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पड़ोस में रहने वाली दोनों लड़कियों को प्रेगनेंट कर दिया

desi kahani

मेरा नाम दीपक है मैं बेंगलुरु का रहने वाला हूं, मैं अपना ही एक डिपार्टमेंट स्टोर चलाता हूं जो कि मेरे घर से कुछ ही दूरी पर है। मुझे यह स्टोर खोले हुए ज्यादा समय तो नहीं हुआ है परंतु मेरा स्टोर अच्छा चल रहा है क्योंकि हमे सब लोग पहले से ही जानते हैं इस वजह से हमारी कॉलोनी के सब लोग हमारे पास ही आते हैं। मेरे पिताजी बैंक में मैनेजर है और वह अभी बेंगलुरु में रहते हैं। मेरी एक छोटी बहन है जो कि अभी स्कूल की पढ़ाई कर रही है। मेरी दुकान में दो-तीन लड़के काम करते हैं और एक लड़की मेरा बिलिंग का काम संभालती है। सुबह मैं अपने स्टोर में जाता हूं और शाम को मैं अपने घर आ जाता हूं यही मेरी दिनचर्या है, मेरे जीवन में कुछ भी नया नहीं हो रहा है। मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए परंतु मैं उन्हें मना कर देता। मैंने उन्हें कहा कि मैं अभी शादी नहीं करना चाहता हूं, मुझे कुछ और वक्त चाहिए जिससे कि मैं अपना काम और भी अच्छे से जमा पाऊँ।

मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि तुम्हारा काम अच्छा चल रहा है उसके बावजूद भी तुम शादी नहीं करना चाहते हो, मैं उन्हें कहता कि मुझे और वक्त चाहिए इसलिए अब, जब भी वह मुझसे शादी की बात करते तो मैं बात को पलट देता और मैं उनसे इस बारे में बिल्कुल भी बात नहीं करता था। एक बार हमारे पड़ोस में दो लड़कियां रहने के लिए आई। एम का नाम संध्या और दूसरी का नाम कविता था। वह दोनों कॉलेज की पढ़ाई कर रहे हैं और अक्सर वह मेरी दुकान से सामान लेकर जाते हैं, जब वह मेरे स्टोर में आते हैं तो मुझे देखकर वह दोनों ही मुस्कुराती हैं लेकिन मैं अपने काम में होता हूं इसलिए उनसे ज्यादा बात नहीं करता। वह मेरे घर के सामने ही रहती हैं। मैंने उनसे एक दिन पूछ लिया कि तुम दोनों मुझे देख कर क्यों मुस्कुराते हो क्या मैं तुम्हें अच्छा नहीं लगता वह कहने लगी ऐसी बात नहीं है आप हमें अच्छे लगते हो इसलिए हम आपको देख कर मुस्कुराते हैं। मैं पहले उन दोनों की बात नहीं समझ पाया लेकिन जब संध्या ने कहा कि आप हम दोनों को बहुत अच्छे लगते हैं इसीलिए हम दोनों आपको देखकर खुश होते हैं। वह जब भी अपने कॉलेज से आती तो मेरे स्टोर से ही सामान लेकर जाते थे।

