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पड़ोस की महिला को अपने घर पर चोदा

desi chudai ki kahani

मेरा नाम अरविंद है मैं नोएडा का रहने वाला हूं, मेरी नौकरी कोलकाता में लग गई और मुझे कोलकाता जाना पड़ा। मेरे घर वालों ने मुझे बहुत मना किया और कहने लगे कि तुम नोएडा में रहकर ही कोई काम कर लो लेकिन मैंने उन्हें कहा कि यह मेरे भविष्य का सवाल है इसलिए मुझे कोलकाता जाना ही पड़ेगा, मैं वहां कुछ काम कर लूं तो उसके बाद अपना ही खुद का कोई बिजनेस शुरू कर लूंगा क्योंकि मेरे पास अभी इतनी सेविंग भी नहीं है और ना ही हमारे घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी है। हम लोग एक मिडल क्लास फैमिली से हैं इसलिए जो भी हम लोग कमाते हैं वह हम अपने खर्चे पर ही लगा देते हैं, मैंने अपने माता पिता दोनों को समझाया और वह मान गए। मेरी बहन भी अभी स्कूल की पढ़ाई कर रही है और वह अभी छोटी है इस वजह से मैंने उसे कहा कि तुम अपनी पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान देना ताकि तुम्हारे अच्छे नंबर आ सके।

जब मैं कोलकाता गया तो मुझे शुरुआत में बहुत ज्यादा दिक्कत हुई, मेरा बिल्कुल भी वहां रहने का मन नहीं हो रहा था क्योंकि मैं आज तक हमेशा ही अपने घर पर रहा हूं इसलिए मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं कैसे एडजेस्ट करूंगा लेकिन धीरे-धीरे मुझे आदत होने लगी। जब मैं शुरुआत में एक घर में रह रहा था तो वहां पर मेरे साथ में 3 लड़के और रहते थे और वह बहुत ज्यादा गंदगी करते थे लेकिन मुझे अपने काम से बिलकुल भी फुर्सत नहीं मिल रही थी इसलिए मैं अपने घर को नहीं बदल पा रहा था। मैंने कई बार इस बारे में सोचा भी लेकिन जहां मैं घर देखने के लिए जाता हूं वहां पर भी मुझे कोई ऐसी जगह नहीं मिलती जहां पर साफ-सफाई हो इसी वजह से मैं वह घर बदल नहीं पाया। एक दिन मेरे ऑफिस के ही एक मित्र ने मुझे कहा कि यदि तुम्हें घर लेना है तो मेरे पड़ोस में ही एक घर खाली है यदि तुम वहां पर आ जाओ तो तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा क्योंकि वह घर काफी समय से खाली पड़ा है और वह लोग किसी को भी किराए पर नहीं देते परन्तु इस वक्त तो वह किराए पर देने के लिए मान चुके हैं। मैं जब उनसे मिलने के लिए गया तो मुझे वह लोग बहुत अच्छे लगे, उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम कहां के रहने वाले हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं नोएडा का रहने वाला हूं।

