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मेरी कामुक बीवी बनी प्राइवेट रण्डी-3

xxx stories मैंने उसे दरवाज़ा बंद करनेका परमिसन देदिया और उसने दरवाजेकी कुण्डी लगादी. फिर बोलाकी अपना कपडा हटाकर उस चेयर पर बैठ जाईये. उसने एक चेयरके तरफ इशारा किया जो बिलकुल लेडीज डॉक्टर के क्लिनिकके चेयर जैसा था. शरमाते हुवे मैंने अपनी साड़ी उठाकर पैंटी उतारदी और साड़ीको कमरके उपर सरकाकर चेयर पर बैठने लगीतो उसने कहाकि साड़ी उतारकर बैठेंतो बेहतर रहेगा. मै जो क्रीम लगाऊंगा उसका दाग साड़ीको ख़राब कर सकता है. मै हिचकिचाते हुवे साड़ी उतरने लगी और साड़ी उतार कर मै चेयरपे बैठ गई. उसने चेयरको थोडा पिछेके तरफ फोल्डकरके चेयरके बगलसे पैर रखनेका स्टैंड आगे घुमाया और मेरे दोनो पैरोंको उठाकर उसपे रख दिया. मै उस अनजान मर्दके सामने अपनी चुत पसारकर बैठी थी. उसने अपने बैगसे सफाईका सामान निकालकर एल स्टूल पर मिलाकर रख दिया. फिर उसने मेरे चुतपे पानी स्प्रे करके मेरे चुतको रगड़ रगड़कर टोवेलसे पोंछा. फिरसे पानी स्प्रे किया और एक बोतल उठाकर उसमेसे कोई लोशन मेरे चुतके उपर जहां जहां बाल थे वहां स्प्रे किया और अपने हाथसे मिलाने लगा. अपने चुतके आसपासके हिस्सों पर उसके हथोंके स्पर्शसे मेरे पुरे शरीरमे सिहरनसी होने लगी थी. वह अपना हाथ काफी देर तक मेरे बुरके उपर तबतक रगड़ता रहा जबतक बाल मुलायम होकर अपने आप निकलने नलगे. फिर टिश्यू पपेरसे पोंछ पोंछ कर उसे साफ किया और गौरसे बदेखनेके बाद बोलाकी एक बार और लगाना पड़ेगा. मै घबरा कर पुछि क्या? तो उसने कहा घबडायिए नही मै लोशनके बारेमे कह रहा हूँ. फिर उसने मेरे चुतपे पानी और लोशन स्प्रे करके अपने हाथोंसे रगड़ने लगा. जब उसे लगाकि सभी बाल निकल गए होंगे तो फिरसे टिश्यू पपेरसे उसे पोंछ कर साफ किया और गौरसे देखनेके बाद बोलाकि एक आध हि बंचे हैं, ठहरिये मै इन्हें भी साफ किये देता हूँ. उसने धागा निकाला और उसका एक किनारा अपने मुंहमे दबाकर मेरे चुतपे झुक गया और थ्रेडिंग करके बंचे हुवे बालोंको निकालने लगा. उसका मुंह बिलकुल मेरे बुरके करीब आगया था और उसके साँसका स्पर्श मुझे अपने चुतपे हो रहा था. सारे बालोंको निकालनेके बाद वह मेरे चुतपे अपना हाथ फेरने लगा. उसकी हरकतोंसे मेरे चुतमे पानी भर गया था और अब वह रिसरिसकर बाहर निकलने लगा था. वह हाथ फेरते हुवे मेरे चुतका मुआयना कर रहा था. उसने मेरे बुरके फांकोंको फैलाकर देखते हुवे कहाकि अन्दरके तरफ दो चार बाल रह गये हैं, इन्हें भी निकल दूँ या रहने दूँ. मैंने लडखडाते आवाजमे कहाकि निकालही दो. फिर उसने मेरे बुरके फांकोंको फैलाते हुवे अपने चुटकीमे पकड़ पकड़कर उन्हे निकालनेका नाकाम कोशिश करने लगा क्योंकि वो बारबार फिसलकर छुट जाते थे. वह परेसान होकर बोला मैडम आपकि ये काफी गीली होगयी है इसलिए बाल बारबार फिसल जारहें हैं. मैंने पुछा क्या गीली होगयी है. वह झिझकते हुवे बोला आपकि बुर और उसने बुरके फांकोंको फैलाये हुवे एक उंगली गचसे मेरे बुरमे ठेल दिया. बुरतो गिलि थि ही सो उसका उंगली गचसे अन्दर चला गया. मेरा भी इमान डोल गया और मैंने कह दिया इसे रोकनेका कोई उपाय होतो रोक दो. उसने कहा मैडमजी जब बांध फुट जाएतो उसे फिरसे बांधनेके लिए पुरे पानीको निकल जाने देना चाहिए. ठीक है तो निकाल दो ना.
