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चेन्नई से 29 साल की शादीशुदा लड़की-2

desi sex kahani फिर मैंने एक हाथ से उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए और देखा कि वो गुलाबी रंग की रूपा की ब्रा पहने हुए थी वाह क्या सेक्सी ब्रा थी मज़ा आ गया। फिर में कुछ देर ब्रा के ऊपर से ही बूब्स दबाता रहा और अपने होंठ फेरता रहा और में बूब्स से नीचे होते हुए उसके पेट और नाभि पर आ गया और उसकी कमर को चूसा उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी। फिर में एक झटके से बिल्कुल नीचे उसके पैरों के पास पहुँच गया और उसके पैरों को चूमते हुए उसकी साड़ी को ऊपर करते हुए जांघो तक आ गया, वाह क्या सुंदर सेक्सी जांघे थी? में दोनों जांघो पर अपने होंठो को रगड़ रहा था, जिसकी वजह से वो मदहोश हो रही थी और अपना सर ज़ोर ज़ोर से इधर उधर घुमा रही थी और अपने होंठो को दाँतों से चबा रही थी। फिर मैंने अपने दोनों हाथ उसकी दोनों जांघो से सरकाते हुए उसकी पेंटी को पकड़ लिया और पेंटी को नीचे खींच दिया, मेरी इस हरकत की वजह से वो चहक गई और उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया। दोस्तों वो बहुत ही मस्त सुंदर चूत थी और वो एकदम मलाई की तरह चिकनी ब्रेड की तरह उठी हुई बिल्कुल साफ उस चूत पर एक भी बाल नहीं था और वो महक भी रही थी।

अब मैंने अपना काम शुरू कर दिया, में अपने दोनों हाथ से उसके बूब्स को सहलाते हुए उसकी चूत को चाटने लगा था और वो अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से ऊपर उछालने लगी थी। उसके मुहं से सीईईई सीईईईई की आवाज निकलने लगी थी और करीब दस मिनट तक चूत को चाटते हुए उसने एक बार अपना पानी छोड़ दिया था, क्योंकि उसको बहुत आनंद आ रहा था। फिर में अलग हुआ, वो भी बैठ गई और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। मैंने पेंट को खोलना शुरू किया तो उसने शर्ट को उतारने के बाद मेरी छाती पर बहुत ही प्यार से हाथ फेरा और अपने होंठो को मेरी छाती से लगा दिया और ज़ोर ज़ोर से मेरी छाती पर होंठ घुमाने लगी। अब में अपनी पेंट को भी उतार चुका था और फिर मैंने उसकी ब्रा को भी अलग कर दिया, जिसकी वजह से उसके बूब्स बाहर आ गये। दोस्तों उसके इतने बड़े आकार के सुंदर बूब्स को देखकर में भी बेकाबू हो गया और मैंने उसको अपनी छाती से चिपका लिया, जिसकी वजह से उसके बूब्स मेरी छाती से दब गए। अब उसको और मुझे भी बहुत अच्छा लगा। फिर कुछ देर के बाद मैंने उसकी नाभि के नीचे साड़ी के अंदर हाथ को डाल दिया, वो मुझे देखने लगी कि में यह क्या कर रहा हूँ?

फिर में मुस्कुराया और मैंने अंदर से उसकी साड़ी का तह किया हुआ हिस्सा पकड़ा और हाथ को बाहर खींच लिया, जिसकी वजह से एक ही झटके में उसकी वो साड़ी एकदम से खुल गई। अब वो हंसने लगी, मैंने उसकी साड़ी को अलग किया और अब वो पेटीकोट में थी पेटीकोट में ही उसके कूल्हों का आकर देखकर में पागल हो गया, क्योंकि उसकी गांड बहुत ही गोल ऊपर उठी हुई और आकार में बड़ी भी थी और मुझे साड़ी में कूल्हों को देखना बहुत पसंद है। दोस्तों राह चलती औरतो की में सबसे ज्यादा उनकी गांड को ही देखता हूँ क्योंकि मेरा मानना है कि अगर औरत के कूल्हे अच्छे आकर में ना हो तो उसको देखकर सेक्स की बिल्कुल भी इच्छा नहीं होती और अगर कोई साड़ी पहने हुए अच्छे बड़े गोल कूल्हे दिख जाए तो लंड तभी झटके से खड़ा हो जाता है। दोस्तों ठीक वैसे ही प्रिया के कूल्हे थे जिसको देखकर मेरा लंड और भी पागल हो गया था और जोश में आकर मैंने उसका पेटीकोट भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। फिर मैंने उसकी गांड को बहुत प्यार किया, सहलाया चूमा अब उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया, लेकिन में अभी भी अंडरवियर में ही था। वो ऊपर से ही मेरे लंड को दबा रही थी।

