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सोनिया की सेक्सी चूत में धक्के

Hindi sex story, antarvasna: मैं कुछ दिनों के लिए अपने दोस्त आकाश के साथ उसके मामा जी के घर चंडीगढ़ चला गया था। हम लोगों के कॉलेज का आखिरी वर्ष था और हम लोगों का कॉलेज पूरा होने वाला था। आकाश के साथ मैं कुछ दिनों तक चंडीगढ़ में ही रहा आकाश ने हीं मुझे अपने साथ चलने के लिए कहा था और हम दोनों कुछ दिनों तक चंडीगढ़ में रहे। हम लोग जब चंडीगढ़ से वापस लौट रहे थे तो उस दिन ट्रेन में मेरी बातचीत सोनिया के साथ हुई। सोनिया जो कि हमारे बिल्कुल सामने बैठी हुई थी पहले तो मेरी सोनिया से बात करने की हिम्मत नहीं हुई लेकिन फिर मैंने सोनिया से बात कर ली। सोनिया भी दिल्ली ही जा रही थी और हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे आकाश और मैं सोनिया से बात कर रहे थे लेकिन मेरे दिल में सोनिया के लिए कुछ तो चल रहा था। जब हम लोग दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो मैंने सोनिया से उसका नंबर मांगा। सोनिया ने मुझे अपना नंबर दे दिया था और अब हम लोग भी अपने घर पहुंच चुके थे।

मुझे नहीं मालूम था कि जल्द ही हम लोगों की मुलाकात होगी और जब सोनिया और मेरी मुलाकात कुछ समय बाद हुई तो हम दोनों ने एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताया। सोनिया को मेरे साथ अच्छा लग रहा था और मैं भी सोनिया के साथ जब भी होता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है। मैं सोनिया से बहुत प्यार करने लगा था हम दोनों एक दूसरे को डेट भी करने लगे थे। करीब 3 महीने तक हम एक-दूसरे को डेट करने के बाद आखिरकार मैंने अपने दिल की बात सोनिया को कह दी। मैंने सोनिया से अपने दिल की बात कही तो सोनिया भी अब मुझसे प्यार करने लगी थी। सोनिया के दिल में भी मेरे लिए प्यार था और हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में बहुत ही ज्यादा खुश हैं।

मेरे कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी थी और मैं नौकरी की तलाश में था। मैं चाहता था कि मैं किसी कंपनी में जॉब करूं और जल्द ही मेरी जॉब लग चुकी थी। जब मेरी जॉब लग गई तो शुरुआत में मैं अपने काम में कुछ ज्यादा ही बिजी हो गया था जिससे कि मैं सोनिया को समय नहीं दे पाता था। सोनिया इस बात से नाराज भी थी लेकिन मैंने सोनिया को समझाया और कहा कि सोनिया तुम तो जानती ही हो कि मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं होता है मैं सुबह ऑफिस के लिए निकल जाता हूं और शाम को घर लौटता हूं। वह मुझे कहने लगी कि हां मुझे मालूम है कि तुम्हें ऑफिस से घर लौटने में देरी हो जाती है। मैंने किसी तरीके से सोनिया को समझाया और मैंने उसे कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूं ताकि तुम्हें भी ऐसा ना लगे कि मैं तुम्हें समय नहीं दे पाता हूं।

सोनिया मुझे कहने लगी कि नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। मैंने अपने ऑफिस से दो दिन की छुट्टी के ली और इन दो दिनों को मैंने सोनिया के साथ बिताने का फैसला किया और हम लोगों ने काफी अच्छा समय साथ में बिताया। मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब सोनिया और मैं एक दूसरे के साथ थे और हम लोगों ने दो दिन बहुत ही अच्छे से बिताए। मुझे कुछ पता ही नहीं चला कि कब दो दिन हम दोनों के अच्छे से बीत गये और अब समय के साथ साथ हम दोनों का रिलेशन और भी ज्यादा गहरा होता जा रहा था। सोनिया ने भी अपनी बहन के साथ मिलकर अपना बुटीक खोल लिया था और वह उसे चलाने लगी थी। हम दोनों जब एक दूसरे को मिलते तो हमें बहुत ही अच्छा लगता।

सोनिया कुछ दिनों के लिए अपने पापा और मम्मी के साथ जयपुर जाने वाली थी। मैंने जब सोनिया को पूछा कि क्या जयपुर में कुछ जरूरी काम है तो वह कहने लगी कि जयपुर में हमारे कुछ रिश्तेदार रहते हैं और वहां पर उन लोगों ने कुछ प्रोग्राम रखा है इसलिए वहां हमें जाना पड़ेगा। मैंने सोनिया को कहा कि लेकिन तुम वहां से वापस घर कब लौट आओगी तो वह मुझे कहने लगी कि वहां से हम लोग जल्दी ही वापस आ जाएंगे हम लोग बस वहां कुछ दिनों के लिए जा रहे हैं। अगले दिन सोनिया जयपुर चली गई थी कुछ दिनों के लिए सोनिया जयपुर में ही रही और जब वह वापस लौटी तो उस दिन हम लोगों ने साथ में अच्छा समय बिताया। मेरी ऑफिस की छुट्टी थी और मैं चाहता था कि मैं सोनिया के साथ में ही समय बिताऊँ।

