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पड़ोस की हॉट भाभी के साथ सेक्स

Hindi sex kahani, antarvasna हमारी कॉलोनी में सब लोग बहुत ही अच्छे हैं और एक दूसरे का हमेशा साथ दिया करते हैं हमारा आस-पड़ोस का माहौल भी बहुत अच्छा है और हमारे पड़ोस में ही गुप्ता जी रहते हैं उनके साथ हमारा बड़ा ही अच्छा संबंध है। गुप्ता जी और मेरी मुलाकात करीब 10 वर्षों पहले हुई थी गुप्ता जी का परिवार 10 वर्ष पहले हमारे पड़ोस में रहने आया था वह लोग बड़े ही सज्जन हैं और बहुत समझदार है। मेरे उनके साथ बड़े ही अच्छे संबंध हैं गुप्ता जी का हमारी कॉलोनी के बाहर ही जनरल स्टोर है और वह उसे चलाया करते हैं मैं उन्ही से सारा सामान खरीदा करता हूं और कभी भी मुझे कुछ जरूर होती है तो मैं उन्हें फोन कर दिया करता हूं। एक दिन हमारी कॉलोनी में चोरी हो गई उस दिन मैंने गुप्ता जी से पूछा क्या आपको मालूम है कि हमारी कॉलोनी में चोरी हुई है तो वह कहने लगे हां मुझे मालूम है कि हमारी कॉलोनी में चोरी हुई है लेकिन अभी तक उस चोर का पता नहीं चल पाया है।

गुप्ता जी मुझे कहने लगे हमारी कॉलोनी में यह पहली चोरी है और अब तो हमें अपनी सोसाइटी में किसी गार्ड को रखना पड़ेगा मैंने गुप्ता जी से कहा हां बिल्कुल ठीक कह रहे हैं हमें सोसाइटी में गार्ड तो रखना ही पड़ेगा। अब हमारे कॉलोनी में कुछ लोग ऐसे रहने के लिए आ गए हैं कि जिन पर हमें नजर रखनी पड़ेगी और उससे हमारा घर भी बचा रहेगा। गुप्ता जी कहने लगे कमल भाई साहब आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं लगता है अब हमारी कॉलोनी में कैमरे लगाने ही पड़ेंगे और अब किसी गार्ड को भी हमें रखना पड़ेगा। आज तक कभी भी हमारी कॉलोनी में चोरी नहीं हुई थी यह पहली ही बार हुआ है जब हमारे कॉलोनी में चोरी हुई है। हम लोगों की कॉलोनी में मीटिंग हुई और सब लोगों की सहमति से हम लोगों ने कॉलोनी के गेट पर कैमरा लगा दिया और एक सिक्योरिटी गार्ड को भी हम लोगों ने रख लिया था ताकि आगे से ऐसा कभी ना हो लेकिन उसके बावजूद भी चोरी रुकने का नाम नहीं ले रही थी। एक दिन हमारे घर से भी मेरा पुराना स्कूटर किसी ने चोरी कर लिया मैंने उसकी कंप्लेंट पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई लेकिन अभी तक वह स्कूटर नहीं मिल पाया।

