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मेरी खुशी बन जाओ जानेमन

Antarvasna, desi kahani: रामू काका हमारे घर के वफादार हैं और वह पिछले कई वर्षों से हमारे घर पर काम कर रहे हैं सुहानी भी अपने मायके गई हुई थी इसलिए रामू काका ही घर का सारा कामकाज संभाल रहे थे। मैंने नाश्ता किया और अपने ऑफिस चला गया जब मैं ऑफिस जा रहा था तो मेरे ड्राइवर ने मुझसे कहा कि साहब मुझे कुछ दिनों के लिए छुट्टी चाहिए मुझे अपने गांव जाना है। मैंने उसे कहा कि तुम्हें कितने दिनों की छुट्टी चाहिए तो वह मुझे कहने लगा कि साहब मुझे पन्द्रह बीस दिनों के लिए घर जाना था घर में जरूरी काम है और मेरे मकान की भी कुछ मरम्मत का काम था इसलिए आने में समय लग जाएगा। मैंने उसे कहा कि ठीक है तुम घर चले जाना उसके बाद मैं अपने ऑफिस चला गया मैं काफी दिनों बाद अपने ऑफिस जा रहा था मैं जब अपने केबिन में बैठा तो मैंने मैनेजर को बुलाया और वह तुरंत ही मेरे केबिन में चला आया। जब वह आया तो उसने मुझसे कहा कि हां सर कहिये क्या काम था तो मैंने उसे बैठने के लिए कहा वह बैठ गया और मैंने उससे काम के बारे में जानकारी ली तो वह मुझे कहने लगा कि सर काम काफी अच्छे से चल रहा है।

मैं शाम के बाद घर लौट गया अगले दिन से सोहन ने ड्राइवर को भेज दिया था उसने अपने ही किसी रिश्तेदार को कुछ दिनों के लिए भेज दिया था सुहानी भी अब अपने मायके से लौट चुकी थी। जब सुहानी अपने मायके से लौटी तो उसने मुझे कहा रमन आपको परेशानी तो नहीं हुई ना, मैंने सुहानी को कहा नहीं मुझे तो कोई परेशानी नहीं हुई मैंने सुहानी से पूछा कि पापा मम्मी कैसे हैं? उसने मुझे बताया कि पापा मम्मी अच्छे हैं और पापा की तबीयत अब पहले से ज्यादा ठीक है। आज से करीब 10 वर्ष पहले जब मैं मुंबई आया था तो मेरे पास कुछ भी नहीं था लेकिन मैंने पूरी मेहनत की और मेहनत के साथ ही मैं अपने आप को साबित कर पाया और अब मेरे पास किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है मेरे पास ना तो पैसों को लेकर कोई कमी है और सुहानी के रूप में मुझे एक अच्छी पत्नी भी मिल चुकी है।

सुहानी ने मेरा हमेशा ही ध्यान दिया है सुहानी और मेरी मुलाकात पहली बार एक पार्टी में हुई थी वहां पर जब मैंने सुहानी को देखा तो पहली नजर में ही उसे देख कर मैं दिल दे बैठा था मैं चाहता था कि किसी भी तरीके से मैं सुहानी से बात करूं। हालांकि यह सब इतना आसान होने वाला नहीं था लेकिन फिर भी मैंने सुहानी से बात की और कुछ समय बाद हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई सुहानी को भी मेरा साथ अच्छा लगने लगा। मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि सुहानी मुझे प्रपोज करेगी मैंने कभी भी इस बारे में नहीं सोचा था लेकिन सुहानी ने हीं मुझे प्रपोज किया और कहा कि रमन क्या तुम मेरे साथ शादी करोगे। भला मैं सुहानी के साथ क्यों शादी नहीं करता क्योंकि सुहानी को तो मैं पहले से ही चाहता था फिर मैंने अपने पापा मम्मी से बात की वह लोग सुहानी से मिलना चाहते थे। मेरे पापा मम्मी चंडीगढ़ में ही रहते हैं और अभी भी वह लोग चंडीगढ़ में ही रहते हैं कभी कबार वह लोग मुंबई आ जाते हैं जब सुहानी को मैंने अपने मम्मी पापा से मिलवाया तो वह लोग सुहानी से मिलकर बहुत खुश थे। उन्होंने सुहानी के परिवार से बात की तो उन्हें भी इस रिश्ते से कोई आपत्ति नहीं थी हालांकि उस वक्त मैंने अपनी कंपनी शुरू ही की थी और शायद मैं इतना सफल भी नहीं था जितना आज हूं लेकिन सुहानी के पापा को मुझ पर पूरा भरोसा था उन्होंने मुझे कहा कि अगर सुहानी और तुम एक दूसरे से प्यार करते हो तो मुझे भला इस रिश्ते से क्या आपत्ति होगी। उन्होंने इस रिश्ते के लिए हामी भर दी और हम दोनों ने शादी कर ली हम दोनों की शादी धूमधाम से हुई और शादी हो जाने के बाद सुहानी ने हमेशा ही मेरा साथ दिया है। एक दिन मुझे अपने बिजनेस टूर के सिलसिले में अहमदाबाद जाना था तो मैंने फ्लाइट की टिकट ट्रैवल एजेंट से कहकर बुक करवा दी थी अब मेरे फ्लाइट की टिकट बुक हो चुकी थी और मैं कुछ दिनों बाद अहमदाबाद जाने वाला था। मैंने यह बात सुहानी को बता दी थी तो सुहानी ने मुझे कहा कि रमन मैं घर पर अकेले बोर हो जाऊंगी तो मैं सोच रही हूं मम्मी पापा को भी यहीं बुला लेती हूं। मैंने सुहानी से कहा हां तो मम्मी पापा को भी यहीं बुला लो क्योंकि बच्चे तो स्कूल चले जाया करते थे और सुहानी घर पर अकेली बोर हो जाती थी।

