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पिज़्ज़ा वाले की भूरी आंखों ने जादू कर दिया

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मेरा नाम कल्पना है मैं अंबाला की रहने वाली हूं लेकिन पिछले 5 सालों से मैं मुंबई में रह रही हूं क्योंकि मैं अपनी लाइफ को इंडिपेंडेंट जीना चाहती थी इसीलिए मैं मुंबई आ गई। मेरी उम्र 30 वर्ष है, पिछले 5 सालों में मेरे जीवन में बहुत कुछ बदलाव हुआ है, जब मैं शुरू में मुंबई आई थी तो मैंने बहुत ही ज्यादा दिक्कते झेली क्योंकि मैं अपने घर से पहली बार ही बाहर आई थी और मुझे कुछ भी काम करना नहीं आता था। मेरी मम्मी मेरे लिए बहुत ही चिंतित थी, वह कहती कि तुम मुंबई मत जाओ तुम यहीं पर रह कर कुछ भी काम कर लो, मैंने उन्हें समझाया कि मैं जब तक घर से बाहर नहीं जाऊंगी तब तक मैं अपने जीवन को कैसे जी पाऊंगी या कोई भी काम कैसे कर पाऊंगी। मैं जब मुंबई आई तो मैंने अपने जीवन को अपने तरीके से जीने की सोची, जब मैं शुरुआत में मुंबई आई तो मैं एक हॉस्टल में रहती थी, वहां पर बहुत सारी लड़कियां थी और हमेशा ही उस हॉस्टल में झगड़े ही होते रहते थे इसी वजह से मैंने ज्यादा समय उस हॉस्टल में रुकना उचित नहीं समझा।

जब मेरी नौकरी लग गई तो मैंने एक लड़की के साथ रूम शिफ्ट कर लिया और उसके साथ भी मैं काफी समय तक रही। शुरुआत में हम दोनों की बहुत अच्छी बनती थी लेकिन धीरे-धीरे हम दोनों के बीच में झगड़े होने लगे क्योंकि उसका बॉयफ्रेंड अक्सर हमारे घर पर आता था और उसे मुझसे बहुत ज्यादा दिक्कत होती थी, वह समझती थी कि मेरा चक्कर उसके बॉयफ्रेंड के साथ चल रहा है इसी वजह से वह मुझसे झगड़ने लगती,  वह हमेशा ही मेरा फोन चेक करती थी। शुरू शुरू में तो मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा लेकिन धीरे-धीरे मुझे लगने लगा कि वह मुझ पर शक करती है इसी वजह से मैंने भी उससे बात करनी बंद कर दी, हम दोनों के बीच में झगड़े होने लगे,  हम लोग ज्यादा दिन तक साथ में नहीं रह पाए  और मैंने अलग रहने की सोच ली। जब मैं अलग रहने के लिए गई तो मुझे बहुत ही दिक्कत हुई क्योंकि  मैं अकेले रहती थी और मुझे अकेले में रहना बहुत डर लगता था। जब धीरे-धीरे समय होने लगा  तब मुझे अकेले रहने की आदत पड़ने लगी, शुरूआत में मुझे खाना बनाने में बहुत दिक्कत होती थी, मैं खाना भी नहीं बना पाती थी लेकिन मैं अपनी मां को फोन कर दिया करती और वह मुझे समझा देती कि किस प्रकार से खाना बनाना है।