वह मुझे कहने लगे कि क्या तुम यहां पर अकेले रहोगे, मैंने उन्हें कहा कि हां मैं अकेला ही रहूंगा इसीलिए उन्होंने मुझसे ज्यादा किराया नहीं लिया और कहने लगे कि हम लोग भी यहां पर नहीं रहते, हम लोगों ने यह घर काफी पहले लिया था लेकिन हमारा ऑफिस यहां से काफी दूर पड़ता है इसलिए हम लोग यहां पर नहीं रहते और हम लोगों ने इसे किराए पर भी नहीं दिया। मैंने उन्हें कहा कि यदि आप इसे मुझे किराए पर दे दे तो मैं घर की भी देखभाल कर लूंगा, वह कहने लगे कि हम लोग यही सोचते हुए तो घर किराए पर देने के लिए सोच रहे हैं। जब वह लोग मुझे घर देने को तैयार हो गए तो मैं भी अपना सारा सामान ले आया। मेरे दोस्त ने भी मेरी बहुत मदद की और हम लोगों ने काफी सारा सामान बाजार से भी खरीदा क्योंकि मेरे पास कुछ भी सामान नहीं था। मैं जिन लड़कों के साथ रह रहा था उन्हीं के पास एक एक्स्ट्रा बेड पड़ा हुआ था इसलिए मैं उस पर ही शाम को जाकर लेट जाता था और खाना भी बाहर से खाता था लेकिन अब मैं अपने घर को अच्छे से सजाने लगा और मैंने घर की अच्छे से साफ सफाई करवा दी। मैं एक दिन बाहर से अपने साथ एक व्यक्ति को भी ले आया और उसे मैंने घर की साफ सफाई करने के पैसे दिए, उसने घर को बहुत अच्छे से साफ कर दिया था इसलिए मुझे उस घर में रहने में भी अच्छा लग रहा था और जब मेरे लैंडलॉर्ड घर देखने के लिए आए तो वह बहुत खुश हो गए और कहने लगे कि तुम यदि इसी प्रकार से यहां पर रहोगे तो हमें भी बहुत खुशी होगी। वह लोग भी ऐसे ही चाहते थे कि उन्हें कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो उनके घर की देखभाल भी कर सके और घर की साफ सफाई भी अच्छे से कर पाए। मुझे बिल्कुल भी गंदगी पसंद नहीं है इसलिए मैंने उनके पूरे घर के आगे पीछे जितनी भी झाड़ियां थी वह सब साफ करवा दिया और उनका घर बिल्कुल साफ हो गया। वह लोग मुझसे बहुत ही खुश थे। मुझे जब भी कोई आवश्यकता होती तो मैं अपने दोस्त को बोल देता, वह मुझे वह सामान दिलवा देता था।

मुझे उस कॉलोनी में रहते हुए काफी वक्त होने लगा था और सब लोग मुझे पहचानने लगे थे। एक दिन मैं पास की ही दुकान पर सामान ले रहा था तो वहां पर एक महिला आई और वह दुकान वाले से पूछ रही थी कि यदि आपके यहां पर कोई काम हो तो आप मुझे बता दीजिए। मैं उनकी बात ध्यान से सुन रहा था और मैंने काफी देर तक कुछ भी नहीं कहा लेकिन जब वह जाने वाली थी तो मैंने उनसे पूछा कि क्या आपको नौकरी की जरूरत है, वह कहने लगी हां मैं अपने लिए कोई नौकरी ढूंढ रही हूं। मैंने उनसे कहा कि आप तो अच्छे घर से लगती हैं और ठीक-ठाक पढ़ी हुई भी लग रहे हैं लेकिन आप यहां छोटी सी दुकान पर काम ढूंढ रहे हैं, मुझे यह बात समझ नहीं आई। वह पहले मुझसे कुछ नहीं कह रही थी लेकिन जब मैंने उन्हें अपना परिचय दिया और बताया कि मैं भी यहीं पास में रहता हूं तो वह थोड़ा कंफर्टेबल हो गई और मुझसे खुलकर बात करने लगी। वह मुझे पास की एक चाय की दुकान में ले गए और वहां पर हम लोग बैठे हुए थे। उन्होंने मुझसे अपनी सारी बात शेयर कि, वह कहने लगी कि मेरे और मेरे पति की बिल्कुल भी आपस में बनती नहीं है इस वजह से हम दोनों का डिवोर्स होने वाला है, वह मुझ पर बेमतलब ही शक करते हैं, मैंने उन्हें कई बार समझाया कि मेरा किसी के साथ भी रिलेशन नहीं चल रहा है लेकिन वह मेरी बात मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं है और कहते हैं कि तुम्हारा किसी ना किसी के साथ तो जरूर कोई चक्कर चल रहा है।

