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प्रतिभा की चूत में माल

Hindi sex stories, antarvasna: मैं कुछ दिनों पहले ही नॉएडा से घर लौटा था और मैं कुछ समय तक घर पर ही था क्योंकि पापा और मम्मी चाहते थे की मैं अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ले लूं। मैंने अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी लेली थी और फिर हम लोग फैमिली टूर पर जाने के लिए प्लान कर रहे थे। मैंने जब पापा मम्मी से इस बारे में कहा कि हम लोग अपनी फैमिली टूर पर कहां जाएं तो मम्मी ने कहा कि हम लोगों को जालंधर जाना चाहिए। हम लोगों के पास ज्यादा समय तो नहीं था इसलिए हम लोग कुछ दिनों के लिए ही जालंधर जाना चाहते थे। हम लोग पूरी फैमिली के साथ जालंधर चले गए और वहां पर हम लोगों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया। मुझे इस बात की बड़ी खुशी थी कि मेरे पूरे परिवार साथ में मैं लंबे समय बाद कहीं घूमने के लिए गया। दीदी और जीजाजी भी हम लोगों के साथ में थे और हम लोग बहुत ही ज्यादा खुश थे जिस प्रकार से हम लोगों ने जालंधर में इंजॉय किया और सब लोग बड़े ही खुश थे।

अब हम लोग वापस लौट आए थे और जब लोग वापस लौटे तो उसके बाद मैं अपना ऑफिस ज्वाइन कर चुका था और अब हर रोज की तरह मैं सुबह ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था। मैं ऑफिस के लिए तैयार हो चुका था और मां से मैंने कहा कि मां मेरे लिए नाश्ता लगा दो मां ने मेरे लिए नाश्ता लगाया। मैं अब नाश्ता करके अपने ऑफिस के लिए निकल ही रहा था कि मेरे दोस्त का फोन आ गया और वह मुझे कहने लगा कि आकाश क्या तुम मुझे भी रिसीव कर लोगे तो मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें लेने के लिए तुम्हारे घर पर आता हूं। मैं अपनी कार से उसे लेने के लिए उसके घर पर गया जब मैं उसके घर पर पहुंचा तो हम दोनों वहां से ऑफिस के लिए निकल पड़े। जब हम लोग ऑफिस पहुंचे तो उसके बाद हम लोग अपने ऑफिस का काम करने लगे। उसी दिन दोपहर में लंच टाइम से वक्त मैं अपने ऑफिस के बाहर ही खड़ा होकर सिगरेट पी रहा था कि तभी सामने से एक लड़की आती हुई मुझे दिखाई दी वह भी शायद किसी ऑफिस में ही जॉब करती थी। उस दिन उसे देखकर मुझे काफी अच्छा लग रहा था और मैं चाहता था कि उससे मैं बात करूं लेकिन मेरा उससे कोई भी परिचय नहीं था।

उसके कुछ दिनों के बाद वह मुझे एक फंक्शन में दिखाई दी और वहां पर जब वह मुझे लड़की दिखी तो मैंने सोचा कि आज मैं उससे बात कर ही लेता हूँ। मैंने उस दिन उससे बात कर ली मुझे पहले तो लगा था कि शायद वह मुझसे बात नहीं करेगी लेकिन उसने बड़े ही अच्छे से मुझसे बात की और मुझे काफी अच्छा भी लगा जिस तरीके से हम लोगों ने एक दूसरे से बात की। अब मुझे उसका नाम पता चल चुका था उसका नाम प्रतिभा है और प्रतिभा के साथ में मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी अच्छा समय बिताने लगे थे। जब भी मैं प्रतिभा को मिलता तो मुझे प्रतिभा से मोलकर काफी ज्यादा अच्छा लगता। कहीं ना कहीं प्रतिभा को भी मेरे साथ अच्छा लगने लगा था और हम दोनों की दोस्ती और भी ज्यादा गहरी होती जा रही थी। समय के साथ साथ मै प्रतिभा के साथ अपनी बातों को शेयर किया करता और प्रतिभा भी मुझसे अपनी बातों को शेयर किया करती तो मुझे काफी अच्छा लगता। अब हम दोनों काफी ज्यादा खुश थे जब भी मैं और प्रतिभा साथ में होते तो हम दोनों को अच्छा लगता।

एक दिन प्रतिभा और मैं कॉफी शॉप में बैठे हुए थे उस दिन हम लोग ऑफिस से फ्री होकर कॉफी शॉप में बैठे हुए थे और हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे। मुझे प्रतिभा से बातें कर के अच्छा लग रहा था और उसे भी मुझसे बातें करना अच्छा लग रहा था हम दोनों ने उस दिन साथ में काफी अच्छा टाइम स्पेंड किया। करीब दो घंटे तक उस दिन हम दोनों साथ में बैठे रहे फिर मैंने ही उस दिन प्रतिभा को उसके घर तक छोड़ा। मैंने जब प्रतिभा को उसके घर पर छोड़ा तो प्रतिभा और मैं साथ में काफी ज्यादा खुश थे और हम दोनों को बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों ने साथ में टाइम स्पेंड किया। प्रतिभा और मेरी फोन पर भी बातें होती रहती थी और हम दोनों फोन पर जब भी एक दूसरे से बातें करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता। कुछ दिनों से मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए मैं अपने ऑफिस नहीं जा पा रहा था तो प्रतिभा ने मुझे फोन किया और कहने लगी की तुम कुछ दिनों से मुझे मिल नहीं रहे हो ना ही तुम्हारा फोन आ रहा है। मैंने प्रतिभा को कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है इस वजह से मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाया था। प्रतिभा ने मुझे कहा कि मुझे तुमसे मिलना है तो मैंने प्रतिभा को कहा कि तुम घर पर ही आ जाओ। यह पहली बार था जब प्रतिभा उस दिन हमारे घर पर आई थी मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि प्रतिभा जब मम्मी से मिलेगी तो मम्मी मुझसे कहेगी की प्रतिभा से तुम शादी कर लो। प्रतिभा को देखते ही मम्मी ने पसंद कर लिया था।

