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चूत देने को तैयार थी

Antarvasna sex stories, hindi sex story चाचा और चाची से मिले हुए काफी समय हो चुका था तो एक दिन मैंने सोचा कि उनसे मिल लिया जाए क्योंकि उनसे मिलने का मुझे समय ही नहीं मिल पाता। जब से मैंने अपना बिजनेस शुरू किया है तब से तो मैं अपने काम में इतना व्यस्त हो गया हूं कि मैं चाचा और चाची से मिलने जा ही नहीं पाता। मैंने चाचा को फोन किया और कहा चाचा जी कैसे हैं तो वह कहने लगे बेटा मैं तो ठीक हूं लेकिन तुम कई महीने बाद मुझे फोन कर रहे है। मैंने चाचा जी से कहा हां चाचा जी दरअसल मैं बिजी था इसलिए आपको फोन नहीं कर पाया फिर सोचा कि आप से बात कर लूं काफी समय हो चुका है आपसे बात ही नहीं हो पाई है।

वह मुझे कहने लगे अविनाश तुम कैसे हो मैंने उन्हें कहा मैं तो ठीक हूं मैं सोच रहा था आपसे मिलने के लिए आज आपके घर पर आता हूं चाचा कहने लगे हां बेटा क्यों नहीं तुम घर पर आओ ना। और मैंने अपने मम्मी पापा से कहा मैं चाचा जी से मिलने के लिए जा रहा हूं वह कहने लगे कि तुम एक काम करना बेटा कुछ दिनों पहले हमने उनसे पैसे लिए थे तो तुम उन्हें वह पैसे लौटा देना मैंने मम्मी से कहा लेकिन यह बात तो आपने मुझे बताई ही नहीं। पापा कहने लगे अरे बीच में कुछ पैसों की आवश्यकता पड़ गई थी तो मैंने राजेंद्र से पैसे ले लिए थे पापा ने पैसे दिए और मैं चाचा जी से मिलने के लिए चला गया। मैं जब चाचा जी से मिलने के लिए गया तो चाचा जी मुझे देखकर खुश हो गए और कहने लगे अविनाश बेटा तुमने तो हमारे घर का रास्ता जैसे देखा ही नहीं था इतने समय से तुम घर आना हीं भूल गए थे। मैंने चाचा से कहा चाचा अब क्या बताऊं बस काम में इतना ज्यादा व्यस्त हो गया हूँ कि अपने लिए भी समय नहीं मिल पाता लेकिन आज काफी समय बाद आपकी याद आई तो सोचा आप से मिल ही लिया जाए।

मैंने चाचा जी को पैसे दिये और कहा चाचा जी यह पैसे पापा ने आपको दिए हैं उन्होंने कहा अरे भैया भी छोटी-छोटी बातों में अपनी ईमानदारी दिखा देते हैं तुम्हारे हाथ पैसे भिजवाने की क्या जरूरत थी। मैंने चाचा से कहा आपको पिताजी के बारे में तो पता ही है वह कितने ज्यादा ईमानदार है और कभी भी किसी से वह उधार ले ले तो उसे जब तक वापस लौटाते नहीं है तब तक वह चैन की सांस नहीं लेते। हम दोनों बात कर ही रहे थे कि मेरे चाची आ गए और कहने लगे अरे अविनाश बेटा इतने समय बाद तुम आ रहे हो मैंने चाची से कहा बस चाची क्या बताऊं काम में बहुत बिजी हो गया हूं। वह कहने लगी तुम्हारा काम तो अच्छा चल रहा है ना मैंने उन्हें कहा हां चाची जी काम तो अच्छा चल रहा है लेकिन किसी से मिल नहीं पाता हूं तभी चाचा कहने लगे कि बेटा हम लोग रागिनी के लिए लड़का देख रहे हैं और उसके लिए एक रिश्ता भी आया है। मेरे चाचा ने चाची से कहा जरा उस लड़के की तस्वीर दिखाना जो शुक्ला जी ने हमें तस्वीर दी थी मेरी चाची ने जब वह तस्वीर दिखाई तो मैंने कहा चाचा जी लड़का तो दिखने में अच्छा है लड़का करता क्या है चाचा कहने लगे की यह इंजीनियर है और उसके पिताजी भी इंजीनियर थे। मैंने चाचा से कहा यह तो शालिनी के लिए अच्छा रहेगा क्या आपने उससे मुलाकात की थी वह कहने लगे हां बेटा हम लोग कुछ दिनों पहले उससे मिले थे। मेरे चाचा और मेरे बीच में बहुत बनती है शालिनी चाचा की इकलौती लड़की है और उन्होंने उसे बड़े ही नाजो से पाला है चाचा ने शालिनी को कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी उन्होंने उसके लिए जितना हो सकता था उससे ज्यादा ही उसे दिया है। मैंने चाचा जी से कहा लड़का तो अच्छा है कुछ दर बाद मैं वहां से वापस लौट आया कुछ दिनों बाद चाचा ने खुशखबरी सुनाई और कहां बेटा हमने शालिनी का रिश्ता पक्का कर दिया है। मैंने चाचा से पूछा क्या आपने शालिनी का रिश्ता उसी लड़के से किया है जो तस्वीर आपने मुझे दिखाई थी वह कहने लगे हां हमने उससे ही शालनी का रिश्ता तय किया है और बस अगले हफ्ते हम लोग शालिनी की सगाई करवा देंगे। मैंने चाचा से कहा चलिए यह तो बहुत अच्छी बात है।