अब मुझे खाना बनाना भी आ गया था और मैं अब अपने तरीके से रहने भी लगी थी। धीरे-धीरे मेरे अंदर समझ आने लगी और मैं अब अपनी सेविंग भी करने लगी थी, मेरे पास थोड़ी बहुत सेविंग भी हो चुकी थी इसीलिए मैं अपने तरीके से अपने जीवन को जीने लगी थी और उसके बाद मैंने एक अच्छी कंपनी में ज्वाइन कर लिया। मैं उसके बाद से उसी कंपनी में काम कर रही हूं और मेरी उस कंपनी में एक लड़के के साथ अच्छी दोस्ती हो गई, उसका नाम पंकज है। पंकज और मेरे बीच में सिर्फ दोस्ती ही है क्योंकि मैं किसी के साथ भी रिलेशन में नहीं रहना चाहती इसीलिए मैंने पंकज से यह बात साफ कर दी थी कि मैं तुम्हारे साथ रिलेशन में नहीं रहना चाहती, बस हम दोनों एक अच्छे दोस्त रह सकते हैं। पंकज को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी, उसके दिल में मेरे लिए बहुत ज्यादा इज्जत है लेकिन उसके बावजूद भी मैंने उसे कभी भी अपने नजदीक नहीं आने दिया और हम दोनों एक अच्छे दोस्त हैं। मुझे जब भी पंकज की जरूरत होती तो वह हमेशा ही मेरे साथ में खड़ा रहता क्योंकि जिस प्रकार से पंकज का नेचर है, वह मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन मैं उसके साथ रिलेशन में नहीं रहना चाहती, मैं अपना जीवन अकेले ही जीना चाहती हूं और कुछ समय तक मैं अपने आप को समझना चाहती हूं।  मैं अपने माता पिता को भी फोन कर दिया करती, जिस वजह से वह मेरी चिंता नहीं किया करते है। एक बार मेरे पिताजी का फोन आया कि तुम काफी समय से घर नहीं आई हो, कुछ दिनों के लिए तुम घर आ जाओ, मैंने उन्हें कहा कि ठीक है मैं कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले लेती हूं और घर आ जाती हूं। मैं जब छुट्टी लेकर अपने घर गई तो मुझे नहीं पता था कि मेरे भैया भी आए हुए हैं, मेरे भैया बेंगलुरु में रहते हैं, वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वहीं पर वह जॉब करते हैं। जब मैं अपने भाई से मिली तो मुझे बहुत खुशी हुई, मैं उनसे काफी समय बाद ही मिल रही थी, मेरी उनसे फोन पर भी ज्यादा बात नहीं होती है, मैं उनकी बहुत रिस्पेक्ट करती हूं क्योंकि वह मुझे बहुत ही अच्छे से समझते हैं, जब भी मुझे कोई दिक्कत होती है तो मैं उन्हें फोन कर लिया करती हूं इसी वजह से मैं उनसे मिलकर बहुत खुश थी। मेरे भैया मुझसे पूछने लगे कि तुम काफी समय बाद घर आ रही हो क्या तुम घर नहीं आती, मैंने कहा कि ऑफिस में बहुत काम रहता है और मैं ज्यादा छुट्टी भी नहीं लेती इसलिए मैं घर नहीं आ पाती।

मेरे भैया भी मेरे डिसीजन का हमेशा से ही रिस्पेक्ट करते हैं और उन्होंने ही मेरी मुंबई जाने में मदद की थी क्योंकि मेरे पिता जी बिल्कुल भी तैयार नहीं थे, उन्होंने ही पिताजी को कहा था कि यदि कल्पना मुंबई चली जाएगी तो उसके भविष्य के लिए अच्छा होगा, उन्होंने ही मुझे मुंबई जाने में मेरी मदद की। भैया पूछने लगे कि कितने दिनों तक तुम घर पर रहने वाली हो, मैंने उन्हें कहा कि मैं 10 दिन घर पर रखूंगी, मैंने 10 दिन की छुट्टी ली हुई है लेकिन एक-दो दिन मेरे मुंबई में ही खराब हो गए क्योंकि मुझे कुछ काम था इसीलिए मैं मुंबई से लेट से निकली। मैंने भैया से पूछा की आप कितने दिनों के लिए घर पर हैं, वह कहने लगे कि मैं अभी 10 15 दिन घर पर ही रुकने वाला हूं। मैंने उनसे कहा चलो यह तो अच्छी बात है कम से कम इसी बहाने हम दोनों की बात भी हो जाया करेगी और हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिता पाएंगे। मैंने भैया से कहा कि क्यों ना हम लोग कहीं घूमने के लिए जाएं, वह कहने लगे ठीक है हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं।

