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शॉप में काम करने वाली लड़की

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मेरा नाम संदेश है, मैं एक कंपनी में मैनेजर के पद पर हूं। मैं जिस कंपनी में काम कर रहा हूं वहां पर काम करते हुए मुझे काफी समय हो चुका है और मेरा कुछ महीनों पहले ही प्रमोशन हुआ है इसीलिए मैं मैनेजर के पद पर हूं। मैं आगरा का रहने वाला हूं और आगरा में ही मैं काम कर रहा हूं। मेरे घर में मेरे माता-पिता और मेरी छोटी बहन है जो कि अभी अपनी स्कूल की पढ़ाई कर रही है। मेरे पिता भी एक दुकान चलाते थे परंतु उनका उसमें नुकसान हो गया उसके बाद से वह घर पर ही हैं लेकिन मैं अपनी तनख्वाह से उन्हें घर खर्चे के लिए पैसे दे दिया करता हूं जिससे कि उन्हें किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती और वह लोग अच्छे से अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

उन्होंने भी मुझे कभी भी बचपन में किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी और मेरा बहुत ही अच्छे से ध्यान रखा, हमेशा ही वह मुझे बहुत प्यार किया करते थे। मेरे माता-पिता ने मेरा हमेशा ही ध्यान दिया है। मेरे चाचा भी हमारे पड़ोस में ही रहते हैं और जब मेरे पापा का नुकसान हुआ तो उस वक्त उन्होंने हमारी बहुत मदद की और कहा कि यदि तुम्हें किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता हो तो तुम मुझसे बेझिझक कह देना लेकिन मैंने उन्हें कहा कि नहीं मेरी भी पढ़ाई पूरी हो चुकी है और अब मैं कहीं पर नौकरी कर लूंगा। उसके बाद से ही मैंने इस कंपनी को ज्वाइन कर लिया और अपना सौ प्रतिशत दिया है इसीलिए मेरा प्रमोशन भी बहुत जल्दी हो गया। मेरी उम्र भी अभी सिर्फ 28 वर्ष की है और मुझे कंपनी के द्वारा एक अच्छी तनख्वाह मिलती है जिससे कि मेरे घर का खर्चा बहुत ही अच्छे से चल जाता है और मैं भी अपने जीवन को बहुत ही अच्छे से जी सकता हूं। मैं साल में एक बार अपने माता पिता और अपनी बहन को लेकर कहीं भी घूमने चला जाता हूं, वह लोग भी बहुत खुश होते हैं जब मैं उन्हें कहीं घुमा कर ले आता हूं और मेरे पिता हमेशा ही कहते हैं कि तुमने अपने कंधों पर बहुत ही जल्दी से जिम्मेदारी ले ली है। मैं भी अपने पिता से कहता हूं कि आपने भी तो हमारे लिए बहुत ही मेहनत की है। आप का नुकसान हो गया तो उसके बावजूद भी आपने हमें किसी भी प्रकार की कोई कमी कभी महसूस नहीं होने दी और आपने बहुत ही अच्छे से हम लोगों का पालन पोषण किया है।