उसके बाद बस हरी झण्डी मिलते हि वो मेरे बुरमे दनादन अपना उंगली अन्दर बाहर करते हुवे उन्गलिसेही मेरी बुर चोदने लगा. मैभी पुरे तावमे आगयी थी सो लपक कर पैंटके उपरसे उसका लंड पकड़ कर बोली, ‘इससे निकालोगे तो पुरा निकल जाएगा.’ उसका लंड पहलेही खड़ा हो चुका था. उसने जिपर खोलके लंड बाहर निकाला और मेरे बुरके छेदपर सटाकर ठेलातो एकही बारमे सटसे पुरा बुरके अन्दर समा गया. उसका लंड तुम्हारे लंडसे काफी मोटा और लम्बा था. थोडा दर्द हुवा लेकिन मै इतनि गीली होगयी थीकि उसका मोटा लंड आरामसे मेरे बुरको फैलाते हुवे अन्दर बाहर हो रहा था. उसने मेरा ब्लाउज खोलकर ब्रा उपर सरकाके मेरे चुंचियोंको बाहर निकाल लिया और अपने मुहमे लेकर उन्हें पारी पारिसे चुसते हुवे हचाहच मेरे बुरको चोदने लगा. उसका लंड सटासट मेरे बुरमे आने जाने लगा. उसका लंड गचगच मेरे बुरको चोद रहा था. मै मारे मस्तिके आह आह, उंह उंह करके सीत्कारने लाही थी. करीब पांच मिनटके ताबड़तोड़ चोदाईके बाद मेरी बुरने पानी छोड़ दिया. तभी वह बोला मैडम मेरा पानिभी छुटने वाला है बोलो बुर मेहि छोड़ दूँ. मै चिल्लाई, ‘अरे भोसड़ीके बाहर निकाल अन्दर मत छोड़ना. उसने लंड जैसेही बाहर निकला, उसने मेरे बुरके उपर पिचकारी छोड़दि. अगर एक सेकेण्डभि डिले करतातो उसका पानी बुरमेहि निकल जाता. उसका पानी मेरे बुर और पेंडु पर फैल गया.

उसने टिश्यू पपेरसे पहले अपना लंड पोंछा, उसे पैंटमे डालकर जिपर लगाया, ऊसके बाद मेरे बुर और पेंडु पर फैला पानी पोंछकर साफ किया. मेरे बुरपे क्रीम लगाया और उसे चुमते हुवे कहा आप बहुत सुन्दर हो, आपकि बुरभी बड़ी अच्छी है. अब कपडा पहन लीजिये.
‘अरे और बाकि बालोंकी सफायी’, मैंने उसे घूरते हुवे पुछा. उसने कहा, ‘अब कोई बाकि बालवाल नही है. वोतो मै आपको चोदनेके चक्करमे वैसेही बोल दिया था. आप मेरा नम्बर लेलो. जबभी आपको अपनी सफाई करानी हो या मेरे लंडसे चुद्वानेका मनहो कॉल कर लेना. मुझे किसी और जगह बुला लेना. यहां आनेकि जरुरत नही है. ये लोग मेरे आधे पैसे रख लेते हैं. मै गरीब आदमी हूँ. चिन्ता नकरें आप बाहर बुलाकर जित्नाभी दोगी मै रख लूँगा.
