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वह छोटा सा कमरा

Hindi sex story, antarvasna मैं अपने दोस्त से मिलने के लिए जाता हूं तो रास्ते में ही मेरी गाड़ी खराब हो जाती है मुझे उससे कुछ जरूरी काम से मिलना था इसलिए मुझे उसके पास जल्दी पहुंचना था। मैंने उसे फोन किया और बताया कि मेरी गाड़ी खराब हो चुकी है तो वह कहने लगा कि तुम बस लेकर घर तक आ जाओ वैसे भी बस मेरे घर के बाहर ही रुकती है मैंने सोचा कि यह ठीक कह रहा है। मैं बस स्टॉप पर चला गया मैंने वहां से बस पकड़ी मैं जब बस में बैठा तो मैंने देखा कनिका भी बस में थी कनिका मेरे चाचा की लड़की है उसके साथ उसकी सहेली भी थी मैंने कनिका से कहा तुम कहां जा रही हो? वह कहने लगी भैया मैं अपने कॉलेज जा रही थी। उसने मुझे अपनी दोस्त से मिलवाया उसका नाम महिमा है महिमा बड़ी सिंपल सी थी उसने पटियाला सूट पहना था और वह बड़ी सुंदर लग रही थी।

मैंने कनिका से कहा तुम्हारी दोस्त महिमा तो बहुत सुंदर है वह दोनों ही मुस्कुराने लगी कनिका मुझे कहने लगी लगता है आप बस में ही महिमा पर चांस मार रहे हो। मैंने कनिका से कहा मैं तो मजाक कर रहा था लेकिन मेरे दिल में महिमा को लेकर कुछ तो बात ऐसी थी कि उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा और उसके साथ मुझे बात करना भी अच्छा लग रहा था लेकिन मुझे अपने दोस्त के घर जाना था इसलिए मैं अगले बस स्टॉप पर उतर गया। मैंने कनिका से कहा मैं तुम्हें फोन करता हूं कनिका कहने लगी ठीक है भैया आप फोन कर दीजिएगा। मैं अपने दोस्त से मिला उससे मैं काफी समय बाद मिला था और उससे मेरा कुछ जरूरी काम था क्योंकि मैं कुछ बिजनेस शुरू करना चाहता था और उसी के सिलसिले में मुझे उससे मिलना था। उसके पिताजी काफी समय से बिजनेस करते आ रहे हैं इसलिए मुझे उनसे कुछ मदद चाहिए थी और मेरा दोस्त भी वही बिजनेस कर रहा है मैंने उससे पूछा तो वह कहने लगा कि तुम्हें जो भी मदद चाहिए हो तुम पापा से या फिर मुझसे पूछ लेना और वैसे भी तुम्हें पापा तो अच्छी तरह ही जानते हैं।