सुहानी ने अपने पापा और मम्मी को घर पर बुला लिया था और मैं भी कुछ दिनों बाद अहमदाबाद जाने वाला था जब मैं अहमदाबाद गया तो वहां से मैं होटल में चला गया। होटल में जब मैं पहुंचा तो वहां पर उस दिन इत्तफाक से मेरे पुराने दोस्त से मेरी मुलाकात हो गई वह भी उसी होटल में रुका हुआ था। हालांकि वह अब अमेरिका में रहता है लेकिन उस दिन उससे मेरी मुलाकात हुई तो मैं उससे मिलकर काफी खुश हुआ उसका नाम विवेक है। विवेक से मैं करीब आठ नौ वर्षों बाद ही मिल रहा था लेकिन विवेक से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। विवेक ने उस दिन मुझे कहा कि आज रात का डिनर हम लोग साथ ही करेंगे तो मैंने विवेक को कहा की ठीक है हम लोग आज रात का डिनर साथ ही करेंगे। उस दिन रात को हम लोगों ने साथ में ही डिनर किया विवेक अपने परिवार के साथ अहमदाबाद आया हुआ था वह अपने किसी जरूरी काम से अहमदाबाद आया था वह अपने परिवार को भी अहमदाबाद घुमाना चाहता था। रात के वक्त हम लोगों ने साथ में ही डिनर किया और विवेक के साथ उस दिन बात कर के मुझे अच्छा लगा इतने सालों बाद भी वह बिल्कुल बदला नहीं था वह वैसा ही था जैसे कि कॉलेज के समय में था उसके अंदर बिल्कुल भी कोई बदलाव नहीं आया था।

मेरी मुलाकात रवीना से हुई रवीना भी उसी होटल में रुकी हुई थी जिसमें मैं रुका हुआ था। मै रात के वक्त रवीना के रूम में चला दिया रवीना और मैं एक साथ बैठे हुए थे जब हम लोग साथ में बैठे हुए थे तो मैंने रवीना के हाथों को पकड़ लिया और मैंने रवीना के हाथों को पकड़ा तो रवीना मुझे कहने लगी आप बहुत ही ज्यादा हैंडसम है। मैंने रवीना को कहा तुम भी बहुत ही ज्यादा सुंदर हो उसके बाद तो जैसे हम दोनों एक दूसरे के आगोश में आने के लिए तड़प रहे थे। हम दोनों एक दूसरे की बाहों मे थे हम दोनो बिस्तर पर लेटे हुए थे और सेक्स को लेकर हम दोनों की आपस में रजामंदी बन चुकी थी। मै रवीना के साथ सेक्स करने को तैयार था रवीना ने मुझे अपने बारे में बताया था वह अपने पति के साथ रिलेशन में बिल्कुल भी खुश नहीं थी उसका झगडा अक्सर अपने पति से होता रहता था लेकिन मेरे लिए तो यह अच्छा मौका था मै रवीना की चूत मार कर अपनी गर्मी को बाहर निकलना चाहता था। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो रवीना ने उसे अपने मुंह में ले लिया जब उसने अपने मुंह के अंदर मेरे मोटे लंड को लिया तो उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह बड़े अच्छे से मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी जिससे की मेरे अंदर की गर्मी भी पूरी तरीके से बढ़ रही थी और उसने मेरे लंड से पानी भी बाहर निकाल कर रख दिया था। मैंने रवीना से कहा मुझे लगता है मुझे तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डालना पड़ेगा। मैंने रवीना की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाने की पूरी तैयारी कर ली थी मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश की और उसके बाद मैंने रवीना की चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही उसकी योनि में मेरा लंड घुसा तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है।

मैंने रवीना से कहा मुझे भी बहुत मजा आ रहा है। रवीना और मैं एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे से संभोग का मजा ले रहे थे मैंने रवीना से कहा जिस प्रकार से तुम मेरा साथ दे रही हो उस से मेरी गर्मी जल्द ही बुझ जाएगी। रवीना की चूत की दीवार के अंदर तक मेरा लंड जाते ही उसकी चूत से आवाज निकलती तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस होता। मुझे ऐसा लगता कि मैं बस उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता रहूं मुझे उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करने में बहुत मजा आ रहा था। वह बहुत ही ज्यादा खुश थी वह मुझे कहने लगी तुम्हारे साथ बहुत अच्छा लग रहा है हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे के साथ सेक्स किया फिर मै उसकी चूत की गर्मी को नहीं झेल पाया थोड़े ही देर बाद मैंने अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर ही गिरा दिया, मेरा वीर्य उसकी चूत के अंदर ही गिर चुका था।

मैंने जब उसकी चूत के अंदर दोबारा से अपने लंड को डाला तो वह जोर से चिल्लाई मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया था। मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है जिस प्रकार से तुम्हारी योनि के अंदर मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा है वह बहुत ज्यादा अच्छा है। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी ऐसा काफी देर तक हम लोगो ने किया, जब उसकी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी तो उसने मुझे कहा मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकलने लगी है मैं भी समझ चुका था कि उसकी चूत से काफी ज्यादा गर्म पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा है जिससे कि मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा वह झड चुकी थी। जब मैंने अपने माल को रवीना की योनि के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई। उसने कपड़े से अपनी योनि को साफ किया हम दोनों ने उस रात सेक्स का मजा लिया। वह इस बात से खुश थी और मैं भी काफी खुश था मैं अपना काम खत्म होने के बाद वापस लौट गया। रवीना से मेरी फोन पर अभी भी बातें होती रहती हैं।

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