उसकी बात ख़त्म होनेके बाद मैंने कहा हरामजादी तुतो रण्डी बन गई. इसका मजा मै तुझे बादमे दूंगा. पर चल अभी अपना बुर दिखा. मैंने उसे बिस्तर पर पटक कर उसकी साड़ी उलट दिया, देखा उसकी बुर लाल होगयी है पर सुन्दर दिख रही थी. मै उसकी बातें सुनकर गर्म होगया था. मेरा लंड तैयार था सो फटाफट उसे चोदने लगा.
चोदाई ख़त्म होनेके बाद उसने कहा मेरा प्लान कैसा लगा तुमने नही बताया. मैंने कहा ठीक है, ट्राई करके देखो.

मै और मेरी बीवी रेणु मेरी बीवी कि बहन यानि मेरी साली मेनुके देवर मनोजको अपना चोदाई पार्टनर बनानेका प्लान बना चुके थे. वह आज आने वाला था. उसे रिझानेके चक्करमे मेरी बीवी अपनी झांटोंकि सफाईके चक्करमे कल एक बिउटी पार्लरमें साला अनजान हज्जामसे कैसे चुदकर आई थी, आप पढ़ चुके हैं. अब मै कहानीको आगे बढाता हूँ.
मै खुद उसे पर पुरुषसे चुद्वाते देखना चाहता था और इसी कारन मैनेही उसे मनोज्से कद्वानेको उकसाया था लेकिन कलके बिउटी पार्लर वाला किस्सा सुनकर मै रात भर याहि सोंचता रहा कि साली पुरी रण्डी बन गई. पता नही आगे क्या गुल खिलाएगी. उसे मेरे अलावा सिर्फ मनोजसे चुदवाना था परन्तु जिस एक अपरिचित ब्यक्तिके सामने बिना सोंचे समझे बेहिचक अपनी चुत पसारनेसे पहले क्या नही सोंचीकि वह उसे वैसेही बिना चोदे छोड़ देगा. क्या ऐसातो नही है कि वह इस काममे पहलेसे हि अभ्यस्त है. वह पहले भि और कई लोगोंसे चुदवा चुकी है? नही नही ऐसातो नही होना चाहिए. लेकिन चाहे जोभि हो यह बाततो अब मानना हि पड़ेगाकि कमसेकम मेरे अलावा एक लंड वह अपने बुरमे पेलवा चुकी है और एक और लंडसे चुदवानेको ब्याकुल है. कहते हैं हर लंड़का अलग स्वाद होता है और हर ब्यक्तिके चोदनेका तरीका भी अलग अलग होता है. अब अगर सालीको नए नए लंडोंसे चुदवानेका चस्का लग गया तो फिर क्या होगा. कहिं आगे चलकर वह रण्डी नाबन जाए. मेरे समझमे तो कुछभि नही आ रहा है इसलिए आप पाठकोंसे गुजारिस हैकि अपना सुझाव जरुर देंकि इसे रोकनेके लिये मुझे क्या कैसे करना चाहए या उसे ऐसेही आजाद छोड़ दें. इस बातको बादमे आपका सुझाव आनेके बाद देखा जाएगा. फ़िलहाल मै कहानीको आगे बढाता हूँ.