मुझे भी अच्छा लगता था जब वह मेरे स्टोर पर आते थे। जब भी वह दोनों मेरे स्टोर में आते तो मुझे बहुत खुशी मिलती, ना जाने उन दोनों को देखकर मुझे क्यों इतना अच्छा लगता था। एक दिन संध्या हमारे स्टोर में आई, उस दिन वह अकेली ही थी। मैंने उस दिन उसे कहा कि यदि तुम्हारे पास कुछ समय है तो हम लोग बैठ कर बातें कर लेते हैं, वह मुझे कहने लगी ठीक है मैं आपके साथ कुछ देर बैठ जाती हूं। जब वह मेरे साथ बैठी तो मैंने उससे पूछा आज तुम्हारी दोस्त कविता नहीं आई, वह कहने लगी कि उसकी तबीयत थोड़ा खराब है इसी वजह से वह घर पर ही है और मैं सामान लेने के लिए आई हूं। मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह दोनों ही मुझे पसंद करती हैं। मैंने जब संध्या से इस बारे में बात की तो वह कहने लगी कि हम दोनों को ही आप बहुत अच्छे लगते हैं और हम दोनों ने आपस में बात की थी पहले कौन आप से बात करेगा लेकिन आपने हम दोनों से बात नहीं की थी। मुझे वह दोनों ही बहुत अच्छी लगती क्योंकि वह दोनों बहुत ही चुलबुले और शरारती किस्म की लड़कीया हैं। मैंने उसे कहा कि तुमने कविता के लिए दवाई ली है या नहीं, वह कहने लगी कि मैंने डॉक्टर को दिखा दिया था उन्होंने कहा है कि कुछ दिनों तक कविता को घर में आराम करना चाहिए इसीलिए वह घर पर है और मैं घर का सारा काम कर रही हूं। संध्या का नेचर भी मुझे अच्छा लगा पहले मैं उन दोनों के बारे में गलत सोचता था क्योंकि मुझे लगता था कि वह दोनों ही बहुत तेज लड़की है परंतु जब मैं संध्या के साथ बैठा तो मुझे एहसास हुआ कि वह तो दिल की बहुत ही अच्छी है। जब वह अगले दिन मेरे स्टोर में आई थी तो मैंने उससे कविता का नंबर ले लिया और कविता को फोन कर दिया, जब मैंने कविता को फोन किया तो वह बहुत खुश थी और कह रही थी कि मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा कि आपने मुझे फोन किया है लेकिन मैं उसे कहने लगा कि मुझे संध्या ने बताया कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है, मैंने तुम्हारी तबीयत पूछने के लिए फोन किया है, वह कहने लगी अभी डॉक्टर ने कुछ दिनों के लिए आराम करने को कहा है और तब तक संध्या ही घर का सारा काम संभाल रही हैं।

मैंने काफी देर उस दिन कविता से बात की और उसके बाद मैं संध्या कि साथ ही बैठा हुआ था। संध्या मुझे कहने लगी कि अब हमारा कॉलेज भी कुछ समय बाद कंप्लीट हो जाएगा उसके बाद हम लोग नौकरी देख रहे हैं, मैंने उसे कहा कि तुम दोनों ही मुझे अपना रिज्यूम दे देना मैं तुम्हारे लिए कहीं नौकरी देख लूंगा। वह दोनों कहने लगी की हमें पार्ट टाइम नौकरी के लिए यदि कहीं पर मिल जाता है तो हम लोग अभी से ही नौकरी शुरू कर देते हैं, मैंने उन दोनों को ही कह दिया की यदि तुम्हे कोई दिक्कत ना हो तो तुम मेरे दुकान में ही आ जाया करो क्योंकि मैं भी सोच रहा था कि मुझे कोई पार्ट टाइम के लिए मिल जाए तो मेरी बहुत मदद हो जाएगी। संध्या कहने लगी कि कविता की तबीयत ठीक हो जाए उसके बाद ही मैं आपको इस बारे में बता पाऊंगी। मैंने उसे कहा कि शाम को जब मैं दुकान से अपने घर आऊंगा तो मैं तुम्हारे घर पर ही आ जाऊंगा, उस वक्त मैं कविता से भी मिल लूंगा। अब मैं शाम को जब अपने दुकान से घर की तरफ जा रहा था तो मुझे ध्यान आया कि मैंने संध्या से कहा था कि मैं शाम के वक्त तुम दोनों से मिलने आऊंगा, मैं उसके बाद उनके घर पर चला गया।