चाचा ने शायद पापा और मम्मी को भी बता दिया था और अगले हफ्ते ही शालिनी और महेश की सगाई हो गई सगाई का अरेंजमेंट चाचा ने बहुत ही अच्छे से किया था सब कुछ बड़ा ही व्यवस्थित था। कुछ समय बाद शालिनी की शादी भी होने वाली थी शालनी उस वक्त घर पर ही थी मैं चाचा से मिलने गया हुआ था तो शालिनी की एक सहेली घर पर आई हुई थी और जब मैंने उसे देखा तो वह ना जाने मुझे देखकर क्यों मुस्कुराने लगी। मेरी मुलाकात उससे पहली बार ही हुई थी मुझे उसका ना तो नाम मालूम था और ना ही उसके बारे में कुछ मुझे जानकारी थी मैंने शालिनी से पूछा तुम्हारी सहेली का क्या नाम है वह कहने लगी मेरी सहेली का नाम राधिका है। शालिनी मुझसे कहने लगी भैया राधिका के बारे में बड़ा पूछ रहे हो मैंने शालनी से कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है तुम शायद गलत समझ रही हो मैंने शालिनी से कहा तुम मेरे साथ बैठो। शालिनी मेरे साथ बैठ गई और मुझसे बात करने लगी मैंने शालिनी से पूछा तुम इस रिश्ते से खुश तो हो ना वह कहने लगी हां भैया मैं इस रिश्ते से खुश हूं। वह कहने लगी महेश के रूप में मुझे एक अच्छा जीवन साथी मिल रहा है जैसा मैं हमेशा से सोचा करती थी महेश बिल्कुल वैसे ही हैं और वह बहुत ही ज्यादा अच्छे हैं। मैंने शालनी से कहा लगता है तुम्हें तो शादी से पहले ही महेश के बारे में सब कुछ पता चल चुका है शालिनी कहने लगी हां भैया हम लोगों की फोन पर तो हमेशा बात होती है और जब हम लोग एक दूसरे से बात करते हैं तो मुझे यह सब तो मालूम चलेगा ही ना। मैंने शालनी से कहा चलो अच्छी बात है कि तुम्हारी शादी महेश से होने जा रही हैं शादी की अब सारी तैयारियां होने लगी थी और कुछ समय बाद शालिनी की शादी होने वाली थी।