मनोज आज ८ बजे आने वाला था. जैसाकि आप जानते हैं, वह मेरी साली मेनुका देवर है और वह अपने भाभिको चोद चुका है. वह २३ सालका, सांवलासा जवान है. मेरी बीवी उससे चुद्वानेके सपने बहुत दिनोसे देख रही थी. आज वह आने वाला था. मेरी बीवी उससे चुदवानेका पुरा प्लान बना लि थी. वह मनोजको रिसीव करने स्टेशन जानेवाली थी. वह ऊसके लिये सुबह्सेही सजने सवरने लगी थी. करीब साढ़े सात बजे जब वह तैयार होकर मेरे सामने आयी तो मै उसे देखताही रह गया. वह वैसे भी बहुत खुबसूरत थी लेकिन आज तो गजब कि लग रही थी. उसका मेकअपने जहां उसके खुबशुरतीको बढा दिया था वहीँ उसकी ड्रेसने उसे बहुत सेक्सी बना दिया था. वह एक काले रंगकी बहुतही वारिक साड़ी और उसी रंगकी झिनिसी ब्लाउज पहन रखी थी. उसके गोरे बदनपे काला ड्रेस किसिपेभी कहर ढानेके लिए काफी है. उसने साड़ी काफी निचे बांध रखे थे और उसका ब्लाउज बहुतही छोटा था. ब्लाउजका गला आगेसे बहुत चौड़ा था और पिछेसे तो बस नाम भरकाहि कपडा था. ब्लाउजका कपडा इतना महीन और पतला था कि वह बिलकुल नंगिसी दिख रही थी. ब्लाउज मे से उसका सेक्सी ब्रा साफ साफ दिख रहा था. ऐसे कपडेका ब्लाउज लोग अक्सर अन्दर अस्तर डाल कर सिलवाते है लिकिन इसने बिना अस्तारके सिलवाया था. उसकी ब्रा इतनि टाइट थी कि उससे दबकर उसके चुंचियोंका अच्छा खासा हिस्सा ब्लाउजके गलेसे बाहर झांक रहा था. ब्लाउज मेसे छलकता हुवा क्लीवेज उसके सेक्स अपीलको और बढ़ा रहा था. वह साड़ीमे लिपटी हुईतो थी लेकिन पल्लुसे ढके होनेके बावजुद उसका पेट, पेंडुका उपरी हिस्सा और नाभि साफ साफ दिख रहे थे. उसकी मुलायम पेट, फूली हुई पेंडुके बिच गहरी नाभि बहुत सेक्सी लग रहा था. उसे देखके मन हुवाकी भोंसड़ी रण्डीको अभी पछाड़कर इसी वक़्त पहले उसके ढ़ोंडिमे और फिर उसके बुरमे अपना लंड पेलके चोद डालूं. मेरा लंड पुरी तरहसे अकड़कर खड़ा हो गया था.

उसने हथेली और बाजुके साथ हि पांव पर भी मेहंदी रचाया हुवा था. कलाईमे काफी खुबशुरत चूड़ियाँ, नाखुन पे गहरे रंगका नेल पालिस बहुतही लुभावने लग रहे थे. उसने चेहरेपे भी काफी निराले ढंगसे मेकअप किया हुवा था. गालोंकि चमक क्रीमने और होंठोंकि आकर्षण गहरे लिप्सटिकने बढ़ा दिया था. आंखोमे काज़ल, माथे पे बिंदी और मांगमे सिंदुर बस गजब ढारहे थे. कानोंके झुमके, गलेका चैन और चुन्चियों पे झूलता नेकलेस बड़े लुभावने लग रहे थे. इस भेसमे बलखाती चालसे कमर मटकाते हुवे जब वह मेरे सामनेसे गुजरी तो मै मुह बाये देखता रह गया. मै सोंच भी नही सकाकी यह मेरी वही बीवी है जिसे पिछले ८ बर्षसे हररोज देख रहा हूँ.
चलते वक़्त उसके पयालसे निकलती छनछनकि आवाज़ मुझे उसके तरफ ऐसे खिंचाकी मै अपने आपको रोक नही पाया और पिछेसे उसे अपनी बहोमे जकडके उसकी चुंचियोंको पकड़ते हुवे उसके नंगे पिठको चुम लिया. वो घुमकर सामनेसे मेरे आगोसमे समाते हुवे बोलि अरे क्या हुवा जनाबको. मै उसके गाल और होंठोंका चुंबन लेते हुवे बतायाकि ईस रुपमे तुम इतनि सेक्सी लग रही हो कि तुम्हे देखकर साला मनोजतो हलाल हि हो जाएगा लेकिन लगता है तुम उस तक पहुंच हिं नपाओगि. उस्ने बोला क्यों, ऐसी बात क्यों बोल रहेहो. उसके चुंचियोंको दबाते हुवे मैंने बताया कि लगता है कोई मनचला लड़का रास्तेसेही तुम्हे किडनैप करके तुम्हारा रेप कर देगा.
उसने जोरसे मुझे हग करते हुवे कहा, छोड़ो इन फिजुलकी बातोंको और अब मुझे जाने भी दो वर्ना मै लेट होजाउंगी.
