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सामने वाली खिडकी मे गदराये बदन की भाभी

Antarvasna, hindi sex story: मैं कोलकाता में रहता था मेरा नाम आकाश है मेरी उम्र 30 साल है। यह बात तब हुई जब मैं 24 साल का था मै एक सोसायटी के छात्रावास में रह रहा था वहां अधिकांश लोग बंगाली थे, मैं छात्रावास के जिस कमरे में था वहां 4 छात्र एक कमरे मे रह रहे थे। हमारा कॉलेज परिसर हमारी सोसाइटी से कुछ ही दूरी पर था कॉलेज में गर्मियों की छुट्टियां पढ़ने वाली थी और इसी बीच मेरे दोस्त ने मुझे कहा कि आकाश क्या तुम अपने घर जा रहे हो तो मैंने उससे कहा हां मैं अपने घर जा रहा हूं। मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर जाने वाला था तो मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि क्या तुमने ट्रेन का रिजर्वेशन करवा लिया तो मैंने उसे कहा हां मैंने ट्रेन की टिकट करवा ली थी। वह कहने लगा यार मुझे अभी तक ट्रेन की टिकट नहीं मिल पाई है मैंने उसे कहा रुको अभी हम देखते हैं। मैं अपने कंप्यूटर पर देख रहा था मैंने उसे कहा कि तुम्हें कब की टिकट चाहिए तो उसने मुझे बताया कि मुझे 5 दिन बाद की टिकट चाहिए मैंने उसे कहा कि उस वक्त तुम्हें ट्रेन में टिकट मिल जाएगी।

मैं और वह आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी मेरे पापा का फोन आया और वह मुझे कहने लगे कि आकाश बेटा तुम घर कब आ रहे हो मैंने उन्हें कहा मैं कुछ दिनों बाद यहां से घर के लिए निकलूंगा मैंने ट्रेन की रिजर्वेशन भी करवा दी है। पापा कहने लगे कि चलो बेटा ठीक है तुम ध्यान से आना और हमें तुम्हारी बहुत याद आ रही है मैंने पापा से कहा ठीक है पापा मैं अभी फोन रखता हूं। मैंने उनसे ज्यादा देर बात नहीं की और फिर मैं अपने दोस्त से बात करने लगा उसने मुझे कहा कि क्यों ना हम लोग ट्रेन की टिकट लेने के लिए रेलवे स्टेशन ही चले। हम लोग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की टिकट लेने के लिए चले गए वहां पर हम लोगों ने देखा कि वहां पर लंबी कतार लगी हुई है हम भी लाइन में खड़े हो गए और करीब एक घंटे के इंतजार के बाद मेरे दोस्त को टिकट मिल ही गई। हम लोग रेलवे स्टेशन से घर की तरफ लौट रहे थे जब हम लोग घर की तरफ लौट रहे थे तो उस वक्त मेरे दोस्त ने मुझे कहा कि आकाश क्या हम लोग आज हावड़ा ब्रिज चले।

