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नौकरानी ने लंड ले लिया

Antarvasna, hindi sex story मेरे छोटे से घर में पहले बच्चों की चकचौन्द से घर में खुशियां रहती थी लेकिन समय के साथ सब कुछ बदलता चला गया मेरे दोनों बेटे विदेश चले गए और मैं घर पर अकेला रह गया। उन दोनों ने विदेश में ही शादी कर ली थी और सुना था कि किसी अंग्रेज के साथ उन्होंने शादी की थी शादी में मैं जा ना सका मेरी आंखें भी अब कमजोर होने लगी थी और कुछ ढंग से दिखाई नहीं देता था। मैं अपने घर की छत पर बैठकर ही रौनक देखने की कोशिश किया करता हूं मैं छत पर अपनी कुर्सी में बैठा हुआ था और अपने पुराने दिनों को याद कर रहा था। मुझे पुराने दिनों की याद से वह किस्सा याद आया जब मेरी पत्नी और मेरे बीच में झगड़ा हो गया था और वह अपने मायके चली गई थी लेकिन अब मेरी पत्नी की यादे सिर्फ मेरे दिल में बसी हैं और मेरे साथ अब उसकी यादों के सिवा कुछ नहीं है।

मैं सीढ़ियों से नीचे उतर आया मैंने दीवार पर टंगी हुई अपनी पत्नी और अपनी तस्वीर देखी तो मेरी आंखों से पानी आ गया। मैं अपनी आंखों को साफ करने लगा तो मुझे ऐसा आभास हुआ कि जैसे मुझे मेरी पत्नी ने आवाज लगाई हो आज भी मेरे घर में उसकी आवाज गूंजती है और मेरे दिल में उसकी यादें अब तक बसी हुई हैं। अब शायद कोई भी मेरे साथ बात करने वाला नहीं है जिस वजह से मैं काफी अकेला हो चुका हूं कभी कबार मेरे दोनों बच्चे मुझे फोन कर दिया करते हैं लेकिन सिर्फ वह खाना पूर्ति के लिए ही मुझे फोन करते हैं। मैं बहुत ज्यादा परेशान तो था ही क्योंकि मैं अपने अकेलेपन से जो जूझ रहा था और ऊपर से मेरे शरीर में पहले जैसी बात नहीं रह गई थी। मैंने अपने बड़े बेटे को फोन करते हुए कहा बेटा तुम मुझसे मिलने कब आ रहे हो वह कहने लगा पिताजी मेरे पास अब समय नहीं है और आपको कितनी बार कहा है कि आप हमारे पास आ जाइए। मैं कहने लगा बेटा मैं कैसे इस घर को छोड़ कर आ जाऊं घर में तुम्हारी मां की यादें हैं और तुम्हारा बचपन भी तो यहीं कटा था। मेरा लड़का कहने लगा कि पिताजी आप हमारे साथ आ जाइए तो आपको भी अच्छा लगेगा आप वहां अकेले रहकर क्या करेंगे मैंने फोन रख दिया और मैं इधर उधर टहलने लगा।