सारी व्यवस्थाएं अच्छे से हो चुकी थी चाचा जी ने बहुत ही बढ़िया अरेंजमेंट किया था और जिस जगह शालिनी की शादी थी वहां पर काफी अच्छी व्यवस्था थी शालिनी की शादी के दिन शालिनी बहुत ही ज्यादा सुंदर लग रही थी और सब कुछ बड़े ही अच्छे से हुआ। शादी तो बहुत धूमधाम से हुई और उसके बाद शालिनी अपने ससुराल चली गई शालनी से मेरी मुलाकात काफी समय तक नहीं हो पाई थी क्योंकि मैं भी अपने काम में बिजी था इसलिए मैं उससे मिल नहीं पाता था। एक दिन शालिनी मुझे मिली मैंने शालनी से कहा तुम कितने समय बाद मुझे मिल रही हो शालिनी कहने लगी भैया करीब 6 महीने तो हो ही चुके होंगे मैंने शालिनी से पूछा तुम्हारा शादीशुदा जीवन कैसा चल रहा है। वह कहने लगी भैया सब कुछ अच्छे से चल रहा है और महेश मेरा बहुत ख्याल रखते हैं वह मुझे बहुत प्यार भी करते हैं, शालिनी ने मुझे जब यह सब बताया तो मैंने शालिनी से कहा चलो यह तो अच्छा है कि तुम्हें महेश के रूप में एक अच्छा जीवन साथी मिला है। मेरी शालनी से काफी देर तक बात हुई उसके बाद वह चली गई मेरा काम भी बहुत अच्छा चल रहा है जिसकी वजह से मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था। मुझे एक दिन राधिका मिली तो वह मुझे देखकर मुस्कुराने लगी वह मेरे पास आई मैंने उसे कहा आप कुछ काम से यहां आए हैं, वह कहने लगी हां कुछ काम से आई थी।

मैने राधिका से पूछा आप कैसी हो तो वह कहने लगी मैं तो ठीक हूं वह मुझसे शालिनी के बारे में बात करने लगी लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान देखकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिल में कुछ चल रहा है वह मुझसे सेक्स करना चाहती है। मुझे पूरा यकीन था कि राधिका को मुझसे अपनी चूत मरवानी है उसकी नशीली आंखों को देखकर मैं समझ गया कि उसे मेरे लंड की जरूरत है उस दिन मैंने उसे अपना नंबर दे दिया। हम लोगों के बीच में कई दिनों तक अश्लील बातें होती रही जब हम दोनों ही एक-दूसरे के साथ सेक्स करने को तैयार हो गए तो मैंने राधिका से कहा क्या तुम मेरे लंड को अपनी चूत में लोगे तो वह कहने लगी मैं आपके लंड को चूत में लेने के लिए तड़प रही हूं। मैंने उसे कहा ठीक है तो फिर हम लोग आज मिलते हैं हम लोग जब मिले तो मैंने सबसे पहले राधिका के नरम होठों को अपने होठों मे लेना शुरू किया मुझे उसके होठों को चूसने में बड़ा मजा आया काफी देर तक मैं उसके होंठों का रसपान करता रहा। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकालकर राधिका के मुंह के अंदर डाला तो वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी।

जब वह मेरे लंड को चुसती तो मेरा लंड पूरी तरीके से खड़ा हो जाता और उसने मेरे लंड को अपने गले तक ले लिया जिससे कि मेरे अंदर गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैंने जैसे ही अपने लंड को राधिका की योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी उसने ना जाने कितने लंड अपनी योनि में लिए थे लेकिन जब उसने मेरे लंड को अपनी चूत में लिया तो मुझे उसे धक्के मारने में मजा आने लगा। उसके दोनों पैरों को खोल लिया मै उसे बड़ी तेजी से धक्के देने लगा जिससे कि उसकी चूत से गर्मी बाहर की तरफ को निकलने लगी जब उसकी योनि से गरम पानी बाहर निकलता तो मेरे अंदर और भी ज्यादा जोश आ जाता मैं उसे तेज गति से धक्का देता रहता। काफी देर तक मैंने उसकी चूत के मजे लिए जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने राधिका के मुंह में अपने वीर्य को गिरा दिया। वह मेरे वीर्य को अपने मुंह में लेकर खुश थी और कहने लगी मुझे बड़ा मजा आया जब मैंने आपके वीर्य को अपने मुंह में लिया। मैंने उसे कहा तुम्हारी तो बात ही गजब की है तुम बड़ी ही पटाखा माल हो ,उसके बाद राधिका वहां से चली गई लेकिन वह जब भी मुझे मिलती तो हम दोनों के बीच में सेक्स संबंध बनते रहते।

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