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पहली चुदाई चाय के बाद

Antarvasna, hindi sex story: मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के लिए दिल्ली चला गया दिल्ली के एक नामी कॉलेज में मैंने दाखिला लिया और वहीं हॉस्टल में में रहने लगा। मैं रोहतक का रहने वाला हूं और दिल्ली से ही मैं पढ़ना चाहता था मेरे पापा चाहते थे कि मैं किसी अच्छे कॉलेज से पढ़ाई करूं इसलिए उन्होंने मुझे दिल्ली के एक नामी कॉलेज में भेज दिया। वहां पर मेरा दाखिला हो चुका था और अब मैं अपनी पढ़ाई करने लगा तो समय का कुछ पता चला ही नहीं और मेरे कॉलेज की पढ़ाई जल्दी से पूरी हो गई उसके बाद मैं रोहतक लौट गया। कुछ समय रोहतक में रहने के बाद मैं दिल्ली अपने प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी करने के लिए वापस लौट आया उसी दौरान मैंने एक किराए का कमरा भी लिया। कमरा लेने के बाद मैंने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना शुरू किया और अपनी पढ़ाई पर मैं पूरा ध्यान देने लगा मेरी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था मैं अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे रहा था और मेरे पापा का भी मुझे काफी सपोर्ट था। मैं हर महीने अपने घर रोहतक चला जाया करता था कुछ समय घर पर रहने के बाद मैं वापस दिल्ली लौट आता।

दिल्ली में ही मेरी मुलाकात मनीषा से हुई मनीषा से मेरी मुलाकात मेरे कोचिंग सेंटर में हुई वहां पर जब मैं पहली बार मनीषा को मिला तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा और हम दोनों की बातचीत भी होने लगी थी। मनीषा के साथ समय बिताकर मुझे अच्छा लगता मैं शायद मनीषा को पसंद करने लगा था लेकिन मनीषा को मैंने अपनी दिल की बात कभी जाहिर होने ही नहीं दी। मेरे पापा अब अपनी नौकरी से रिटायर हो चुके थे तो उन्होंने घर पर ही छोटा सा फंक्शन रखने के बारे में सोचा उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि रोहन बेटा मैं रिटायर हो चुका हूं तो तुम कुछ दिनों के लिए घर पर आ जाओ। मैंने पापा को कहा ठीक है पापा मैं कल ही घर आ जाऊंगा मैं अब घर के लिए निकल चुका था मैं जब घर के लिए निकला तो मैं बस से ही रोहतक गया।

जब मैं रोहतक पहुंचकर जैसे ही मैं बस से नीचे उतरा तो सामने ही मेरा दोस्त निखिल खड़ा था निखिल मुझे देखते ही मेरे पास आया और कहने लगा कि तुम काफी समय बाद मिल रहे हो। मैंने निखिल को कहा कि तुम्हे यह बात तो पता ही है कि मैं दिल्ली में रहता हूं निखिल मुझे कहने लगा कि हां रोहन मुझे यह बात पता है कि तुम दिल्ली में ही रहते हो लेकिन तुम यह बताओ कि तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है। मैंने उसे कहा अभी तो मैं अपनी तैयारियों में ही लगा हूं मैंने निखिल को पूछा कि तुम क्या कर रहे हो तो निखिल ने मुझे बताया कि उसने अपने पापा का कारोबार संभाल लिया है। निखिल और मैं एक दूसरे से करीब 15 मिनट तक बात करते रहे उसके बाद निखिल ने मुझसे पूछा कि तुम अभी कहां जा रहे हो तो मैंने उसे बताया कि मैं अपने घर जा रहा हूं पापा रिटायर हो चुके हैं इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए घर आया था। निखिल ने मुझे कहा कि चलो यह तो बहुत अच्छी बात है और निखिल ने हीं उस दिन मुझे अपनी कार से घर तक छोड़ दिया था उसके बाद वह चला गया। मैं जब घर पहुंचा तो मैं कुछ देर अपने पापा के साथ बैठा रहा पापा ने मुझे कहा कि रोहन बेटा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है तो मैंने उन्हें कहा पापा पढ़ाई तो अच्छी चल रही है। मैं कुछ दिनों के लिए घर पर ही रहना चाहता था, मैंने पापा से पूछा आपने अचानक से ही पार्टी देने के बारे में निर्णय ले लिया वह मुझे कहने लगे कि रोहन बेटा मैंने काफी समय पहले ही सोच लिया था लेकिन मुझे लगा कि जब तुम घर आ जाओगे उसके बाद ही मैं यह फैसला लूंगा अब तुम घर आ चुके हो तो मैं सारी तैयारियां कर देता हूं, मैं चाहता हूं कि हमारे सारे रिश्तेदार आये इस बहाने उन लोगों से मुलाकात भी हो जाएगी। तभी मम्मी भी आ गई और मम्मी कहने लगी कि रोहन बेटा तुम कब आए मैंने मम्मी से कहा कि मम्मी मैं तो बस थोड़ी देर पहले ही आया हूं। मम्मी पड़ोस की आंटी के पास गई हुई थी और वह कहने लगे कि बेटा तुमने पानी पी लिया था मैंने अपनी मां से कहा हां मां मैंने पानी फ्रिज से निकाल कर पी लिया था।