फिर अचानक से उसने मेरी अंडरवियर को नीचे खींच दिया और मैंने पूरी अंडरवियर को बाहर निकाल दिया और वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज अब कब तक तुम मुझे ऐसे ही तड़पाते रहोगे? प्लीज जल्दी से अंदर डालो ना। अब मैंने भी बिना देर किए उसके दोनों पैरों को अपनी कमर पर रखकर उसकी चूत पर अपने लंड को रख दिया, लेकिन उसने पहले से ही अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया और फिर मैंने अपना लंड उसकी कुँवारी चूत पर रगड़ना शुरू किया। फिर धीरे से लंड को चूत के अंदर डाल दिया और वो दर्द की वजह से झटपटा गई, अभी मेरा थोड़ा सा ही लंड अंदर गया था, लेकिन वो पागल होने लगी थी और अभी उसको असली दर्द का अहसास नहीं था, क्योंकि मैंने अभी थोड़ा सा लंड चूत के अंदर किया था, जिसकी वजह से वो इतनी मचल रही थी। फिर अचानक से उसने अपने दोनों पैरों से मुझे कसकर जकड़ लिया और अपने दोनों हाथ बिस्तर पर टिकाकर अपनी कमर से एक ज़ोरदार झटका देकर उसने मेरे लंड पर एक भरपूर वार कर दिया। अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया, मेरे लंड की चमड़ी ऊपर चड़ गई थी जिसकी वजह से मुझे बहुत दर्द हुआ और में दर्द की वजह से चीख पड़ा और मेरे साथ वो भी चीख पड़ी, क्योंकि उसको भी बहुत दर्द हो रहा था।

अब मेरे उसकी चूत में लंड को डालते ही वो इतनी उत्तेजित हो गई थी कि में बता नहीं सकता और हम दोनों कुछ देर वैसे ही रुक गये। मेरा लंड अब भी उसकी चूत में था और कुछ देर के बाद दर्द कम होने पर में आगे पीछे हुआ। अब हम दोनों को कुछ अच्छा लगने लगा था और फिर मैंने धीरे धीरे अपने धक्को की रफ्तार को बढ़ा दिया, जिसकी वजह से उसको भी मज़ा आने लगा था और वो भी अपनी गांड को उठा उठाकर मेरा साथ दे रही थी। दोस्तों करीब तीस मिनट तक मैंने उसी एक आसन से उसकी चुदाई के मज़े लिए और इतने समय में वो ना जाने कितनी बार झड़ चुकी थी। फिर वो मुझसे कहने लगी कि अब बस तुम अपना काम खत्म कर दो, अब मुझसे ज्यादा देर सहन नहीं होगा, तुमने मुझे आज जीते जी स्वर्ग की सेर करा दी है, मेरी आत्मा ना जाने कब से प्यासी थी और हाँ में जब 9th क्लास में पढ़ती थी तब से लंड की प्यासी थी और अब मैंने 29 साल की उम्र में यह पाया है, इसलिए में तुम्हारी बहुत अहसान मंद हूँ। फिर यह सब कहकर उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मैंने अपने धक्को की रफ्तार को बढ़ा दिया और करीब दस मिनट और करने के बाद भी में नहीं झड़ा और वो मुझसे कहने लगी कि तुम झड़ क्यों नहीं रहे हो, प्लीज अब मेरी कमर दर्द कर रही है।

दोस्तों में मुस्कुरा गया क्योंकि मैंने उसको तो पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया था, लेकिन में अभी भी संतुष्ट होना चाहता था। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है अच्छा तुम मेरे ऊपर आ जाओ और वो बोली कि हाँ ठीक है, लेकिन जल्दी से काम खत्म कर देना। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, वो मेरे ऊपर आ गई, मैंने उसकी चूत में अपना लंड डाला और उसने अपनी चूत का पूरा भार मेरे लंड पर रख दिया वो कुछ आगे पीछे हुई जिसकी वजह से मुझे अच्छा लगने लगा था। फिर मैंने अचानक से उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसको ऊपर उठा दिया, जिसकी वजह से अब उसका भार उसके ही दोनों घुटनों पर था। अब मैंने अपने दोनों पैरों को बिस्तर पर टिकाकर अपनी गांड को ऊपर उठा दिया और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत पर अपने लंड से वार करने लगा, लेकिन मुझे कुछ परेशानी हुई जिसकी वजह से में रुक गया और मैंने अपने सर के नीचे एक तकिया रख लिया और में एक बार फिर से शुरू हो गया। अब में बड़ी तेज रफ्तार से उसको चोद रहा था और वो भी मछली की फड़क रही थी, करीब दस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मैंने उसकी चूत में अपना सारा वीर्य निकाल दिया।