मैंने उसे कहा हां यार तुम ठीक कह रहे हो मैं अंकल से भी तो इस बारे में पूछ सकता हूं। दरअसल मैंने कपड़ो का कारोबार शुरू किया था और वह लोग भी काफी समय से कपड़ो का कारोबार करते आ रहे हैं। मैंने एक शोरूम खोला था उसी के सिलसिले में मुझे तुमसे मिलना था वह मुझे कहने लगा तुम्हें जब भी कोई जरूरत हो तो तुम पूछ लिया करो। मैंने उसे कहा हां यार मैं तुमसे ही तो मदद ले सकता हूं मैं कुछ समय पहले तक नौकरी कर रहा था लेकिन मैंने नौकरी छोड़ दी और उसके बाद मैंने अपना ही कारोबार शुरू कर लिया हमारे पास जो इस्पेस था मैंने उसका अच्छे से इस्तेमाल किया मैंने अपना एक कपड़ों का शोरूम खोल दिया। उन्होंने मुझे अपने कुछ डीलरों के नंबर दिए जहां से वह लोग सामान लिया करते थे मैंने भी कुछ सामान वहां से मंगवा लिया और मुझे बहुत सामान काफी अच्छे दामों पर पड़ा। मेरे पास अब मेरे खुद के कस्टमर बनने लगे थे और धीरे-धीरे मेरे कस्टमर बढ़ते ही जा रहे थे क्योंकि मैंने जो कपड़ों का शोरूम खोला था उसमें मैंने सब कुछ चीजें रखी थी उसमें मैंने बच्चों के कपड़े भी रखवाये थे और लेडीस कपड़े भी उसमें रखवाये हुए थे। मेरे पास ज्यादातर लड़के आते थे क्योंकि जिस जगह मेरा शोरूम है वहां से कुछ दूरी पर ही एक कॉलेज है और वहीं से अक्सर लड़के मेरे पास शॉपिंग करने के लिए आते थे। मैं उन्हें अच्छे खासे डिस्काउंट भी दे देता था जिससे कि वह लोग मेरे पास से सामान ले जाने लगे काफी समय बाद मैंने कनिका को फोन किया कनिका ने मुझे कहा भैया आप तो उस दिन के बाद मिले ही नहीं और ना ही आपने फोन किया। मैंने कनिका से कहा मैं दरअसल काम में बिजी हो गया था इसलिए तुम्हें फोन नहीं कर पाया लेकिन आज मैं फ्री था तो सोचा तुम्हें फोन कर लूं। मैंने उस दिन कनिका से काफी देर तक बात की कनिका से मैंने महिमा के बारे में भी पूछा कनिका मुझे कहने लगी की महिमा भी आपकी काफी तारीफ कर रही थी और कह रही थी कि क्या यह तुम्हारे भैया हैं वह दिखने में बहुत ज्यादा हैंडसम है। मैं अपने पर्सनैलिटी का पूरा ध्यान रखता हूं मैं हमेशा जिम जाया करता हूं जिससे कि मेरी बॉडी भी अच्छी बनी हुई है।

मैंने कनिका को कहा तुम भी कभी कपड़े लेने के लिए आ जाया करो वह कहने लगी ठीक है भैया मैं इस हफ्ते देखती हूं आप से मिल भी लूंगी और कुछ शॉपिंग भी कर लूंगी। कनिका एक दिन महिमा को अपने साथ ले आई कनिका मुझे कहने लगी भैया आपने तो काफी बड़ा शोरूम खोला है मैंने कनिका से कहा तुम तो अब घर पर आती ही नहीं हो तो तुम्हें क्या पता चलेगा तुम तो ना जाने कहां बिजी रहती हो। वह मुझे कहने लगी भैया आपको क्या बताऊं कॉलेज में तो बिल्कुल फुर्सत ही नहीं मिल पाती है और मैं इतना ज्यादा बिजी हो जाती हूं कि घर आते ही शाम हो जाती है उसके बाद तो कहीं जा पाना मुश्किल ही होता है। कनिका को मैंने कहा तुम देख लो यदि तुम्हें कुछ शॉपिंग करनी हो तो कनिका कहने लगी क्यों नहीं भैया हम लोग जब आए हैं तो कुछ शॉपिंग जरूर करेंगे। मैं तो सिर्फ महिमा की तरफ देख रहा था और उन दोनों ने काफी सारा सामान ले लिया था। जब कनिका मुझे पैसे देने लगी तो मैंने उसे कहा तुम यह पैसे अपने पास ही रखो वह मुझे कहने लगी भैया लेकिन मैं यह पैसे अपने पास नहीं रख सकती आपको पैसे रखने पड़ेंगे। मैंने कनिका से कहा यह मेरी तरफ से तुम्हारे लिए गिफ्ट है तो कनिका कहने लगी इतना सारा गिफ्ट भला कौन देता है आप यह पैसे रख लीजिए।