वह बहुत ही अच्छे से मुझसे बात करते हैं और कभी भी मुझे किसी प्रकार की कोई समस्या होती है तो सबसे पहले मैं उनसे ही पूछता हूं क्योंकि उनका अनुभव मुझसे बहुत ज्यादा है और उन्होंने हमेशा ही मेरी भलाई के लिए सोचा है। मुझे अपने लिए बहुत कम समय मिल पाता था क्योंकि मैं ऑफिस के काम से ही बिजी रहता हूं और कई बार मैं अब ऑफिस के काम से बाहर भी जाने लगा था, इस वजह से मुझे अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल पा रहा था। मैंने काफी समय से कुछ शॉपिंग भी नहीं की थी और मैं सोचने लगा कि क्यों ना इस बार मैं कुछ शॉपिंग कर लूं लेकिन उसके बावजूद भी मैं अपने लिए समय नहीं निकाल पा रहा था। एक दिन छुट्टी के दिन मैंने पूरा मन बना ही लिया कि मैं आज शॉपिंग कर ही लेता हूं। मैं उस दिन अकेले ही शॉपिंग के लिए चला गया। जब मैं शॉपिंग के लिए गया तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या चीज लेनी चाहिए क्योंकि मुझे कुछ भी पसंद नहीं आ रहा था। अब मैं एक दुकान में चला गया और वहां पर मैं काफी देर से कपड़े देख रहा था लेकिन मुझे उसके बावजूद भी कुछ समझ नहीं आ रहा था, तभी एक लड़की मेरे पास आई और कहने लगी कि यदि आपको कुछ भी समझ नहीं आ रहा तो आप मुझसे पूछ लीजिए मैं आपको बता देती हूं कि आपको क्या चीज लेनी चाहिए। उस लड़की का नाम ममता है और मैंने उसे कहा कि मुझे आप कुछ ऐसे कपड़े दिखाइए जो मैं अपने ऑफिस में भी पहन सकूं। उसने मुझे कुछ शर्ट दिखाई, वह मुझे बहुत अच्छी लगी और मैंने वह शर्ट खरीद ली। जिस प्रकार से वह मुझसे बात कर रही थी मुझे उससे बात करना अच्छा लग रहा था और वह बड़े ही मुस्कुरा कर मुझसे बात करती। मुझे उसके बात करने का तरीका बहुत ही अच्छा लगा और मैंने उसे कहा कि यदि मैं अगली बार आऊंगा तो मैं आपसे ही मदद लूंगा।

वह कहने लगी कि आप जब भी आए तो आप मुझसे ही पूछ लीजिए, मैं आपको यहीं पर मिल जाऊंगी। जब भी मुझे अब कपड़े लेने होते तो मैं उसी शॉप में जाता था और वही से कपड़े लिया करता था। मैं ममता से इस बारे में जरूर पूछता कि मुझे कौन से कपड़े लेने चाहिए। वह मुझे हर बार मदद कर देती। मैंने उससे एक दिन उसका नंबर ले लिया और जब मैंने उसका नंबर लिया तो मैं अब उससे फोन पर बात कर लिया करता था। जब भी मैं दुकान पर जाता तो वह भी बहुत खुश होती थी। एक दिन मैंने उसे कहा कि यदि तुम्हारे पास समय हो तो तुम मेरे साथ लंच पर चल सकती हो, वह यह बात सुनकर बहुत खुश हुई और मेरे साथ लंच पर चल पड़ी। जब वह मेरे साथ लंच पर आई तो वह बहुत ही खुश हो रही थी और हम दोनों साथ में बैठकर काफी बातें कर रहे थे। मैं उसके बारे में जानने की कोशिश कर रहा था और उसे पूछ रहा था कि तुम्हें क्या चीज पसंद है। वह मुझे सब कुछ बता देती। मुझे बिल्कुल भी ऐसा नहीं लग रहा था जैसे हम दोनों पहली बार मिल रहे हो। हम बहुत ही खुल कर बात कर रहे थे और एक दूसरे से बहुत अच्छे से हम लोग बात कर रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं ममता के साथ समय बिता रहा था और वह भी मुझे कहने लगी कि मुझे आपके साथ समय बिताना अच्छा लग रहा है।