मम्मी भी हमारे साथ बैठ गई और पापा मम्मी के साथ इस बात को लेकर चर्चा करने लगे कि हम लोग किस प्रकार से पार्टी करेंगे आखिर में पापा ने निर्णय लिया कि हम लोग किसी होटल में ही हॉल बुक करवा देते हैं। हम लोगों ने एक होटल में हॉल बुक करवाने के बारे में सोच लिया था और हम लोगों ने जब होटल में हॉल बुक करवाया तो उसके बाद पापा ने हमारे जितने भी रिश्तेदार हैं उन सब को इनविटेशन भेज दिया था। मैंने भी अपने कुछ दोस्तों को बुला लिया था मैंने निखिल को भी उस पार्टी में बुला लिया था और जब पार्टी हुई तो उस दिन मैं अपने रिश्तेदारों से भी मिला और पापा भी काफी खुश थे। उसके बाद मैं वापस दिल्ली लौटना चाहता था तो मैंने पापा से कहा कि पापा मैं कल दिल्ली चला जाऊंगा पापा ने कहा कि बेटा दो दिन तुम और घर पर रुक जाते तो हमें भी अच्छा लगता। मुझे भी लगा कि मुझे एक-दो दिन और घर पर रुकना चाहिए इसलिए मैं घर पर रुक गया मैं दो दिन घर पर ही रुका उसके बाद मैं दिल्ली वापस लौट आया। मैं जब दिल्ली वापस लौटा तो मैंने अपनी क्लास शुरू कर दी मैं अपनी कोचिंग क्लास जाने लगा था और मनीषा से भी मैं काफी दिनों बाद मिल रहा था मनीषा ने मुझसे पूछा कि रोहन तुम काफी दिनों बाद दिखाई दे रहे हो।

मैंने मनीषा को बताया कि पापा रिटायर हो चुके हैं इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए रोहतक चला गया था मनीषा कहने लगी कि चलो यह तो अच्छी बात है कि तुम कुछ दिनों के लिए अपने घर चले गए थे। मैंने मनीषा को कहा की कुछ दिनों के लिए मैं घर चला गया था तो उतने दिनों की मेरी पढ़ाई छूट गई थी इसलिए मैंने मनीषा से नोट्स लिए। एक दिन मनीषा ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे घर पर आना चाहती हूं। मनीषा की बात को मैं मान गया और उसे अपने साथ अपने रूम मैं ले आया। मेरा रूम इतना बड़ा नहीं था लेकिन मनीषा और मैं साथ में बैठे हुए थे मैंने उसे चाय के लिए पूछा उसने कहा हां मेरे लिए तुम चाय बना दो  मैंने मनीषा के लिए चाय बना दी हम दोनों साथ में बैठकर चाय पीने लगे मैं मनीषा के कुछ ज्यादा ही नजदीक आने लगा मनीषा को भी यह सब अच्छा लग रहा था। हम दोनों एक दूसरे से खुलकर बात कर रहे थे कि तभी मैंने उसकी जांघों पर हाथ रखा और उसकी जांघों को सहलाने लगा जिससे कि वह मेरी तरफ देखने लगी और कहने लगी रोहन यह सब ठीक नहीं है लेकिन मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी जांघों को बहुत देर तक सहलाया और मनीषा ने मेरे सामने अपने तन बदन को समर्पित कर दिया मेरे लिए तो यह बहुत ही अच्छा था मै उसके गोरे बदन को देखकर उत्तेजित होने लगा। मैं उसकी चूत के अंदर लंड को घुसाना चाहता था मेरे लिए तो यह बहुत ही अच्छा मौका था और वह भी खश थी। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके होंठो को चूमा, मैंने जब उसके सामने अपने लंड को किया तो उसने मेरे लंड को देखा और उसे हिलाना शुरू कर दिया। जब वह मेरे लंड को हिला रही थी तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था, मेरे अंदर का ज्वालामुंखी बाहर आ रहा था। मैंने मनीषा से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लो, उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया। उसने जब अपने मुंह से मेरे लंड को चूसना शुरु किया तो मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लो।

उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया था उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मनीषा मेरे लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक हो रही थी। मैंने उसके कपड़े उतारकर उसके बूब्स को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी कि वह मुझे कहने लगी मैं रह नही पा रही हूं। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो उसकी पिंक चूत को चाटने मे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैं उसकी चूत को बहुत अच्छे से चाट रहा था उसकी गर्मी पूरी तरीके से बढ गई थी। मनीषा की चूत से इतना ज्यादा पानी निकलने लगा था कि वह अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही थी उसने अपने पैरों को खोला और मुझसे कहा तुम मेरी चूत के अंदर लंड को डाल दो? मैंने अपने लंड पर तेल लगाकर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया तो मेरा लंड उसकी चूत को फडता हुआ अंदर तक चला गया।

जब मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर घुसा तो वह बड़ी जोर से चिल्लाई और उसकी चूत से खून निकल गया उसकी सील टूट गई। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर तेजी से लंड को धक्के देना शुरू कर दिया मैं उसकी चूत के अंदर धक्के दे रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं उसकी चूत मारता ही रहूं। मुझे उसकी चूत बड़ी ही टाइट महसूस हो रही थी। मुझे उसे धक्के देने मे बहुत मजा आ रहा मैंने उसके दोनों पैरों को चौडा किया तो वह मुझसे कहने लगी आज तो मजा ही आ रहा है। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर तेजी से हो रहा था वह बहुत ही ज्यादा गरम हो रही थी। उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ना कि कोशिश कि मै समझ गया था वह झड चुकी है। मैने लंड को बाहर निकाला और और उसके मुंह मे माल को गिरा दिया। मैने पहली बार मनीषा की चूत मारी तो मै खुश था।

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