उस दिन हम लोगों ने साथ में बहुत ही अच्छा समय बिताया और मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि सोनिया के साथ उस दिन मैं अच्छा समय बिता पाया था। सोनिया को उसके बाद मैंने उसके घर पर छोड़ा और फिर मैं अपने घर चला आया था। जब उस दिन मैं घर लौटा तो मैंने देखा कि घर पर हमारे पड़ोस में रहने वाले गुप्ता जी आए हुए थे वह पापा के साथ बैठे हुए थे और वह पापा से कुछ बातें कर रहे थे। जब मैं घर पर पहुंचा तो उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है मैने उनसे कहा कि हां अंकल मेरी जॉब तो अच्छी चल रही है। उसके बाद मैं अपने रूम में चला गया था और जब मैं अपने रूम गया तो मुझे सोनिया का फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि क्या तुम घर पहुंच चुके हो। मैंने सोनिया को कहा कि हां मैं घर पहुंच चुका हूं, मैं सोच ही रहा था कि तुम्हें फोन करूं लेकिन तभी तुम्हारा फोन मुझे आ गया। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे काफी देर तक हमारी बातें हुई और तब तक गुप्ता जी भी जा चुके थे और मैं पापा के साथ हॉल में बैठा हुआ उनसे बातें कर रहा था।

अगले दिन मैं अपने ऑफिस के लिए सुबह जल्दी निकल चुका था। जब उस दिन में शाम को घर लौटा तो मैं उस दिन सोनिया से मिल नहीं पाया। मैंने सोनिया को कहा आज मैं तुमसे मिल नहीं पाऊंगा क्योंकि ऑफिस में बहुत ही ज्यादा काम था और मुझे घर लौटने में देरी हो जाएगी। सोनिया और मैं अक्सर एक दूसरे को मिला करते थे लेकिन उस दिन मैं सोनिया को मिल ना सका। अगले दिन हम दोनों एक दूसरे को मिले जब उस दिन हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे तो सोनिया के हाथों को मैंने अपने हाथों में पकड़ा हुआ था। उसके होठों को मैं देख रहा था उसके गुलाबी होठ मेरे अंदर की गर्मी बढ़ते जा रहे थे और वह भी बहुत ज्यादा गर्म हो रही थी। मैंने सोनिया से कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है और सोनिया भी मेरी तरफ देख रही थी उसकी आंखों में मेरे लिए उस दिन कुछ ज्यादा ही प्यार उमड़ रहा था। मैंने सोनिया से कहा आज हम लोग साथ में ही कहीं चलते हैं। मैं सोनिया को अपने साथ अपने दोस्त के घर ले गया जहां पर हम दोनों साथ में बैठे हुए थे।

मैं और सोनिया एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे तभी मैंने सोनिया के गुलाबी होंठों को महसूस करना शुरू कर दिया था। उसके गुलाबी होंठों को चूस कर मुझे अच्छा लग रहा था और वह भी बहुत ज्यादा खुश थी। मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था सोनिया को भी मज़ा आने लगा था सोनिया की तडप बढ़ती ही जा रही थी और मेरी गर्मी भी अब बढने लगी थी। मैंने सोनिया के बदन से कपड़े उतारते हुए जब उसके बदन को महसूस करना शुरू किया तो वह गर्म होने लगी और मेरी गर्मी भी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैं और सोनिया एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाते जा रहे थे। मैं उसके निप्पल का रसपान कर रहा था जिससे कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था।

मैंने सोनिया से कहा मुझे तुम्हारी चूत को चाटना है। सोनिया ने अपनी काली रंग की पैंटी को नीचे किया। मैं उसकी चूत को देख रहा था सोनिया की चूत पर एक भी बाल नहीं था उसकी योनि को देखकर मैं उसकी योनि को चाटने लगा। मुझे उसकी योनि को चाटने में बहुत ही अच्छा लग रहा था उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था। मुझे मज़ा आ रहा था सोनिया और मैं एक दूसरे की गर्मी को बढाए जा रहे थे। हम दोनों बहुत ज्यादा खुश हो चुके थे जिस तरीके से हम लोगों ने एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा दिया था। मुझे सोनिया की चूत को चाटने में मजा आ रहा था लेकिन अब वह भी मेरे लंड को चूसना चाहती थी। जब उसने मेरे लंड को चूसना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और उसे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। जब वह ऐसा कर रही थी तो हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे।

जब मैंने सोनिया की चूत पर अपने लंड को लगाया तो सोनिया की चूत से पानी निकाल रहा था। उसकी चूत से निकलता हुआ पानी  मेरे गर्मी को बढाए जा रहा था। मैं सोनिया की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाने वाला था। मैंने उसकी चूत में लंड को डाला तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मैंने देखा सोनिया की चूत से खून बाहर की तरफ निकल आया है। सोनिया की चूत से निकलता हुआ खून मेरे गर्मी को बढा रहा था। मुझे मज़ा आ रहा था जब मैं और सोनिया एक दूसरे की गर्मी को बढाए जा रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को इतना ज्यादा बढ़ा था हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे।

जिस तरीके से हम लोगों की गर्मी बढ़ती जा रही थी हम दोनों रह सके और मैंने सोनिया को बड़ी तेजी से धक्के देना शुरू कर दिया था। मेरा धक्को में और भी तेजी आती जा रही थी। सोनिया की चूत मुझे बहुत ज्यादा टाइट महसूस हो रही थी। उसकी योनि से लगातार पानी बाहर निकल रहा था। जिस तरीके से उसकी चूत से पानी बाहर निकल रहा था उससे मुझे मज़ा आ रहा था और सोनिया को भी बड़ा अच्छा लग रहा था। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढखए जा रहे थे। मैंने जैसे ही सोनिया की चूत में अपने माल को गिराया तो वह खुश थी और उसने मेरे लंड को उसके बाद चूसा। मेरे लंड पर लगे माल को सोनिया ने अंदर निगल लिया था।

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