मैं जब भी अब शॉपिंग करने जाता तो ममता से हमेशा मिल लेता था। हम दोनों अब एक दूसरे के बहुत ही नजदीक आ चुके हैं और मैं उससे फोन पर भी काफी बातें करने लगा। मेरे पास जब भी वक्त होता तो मैं ममता को अपने साथ घुमाने के लिए ले जाता। एक दिन मैंने उसे अपने ऑफिस में भी बुला लिया और वह जब मेरे ऑफिस में आई तो वह बहुत ही खुश हुई और कहने लगी कि आप तो ऑफिस के मैनेजर हैं, क्योंकि मैंने उसे कभी भी इस बारे में नहीं बताया था कि मैं एक मैनेजर के पद पर हूं। अब हम दोनों के बीच में बहुत बातें होने लगी और वह भी मुझे एक दिन अपने घर ले गई। जब मैं उसके घर गया तो मैं उसके माता-पिता से मिलकर बहुत खुश हुआ और उसने मुझे अपने बड़े भैया से भी मिलवाया, वह भी मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और उन्हें मुझसे कोई भी आपत्ति नहीं थी। जब ममता ने मुझे अपने घर वालो से मिलवाया तो ममता ने कहा कि यह मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त हैं और यह एक मैनेजर भी हैं। अब हम दोनों अक्सर ही मिल लिया करते थे और कभी वह मेरे ऑफिस में आ जाती और कभी मैं भी उसके घर पर चला जाता था। मैंने भी अब उसे अपने घर पर मिलवा दिया और जब वह मेरे माता-पिता से मिली तो बहुत खुश हुई और कहने लगी कि तुम्हारे माता-पिता बहुत ही सिंपल और साधारण है। वह मेरी बहन से मिलकर बहुत खुश हुई और जब भी मैं उसकी दुकान में जाता तो वह मेरी बहन के लिए कुछ ना कुछ गिफ्ट दे दिया करती थी जिससे कि मेरी बहन भी बहुत खुश रहती थी और वो कहती थी कि आप अगली बार मुझे ममता से कब मिला रहे हैं। जब भी ममता हमारे घर पर आती तो मेरी बहन से बहुत ही बातें किया करती थी और वह दोनों बहुत देर तक बातें करते थे।

एक दिन मैं ममता से मिलने उसके घर पर चला गया जब मैं उसके घर पर गया तो हम दोनों आपस में बैठकर बात कर रहे थे और वह मेरे बगल में बैठी हुई थी उसकी गांड मुझसे टकरा रही थी और मैं भी उससे बिल्कुल सट कर बैठा हुआ था। मैंने जैसे ही उसकी जांघों पर हाथ लगाया तो वह मेरे इशारों को समझ चुकी थी और वह मुझे अपने साथ अपने रूम में ले गई। हम दोनों साथ मे बैठ गए हम दोनो बैठ कर बात कर रहे थे मैंने उसकी जांघों पर हाथ लगाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे मैंने उसकी योनि को दबाना शुरू किया। उसकी योनि से बहुत तेज पानी निकल रहा था और वह पूरे मूड में आ गई मैंने उसके होठों को किस करना शुरू कर दिया और मैं उसके होठों को बड़े अच्छे से किस कर रहा था। उससे भी बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था और वह भी मेरे होठों को अपने होठों में लेकर चूमने लगी।

ममता भी पूरे मूड में आ चुकी थी और अब उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए और जब उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। वह बहुत तेजी से मेरे लंड को हिलाए जा रही थी और उसने हिलाते हिलाते अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लिया वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने भी उसके सारे कपड़े खोल दिया और उसके स्तनों को अच्छे से चूसने लगा। अब उससे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा था और मैंने उसकी योनि में जैसे ही अपने लंड को डाला तो उसकी चूत से खून की पिचकारी मेरे लंड पर आ गिरी और मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसे बड़ी तेजी से झटके मारने शुरू कर दिए। उसके अंदर की उत्तेजना भी अब पूरी चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी और वह भी पूरे मूड में आ गई वह अपने मुंह से सिसकियां लिए जा रही थी और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मुझे उसे धक्के मारने में बड़ा ही आनंद आ रहा था वह मेरा पूरा साथ देती। मैंने उसे तेज तेज झटके मार रहा था और उन्हें झटकों के बीच में मेरा वीर्य पतन उसकी योनि के अंदर ही हो गया हम दोनों एक दूसरे को पकड़कर ऐसे ही लेटे रहे। ममता मुझसे बहुत ही ज्यादा बात करती है और हम दोनों के बीच में सिर्फ सेक्स को लेकर ही बात होती है।

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