अब में शांत हो गया और वो मेरे ऊपर लेट गई। फिर दस मिनट तक हम दोनों वैसे ही लेटे रहे और फिर हम अलग हुए, दोनों बाथरूम गये और हम दोनों ने अपने आप को साफ किया और हम दोनों ही नंगे थे। हमारे बदन पसीने से लतपथ हो रहे थे। फिर मैंने फव्वारे को खोल दिया और हम दोनों उसके नीचे खड़े थे, अब उसका वो गोरा गीला बदन देखकर में एक बार फिर से जोश में आ गया और हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये और हमारे ऊपर पानी लगातार गिरे जा रहा था। दोस्तों हम दोनों करीब पन्द्रह मिनट तक एक दूसरे के बदन से खेलते रहे और फिर में उसके पीछे आया। अब मैंने उसको आगे की तरफ झुका दिया और अपना लंड पीछे से मैंने उसकी गांड में डालना चाहा, लेकिन उसने मना कर दिया। फिर में भी मान गया और मैंने अपना लंड उसी तरह उसको और आगे झुकाकर उसकी चूत में डाल दिया। वो झुकी हुई थी और अपने दोनों हाथों से नल को पकड़े हुए थी। अब मैंने आगे पीछे होना शुरू किया, जिसकी वजह से उसको भी मज़ा आने लगा था, इसलिए वो भी अपनी गांड को आगे पीछे कर रही थी। फिर मैंने अपनी रफ्तार को बढ़ा दिया और मेरे दोनों हाथ उसके कूल्हों को कसकर पकड़े हुए थे और दस मिनट की जबर्दस्त चुदाई के बाद वो मुझसे कहने लगी कि मेरी कमर में दर्द हो रहा है प्लीज अब तुम खत्म कर दो।

फिर मैंने अपनी रफ्तार को बढ़ाया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारकर मैंने उसकी चूत में अपना वीर्य निकाल दिया और वो पानी हमारे ऊपर लगातार गिरे जा रहा था। दोस्तों गिरते पानी में चुदाई का क्या आनंद आता है यह बात वो समझ सकता है जिसने ऐसा किया हो और फिर हम दोनों अलग हुए और एक दूसरे को बाहों में भरकर बहुत प्यार किया। अब हम दोनों बाथरूम में नहा रहे थे और नहाकर हम लोग बाहर आए, प्रिया बहुत खुश थी हमने अपने कपड़े पहने और बाहर निकलने के लिए तैयार हो गये। फिर प्रिया ने अपने पर्स से रुपये निकालकर मुझे दे दिए और वो मुझसे कहने लगी कि धन्यवाद अगर तुम ना होते तो जीवन के इस सुख से में ना जाने कब तक महरूम रहती और यह कहकर वो एक बार फिर मुझसे लिपट गई। अब वो मुझसे कहने लगी कि तुम्हें जाने देने को मेरा बिल्कुल भी मन नहीं कर रहा है। फिर मैंने उसको चूमा और कहा कि अगर दोबारा तुम्हे मेरी याद आए तो तुम मुझे फोन कर देना, लेकिन अब यह कोशिश करना कि तुम्हे मेरी ज़रूरत ना पड़े और तुम अपना ध्यान रखना, ठीक है अब हम चलते है। फिर वो मुझसे बोली कि रूको पहले में बाहर देखती हूँ कोई है तो नहीं, मैंने कहा कि हाँ ठीक है।

अब उसने दरवाजा खोला और वो बाहर से दरवाजा बंद करके चली गई और वो दो मिनट में ही वापस आ गई, वो मुझसे कहने लगी कि सब कार्यक्रम हो चुके है अब विदाई हो रही है सब लोग उधर ही है, तुम निकल जाओ। फिर में उसके साथ बाहर आ गया और बरामदे में आने पर मैंने देखा कि उधर सभी लोग थे और हम दोनों भी उस भीड़ में शामिल हो गये और उसके बाद अलग अलग हो गये। अब में धीरे धीरे बाहर की तरफ बढ़ने लगा और प्रिया भी अपनी सहेलियों के साथ शामिल हो गई, लेकिन वो मुझे लगातार देखे ही जा रही थी और फिर मैंने पीछे मुड़कर देखा तो प्रिया की आँखों में आँसू थे। फिर मैंने उसको एक हल्की सी मुस्कान दी और तेज़ी से बाहर निकल गया और किसी को कोई शक नहीं हुआ। दोस्तों यह थी मेरी उस शादी के बीच चुदाई की सच्ची घटना मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगी ।।

धन्यवाद …

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