मै, ‘साली अपने बुरमे मनोजका लंड पेलवानेके लिए तु इतनि बेताब हो तो ठीक है जावो.’
रेणु, ‘और हां तुम भी चलोना स्टेशन से कुछ दुर पहले उतर जाना. मै स्कुटी स्टेशनके स्टैंड मे हि छोड़ कर उसके साथ ऑटोमे आजाउंगी और तुम्हे फ़ोन करके बता दूंगीकि लौटते हुवे स्कुटी लेते आना. तुम स्कूटिकी एक चाभी अपने पास रख लो.’
मै उसकी बात मानते हुवे उसके साथ चल दिया. स्कुटी मै ड्राइव करने लगा और वह पीछे मुझसे चिपककर बैठी गयी. इस तरह हम अक्सर चला करते हैं लेकिन आज अपने पीठ पर टच करता उसकी चुंचियोंका अहसास मुझे बहुत रोमांचित कर रहा था. रस्तेमे मैंने मनही मन उनके हरकतोंको छुपकर देखनेका प्लान बना लिया. रस्तेमे मै जानबूझकर कुछ ज्यादाही ब्रेक लगा रहा था ताकि उसकि चुंचियोंका स्पर्श बार बार होता रहे. शायद मेरी नियत वह भांप गई थी और मेरे ब्रेक लगाते वक़्त कुछ अधिकहि मेरे पीठ पर चुंचियां दबा देती थी.
ऐसेही चलते चलते स्टेशनका एरिया आगया तो मैं स्कुटी रोक कर उतर गया और वह स्कुटी लेकर मुझे आँख मरते हुवे चल दी. उसके जानेके बाद अपने प्लानके अनुसार मै उसके पिछे स्टेशनके तरफ़ चल दिया. देखाकि स्कुटी स्टैंड मे खडी थी. मेरी आँखें उसे तलासने लगी. कुछहि देरमे वह दिख गई. मै उसकी नजरोंसे बचते हुवे उसके करीब पहुंच गया और उसपे स्पाई करने लगा.
स्टेशन पर बहुत सारी खुबशुरत लड़कियां इधर उधर हर तरफ खडी थीं और कुछ इधर उधर आ जा रही थी. मर्द, जैसाकि आम तौरपे होता है, उन्हें देखनेमे ब्यस्त थे. मैंने नोटिस कियाकि बहुत सारे लोग उसे बार बार निहार रहे थे, जिनमेसे ज्यादातर लोग अधेड़ उम्रके थे और कुछ बुढ्ढे और टीनेजर भी उसके जल्वेका लुत्फ़ उठा रहे थे. थोड़ी देर लगातार देखते रहने पर मैने नोटिस किया कि एक बुढ्ढेका और एक १८-१९ सालके लड़केका नजर उसपर लगातार टिका हुवा था. मेरे बीवीने भी सायद यह देख लिया था कि वो ७० के आसपासका बुढा लगातार उसे बड़े हसरत भरी निगाहोंसे देख रहा है. मैंने देखाकि वो बुढा एक बार अपने पैन्टके उपरसे अपने हाथको लंड पर दबया फिर पॉकेटमे हाथ डालकर उसे निहारता रहा. उसका हाथ पॉकेटमे हिल रहा था. शायद वह अन्दरही अन्दर अपना लंड रगड़ने लगा था. तभी रेणुके हाथसे कुछ गिर गया जिसे उठानेके लिए वह झुकितो बुढा आंखे फाड़कर उसे देखते हुवे अपना जिभ चबाने लगा. रेणु खड़ी हो गई. मै रेणुके पीछे खड़ा था इसलिए देख तो नही पायाकि झुकने पर बुढेको क्या दिखा पर चुंके बुढा मेरे सामने था उसके एक्टिविटीसे मै अंदाज़ लगा चुका था कि उसने रेणुके चुंचियोंका बहुतही ढंगसे दर्शन कर लिया है और इतना उसके मुठ मारनेके लिए बहुत है.