मैंने मम्मी से कहा कि मम्मी मैंने कभी भी प्रतिभा के बारे में ऐसा कुछ नहीं सोचा। प्रतिभा तो घर से जा चुकी थी लेकिन अब मम्मी मेरे पीछे पड़ी हुई थी कि तुम प्रतिभा से अपने रिश्ते की बात करो। प्रतिभा का भी हमारे घर पर अक्सर आना जाना रहने लगा था लेकिन हम दोनों के बीच अभी भी कुछ ऐसा नहीं था परंतु मुझे भी लगने लगा था कि प्रतिभा के बिना शायद मैं नहीं रह पाऊंगा इसलिए मैंने उसे अपने दिल की बात कह दी।

प्रतिभा ने भी मेरे रिलेशन को स्वीकार कर लिया और हम दोनों बहुत ही खुश थे जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा था। मैं और प्रतिभा एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश थे हम दोनों साथ में ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करते और वह भी मुझसे मिलने के लिए घर पर आ जाया करती थी। जब भी वह मुझसे मिलने के लिए घर पर आती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और प्रतिभा को भी बहुत ज्यादा अच्छा लगता। एक दिन मैं और प्रतिभा साथ में बैठे हुए थे उस दिन मैंने प्रतिभा के हाथों को महसूस करना शुरू किया तो वह भी कहीं ना कहीं गर्म होने लगी थी। यह पहली ही बार था जब मेरे और प्रतिभा के होंठ आपस मे टकराने जा रहे थे उस दिन जब हम दोनों के होंठ आपस में टकराने लगे तो हम दोनों को बड़ा अच्छा लगने लगा और प्रतिभा को भी बड़ा मजा आने लगा था।

मैंने प्रतिभा के बदन से धीरे-धीरे कर के उसके कपड़ों को उताराना शुरू किया तो वह भी उत्तेजित होने लगी। उसकी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। ना तो मैं अपने आपको रोक पाया और ना ही प्रतिभा अपने आप पर काबू कर पा रही थी। हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो प्रतिभा ने उसे अपने हाथों में ले लिया और मेरे लंड को सहलाने लगी। जब वह मेरे लंड को हिला रही थी तो मुझे मजा आने लगा था और प्रतिभा को भी बड़ा मजा आ रहा था।

वह जिस तरीके से मेरे मोटे लंड को हिला रही थी उस से मेरी गर्मी बढ़ाती जा रही थी। प्रतिभा ने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने प्रतिभा से कहा मुझसे रहा नहीं जा रहा है प्रतिभा ने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू किया। प्रतिभा भी उत्तेजित हो चुकी थी इसलिए वह मेरे लंड को अपने गले तक लेकर उसे बड़े अच्छे तरीके से चूसने लगी थी। मेरी गर्मी बढ़ाने लगी थी। वह पूरी तरीके से मेरी गर्मी को बढ़ा चुके थी मेरी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी मैं बिल्कुल रह नहीं पाया और मैंने प्रतिभा की चूत को चाटने के बाद उसकी योनि को पूरी तरीके से गिला कर दिया था जिससे कि प्रतिभा भी मचलने लगी थी। मैंने उसकी चूत में अपने लंड को घुसा दिया था। मेरा लंड प्रतिभा की चूत में जाते ही वह जोर से चिल्लाई और बोली मेरी योनि में तुम्हारा लंड  चला गया है।

वह मुझे कहने लगी मुझे मजा आने लगा है अब मुझे भी काफी मज़ा आने लगा था जिस तरीके से मै और प्रतिभा एक दूसरे का साथ दे रहे थे। मैं प्रतिभा को तेज गति से धक्के दिए जा रहा था और प्रतिभा पूरी तरीके से मजे में आ गई थी। मेरा लंड प्रतिभा की चूत के अंदर जाता तो उसकी योनि से खून की पिचकारी बाहर निकल आती और वह उत्तेजित होती जा रही थी। हम दोनों की गर्मी बढ़ती जा रही थी अब मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रहा था। ना तो प्रतिभा अपने आप पर काबू कर पा रही थी और ना ही मैं अपने आप पर काबू कर पा रहा था इसी वजह से मैंने जब प्रतिभा की चूत में अपने माल को गिराया तो प्रतिभा खुश हो गई। वह मुझसे लिपटकर बोली आई लव यू। प्रतिभा के चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी उसकी चूत मारने में मुझे मजा आया था। वह बहुत ज्यादा खुश थी और मैं भी काफी खुश था उस दिन के बाद हम दोनों के बीच ना जाने कितनी बार शारीरिक संबंध बने और हम दोनों एक दूसरे को पूरी तरीके से संतुष्ट करने की कोशिश किया करते है।

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