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मेरे लंड को गले तक समा लिया

Antarvasna, hindi sex stories: करीब एक वर्ष बाद मैं दुबई से घर लौटा था जब मैं दुबई से घर लौटा तो सब कुछ बदल चुका था मैं मुंबई का रहने वाला हूं और इस एक वर्ष में मेरे दोस्तों की शादी भी हो चुकी थी और मैं जिस लड़की से प्यार करता था वह भी अब शादी कर चुकी थी। मैं जब दुबई से घर लौटा तो उस वक्त मेरी मां काफी ज्यादा बीमार थी इसलिए मुझे घर लौटना पड़ा था। उनका इलाज भी एक नामी हॉस्पिटल से चल रहा था और अब वह पहले से काफी बेहतर महसूस कर रही थी। पापा मुझे कहने लगे कि सुधीर बेटा हमने तुम्हारी बहन ममता के लिए एक लड़का देखा है यदि तुम उससे मिल लेते तो अच्छा रहता मैंने पापा से कहा कि ठीक है पापा मैं उससे मिल लूंगा। अगले ही दिन मैं उससे मिलने के लिए चला गया जब मैं उससे मिला तो मुझे लड़के में कोई भी कमी नहीं दिखाई दी और मैंने उसके बारे में पता भी करवाया लेकिन वह काफी शरीफ है उसका नाम राजेश है। जल्द ही ममता और राजेश की भी सगाई हो गई उन दोनों की सगाई हो जाने के तुरंत बाद उन दोनों की शादी भी हो गई थी।

मैं भी मुंबई में ही था मैं चाहता था कि मुंबई में ही मैं कोई काम शुरू करूं इसलिए मैंने मुंबई में ही अब एक नया कारोबार शुरू कर लिया था उसमें मेरी मदद मेरे चाचा जी ने की। चाचा जी काफी पहले से ही कपड़ों का कारोबार करते हैं मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी इसलिए चाचा जी ने ही मेरी मदद की और मैंने एक कपड़ों की दुकान खोल ली मेरा काम भी ठीक ठाक चल रहा था। एक दिन मैं दुकान में ही था उस दिन मेरी दुकान में मेरा दोस्त रोहित आया जब उस दिन रोहित मेरी दुकान में आया तो मैं रोहित से मिलकर बहुत खुश था काफी समय बाद रोहित से मेरी मुलाकात हो रही थी। रोहित मुझे कहने लगा कि सुधीर तुम तो बिल्कुल वैसे ही हो जैसे पहले थे मैंने उसे कहा मैं तो खैर वैसा ही हूं लेकिन तुम भी बिल्कुल नहीं बदले हो। मैंने रोहित को कहा तुम आजकल क्या कर रहे हो तो रोहित ने मुझे बताया कि मैं तो जॉब कर रहा हूं। मैंने रोहित से कहा लेकिन तुम्हें यह किसने बताया कि मैंने दुकान का काम शुरू किया है तो वह मुझे कहने लगा कि मुझे कुछ दिनों पहले तुम्हारे पापा मिले थे उन्होंने ही मुझे इस बारे में बताया था।