मुझे कई बार उन पर गुस्सा भी आता था लेकिन मैं चुप हो जाती हूं परंतु अब बहुत ज्यादा होने लगा है यदि कोई मेरा पुराना दोस्त मुझसे मिलने भी आता तो वह उसके साथ भी झगड़ा कर लेते इसीलिए हम दोनों ने फैसला किया है कि हम दोनों डिवोर्स ले लेंगे, मैं यह सोच रही हूं कि उसके बाद मैं कहां काम करूंगी। मैंने उनसे पूछा कि आपकी उम्र कितनी है, वह कहने लगी कि मेरी उम्र 32 वर्ष है। वह बहुत ही परेशान थी और मैंने उनसे उनका रिज्यूम ले लिया और कहा कि मैं अपनी कंपनी में आपके लिए बात करता हूं यदि वहां पर कोई वैकेंसी हुई तो मैं आपको बुला दूंगा। अब वह वहां से चली गई और मैं कुछ देर उसी दुकान में बैठा हुआ था, मुझे वह दुकान वाला भी कहने लगा कि यह महिला बहुत ज्यादा परेशान हैं। मैं वहां से उठकर चला गया और जब मैं घर पर आया तो मैं उसके बारे में ही सोचने लगा, मैंने अपने एक दोस्त से उनके लिए नौकरी की बात की और मैंने उन्हें उसी दिन शाम को फोन किया और उन्हें कहा कि महिमा जी आप यदि काम करना चाहती हैं तो मेरे दोस्त के ऑफिस में एक वैकेंसी खाली है, आप वहां पर कल इंटरव्यू दे आइएगा आपका वहां पर सलेक्शन हो जाएगा। वह कहने लगी ठीक है मैं वहां पर चली जाऊंगी। जब वह उस ऑफिस में गई तो उनका सिलेक्शन हो गया क्योंकि वह पढ़ी लिखी थी और वह पहले भी नौकरी करती थी इस वजह से उनका वहां सिलेक्शन हो गया। उसके बाद उन्होंने मुझे फोन किया और कहने लगी कि मैं आपका धन्यवाद कहना चाहती हूं, आपने मेरी बहुत मदद की। मैंने उन्हें कहा कि इसमें मदद वाली कोई बात नहीं है, आपको बहुत जरूरत थी इसलिए मैंने आपका रिज्यूम अपने दोस्त को भेज दिया था। अब उनकी नौकरी लग चुकी थी और वह बहुत खुश थी। वह मुझे अक्सर फोन कर देते थे और एक दिन उन्होंने मुझसे मिलने की इच्छा जताई, मैंने उन्हें अपने घर पर ही बुला लिया। जब वह मेरे घर पर आई तो कहने लगी तुमने तो अपने घर को बहुत साफ रखा है।

वह मेरे साथ ही बैठ कर बातें कर रही थी और उस दिन वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हारे लिए खाना बना लेती हूं। उन्होंने मेरे लिए उस दिन खाना बनाया और हम दोनों ने साथ में ही उस दिन लंच किया लंच करने के बाद हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और मैं महिमा के स्तनों को बड़े ध्यान से देख रहा था क्योंकि उसने बहुत पतला सा टॉप पहना हुआ था जिससे की उसकके चूचे दिखाई दे रहे थे। मैंने जब उसके स्तनों पर हाथ लगाया तो वह समझ गई  मुझे उसके साथ सेक्स करना है। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया कुछ देर बाद उसने भी मेरे लंड को बाहर निकालते हुए अपने मुंह में समा लिया और बहुत अच्छे से सकिंग करने लगी। उसने मेरे लंड को इतने अच्छे से चुसा की मेरा पूरा पानी बाहर निकलने लगा मैं उत्तेजित हो चुका था। मैंने भी उसे अपने बिस्तर पर पटक दिया और उसके सारे कपड़े उतार दिए। जब मैंने उसके स्तनों को देखा तो मैंने तुरंत उसे अपने मुंह में समा लिया और चूसना शुरू कर दिया। मैंने उसके स्तनों को बहुत अच्छे से चूसा उसके बाद  मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जब मैं उसे चोद रहा था तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मैंने काफी देर तक उसे चोदा। मैंने उसे अपने ऊपर लेटा दिया जब मेरा लंड उसकी योनि में गया तो वह चिल्लाने लगी। वह अपने चतडो को ऊपर नीचे करने लगी मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी। लेकिन मैं उसकी योनि को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया जब उसकी योनि में मेरा वीर्य गया तो मुझे बहुत शांति मिली उसके बाद मैंने उसे अपने बगल में लेटा दिया हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर लेटे हुए थे।

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