हम लोग बहुत ज्यादा परेशान हो चुके थे और मैंने तो सोच लिया था कि मैं अपने घर के बाहर ही कैमरा लगा दूंगा फिर मैंने अपने घर के बाहर कैमरा लगवा दिया। पूरी कॉलोनी परेशान हो चुकी थी और समझ में नहीं आ रहा था की चोरी कौन कर रहा है लेकिन इस चीज का तो मुझे पूरा भरोसा था कि कोई कॉलनी का ही यह सब करवा रहा है। एक दिन मैंने सोचा कि मैं देखता हूं कि आखिरकार यह कौन करवा रहा है उस दिन मैं रात के वक्त अपनी छत पर ही बैठ गया और मैं सिगरेट पीने लगा तभी मैंने देखा कि हमारे कॉलोनी के पीछे दीवार से कोई आ रहा है और वह करीब चार-पांच लोग थे उन्होंने अपने मुंह पर कपड़ा लपेटे हुए था। उनके चेहरे तो अंधेरे में दिखाई नहीं दे रहे थे वह कॉलोनी के अंदर आ गए और मैं यह सब देखता रहा हमारी कॉलोनी के ही एक घर में वह घुसे और कुछ देर बाद वह लोग वहां से निकल गए। मैं यह सब देखता रहा कि आखिरकार यह माजरा क्या है लेकिन मुझे कुछ समझ में नहीं आया की माजरा क्या था क्योंकि उन लोगों ने कोई चोरी भी नहीं की और वह लोग चुपचाप वहां से चले गए। मुझे कुछ समझ में नही आया अगले दिन मैंने गुप्ता जी से पूछा गुप्ता जी आप मुझे एक बात बताइए जो हमारी कॉलोनी में सफेद रंग का मकान है वहां पर कौन रहता है। वह कहने लगे सफेद रंग के तो हमारी कॉलोनी में काफी मकान है आप यह बताइए कि आप किसकी बात कर रहे हैं मैंने उन्हें कहा आपके घर से जो पांच घर छोड़कर सफेद रंग का घर है वह किसका है। वह कहने लगे कि वह तो शायद श्रीवास्तव जी का घर है उन्होंने उसे कुछ समय पहले ही खरीदा था और अब उन्होंने वहां पर कोई किरायेदार रखे हुए हैं। मैंने गुप्ता जी से कहा लेकिन वहां तो पहले अजय जी रहा करते थे वह बड़े ही सज्जन थे मैंने उन्हें अच्छे से जानता था लेकिन मुझे इतना मालूम है कि वह घर किसी ने खरीदा है और उनसे मेरा परिचय नहीं है। गुप्ता जी कहने लगे कि वह श्रीवास्तव जी ने खरीदा था और उस घर में आज कल कुछ लड़के रहते हैं, मुझे उन लड़कों पर पूरा शक था कि वह लोग ही इस चोरी को करवा रहे हैं।

एक दिन मैंने उन लड़कों को देखा तो उनके हाव-भाव कुछ ठीक नहीं थे मुझे उन्हें देखकर ही पूरा यकीन हो गया था कि उन लोगों ने हीं चोरी करवाई है और वह सब लोग आपस में मिले हुए थे। उनके आने के बाद से ही हमारी कॉलोनी में चोरी का सिलसिला बढ़ने लगा था उससे पहले ना तो हमारे कॉलोनी में कभी चोरी हुई थी और ना ही कभी ऐसी कोई घटना हुई थी मेरा शक यकीन में बदला जा रहा था। मैंने देखा कि  लड़कों के हाव भाव बिल्कुल भी अच्छे नहीं है और वह बहुत ही ज्यादा गलत किस्म के हैं उनके घर में ना जाने कौन-कौन आता रहता था। मैंने एक दिन गुप्ता जी से कहा कि आप मेरी मुलाकात श्रीवास्तव जी से करवा दीजिए तो वह कहने लगे हां मैं उन्हें फोन करता हूं गुप्ता जी का उनके साथ काफी अच्छा रिलेशन था। उन्होंने उसी वक्त उन्हें फोन किया और कहा भाई साहब आप से हमे मिलना था वह कहने लगे कि शाम के वक्त मैं आप से मिल सकता हूं। गुप्ता जी ने मुझे कहा कि शाम के वक्त वह हमें मिलेंगे तो आप दुकान पर ही आ जाइएगा मैंने गुप्ता जी से कहा ठीक है मैं शाम को आपको मिलता हूं और मैं वहां से अपने काम पर चला गया। शाम के वक्त जब श्रीवास्तव जी हमे मिले तो मैंने उन्हें सारी बात बताई और कहा जो लड़के आपके घर में रहते हैं वह मुझे कुछ ठीक नहीं लगे। मुझे उन पर पूरा शक है की उनकी वजह से ही हमारी कॉलोनी में चोरी होनी शुरू हुई है यदि आप उन्हें घर खाली करवाने के लिए कह दे तो हमारी कॉलोनी के लिए अच्छा रहेगा।