मैंने उसे कहा ठीक है और हम लोग वहां से चले गए हम लोग हावड़ा ब्रिज पर खड़े थे कि तभी कुछ युवक एक लड़के के पीछे भाग रहे थे हम लोगों ने जब उस युवक की तरफ देखा तो वह बहुत घबराया हुआ था वह अकेला ही था और पीछे से करीब सात-आठ योग दौड़ते हुए आ रहे थे उन्होंने उसे पकड़ लिया था। जब उन्होंने उसे पकड़ा तो तब जाकर हमें पता चला कि वह तो एक चोर है और उन लोगों ने उसकी जमकर धुनाई की। हम लोग वहां पर काफी देर तक खड़े रहे और उसके बाद वहां से हम लोग अपने छात्रावास लौट आए अब हम लोग बैठकर आपस में बात कर रहे थे मैं अपना सामान पैक करने लगा क्योंकि मुझे घर जाना था इसलिए मैंने अपने दोस्त से कहा कि तुम भी मेरी मदद कर दो। सामान काफी बिखरा हुआ था आखिरकार मैंने अपना सामान अपने बैग में रखा और मैं रेलवे स्टेशन तक के लिए ऑटो से गया। जब मैं रेलवे स्टेशन पहुंचा तो उस वक्त ट्रेन देरी से चल रही थी ट्रेन थोड़ी देर बाद आई, जब ट्रेन आई तो मैंने ट्रेन में अपना सामान रखा और मुझे करीब आधा घंटा हो गया था अब ट्रेन चलने वाली थी। आधे घंटे बाद जब ट्रेन चली तो मेरे पापा का फोन मुझे आया और वह कहने लगे कि बेटा क्या तुम ट्रेन में बैठ चुके हो तो मैंने उन्हें कहा हां पापा ट्रेन थोड़ा देरी से है इसलिए आप थोड़ा रुक कर ही आइएगा। पापा ने कहा ठीक है बेटा जब तुम पहुंचने वाले हो तो मुझे फोन कर देना मैं तुम्हें लेने के लिए रेलवे स्टेशन आ जाऊंगा। करीब 6 महीने के बाद मैं घर जा रहा था और मेरा रात का सफर बड़ा ही अच्छा रहा अगले दिन सुबह ट्रेन एक घंटे देरी से चल रही थी मैंने पापा को फोन किया और कहा कि आप एक घंटे देरी से आइएगा। ट्रेन के पहुंचने का समय सुबह 7:00 बजे का था लेकिन ट्रेन एक घंटे देरी से थी, करीब 8:00 बजे के आसपास ट्रेन पहुंचने वाली थी। मैं जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुंचा तो मैं वहां से बाहर आया मैंने इधर उधर देखा तो मुझे कहीं पापा नजर नहीं आए मैंने उन्हें फोन किया और कहा कि क्या आप रेलवे स्टेशन में ही है पापा कहने लगे हां बेटा। उन्होंने मुझे कहा कि तुम थोड़ा बाहर की तरफ आओ मैं जैसे ही बाहर गया तो मुझे पापा दिखाई दिये पापा को देखते ही मैं खुश हो गया।

मैंने जब पापा को देखा तो पापा ने मुझे गले लगा लिया और कहा आकाश बेटा तुम काफी दुबले हो गए हो तो मैंने उन्हें कहा कि पापा आपको तो पता ही है कि हॉस्टल में खाना कैसा मिलता है। पापा कहने लगे चलो कोई बात नहीं तुम अब कुछ दिनों तक घर पर रहोगे तो सब ठीक हो जाएगा। पापा और मैं घर आ गए जब हम लोग घर पहुंचे तो पापा और मैं साथ में बैठे हुए थे मेरी मां भी बहुत खुश थी और वह मुझे कहने लगी कि बेटा तुमने बहुत अच्छा किया जो इस गर्मी की छुट्टी में तुम घर आ गए। मैंने मां से कहा मां वैसे भी अब मेरा कॉलेज खत्म होने वाला है और अब समय ही कितना बचा है यह मेरा आखरी साल है और इस वर्ष मेरा कॉलेज पूरा हो जाएगा उसके बाद तो मैं घर ही आ जाऊंगा। पापा कहने लगे हां बेटा तुम अब घर ही आ जाना मैंने उन्हें कहा पापा जैसे ही कॉलेज खत्म होगा तो वैसे ही मैं घर आ जाऊंगा। अब मैं अपने घर पर था इसलिए मुझे घर पर काफी अच्छा लग रहा था मेरी मेरे दोस्तों से फोन पर भी बात हो रही थी वह लोग मुझे फोन कर के कहते कि हम लोग भी घर आए हुए हैं।