रोहित मेरा काफी पुराना दोस्त है और रोहित से इतने समय बाद मिलकर मुझे अच्छा लगा। रोहित और मैं साथ में ही बैठे हुए थे रोहित ने मुझे बताया कि वह जल्द ही शादी करने वाला है मैंने रोहित को कहा लेकिन मुझे तो इस बारे में कुछ पता ही नहीं है। रोहित ने मुझे बताया कि उसके ऑफिस में एक लड़की जॉब करती है उसका नाम महिमा है और महिमा के साथ वह बहुत जल्दी शादी करने वाला है। महिमा और रोहित एक दूसरे को पसंद करते थे इसलिए उन दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया रोहित ने मुझे कहा कि तुम्हें शादी में आना है मैं तुम्हारे घर पर शादी का कार्ड भिजवा दूंगा मैंने रोहित को कहा मैं तुम्हारी शादी में जरूर आऊंगा। कुछ दिन बाद मैं रोहित की शादी में गया रोहित की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई और शादी के कुछ समय बाद जब रोहित मुझे मिला तो मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी शादी शुदा जिंदगी कैसी चल रही है। वह मुझे कहने लगा कि सुधीर मेरी जिंदगी तो अच्छे से चल रही है और मैं बहुत ज्यादा खुश हूं कि मेरी शादी महिमा के साथ हुई। महिमा के पिताजी रोहित से महिमा की शादी नहीं करवाना चाहते थे लेकिन महिमा की जिद के आगे उनकी एक न चली और महिमा की शादी रोहित से हो गयी थी। रोहित ने मुझे कहा कि तुम भी जल्दी से शादी कर लो मैंने उसे कहा कि मैं भी कई बार सोचता हूं कि मैं शादी कर लूं लेकिन यह सब इतना आसान भी तो नहीं है शादी के लिए मुझे लड़की देखनी होगी जो कि फिलहाल मैंने अभी देखी नहीं है। एक दिन मैं दुकान पर ही था उस दिन मैं जैसे ही घर लौटा तो मेरी दुकान में चोरी हो गई और जब दुकान में चोरी हुई तो मैं इससे काफी ज्यादा परेशान हो चुका था। हालांकि मैंने पुलिस स्टेशन में भी कंप्लेंट करवा दी थी लेकिन अभी तक चोरी का कुछ पता नहीं चल पाया था और मैं काफी ज्यादा परेशान था। मैंने यह बात पापा को भी बताई उस दिन दुकान से काफी सामान चोरी हुआ था और दुकान में काफी ज्यादा नुकसान भी हो चुका था इसलिए मुझे दोबारा से सामान रखवाना पड़ा और दोबारा से मैंने दुकान का काम शुरू कर दिया।

एक दिन मैं दुकान पर था उस दिन मुझसे मिलने के लिए मेरे चाचा जी आए थे चाचा जी ने कहा कि सुधीर बेटा दुकान के बारे में मैंने सुना की तुम्हारी दुकान में कुछ समय पहले चोरी हुई थी। मैंने चाचा जी से कहा हां चाचा जी कुछ समय पहले ही दुकान में चोरी हुई थी और दुकान में काफी पैसा रखा था जो कि चोरी हो चुका है और अभी तक उस पैसे का कोई पता नहीं चला है दुकान से काफी सारा सामान भी गायब है। चाचा जी मुझे कहने लगे कि सुधीर बेटा अगर तुम्हें कुछ पैसों की जरूरत है तो मैं तुम्हें पैसे दे देता हूं। मैंने उन्हें कहा कि नहीं चाचा जी मुझे पैसों की जरूरत नहीं है। मै काफी ज्यादा परेशान था जिस वजह से मैं किसी से अच्छे से बात नहीं कर पा रहा था लेकिन जब मैं कविता से मिला तो कविता से बात करना मुझे अच्छा लगने लगा। कविता से मेरी मुलाकात मेरी दुकान में ही हुई थी धीरे-धीरे हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे कविता का तलाक हुए कुछ समय ही हुआ था और मुझे उससे बात करना अच्छा लगता। उसने मुझे अपने डिवोर्स के बारे में बता दिया था कविता और मैं ज्यादा से ज्यादा समय साथ में बिताने की कोशिश करते और मैं जब भी कविता से बात करता तो मुझे काफी ज्यादा सुकून मिलता और अच्छा भी लगता।

