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चलो चुदाई करते हैं

Hindi sex kahani, antarvasna: मेरी पत्नी आशा घर का काम कर रही थी मैं भी घर पर ही था आशा ने मुझे कहा कि रोहित घर की राशन खत्म हो चुकी है तो मैंने आशा को कहा कि ठीक है हम लोग राशन ले आते हैं। आशा मुझे कहने लगी कि घर की साफ सफाई करने के बाद हम लोग चलते हैं मैंने आशा को कहा ठीक है हम लोग थोड़ी देर बाद चलते हैं। मैं भी नहाने के लिए बाथरूम में चला गया मैं जब बाथरूम में नहाने के लिए गया तो वहां पर साबुन नहीं थी मैंने आशा को आवाज देते हुए कहा तो आशा मेरे लिए साबुन ले आई और फिर मैं नहाने लगा। करीब 10 मिनट बाद नहा कर मैं बाहर निकला तो आशा उस वक्त भी साफ सफाई कर रही थी उसने अभी तक काम खत्म नहीं किया था। मैंने आशा को कहा कि तुम्हें कितना समय लगेगा तो आशा कहने लगी कि बस थोड़ी देर बाद ही मैं काम खत्म कर लूंगी उसके बाद हम लोग चलते हैं। पापा और मम्मी भी गांव गए हुए थे इसलिए आशा और मैं ही घर पर थे।

हम दोनों की शादी को अभी एक वर्ष ही हुआ है और आशा घर की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही है। आशा ने घर की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है मम्मी और पापा आशा से बहुत खुश हैं। आशा ने कभी भी किसी प्रकार की उन्हें कोई कमी या फिर कोई शिकायत महसूस कभी नही होने दी। मैं और आशा एक दूसरे के साथ अच्छे से अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। मैंने आशा को कहा कि तुम्हें कितना समय लगेगा तो आशा कहने लगी बस काम खत्म हो चुका है आप नाश्ता कर लीजिए मैं आपके लिए नाश्ता लगा देती हूं मैंने आशा को कहा कि नहीं नाश्ता हम दोनों साथ में ही करेंगे। आशा भी फ्रेश होने के लिए चली गई और वह नहा कर जब आई तो उसके बाद उसने नाश्ता बनाया। हम लोगों ने साथ में ही नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद आशा तैयार होने के लिए रूम में चली गई। आशा तैयार हो रही थी तो मैंने सोचा कि कुछ देर टीवी देख लेता हूं। मैं टीवी देख रहा था आधे घंटे बाद आशा भी तैयार हो चुकी थी और हम दोनों उसके बाद राशन लेने के लिए चले गए। हमारे घर के पास में ही एक डिपार्टमेंट स्टोर है हम लोग वहां पर राशन लेने के लिए चले गए, वहां से हम लोगों ने राशन ली और उसके बाद हम लोग दोपहर के वक्त घर लौट आए थे।

आशा ने मुझे कहा कि रोहित मैं आपके लिए कुछ बना देती हूं मैंने आशा को कहा नहीं रहने दो लेकिन आशा कहां मानने वाली थी वह मेरे लिए खाना बनाने लगी। करीब एक घंटे बाद वह खाना तैयार कर चुकी थी और उसके बाद जब उसने खाना तैयार कर लिया तो आशा और मैंने लंच करने के बाद कुछ देर आराम किया, मुझे पता नहीं कब नींद आ गई कुछ मालूम ही नहीं चला। जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा उस वक्त शाम के 5:00 बज रहे थे मैंने आशा को उठाया और कहा तुम मेरे लिए चाय बना दो तो आशा कहने लगी की रोहित बस अभी आपके लिए चाय बनाकर ले आती हूं। थोड़ी देर में आशा मेरे लिए चाय बना कर ले आई हम लोगों ने चाय पी उसके बाद मैंने आशा को कहा कि मैं रमन के घर जा रहा हूं। रमन हमारे पड़ोस में ही रहता है और रमन से मेरी दोस्ती को 5 साल हो चुके हैं रमन का परिवार 5 साल पहले ही हमारे पड़ोस में रहने के लिए आया था। मैं रमन के घर चला गया जब मैं रमन के घर पर गया तो वह घर पर ही था मैंने रमन से कहा कि तुम काफी दिनों से मुझे मिले नहीं थे तो सोचा कि तुमसे मिल लेता हूं। रमन ने मुझे कहा कि यह तुमने बहुत ही अच्छा किया। हम दोनों साथ में बैठकर बातें कर रहे थे तभी रमन की पत्नी हम दोनों के लिए चाय बना कर ले आई। रमन ने मुझसे पूछा कि तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है तो मैंने उससे कहा जॉब तो ठीक ही चल रही है और आज छुट्टी थी तो सोचा कि तुमसे मिल लेता हूं। रमन और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो रमन ने मुझे अपनी बहन की सगाई के बारे में बताया और कहा कि उसकी सगाई हो चुकी है। मैंने रमन से कहा कि लेकिन मुझे तो इस बारे में कोई जानकारी नहीं है तो रमन ने मुझे कहा कि उसकी सगाई कुछ दिनों पहले ही हुई थी तो हम लोगों ने एक छोटा सा प्रोग्राम रखा था जिसमें कि हमारी फैमिली के लोग ही आए थे। मैंने रमन से कहा चलो यह तो बड़ी खुशी की बात है कि तुम्हारी बहन की सगाई हो चुकी है। रमन के घर पर मैं करीब एक घंटे तक रुका और उसके बाद मैंने उससे कहा कि अब मैं घर चलता हूं रमन कहने लगा कि ठीक है रोहित हम लोग कुछ दिनों में मिलते हैं उसके बाद मैं अपने घर लौट आया। जब मैं घर लौटा तो आशा मेरा इंतजार कर रही थी आशा ने मुझसे पूछा कि क्या आपको रमन मिले थे तो मैंने आशा को कहा कि हां मेरी मुलाकात रमन से हुई थी। आशा और मैं एक दूसरे के साथ काफी देर तक बातें करते रहे उसके बाद आशा ने मुझे कहा कि मैं खाना बना देती हूं और फिर आशा ने रात के डिनर की तैयारी शुरू कर दी।