महिमा ने भी मुझे कहा परंतु मैंने उनसे पैसे नहीं लिए मैंने दोनों से कहा जब तुम अगली बार आओगी तो मैं जरूर तुमसे पैसे लूंगा। कनिका से तो मैं वैसे भी पैसे नहीं ले सकता था क्योंकि वह मेरी बहन है और उससे पैसा लेना मुझे ठीक भी नहीं लग रहा था इसलिए मैंने उनसे पैसे नहीं लिए जब भी उन्हें शॉपिंग करनी होती तो वह लोग मेरे पास आ जाया करते थे। मैंने कनिका से कहा यार तुम महिमा से मुझे अकेले में तो मिलवाओ कनिका कहने लगी ठीक है भैया मैं देखती हूं कि वह आपसे मिलना चाहती है या नहीं। शायद महिमा भी मुझे पसंद करती थी इसलिए उसने झट से हां कह दी और एक दिन हम लोग एक रेस्टोरेंट में मिले उस दिन मैंने महिमा से काफी देर तक बात की। मैंने उसे समझने की कोशिश की महिमा पर मेरा दिल तो उसी दिन आ गया था लेकिन अब मुझे अपने दिल की बात उसे कहनी थी। कुछ समय तक हम दोनों ने एक दूसरे से बात की उसके बाद मैंने महिमा से अपने दिल की बात कह दी जब मैंने महिमा से अपने दिल की बात कही तो वह भी मना ना कर सकी और उसने मुझे झट से जवाब दे दिया। अब हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे थे मुझे महिमा से बहुत ज्यादा प्यार था मैं उसका बहुत ध्यान रखा करता उसे जब भी समय मिलता तो वह मुझसे मिलने आ जाया करती थी। हम दोनों की फोन पर बात होती ही रहती थी हम लोग काफी देर तक फोन पर बात किया करते थे कनिका को भी हम दोनों के बारे में पता था और यह बात मैंने किसी को भी नहीं बताई थी। महिमा से जब भी मैं मिलता तो मुझे बहुत अच्छा लगता और उसके साथ समय बिताना तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता था। एक दिन मैं महिमा को मिला और उस दिन महिमा और मेरे बीच में बहुत देर तक बात हुई।

मैंने उस दिन महिमा का हाथ पकड़ लिया मैंने पहली बार ही महिमा का हाथ पकड़ा था इससे पहले ना तो कभी हमारे बीच में ऐसा कुछ हुआ था और ना ही कभी हम दोनों ने एक दूसरे के साथ कभी ऐसा करने की कोशिश की थी लेकिन जब पहली बार मैंने महिमा का हाथ पकड़ा तो मुझे बड़ा अच्छा लगा और ऐसा लगा जैसे कि हम दोनों सिर्फ एक दूसरे के लिए ही बने हैं। उसके बाद तो यह सिलसिला आम हो गया हम लोग जब भी मिलते तो एक दूसरे से गले मिला करते एक दिन मैंने महिमा को किस भी किया और धीरे-धीरे हम दोनों के बीच में फोन सेक्स होने लगा। मै अब महिमा के साथ सेक्स करना चाहता था और एक दिन मैं जब उससे मिला तो मैंने महिमा से कहा आज हम लोग कहीं चलते हैं। हम दोनों वहां से मेरे शोरूम में चले आए मेरे शोरूम मैने एक छोटा सा कमरा बना रखा है वहां पर मैं कभी-कभार दिन में सो जाया करता हूं वहां सिर्फ एक ही बेड लगा हुआ है। जब मैं और महिमा वहां पर बैठे तो हम दोनो अपने आप पर काबू ना कर सके मैंने महिमा के बदन से कपड़े उतार दिए उसकी लाल रंग की पैंटी और ब्रा देखकर मेरा मन पूरी तरीके से मचलने लगा। मैंने उसके स्तनों को उसकी ब्रा से बाहर निकालते हुए अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसने लगा उसके स्तनों का रसपान करना मेरे लिए एक अलग ही अनुभव था मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

मैंने उसके स्तनों का जमकर रसपान किया उसके गोरे और बड़े स्तन मैं अपने मुंह में लेकर चूसता तो मुझे बहुत मजा आता। जब मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर सटाया तो महिमा कहने लगी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है मैंने भी एक ही झटके में अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया। मेरा लंड उसकी योनि में जाते ही वह चिल्ला उठी जब वह चिल्लाई तो मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए। मेरे धक्के इतने तेज होते कि वह चिल्ला पडती।, वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और कुछ ही क्षणो बाद मेरा वीर्य पतन जैसे ही महिमा की योनि के अंदर हुआ तो वह मुझसे लिपट गई और कहने लगी आज तुम्हारे साथ सेक्स कर के मजा आ गया। महिमा और मेरे बीच में उसके बाद कई बार सेक्स हुआ और अब महिमा के परिवार वाले मेरे साथ उसकी शादी करने के लिए भी मान चुके हैं हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। महिमा की चूत इतनी टाइट है जितनी पहले थी और हमेशा ही मैं उसके साथ मजे लेता रहता हूं।

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