भैया कहने लगे कि हम लोग शिमला चलते हैं, कुछ दिन शिमला में ही साथ में समय बिताते हैं, मैंने उनसे कहा यह तो बहुत ही अच्छी बात है और फिर हम लोग शिमला चले गए। मेरे माता-पिता भी बहुत खुश है और मैं भी अपनी फैमिली के साथ समय बिता कर खुश थी, हम लोग कुछ दिन शिमला में रहे, उसके बाद हम लोग घर लौट आए। मैं कुछ दिन घर पर ही रही और उसके बाद मैं मुंबई लौट आई, जिस दिन मैं मुंबई लौटी तो उस दिन मैं बहुत ज्यादा ही थक चुकी थी और मुझे अपने घर की बहुत याद आ रही थी इसीलिए मैंने अपने घर पर फोन कर दिया और मैंने अपनी मम्मी से बात की तो मैंने उन्हें कहा कि मुझे आपकी बहुत याद आ रही है, वह कहने लगी कोई बात नहीं तुम कुछ दिन और छुट्टी लेकर घर आ जाना, मैंने उन्हें कहा कि अब तो संभव नहीं हो पाएगा लेकिन फिर भी मैं कोशिश करूंगी की मैं घर आ पाऊँ। मुझे बहुत तेज भूख लग रही है इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना मै  पिज़्ज़ा आर्डर कर दू। मैंने जब भी  पिज़्ज़ा ऑर्डर किया त कुछ देर बाद ही पिज्जा लेकर एक लड़का आ गया। जब मैंने उस लड़के को देखा तो उसकी आंखें भूरी थी और मुझे उसे देख कर बहुत ज्यादा सेक्स की भावना चढ़ने लगी। मैंने उसे अंदर अपने कमरे में बुला लिया। वह मेरे साथ ही बैठा हुआ था मैंने उससे सेक्सी बातें करनी शुरू कर दी। वह पूरे मूड में आ गया मैंने उसे कहा कि तुम मेरी चूत मारो। जब उसने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने भी उसके लंड को अपने मुंह में लेकर तो चूसना शुरू कर दिया। मैंने उसके लंड को बहुत अच्छे से चूसा और उसका पानी बाहर निकाल दिया। उसने मुझे मेरे बिस्तर पर लेटा दिया और कहने लगा अब आप अपने कपड़े खोलो। मैंने अपने कपड़े खोलने शुरू कर दिए और उसने मेरे होठों को किस करना शुरू किया तो मैंने भी उसके होठों को किस करना शुरू कर दिया।

हम दोनों के बदन से ही बहुत गर्मी निकलने लगी। मैंने उसे कहा कि तुम जल्दी से मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दो। उसने जैसे ही अपने लंड को मेरी नरम और मुलायम योनि के अंदर डाला तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ और मुझे दर्द भी होने लगा था परंतु उस दर्द में भी एक अलग ही प्रकार के मजा था। उसने मेरी जांघों को पकड़ लिया और वह अपने लंड को मेरी योनि के अंदर तक डालता तो वह कहता आपकी योनि बहुत ही ज्यादा टाइट है मुझे आपको चोदने में बड़ा मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा कि मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने में बड़ा मजा आ रहा है। वह जिस प्रकार से मुझे धक्के मार रहा था उससे मेरी पूरी उत्तेजना बाहर आने लगी और उसका भी पूरा मूड होने लगा। उसने कहा अब आप उल्टे लेट जाओ। जब उसने मुझे उल्टा लेटाया तो जैसे ही उसने अपने मोटे लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मुझे बहुत दर्द हुआ। उसने मेरी चूतडो को कसकर पकड़ लिया और उसके नाखून मेरे चूतड़ों के अंदर घुस चुके थे। मैंने भी अब बड़ी तेजी से अपनी चूतडो को उसकी तरफ करना शुरू कर दिया। उसके और मेरे पसीने छूटने लगे मैंने उसे कहा कि मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। वह कहने लगा कि मुझे भी बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है और मेरा भी लंड पूरी तरीके से छिल चुका है लेकिन मेरा मन बिल्कुल भी नहीं भर रहा आप जिस प्रकार से अपनी चूतडो को उठा रही हैं मेरा मन कर रहा है मैं आपको ऐसे ही पकडकर रखू और ऐसे ही बस चोदता रहूं। वह मुझे बड़ी तेजी से धक्का दे रहा था और अब उसका पसीना टपकने लगा और उसका पसीना टपकते ही मेरी चूतडो पर गिरने लगा। मैंने उससे पूछा कि क्या  तुम्हारा हुआ नही वह कहने लगा मेरा शरीर पूरा गर्म हो गया है। उसने 10 मिनट तक मुझे ऐसे ही चोदना जारी रखा और 10 मिनट बाद जब उसने अपने वीर्य को मेरी चूतडो पर गिराया तो मुझे अच्छा महसूस हुआ।

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