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रचना की टाइट चूत का मजा

Hindi sex stories, antarvasna: मैं पटना अपनी दीदी से मिलने के लिए गया हुआ था। मैं दो दिनों तक पटना में ही रहा दो दिन बाद में पटना से वापस लखनऊ लौट आया था। जब मैं लखनऊ वापस लौटा तो मुझे काफी ज्यादा काम था इसलिए मैं अपने काम में बिजी हो गया मेरी बात काजल के साथ बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी जिससे काजल बहुत ज्यादा गुस्से में थी। जब काजल को समय मिला तो काजल ने मुझे उस दिन काफी कुछ कहा जिससे कि हम दोनों के बीच बहुत झगड़े हुए। मेरी और काजल की दूरियां उस दिन के बाद बढ़ने लगी थी काजल मुझसे अब दूर होती जा रही थी और मैं भी काजल से काफी दूर हो चुका था। मुझे नहीं मालूम था काजल और मैं एक दूसरे से अब दूर हो जाएंगे और हम दोनों की जिंदगी अब पूरी तरीके से बदल जाएगी। काजल मेरी जिंदगी से दूर जा चुकी थी। काजल और मेरा रिलेशन पिछले 3 वर्षों से चल रहा था लेकिन अब हम दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके थे और मैं अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता था।

मैं लखनऊ में ही नौकरी करता हूं लेकिन मेरा मन लखनऊ में जॉब करने का बिल्कुल भी नहीं था इसलिए मैंने लखनऊ से नौकरी छोड़कर अब दिल्ली आने का फैसला कर लिया था और मैं दिल्ली आ गया। जब मैं दिल्ली गया तो मैं दिल्ली में जॉब करने लगा और मेरी नौकरी अच्छे से चलने लगी थी। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था जिस तरीके से मेरी जॉब चल रही थी और मेरी जिंदगी भी अब आगे बढ़ने लगी थी। मैं चाहता था मैं  अपने माता-पिता से मिलने के लिए जाऊं जब मैं अपने माता-पिता से मिलने के लिए लखनऊ गया तो उन लोगों से मिलकर मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगा। मैं लखनऊ में काफी खुश था मैं अपने माता-पिता से मिला उससे मैं काफी खुश था और काफी दिनों तक मैं लखनऊ में ही रहा। उसके बाद मैं वापस दिल्ली लौट आया जब मैं दिल्ली लौटा तो मै काफी बिजी रहने लगा था और मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं होता था।

मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं वहां पर मैं ज्यादा किसी को नहीं पहचानता था लेकिन रोज में एक लड़की को शाम के वक्त कॉलोनी में देखा करता हूं। उस लड़की को देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता और मुझे लगता मुझे उससे बात करनी चाहिए लेकिन मेरी उस लड़की से बात नहीं हो पाई थी मैं उस लड़की से बात तो नहीं कर पाया था लेकिन एक दिन मैं अपने ऑफिस के लिए अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था मुझे वह लड़की रास्ते में दिखी और उसने मुझसे लिफ्ट मांगी। मेरे लिए यह बहुत ही अच्छा था उस दिन पहली बार मेरी बात रचना के साथ हुई। रचना से बात कर के मुझे अच्छा लगा और रचना से मेरी उस दिन काफी बात हुई। मैंने उस दिन उसके ऑफिस तक उसे छोड़ दिया था उस दिन के बाद रचना और मैं एक दूसरे से बात करने लगे थे लेकिन कुछ दिनों से मुझे रचना दिखाई नहीं दी थी। मेरे पास रचना का कोई नंबर भी नहीं था और ना ही मुझे उसके घर पता था। मैं सोचने लगा मैं रचना से किस तरीके से संपर्क करूं क्योंकि मेरी बात उससे काफी लंबे समय से हो नहीं पाई थी।

मैं चाहता था मैं रचना से बात करूं काफी लंबे समय के बाद मेरी मुलाकात रचना के साथ हुई तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मैं रचना से मिलकर बड़ा खुश था जिस तरीके से रचना और मैं एक दूसरे को मिले उस से हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगा था। अब हम दोनों की मुलाकात एक दूसरे से होने लगी थी मैंने रचना को एक दिन अपने साथ कॉफी पर चलने के लिए कहा और वह मेरे साथ उस दिन आ गई। जब रचना और मैं उस कॉफी शॉप में बैठे हुए थे तो मैं रचना के बारे में जानना चाहता था। उस दिन रचना ने मुझे अपने परिवार की स्थिति के बारे में बताया और कहा घर में सिर्फ वही कामाती है इस वजह से उसके ऊपर काफी ज्यादा दबाव है। मैंने रचना से उस दिन काफी देर तक बातें की और रचना के बारे में उस दिन जानकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा। कहीं ना कहीं मेरे दिल में रचना को लेकर और भी ज्यादा प्यार बढने लगा था मैं बहुत ज्यादा खुश था जिस तरीके से हम दोनो एक दूसरे से मिलते और हम दोनों एक दूसरे के साथ जब भी होते तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता।