तभी दरवाजे की घंटी कोई बजा रहा था मैं जब बाहर गया तो मैंने देखा कुछ बच्चे दरवाजे की घंटी बजा रहे हैं मैंने उन्हें कहा आओ बच्चों अंदर आ जाओ। मैंने उन्हें अंदर आने के लिए कहा तो वह लोग अंदर आ गए मैंने उन्हें बड़े ही प्यार से पूछा कि बेटा कुछ लोगे तो वह कहने लगे नहीं अंकल जी हम तो ऐसे ही आपके घर की घंटी बजा रहे थे। उनके चेहरे पर जो मासूमियत थी वह मुझे मेरे बच्चों की याद दिला रही थी मैंने उन्हें कहा मैं तुम्हें चाकलेट देता हूं तो वह खुश हो गए उनके चेहरे की मुस्कुराहट देखते ही बनती थी। उन्होंने जब अपने हाथों में चॉकलेट ली तो वह खुश हो गए और जब वह घर से गए तो एक बच्चा पलट कर कहने लगा अंकल हम दोबारा आएंगे। यह कहते हुए वह चले गए कुछ देर के लिए तो मुझे ऐसा आभास हुआ कि जैसे पुरानी यादें अब दोबारा से ताजा हो चुकी हैं और सब कुछ पहले जैसा ही हो चुका है लेकिन यह सिर्फ समय का अच्छा अहसास था। सुबह के वक्त हमारे घर पर काम करने के लिए मोनू आ जाया करता था मोनू ही घर का काम किया करता था और मेरे लिए खाना भी बना दिया करता था। मोनू को मैंने कई बार कहा कि मेरे लिए तुम सब्जी में मसाले कम डाला करो लेकिन वह हमेशा मसाले ज्यादा डाल दिया करता जिसकी वजह से मेरी तबीयत भी अब थोड़ा खराब रहने लगी थी। मोनू को मैं हमेशा समय पर पगार दे दिया करता था जिससे कि वह खुश हो जाता था और कहता कि बाबूजी आप मेरा कितना ध्यान रखते हैं मैं उससे हमेशा ही कहता कि मैं तुम्हारी मेहनत का फल कैसे अपने पास रख सकता हूं। मोनू ही सिर्फ मेरे जीवन का सहारा था और जैसे मैं उसके भरोसे ही अपनी जिंदगी अब जी रहा था और आखिरकार मेरे दोनों बेटों ने घर आने का फैसला कर लिया। जब वह मेरे पास आए तो कुछ दिनों के लिए ही सही पर घर में काफी चहल फल हो चुकी थी मैं भी बहुत खुश था क्योंकि बच्चे घर में ऊपर से लेकर नीचे तक शोर शराबा मचाया करते। मेरी दोनों बहुएं हालांकि विदेशी थी लेकिन वह अब हिंदी भी सीख चुकी थी इसलिए उनसे बात करने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी और कुछ दिनों बाद वह लोग जाने की बात कहने लगे।

मेरे दोनों बेटों ने मुझसे कहा कि बाबू जी आप हमारे साथ चलिए आप अकेले यहां क्या करेंगे लेकिन मेरी कहीं जाने की इच्छा नहीं थी और मैंने उन्हें कहा देखो बेटा जब तक मेरे शरीर में जान है तब तक मैं यहीं पर रहूंगा और मैं कहीं भी नहीं जाने वाला। मेरे बेटे को लगा मैं कहीं नहीं जाने वाला हूं इसलिए उन्होंने मुझसे दोबारा कभी भी नहीं पूछा और उसके बाद वह लोग विदेश जा चुके थे मुझे उनकी काफी याद आ रही थी इसी बीच मोनू की भी तबीयत खराब रहने लगी और मोनू ने कहा कि बाबूजी मैं कुछ दिनों के लिए आराम करना चाहता हूं मैं काम पर नहीं आ पाऊंगा। मैंने मोनू से कहा ठीक है तुम देख लो जैसा तुम्हें उचित लगता है तो मोनू कहने लगा बाबूजी मैं कुछ दिनों बाद ही काम पर लौट आऊंगा मैंने मोनू से कहा लेकिन इस बीच मैं घर का काम कैसे करूँगा। मोनू कहने लगा बाबूजी मैं देख लेता हूं कि यदि कोई एक काम करने के लिए इस बीच मिल जाता है तो मैं उसे आपके पास काम पर रख जाऊंगा और कुछ दिनों के लिए मैं आराम करना चाहता हूं क्योंकि मेरी तबीयत भी ठीक नहीं लग रही है। मैंने मोनू से कहा लेकिन जब तक कोई मिल नहीं जाता तब तक तुम्हें ही काम करना पड़ेगा वह कहने लगा हां बाबूजी मैं तब तक काम कर लूंगा आप उसके लिए बिल्कुल ही निश्चिंत रहिए।