मैं पहली बार ही उन दोनों से मिलने गया था इसलिए मैं उसके लिए कुछ गिफ्ट ले गया था और अपनी दुकान से ही मैंने कुछ सामान ले लिया था। जब मैं उनके घर पर गया तो कविता अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी, संध्या उसके बगल में ही बैठी हुई थी। मैंने कविता से उसका हालचाल पूछा, वह कहने लगी कि मेरी तबीयत थोड़ा ठीक है, थोड़े दिनों बाद मैं पूरी तरीके से स्वस्थ हो जाऊंगी। संध्या मेरे लिए चाय बना कर ले आई और मैं चाय पीते हुए ही उन दोनों से बात कर रहा था, तभी संध्या ने कविता से पार्ट टाइम नौकरी के बारे में बात करने को कहा, मैंने जब कविता से इस बारे में बात की तो वह मुझे कहने लगी कि मैं कुछ दिनों में ठीक हो जाऊंगी उसके बाद हम लोग आपके स्टोर पर काम कर लेंगे क्योंकि हम लोगों के पास काफी समय बच जाता है इसलिए हम दोनों ही सोच रहे हैं यदि कहीं पर हमें कोई काम मिल जाए तो अच्छा रहेगा। मैं काफी देर उन दोनों के साथ ही बैठा हुआ था, उसके बाद मैं अपने घर चला गया। जब मैं अपने घर आ गया तो मेरी उनसे फोन पर बात हो जाया करती थी। एक दिन संध्या मुझे कहने लगी कविता की तबीयत अब ठीक हो चुकी है हम लोग सोच रहे हैं कुछ दिनों बाद हम लोग आपके स्टोर पर काम करना शुरू कर दे। मैंने उन्हें कहा ठीक है, तुम लोग जब भी आओगे तो उससे पहले मुझे एक बार बता देना कि तुम लोग कब से आना चाहते हो, यह कहते हुए मैन जब संध्या से इस बारे में पूछा तो वह कहने लगी कि हम लोग कुछ दिनों बाद ही आपके यहां पर काम करने के लिए आ जाएंगे। मेरी उन दोनों से बहुत अच्छी दोस्ती भी हो चुकी थी और मुझे उन दोनों के साथ बात करना भी अच्छा लगता था लेकिन कविता की अभी तबीयत ठीक नहीं हुई थी और वह बेड रेस्ट पर ही थी। मैं उस उन दोनों से मिलने उनके घर पर चला गया। जब मै उनके घर पर गया तो कविता बिस्तर पर लेटी हुई थी और मैं उसके बगल में ही बैठा हुआ था। मैं उससे बात कर रहा था और पूछ रहा था तुम्हारी तबीयत कैसी है। वह कहने लगी कि मेरी तबीयत अब पहले से बेहतर है। उसने एक चादर ओढ़ी हुई थी जैसे ही वह चादर थोड़ा ऊपर हुई कविता ने अंदर से कुछ भी नहीं पहना हुआ था।

मैंने जब उसकी जांघ पर हाथ रखा तो उसने कुछ भी नहीं पहना था। मैंने जैसे ही उसकी जांघों को सहलाना शुरू किया तो वह पूरे मूड में आ गई और मैंने जब उसकी योनि के अंदर उंगली डाली तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा। संध्या किचन में थी। मैंने अपने लंड को निकालते हुए कविता के मुंह में डाल दिया वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी। उसके बाद मैंने उसके पैर को चौडा करते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया। उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसे चोद रहा था मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा और हम दोनों ही पूरे मजे ले रहे थे। उसने अपने पैरों को खोल रखा था लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य कविता की योनि में गया तो उस वक्त संध्या भी आ गई। वह मुझे कहने लगी कि तुम्हें मेरी इच्छा को पूरा करना पड़ेगा। उसने जैसे ही अपने कपड़े खोले तो उसका बदन गदरया हुआ था। मैंने उसे भी बिस्तर पर लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को खोलते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और बड़ी तेजी से उसे धक्के मारने लगा। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसे झटके दिए जा रहा था वह अपने मुंह से तेज सिसकिंया निकल रही थी। वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी मुझे इतना अच्छा महसूस होने लगा कि मैंने उसे बड़ी तेज तेज धक्के देने शुरू कर दिए उन झटको के बीच में ही ना जाने कब मेरा माल संध्या के अंदर गिर गया मुझे पता ही नहीं चला। कुछ समय बाद वह दोनों ही प्रेग्नेंट हो गई उसके बाद से मेरी गांड फटी हुई है इसलिए मुझे दोनों को डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा।

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