आशा ने खाना बना दिया था उसके बाद आशा और मैंने साथ में डिनर किया। डिनर करने के बाद हम लोग सोने की तैयारी करने लगे क्योकि अगले दिन मुझे अपने ऑफिस जल्दी जाना था इसलिए हम लोग जल्दी सो गए थे। मनीषा जो कि हमारे पड़ोस में रहने के लिए आती है। मनीषा जब हमारे पडोस में रहने के लिए आती है तो उस से मेरी काफी अच्छी बातचीत होने लगी। मनीष और मेरे बीच बातचीत होने लगी थी जिस कारण हम दोनों एक दूसरे के बहुत नजदीक आते चले गए। मुझे क्या मालूम था मनीषा का चरित्र ठीक नहीं है इसलिए तो एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया। जब मनीषा ने मुझे अपने घर पर बुलाया तो उसने मुझ पर अपने बदन का ऐसा जादू किया कि मैं उसके बदन की गर्मी को महसूस करने के लिए बहुत ज्यादा उतावला हो चुका था। मैं समझ चुका था मैं मनीषा के बदन को महसूस करना चाहता हूं इसलिए मैंने जब उसके होंठों को चूमना शुरू किया तो उसको बहुत ही मजा आने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं जब उसके होठों को चूम रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी बढ रही थी और साथ ही मनीषा की गर्मी बढ़ चुकी थी। वह मुझसे कहने लगी मेरे अंदर की गर्मी को तुमने बढा कर रख दिया है। हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे से मजे ले रहे थे।

जब मैंने मनीषा के स्तनों को दबाना शुरू किया तो मनीषा को मजा आने लगा और उसके अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मनीषा के अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी लेकिन मुझे महसूस हो चुका था कि मैं बिल्कुल रह नहीं पाऊंगा। मैंने मनीषा के सामने अपने लंड को किया तो उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर उसे हिलाना शुरु किया। जब मेरे मोटे लंड को वह हिला रही थी तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और मनीषा को भी बड़ा मजा आने लगा था। हम दोनों के अंदर की गर्मी बढ चुकी थी। मनीषा मुझसे चुदने के लिए तैयार थी। उसने मेरे सामने अपने पैरो को खोला जब मनीषा ने अपने पैरों का मेरे सामने खोला तो मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को रगडना शुरू किया तो मेरा लंड मनीषा की योनि से टकरा रहा था। मुझे एक अलग ही फीलिंग पैदा हो रही थी मुझे मजा आ रहा था मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैंने मनीषा की योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाकर मुझे बोली मेरी चूत फट गई। मैंने मनीषा को कहा मुझे मजा आ गया मनीषा को भी अब इतना ज्यादा मजा आने लगा था कि वह मेरे लंड को लेकर मजे मे आ गई थी वह रह नहीं पा रही थी मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर उठाकर उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए। मैं मनीषा को चोद रहा था उसकी सिसकारियां लगातार बढ़ती जा रही थी। मेरे अंदर की गर्मी भी लगातार बढ़ती जा रही थी मैंने मनीषा से कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा। मनीषा समझ चुकी थी कि उस से बिल्कुल रहा नहीं जाएगा इसलिए जैसे ही मैंने मनीषा की योनि के अंदर बाहर अपने लंड को तेजी से करना शुरू कर दिया था तो वह मुझे कहने लगी अब तुम मुझे घोड़ी बनाकर चोदा।

मैंने मनीषा को बहुत तेजी से धक्के मारे जिस से कि मेरा माल मनीषा की योनि के अंदर गिर गया। जब मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो उसे मजा आने लगा अब मैं उसे इतनी तेज गति से धक्के मार रहा था कि मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ती जा रही थी। मैने मनीषा के अंदर ही अपने माल को गिरा दिया मनीषा की चूत का जादू मुझ पर चढ चुका था। मैं उसके बिना एक पल भी रह नहीं पाता था। जब भी मेरा मन करता था मैं मनीषा को चोदने के लिए उसके घर चला जाया करता। मनीषा की चूत का मजा लेकर मुझे बहुत ही मजा आता और मेरे अंदर की गर्मी को वह पूरे तरीके से बड़ा ही देती थी। जब भी मैं उसके पास होता तो वह सिर्फ मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए उतावली रहती और मैं उसकी चूत की गर्मी को पूरी तरीके से मिटा देता। मुझे मनीषा के साथ बहुत ही मजा आता जब भी मै उसके साथ चुदाई का खेल खेलता। मनीषा की चूत मेरे लिए हमेशा ही तडपती थी। कुछ दिन पहले मै उसे चोदने के लिए गया था मुझे उस दिन मालूम पडा मनीषा अपने ही दोस्त से अपनी चूत की खुजली मिटा रही थी लेकिन मैने उसे कुछ नही कहा मै उसे बस चोदता था।

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