हॉस्टल में कोई भी नहीं था करीब एक महीने तक मैं घर पर ही था इसी बीच एक महीने के दौरान हमारे कॉलोनी में फंक्शन था और वहां पर मैं अपने पापा मम्मी के साथ गया हुआ था। कॉलोनी में पापा की सब लोग बड़ी इज्जत करते हैं और जब हमारे पड़ोस के लोगों ने मुझे देखा तो उन्होंने पूछा कि आकाश बेटा तुम कब आए मैंने उन्हें कहा मुझे आए हुए थोड़ा समय हो चुका है। मैं ज्यादातर अपने घर पर ही रहता हूं मैं पापा मम्मी के साथ समय बिता रहा था पापा ने भी अपने ऑफिस से कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले ली थी और वह चाहते थे कि हम लोग कुछ समय साथ में ही बिताये। मैं और पापा बहुत खुश थे और मम्मी भी घर पर ही रहती मैंने पापा और मम्मी के साथ काफी अच्छा समय बिताया उसके बाद मैं वापस कोलकाता लौट गया। जब मैं कोलकाता लौटा तो अभी भी मेरे कुछ दोस्त वापस आए नहीं थे और मैं हॉस्टल के रूम में अकेला ही था। मैंने अपने दोस्तों को फोन किया तो वह कहने लगे कि हम लोगों को आने में थोड़ा समय लगेगा, मैं छुट्टी से दो दिन पहले ही आ गया था। मैं हॉस्टल के रूम में अकेला ही था और मेरे कमरे की खिड़की से जब मैं बाहर की तरफ देख रहा था तो मैंने देखा सामने खिड़की से एक भाभी देख रही हैं उनकी तरफ में देखे जा रहा था वह भी बाहर देख रही थी। मैं उन्हें देख कर बड़ा खुश हुआ जब उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो वह मुस्कुराने लगी और अपनी साड़ी के पल्लू को वह ऊपर नीचे करने लगी मैंने उन्हें इशारा करते हुए अपने हॉस्टल में आने के लिए कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। मैंने उन्हें गेट पर आने के लिए कहा तो वह गेट पर आई जब वह मुझसे बात कर रही थी तो मैंने उन्हें कहा आप मेरे साथ हॉस्टल में चलिए। वह कहने लगी नहीं वहां पर नहीं आ पाऊंगी लेकिन किसी प्रकार से मैं भाभी को हॉस्टल में ले आया था भाभी का नाम सुनीता है और वह बड़ी गदराए हुए बदन की है उन्हें देखकर तो मेरा पानी छुटने लगा था।

यह पहला मौका था जब किसी भाभी के साथ में सेक्स करने वाला था सुनीता भाभी मेरे साथ कमरे में बैठी हुई थी मैंने कहा भाभी आप तो बड़ी ही लाजवाब है और यह कहते ही मैंने उनको अपनी बाहों में भर लिया। उन्होंने अपनी साड़ी को उतारना शुरू किया जब मैंने उनके पेटीकोट को उतारा तो वह कहने लगी तुम मेरी चूत को चाट लो मैंने उनकी चूत को बहुत देर तक चाटा। मैंने उनके स्तनों को दबाना शुरु किया तो वह खुश हो गई थी मैंने उनके स्तनों को बहुत दबाया। वह मुझे कहने लगी तुम तो बड़े ही सेक्स के भूखे हो। मैंने उन्हें कहा भाभी इतने लंबे समय बाद मुझे कोई मिला है तो मैं आपको कैसे छोड़ सकता हूं और जब मैंने उनको कहा तो वह मुझे कहने लगी ठीक है मैं अपने दोनों पैरों को खोल रही हूं तुम अपने लंड को चूत के अंदर डाल दो। मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर घुसा दिया और जैसे ही मेरा लंड उनकी चूत के अंदर गया तो उन्होंने कहा कि मुझे तो बड़ा मजा आ गया। मैने उन्हे कहा आपकी चूत मे मेरा लंड जाते ही मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपकी चूत के मजे मे लेता रहूं।

वह कहने लगी तुम्हारा जब तक मन करे तब तक तुम मुझे चोदो उनके पति अक्सर काम के सिलसिले में बाहर ही रहते थे इसलिए उन्हें सेक्स का सुख नहीं मिल पा रहा था। वह चाहती थी कि मैं उनकी इच्छा की पूर्ति करू इसी के लिए उन्होंने मुझे कहा कि तुम मेरी चूत की गर्मी को मिटा दो। मैंने उनकी चूत के अंदर बाहर लंड को करना शुरू कर दिया मैं अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था उससे वह बडी खुश हो रही थी और उनके मुंह से निकलती हुई मदाक आवाज मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। मैंने उनको कहा आपको चोद कर मुझे बड़ा मजा आ रहा है मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और उनकी चूत पर मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था। उनकी चूत की दीवार से जिस प्रकार से मेरा लंड टकरा रहा था उससे मुझे बड़ी खुशी हो रही थी और मैं बहुत ही ज्यादा खुश था मुझे उन्हें चोदने में बहुत ही मजा आया और काफी देर तक उन्हें ऐसे ही धक्के मारता रहा। मैंने उन्हें कहा कि अभी मुझे लगता है मैं आपकी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा तो वह कहने लगी तुम मेरी चूत मे माल गिरा दो। उनकी चिकनी चूत के अंदर मैने वीर्य को गिरा दिया जिस प्रकार से मेरा वीर्य उनकी चूत के अंदर गिरा वह खुश हो गई। उसके बाद भी हम लोगों ने आधे घंटे तक और सेक्स किया हम दोनों बड़े ही खुश थे जिस प्रकार से मैंने उनके साथ संभोग किया था।

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