हम दोनों की जिंदगी बड़े अच्छे से चल रही है और रचना बहुत ज्यादा खुश थी मेरी और रचना की दोस्ती हो चुकी थी। रचना और मैं एक दूसरे को कहीं ना कहीं प्यार भी करने लगे थे क्योंकि हम दोनों एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं। मैं जिस तरीके से रचना से मिलता उस से मुझे बहुत ही खुश होती और मुझे बड़ा अच्छा लगता जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते। रचना और मैं अब एक दूसरे के बहुत ज्यादा करीब आ चुके थे इसलिए मैं चाहता था रचना से मैं अपने प्यार का इजहार कर दूं। मैंने रचना से अपने दिल की बात कह डाली मैं रचना को प्यार करने लगा था इसी वजह से मैं चाहता था रचना से मैं अपने प्यार का इजहार करूं। जब मैंने रचना से अपने दिल की बात कही तो वह मुझे मना ना कर सकी और हम दोनों का रिलेशन चलने लगा था। हम दोनों का रिलेशन चलने लगा था जब भी रचना को मेरी जरूरत होती तो मैं हमेशा ही उसकी मदद के लिए तैयार होता।

रचना को बहुत अच्छा लगता जब भी हम दोनों साथ में होते क्योंकि रचना और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश हैं। जिस तरीके से हम दोनों की जिंदगी चल रही है उस से हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता। एक दिन रचना और मैं साथ में थे उस दिन जब रचना और मैं हमारी कॉलोनी के पार्क में बैठे हुए थे तो हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे। रचना ने मुझे कहा आज हम लोगों को कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए क्योंकि हम दोनों की छुट्टी थी मैंने रचना से कहा क्यों ना आज हम लोग मूवी देखने के लिए चले। रचना भी मेरी बात मान गई और उस दिन हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए। रचना को मेरे साथ कहीं भी चलने में कोई एतराज नहीं था वह मुझ पर बहुत ज्यादा भरोसा करती है। मैं रचना के भरोसे पर हमेशा ही खरा उतरा हूं और रचना को बहुत अच्छा लगता है जब भी वह मेरे साथ समय बिताती है। हम दोनों मूवी देखने के लिए गए जब हम दोनों मूवी देखने के लिए गए तो हम दोनों ने उस दिन बड़ा ही इंजॉय किया।

अब हम लोग वहां से वापस लौट आए थे रचना और मैं वापस लौट आए थे। मैंने उसके अगले दिन रचना को उसके ऑफिस तक छोड़ा और मैं वहां से अपने ऑफिस चला गया। मैं हमेशा ही रचना को उसके ऑफिस छोड़ दिया करता था और शाम के वक्त हम दोनो साथ में ही घर आया करते थे। रचना का भरोसा मुझ पर बहुत ही ज्यादा है इस वजह से रचना मुझसे मिलने के लिए घर पर भी आ जाया करती थी। रचना और मैं कई बार एक दूसरे के साथ अकेले होते तो हम दोनों को अच्छा लगता जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हमें बहुत ही अच्छा लगता था। एक दिन रचना और मैं साथ में बैठे हुए थे उस दिन जब रचना और मैं एक दूसरे के साथ थे। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे हम दोनों को ही बड़ा अच्छा लग रहा था।

हम दोनो एक दूसरे से बातें कर रहे थे जब मेरा हाथ रचना की जांघ पर लगा तो वह उत्तेजित होने लगी थी मेरी गर्मी बढ़ाने लगी थी़ रचना ने मेरी गर्मी को बढ़ा दिया था। हम दोनो रह नहीं पाए मैं उसके नरम होंठों को चूमने लगा था। मैं रचना के नरम होठों को चूम रहा था जिससे वह बहुत गरम हो रही थी। अब रचना की चूत से पानी निकलने लगा था वह अपने पैरों को आपस में मिलाने लगी थी। मैं समझ चुका था वह रह नहीं पाएगी इसलिए मैंने रचना के कपड़ों को उतारा तो वह पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी। मैं उसके बदन को महसूस करने लगा था। मैं उसके नरम बदन को महसूस करने लगा था मैंने उसकी ब्रा को उतारकर किनारे रखा तो मुझे उसके स्तनों को चूसने में मजा आने लगा था। मुझे रचना के स्तनों को चूसने में बहुत ही मजा आता जब मैं उसके स्तनों को चूस रहा था उससे वह बहुत ज्यादा गर्म हो रही थी। अब हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी।

मैंने रचना की पैंटी को उतारते हुए उसकी चूत को सहलाना शुरु किया। मैं जब उसकी पैंटी को उतार कर उसकी चूत को सहला रहा था तो वह पूरी तरीके से मजे में आ चुकी थी। हम दोनों की गर्मी बढ़ने लगी थी मैंने उसकी चूत मे लंड को घुसा दिया। जैसे ही मैंने रचना की चूत मे लंड को डाला तो वह बहुत जोर से चिल्ला कर मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकलने लगा है। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसकी योनि के अंदर बाहर लंड को किए जा रहा था। मेरा लंड बड़े ही आसानी से उसकी चूत के अंदर बाहर होता मुझे बहुत ही मजा आता हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते जा रहे थे।

करीब 5 मिनट तक मैं रचना को धक्के मारता रहा लेकिन मुझे एहसास होने लगा था मैं ज्यादा देर तक उसकी टाइट चूत का मजा नहीं ले पाऊंगा। रचना की चूत से खून भी निकल रहा था उसकी चूत की गर्मी को झेल पाना मुश्किल था उसने मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड लिया था जब उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकडा तो मैं बिल्कुल भी रह ना सका और मेरा वीर्य रचना की चूत मे गिरने को था। जैसे ही मेरा वीर्य रचना की चूत मे गिरा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और रचना भी बहुत ज्यादा खुश थी। हम दोनों के बीच उस दिन के बाद अक्सर सेक्स संबंध बनते ही रहते हैं और हम दोनों को बहुत खुशी थी हम दोनो एक दूसरे के साथ अच्छे से सेक्स का मजा लेते हैं।

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