तभी मनोज जिस गाडीसे आरहा था उसका प्लेटफार्म संख्या ३ पर थोड़ी देरमे पहुँचनेका अनाउंसमेंट हुवा और रेणु प्लेटफार्मके तरफ चल दिये. बुढेके खड़े लंड पर पानी फिर गया. उधर गेटके पास भीडभाडका फायदा उठाते विपरीत दिसासे आते एक लडकेने जन बुझ कर रेणुके बगलसे गुजरते वक़्त अपना कुहनि उसके चुंचीपे ठोक दिया.
रेणु अन्दर चली गई मै ऑटो स्टैंडके पीछे सुरकछित स्थान पर पहुंच गया ताकि छुपकर उनपे नजर रख सकूँ. गाडीके पहुँचनेका अनाउंसमेंट होने लगा. मै उनके आनेका इन्तेजार बेसब्रिसे करने लगा.
अब मै आप लोगोंको जो बताने जा रहा हूँ उसमेसे कुछ मेरे प्रत्यक्ष देखे हुवे और कुछ रेणुके बादमे बतानेके आधार पर तरतीब मिलाते हुवे बता रहा हूँ.
गाड़ी प्लेटफार्म कर आकर रुकी. रेणु उस कोचके पास पहुची जिसमे मनोज सफ़र कर रहा था. गाड़ी आगे जाने वाली थी यहां सिर्फ तिन मिनटका स्टापेज था. उतरनेवालोंसे चढ़ने वालोंका संख्या ज्यादा था. रेणु भिडमे घुस गई ५-६ लड़के उसके इर्दगिर्द खड़े थे. वे रेणुको चारो ओरसे घेरसा लिए और भिडका फायदा उठाते हुवे एक उसके पिछे चिपककर अपना लंड उसके गांड पर सटा दिया. एक दूसरा उसकी चुचि दबाने लगा. इन सबका परवाह किये बगैर वह मनोजको ढूढ़ रही थी. वे लड़के उसे हिलने भी नही दे रहे थे और खड़े खड़े मज़ा लुट रहे थे. रेणु एक दरवाजे पे उन मनचलोंके बिच फंसी थी और मनोज दुसरे दरवाजेसे उतरकर उसे ढूंढ रहा था. भीड़ कम हुई तो वे लड़के उससे अलग हुवे तभी उसकी नज़र मनोज पर पड़ा. वह उसे पुकारते हुवे उसके पास पहुंची. मनोज झुककर उसका पैर छुनेको हुआ तो उसे रोकते हुवे रेणुने उसके बांहोंको पड़कर उठाया. मनोज उसे गौरसे देखने लगा. रेणु बड़े प्यारसे बोली, ‘कोई फॉर्मेलिटी नही, चलो.’
उसका तिन लगेज था वह कभी रेणुको तो कभी सामानोंको देख रहा था. रेणु बोली चलो एक मै लेलेती हूँ बाकि तुम मैनेज करलो. रेणु झुकझुक कर बारी बारीसे तीनो सामानोंको उठा उठाकर उनके वाजनका अंदाजा करने लगी. वो इस काममे आवश्यकतासे कुछ अधिक समय लगा रही थी. झुकनेसे ब्लाउजके अन्दर चुंचियोंका अधिकांस हिस्सा दिख रहा था. मनोज बड़े गौरसे उसके ब्लाउजके अन्दरका नजारा देख रहा था. तीनो सामानोंका अन्दाजा लगानेके बाद वह बोली समझ मे नही आरहा है कि मै कौनसा उठाऊँ. मनोजने कहा रहने दीजिये किसी कुलीको देखते हैं. अरे नही हम लेजा सकते हैं. फिर मनोज मजाककि मुडमे बोला देख लीजिये बादमे नही बोलियेगा कि इसने मुझे कुली बना दिया.