श्रीवास्तव जी भी बड़े ही सज्जन व्यक्ति हैं वह मेरी बात मान गए और कहने लगे कि ठीक है मैं उन लड़कों से आज ही कह देता हूं कि वह घर खाली कर दे। कुछ दिनों बाद उन लड़कों ने वहां से घर खाली कर दिया उसके बाद कॉलोनी में भी चोरी होनी बंद हो गई। गुप्ता जी कहने लगे कमल भाई साहब आपने बिल्कुल सही सोचा था उन लड़कों की वजह से ही चोरी होती थी लेकिन चलो ठीक ही हुआ कि अब वहां पर वह लोग नहीं रहते। फिर गुप्ता जी ने मुझे कहा है कि आप वह घर किसी अच्छी फैमिली वाले को किराये पर दे दीजिएगा। मैंने गुप्ता जी से कहा कि क्या उनका घर किराए के लिए खाली है मेरे ऑफिस में एक व्यक्ति हैं उन्हें भी घर किराए पर चाहिए था तो आप उनसे बात कर लीजिए या फिर मैं कल आपको उनसे मिलवा देता हूं। वह कहने लगे ठीक है आप कल उन्हें मुझ से मिलवा दीजिएगा अगले दिन मैंने उन्हें गुप्ता जी से मिलवा दिया और वह लोग वहां रहने के लिए आ गए। कुछ ही समय पहले मेरे ऑफिस में उनकी जॉइनिंग हुई थी उनका ट्रांसफर लखनऊ से हुआ था उनका नाम राजीव है। राजीव जी और उनकी पत्नी और उनके दो छोटे बच्चे हैं वह लोग अब हमारे पड़ोस में रहने लगे थे। राजीव जी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी एक दिन हम लोगों ने उन्हें घर में डिनर पर भी इनवाइट किया था लेकिन उनकी पत्नी की नजरे मुझे कुछ ठीक नहीं लगी वह मुझ पर डोरे डालने लगी। मैंने भी मौका नहीं गवाया और एक दिन आखिरकार वह मौका मुझे मिल ही गया जब मैं उनके घर पर चला गया उस दिन मुझे राजीव जी की पत्नी माधुरी ने अपने बदन की गर्मी को महसूस करने का मौका दिया।

हम दोनों ने एक दूसरे के होठों को चूमना शुरू किया हमारे अंदर गर्मी बढ़ने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं माधुरी के होठों को किस करता। काफी देर तक यह सिलसिला चलता रहा मैंने जैसे ही उनकी चूत को अपनी उंगली से सहलाना शुरु किया तो उसे मजा आने लगा और मुझे भी मज़ा आ रहा था काफी देर तक ऐसा ही चला। जैसे ही माधुरी ने मेरे मोटा लंड को अपने मुंह में लेकर अंदर बाहर करना शुरू किया तो मुझे मज़ा आने लगा और उसे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैंने जब उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो उसके अंदर से गर्मी निकलने लगी और उसकी योनि ने तरल पदार्थ बाहर की तरफ छोड़ना शुरू कर दिया। हम  दोनो की गर्मी बढ़ चुकी थी माधुरी भी अपने आपको ना रोक सकी। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाते ही उसकी योनि के अंदर जैसे ही मैंने अपने 9 इंच मोटे लंड को प्रवेश करवाया तो उसके मुंह से चीख निकल पड़ी और वह चिल्लाने लगी।

जब उसके मुंह से मादक आवाज निकलती तो मेरे अंदर का जोश बढ़ता चला जाता और मैं उसकी बड़ी चूतड़ों को पकड़कर उसे और भी तेज गति से धक्के देने लगता। मैंने काफी देर तक उसकी चूत के मजे लिया जब मैं पूरी तरीके से संतुष्ट हो गया तो मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि में गिरा दिया। जब मेरा वीर्य माधुरी की योनि में गिरा तो वह कहने लगी आपने तो मेरी चूत की गर्मी को शांत कर दिया है। मैंने उसे कहा क्या तुम मेरे लंड को दोबारा से अपने मुंह में लोगी तो वह कहने लगी क्यों नहीं उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे चूसने लगी। वह बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी उसने मेरे अंदर से गर्मी बाहर निकाल कर रख दी मैं बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि काफी समय बाद मुझे ऐसा मौका मिला था कि मैं किसी से अपने लंड को चूसवा रहा था। मेरा लंड दोबारा से 90 डिग्री पर खड़ा हो चुका था मैंने भी अपने लंड को दोबारा मधुरी की योनि में डाल दिया और उसकी चूत के मजे काफी देर तक लिए। मुझे बहुत खुशी हुई जब हम दोनों की इच्छा पूरी हो गई।

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