहा अच्छा ये बताओ कि बेचैनी दूर करनी है क्या ? मैंने कहा नेकी और पूछ-पूछ, मै अभी आ जाता हूं तभी उसने कहा नहीं रुको तो मेरी बात सुनो कल मै और तुम मेरे पापा के घर चल रहे हैं | मुझे वहां से ग्रेजुएसन कि मार्कशीट लानी है, मैंने तुम्हारा टिकट भी ले लिया है | हम लोग शाम सात बजे निकलेंगे | मैंने पूछा शाम को कौन सी ट्रेन जाती है ? तो उसने कहा कि हम ट्रेन से नहीं बस से जायेंगे | मैंने कहा बस में बैठ कर तो मेरा कचूमर निकल जायेगा | शालिनी ने कहा कि ये लग्जरी बस है और हम एक ही स्लीपर में सफ़र करेंगे | मेरे मुंह से निकला वाव शालिनी यु आर ग्रेट, उसने कहा बस-बस कल शाम सात बजे नागपुर वाली बस में मिलो फिर मै तुम्हारी सारी बेचैनी दूर कर दूँगी, मुझे भी तो अपनी तड़प शांत करने कि जल्दी है | ओके अब सो जाओ गुडनाइट |

मुझे रात भर नीद नहीं आई, सुबह होते ही मै जल्दी शाम होने का इंतजार करने लगा | मम्मी को मैंने पहले ही बता दिया था कि, मै एक दोस्त के साथ बाहर जाऊंगा | ठीक सात बजे मैं बस स्टैंड पहुँच गया जहाँ शालिनी बेसब्री से मेरा इंतजार कर रही थी | हम दोनो जल्दी से बस में सवार हो गए | बस ठीक पांच बजे नागपुर के लिए चल पड़ी | हम लोग अपनी बर्थ पर बैठ गए | तभी शालिनी ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और कहने लगी कि मुझे तुमसे मिलने कि ज्यादा बेचैनी हो रही थी इसलिए मैंने दीदी से झूठ बोला कि मै मार्कशीट भूल आई हूं | मैंने भी बस कि बर्थ के परदे ठीक करते हुए उसे जोरदार किस किया | शालिनी ने कहा कि चलो पहले हम कुछ खा लेते हैं तब तक रात भी हो जाएगी | खाना खाकर हम एक दूसरे को जकड कर लेट गए | तभी बरसात शुरू हो गई, अब नौ बज रहे थे तो ड्राइवर ने बस कि अन्दर की सभी लाइटें बंद कर दी | मैंने शालिनी के कपडे उतारने शुरू कर दिए और उसने मेरे अब हम दोनों के शरीर पर एक भी कपडे नहीं थे | तभी बगल से गुजरते ट्रक की रौशनी में मैंने शालिनी के शरीर को देखा तो बस देखता ही रह गया |

दोस्तों मै आप को अपनी कहानी में आगे कि ओर ले चलता हूं | शालिनी के साथ मैं नागपुर के सफ़र में था और अब तक हम दोनों ही निर्वस्त्र हो चुके थे मैं अब अपने ऊपर काबू रख पाने कि स्थिति में नहीं था, यही हाल शालिनी का भी था अब शालिनी पूरी तरह से आग में जल सी रही थी उसका भी खुद पर काबू नहीं था, वो अब मुझे नीचे  लिटा कर मेरे ऊपर आ गई और वो मेरे लिंग को अपने हाथों में लेकर जोर-जोर से दबाने लगी और मदहोशी में चूर शालिनी मेरे लिंग को अपने मुंह भरकर जोर से चूसने लगी | मैंने उसके ब्रेस्ट को कसकर दबाना शुरू कर दिया | उसके ब्रेस्ट के कड़े होने से ही मुझे एहसास हो गया कि मेरी तरह शालिनी का भी यह पहला शारीरिक मिलन है | अब मेरा लंड अपने पूरे शबाब पर था मैंने शालिनी को उठा कर धीरे से अपने लंड पर बैठा लिया, तभी एक स्पीड ब्रेकर में बस के उछलने से मेरा लंड शालिनी कि चूत में एक ही झटके में समा गया |

हम दोनों के ही मुह से दर्द के मारे चीख निकल गई, मैंने झट से शालिनी के होंठो को अपने होंठो में भर लिया ताकि हमारे दर्द कि आवाज से दूसरे यात्रियों को डिस्टर्ब न हो | कुछ देर हम दोनों इसी पोजीशन में चुपचाप पड़े रहे | फिर मैंने धीरे से शालिनी से पूंछा अब कैसा लग रहा है, तो उसने कहा बहुत अच्छा लग रहा है | अब देर मत करो मेरी तड़प को शांत कर दो | मैंने अब शालिनी कि कमर को कस कर पकड़ के उसकी चूत में अपने लंड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा और उसके ब्रेस्ट के निप्पलस को मुह में भर कर चूसने लगा, शालिनी पूरी तरह उत्तेजित होकर अब जोर-जोर से धक्के मार रही थी | मैं भी पूरी स्पीड से शालिनी का साथ दे रहा था | लगभग एक ही समय पर हम दोनों ही स्खलित हो गए | वह समय ऐसा था मानो हम दोनों ही जन्नत में पहुच गए हों| कुछ क्षण हम ऐसे ही लेटे रहे | फिर मैंने धीरे से शालिनी को अपने ऊपर से निचे लिटाया और उसके निप्पल्स को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा | इस दौरान शालिनी फिर से उत्तेजित होने लगी और कहने लगी ओ रॉकी आई लव यू मैंने भी उसे किस करते हुए आई लव यू कहा और उसके बिना बालों वाले चूत पर अपनी जीभ फिरने लगा, अब तो शालिनी को मानो पागलपन का दौरा सा पड़ गया उसने मेरे खड़े लंड को पकड़ कर अपनी चूत में डाल लिया | मैंने भी जोरदार झटके के साथ एक ही बार में अपना लंड पूरा घुसेड दिया | अब हम फिर से एक दूसरे में पूरी तरह समा जाने की कोशिश करने लगे | और इस बार चुदाई का आनंद जबरदस्त रहा , क्योंकि इस बार हम दोनों ही आराम से और लम्बे समय तक मिलते रहे | उत्तेजना कि चरम अवस्था में हम एक साथ पहुँच कर स्खलित हो गए | लेकिन हम दोनों इसी अवस्था में सो गए |

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