मोनू पर मुझे पूरा भरोसा था मोनू ने मुझे कह दिया था कि वह तब तक कहीं नहीं जाने वाला जब तक कोई मिल नहीं जाता और मोनू भी काम के लिए किसी को देखने लगा लेकिन कोई भी अभी तक मिल नहीं पाया था तब तक मोनू ही घर का काम कर रहा था। मोनू कई बार कहता की बाबूजी आप अपनी दवाइयां भी समय पर ले लिया कीजिए क्योंकि आपकी भी तबियत अब ठीक नहीं रहती। मैं उसके कहने के अनुसार दवाई ले लिया करता लेकिन मुझे अब दिखाई देना भी कम होने लगा था, एक दिन मैंने मोनू से कहा कि मुझे तुम डॉक्टर के पास ले चलो। जब मैं डॉक्टर के पास गया तो डॉक्टर ने कहा बाबूजी आप के चश्मे का नंबर अब बढ़ने लगा है। मोनू ने घर पर काम करने के लिए एक महिला को रखवा दिया उसके पति की मृत्यु हो चुकी थी और वह विधवा थी उसका नाम मीना है। मीना मुझे कहने लगी बाबू जी मैं आपकी देखभाल अच्छे से करूंगी और कुछ दिनों के लिए मोनू ने काम पर आना बंद कर दिया था। मीना अच्छे से घर की देखभाल किया करती थी मेरा घर की साफ-सफाई बड़े अच्छे से करती और मेरे अनुसार ही वह खाना बना दिया करती थी। एक दिन मुझे बड़ी तेज पेशाब आ रही थी तो मैं बाथरूम की मे गया मीना ने अंदर से दरवाजा बंद नहीं किया हुआ था उसकी बड़ी चूतड देख कर बुढ़ापे में भी मेरा लंड हिलोरे मारने लगा। मैंने उस वक्त तो दरवाजा बंद कर दिया लेकिन फिर मैंने मीना को अपने कमरे में बुलाया। मैंने मीना से कहा आज तुम मेरे बदन की मालिश कर दोगी मेरा बदन बहुत दुख रहा है। मीना कहने लगी क्यों नहीं उसने मेरे बदन की मालिश की और मेरा बदन जवान सा लगने लगा था। जैसे ही मीना ने मुझसे कहा कि मैं जाऊं तो मैंने मीना को कुछ पैसे पकड़ा दिए और कहां यह तुम रख लो।

मीना खुश हो गई मैंने मीना से कहा यदि तुम मेरे लंड को चूसोगी तो मैं उसके बदले पैसे दूंगा? मीना इस बात के लिए तैयार हो गई मीना ने मेरे लंड को अच्छे से चूसा मैंने उसे कुछ पैसे भी दिए। मीना ने मेरे लंड से चूस चूस कर पानी भी बाहर निकाल दिया था मैं पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगा था। इस बुढ़ापे में भी मेरा लंड 90 डिग्री पर खड़ा हो चुका था काफी समय बाद किसी ने मेरे लंड को चूसा था। मैंने मीना से कहा तुम मेरे लंड के ऊपर अपनी योनि को सटा दो? मीना मेरे लंड के साथ खेलने लगी और वह अपनी योनि पर मेरे लंड को सटाने लगी जिससे कि मीना की योनि से पानी टपकने लगा था। मीना ने जैसे ही मेरे लंड को अपनी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी और मेरे लंड के ऊपर वह अपनी चूतडो को बड़ी तेजी से ऊपर नीचे करती जा रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था मीना भी बहुत खुश थी काफी देर तक तो यही सिलसिला चलता रहा। जब मैं और मीना पूरी तरीके से चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी तो मीना कहने लगी बाबूजी आपका लंड तो बड़ा मोटा है।

मैंने मीना से कहा तुम मेरे नीचे से लेट जाओ मीना बिस्तर पर अपने पेट के बल लेट चुकी थी उसने अपनी चूतडो को थोड़ा सा ऊपर कर लिया। मैं अपने लंड को उसकी योनि के अंदर नहीं डाल पा रहा था तो मीना ने मेरे मोटे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी योनि के अंदर घुसा दिया। जैसे ही मेरा लंड मीना की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह कहने लगी बाबूजी आपका लंड तो किसी 25 साल के युवक जैसा कड़क और मोटा लंड है। मीना को चोदकर जैसे मेरे अंदर जवानी का जोश पैदा होने लगा था मैं मीना की बड़ी सी चूतड़ों को कसकर पकड़ कर उसे इतनी तेजी से धक्के मारता जिससे कि मीना भी खुश हो जाती। वह मुझसे अपनी चूतड़ों को मिलाए जाती काफी देर तक मैंने उसे धक्के दिए तो मेरे लंड से बड़ी तेज गति से मेरे वीर्य गिरा जो की मैने मीना की चूतडो के ऊपर गिर दिया।

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