रेणु फिरसे झुक कर सामानोंके वजनका अंदाज़ा करने लगी और उसके ब्लाउजके अन्दर मनोज अपने आखोंका ठंढक ढूढने लगा. आखिर रेणुने अपने लिये एक बैग चूज करही लिया. बोली चलो मै ये लेलेती हूँ. मनोज थोडा हैरानसा लगा. रेणु जानबूझ कर इतना जांच परखके बाद भी सबसे वजनदार सामान क्यों चूज कि है. उसने बाकि सामान उठाया और गेटके तरफ चल दिया. रेणु उसके पीछे चल रही थी. कुछ दुर जानेके बाद बोली मनोज रुको थोडा धीरे चलो. मनोज पलटके देखातो रेणु सामान निचे रखके खड़ी थी. झुककर सामान उठाते हुवे एक बार फिर उसे चुंचियोंका दीदार करा दिया. बिचमे एक बार फिर उसे रोककर सामान निचे रखा और थोडा ठहरकर उठाके चलने लगी. मनोज सोंच रहा था कितनी लापरवाह है ये. ऐसा कपडा पहने है और बार बार झुक कर लोगोंको अपनी माल दिखा रही है. चलो मेरेको क्या अच्छा नजारा मिल रहा है.
फिर बाहर आनेके बाद बोली मै उन्हें फोन कर देती हूँ लौटते वक़्त स्कुटी लेते आनेको. इतने समानके साथ हम स्कुटीसे तो जा नही सकते. वो फोन करने लगी. मुझे बतानेके बाद एक ऑटो बुलाया. उसमे सामान रखा. मनोजने सामान बिच मे रख दिया था सो मनोजको बोली रुक जाओ सामान मिलाके रख देनेदो ताकी आरामसे बैठ सकें. उसने किनारेके तरफ एक दुसरेके उपर निचे और सीटपे मिलाकर तीनो सामान रखा. इस चक्करमे उसे इतने देर तक झुकना पड़ाकि मनोजको एक और मौका मिल गया उसकी चुचियोको देखनेका. मै छुप कर देख रहा था सिर्फ मनोजहि नही बल्कि ऑटो ड्राईवरभी उसके ब्लाउजमे झांक रहा था. समानोंके तरफ सटके बैठते हुवे अपने बगलमे मनोजको बिठाया और ऑटो वालेसे कहा चलो. ऑटोमे सामानके चलते जगह इतना काम थाकि दोनो एक दम सटकर बैठे थे. दोनोका शारीर एक दुसरेसे एक दम सटा हुवा था. रेणुने मनोजको थोडा आगे खिसक कर बैठनेको कहा तो वह थोडा खिसक गया. रेणुको जगह मिला तो पिछे खिसकते हुवे वह मनोजके और करीब आगयी. मौकाका फायदा उठाकर रेणुने मनोजके तरफ वाला अपना हाथ सीटके पीछेके सपोर्ट पर रख दिया. अब कभी कभी मनोजका कुहनि रेणुके चुचिसे टकराने लगा था लेकिन नातो मनोज अपना कुहनि हटा रहा था ना रेणु अपनी चुंची. रेणुतो जानबुझकर मजे लेने और मनोजको उत्तेजित करके फांसनेके लिए ऐसा कर रही थी लेकिन शायद मनोजभी मजे ले रहा था.
आगे रास्ता कुछ टुटाफुटा था इस वजहसे ऑटो हिचकोले खाते चल रहाथा और इसके साथहि मनोजके कुहनि पर रेणुकी चुंची बार बार टकरा रही थी. रेणु जानबूझकर अपने चुंचिका दबाव बढ़ा देती थी. मानोजतो जैसे स्वर्गका सफ़र कर रहा था. उसका लंड खड़ा हो चुका था. वह मनही मन सोंच रहा थाकि साली ये भी अपनी बहनके जैसेही चोदक्कड लग रही है. वह इसे चोदनेका इरादा कर बैठा. ईसी तरह उनका आनंदमय सफ़र पुरा हुवा और वे घर पहुंच गए.
घर पहुंचकर रेणुने मुझे कॉल किया और कहा. ‘मनोज घर पहुंच गया है, तुम भी जलदीसे आजावो और हां स्कूटी लेते आना.
मैंने जानबूझ कर उन्हें थोडा मौका देनेके लिए और छुप कर उनका खेल देखनेके नियत्से कहा, ‘तुम उसको चाय नास्ता कराओ और आराम करने दो, मेरी तरफसे माफ़ी मागते हुवे उसे समझा दो की मुझे घर पहुचने मे अभी कामसे कम ३-४ घंटा लग जाएगा.’

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