कविता मुझे अपने घर पर अक्सर बुलाया करती थी लेकिन एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुलाया तो उस दिन वह बाथरूम से नहा कर बाहर निकली थी उसके बालो से पानी टपक रहा था उसका बदन गिला था मैं यह देखकर उत्तेजित हो गया था जब मैंने उसे देखा तो मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारे बदन को महसूस करना है। वह कहने लगी तुम मेरे बदन को महसूस कर लो जब उसने मुझे यह कहा तो मैंने भी उसे गोद में उठाया और उसको बिस्तर पर पटक दिया शायद वह भी सेक्स के लिए तड़प रही थी और मेरे लिए यह अच्छा मौका था। मैंने भी उसके कपड़ों को उतार फेंका जब मैंने उसकी ब्रा को देखा तो वह मुझे कहने लगी सुधीर तुम बहुत अच्छे हो। मैंने जैसे ही अपनी जीभ का स्पर्श उसके होठों पर किया तो वह मुझे कहने लगी अब तुम मुझे किस कर लो और मैंने उसे किस कर लिया। उसके बाद जैसे वह मेरी हो चुकी थी मैं उसकी चूत के अंदर उंगली डाल रहा था और उसके होठों को चूम रहा था। एक हाथ से मैं  उसके स्तनों को मुंह मे ले चुका था जिन्हें मैं अच्छे से दबाए जा रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक दबाया उसके बाद जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया तो वह कहने लगी मुझे भी तुम्हारे लंड का मजा लेने दो। हम दोनों 69 पोज मे बन चुके थे जिसके बाद मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया जब वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक लेती तो मेरे अंदर की उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ जाती और मैं उसे पूरी तरीके से संतुष्ट करना चाहता था इसलिए मैंने भी उसकी चूत के अंदर तक अपने जीभ को डाल दिया था। उसके मुंह के अंदर बाहर में अपने लंड को कर रहा था मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और वह भी पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी। हम दोनों ही बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गए थे मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर लंड को डालना चाहता हूं।

वह भी मेरे लंड को लेने के लिए तड़प रही थी मैंने जब अपने लंड पर थूक लगाते हुए उसकी चूत पर लंड को सटाया तो वह कहने लगी सुधीर अब तुम अंदर की तरफ लंड डाल दो और मैंने धीरे-धीरे उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया। मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर तक चला गया था जब मेरा लंड उसकी चूत को चिरता हुआ अंदर की तरफ गया तो वह चिल्लाते हुए कहने लगी आज तो मुझे मजा ही आ गया। मैंने उसके दोनों पैरो को अपने कंधों पर रख लिया था जिससे कि मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और वह भी मेरा साथ अच्छे से दे रही थी उसे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत अधिक मज़ा आ रहा था। अब हम दोनों की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह तड़पने लगी थी उसने भी मुझे अपने पैरों के बीच जकडना शुरू कर दिया जिस से कि मुझे एहसास हो चुका था कि वह ज्यादा देर तक मेरा साथ नहीं दे पाएगी और उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकलने लगी थी जिसे कि मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरा वीर्य उसकी चूत के अंदर ही गिर गया।

मेरी इच्छा अभी तक पूरी नहीं हुई थी मैंने उसकी चूत को साफ करते हुए अपने लंड को भी साफ कर लिया अब मैंने उसे घोडी बनाते हुए अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाला मैंने ऐसा किया तो उसकी चूत के अंदर मेरा लंड चला गया था और मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए। जब मैं उसे तेजी से धक्के मार रहा था तो मुझे मज़ा आ रहा था अब वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाए जा रही थी ऐसा करने से उसकी इच्छा पूरी हो रही थी और मेरी भी इच्छा पूरी होने लगी थी मैंने उसे कहा मझे तुम्हे चोदने में बहुत मजा आ रहा है। वह कहने लगी तुम ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहो मैंने उसकी चूतड़ों को लाल कर दिया था और वह भी मुझसे कहती तुम मुझे धक्के मारते रहो और मेरी चूत के अंदर बाहर लंड को करते रहो कुछ देर बाद मैंने अपने वीर्य को गिरा दिया और उसकी चूत के अंदर मैंने जब अपने वीर्य को गिराया तो मुझे मजा ही आ गया और वह भी पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी।

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