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मेरी कामुक बीवी बनी प्राइवेट रण्डी-1

kamuk ladki हेल्लो दोस्तों मेरा नाम प्रमोद और उम्र ३८ बर्ष है. मेरी बीवी की उम्र ३५ और नाम रेणु है. वो काफ़ी खूबसूरत और सेक्सि औरत है. वो अक्सर सारी ब्लाउज पहनती है, जिसमे वह बहुतही सेक्सी दिखती है. हमारे सादीको ८ बर्ष हो चुके थे और हम पिछले ८ बार्षोसे मस्त चुदाईका मज़ा लूट रहे हैं लेकिन अभी तक कोई बच्चा नही हुवा था.
वह साडी हमेशा अपने नाभिके नीचे बांधती है जिससे उसकी पेंडूका कुछ हिस्सा हमेशा दिखता रहता है जो किसी भी मर्द को आकर्षित करने के लिए काफ़ी है. बड़े गले के ब्लाउजसे झाँकती उसकी बड़े बड़े परन्तु टाइट चूंचियाँ किसिभि मर्दको पागल बना देनेके लिए काफ़ी हैं. एक तो सेक्सी सुडौल गदराई बदन और उपरसे उसका बनाव श्रीन्गर किसिको भी मोहित करलेने केलिए काफ़ी हैं. वह जब कभी घरसे निकलती है पुरे बन ठन कर ही निकलती है. हाथ और पाँव के नाख़ून नेल पालिस से रंगे हुवे, कलाईयों मे आकर्षक चूड़िया, बाँह हथेली और पाँव मे मेहंदी रची हुई, गलेमे सोनेक चैन से लटकता हुआ नेक्लेस जो चूंचियों पर ठोकर मार मार कर राह चलते मर्दोंको इन्हे देखने, छूने, मसलने, चुमने और चाटनेका खुला निमंत्रण देते हुवे प्रतीत होते हैं. होंठो पर रची गहरी लिपस्टिक, माथे की बिंदी और माँग मे भरी सिंदूर उसके सेक्स अपील को और बढ़ा देते हैं. जब चलती है तो उसके गांड बड़े मादक अंदाज़ मे मटकते रहते हैं और उसकी चूंचिया ऐसे फुदकटी रहती हैं की किसि भी रह चलते मुशाफिरका लंड खड़ा हो जाए. वो देखनेमे जितनी सेक्सी है चुदनेमे भी उतनी ही कामुक है. चुदवाते वक्त वो बड़ी सेक्सी आवाज़ निकलती और गाँड उछाल उछाल कर चुदवती है.
चोदाई करते हुवे हम अक्सर सेक्सी बातें करते रहते हैं. पहले उसे चोद्ते वक़्त मै उसकी बहन मेनू के बारेमे बोलता रहता था, कहता की उसकी चूंचिया क्या मस्त हैं, बुर क्या फूली हुई और टाइट है. सुरुवती वक़्तमे वो चिढ़ती रहती थी और मुझे गंदी गलियाँ बकने लगती थी जिससे मेरा उत्तेजना और बढ़ जाता था और मै उसके बुरमे और कस कासके धक्के मारने लगता था. वो मस्त हो जाती थी और खूब गाँड उच्छाल उच्छाल कर पेलवाने लगती थी. शुरू शुरूमे ऐसी बातें ज़्यादातर मै ही किया करता था और मेरे बातोंका असर सीधा उसके बुर पर पड़ता था और हमे चोदाईका कुछ अलग ही आनंद मिलता था. चोदते वक़्त मै अक्सर उसे गन्दी गालियां बकता रहता था जैसे रण्डी, भोंसड़ी, छिनाल, वगैरा वगैरा. बादमे वो भी धीरे धीरे खुलने लगी थी और हमारे चोदाईके दरमियान अपने बहन मेनुका नाम लेने लगी थी. कहती की सोंचोकी तुम्हारा लंड मेनुकी बुरमे जा रहा है और तुम उसे गाचा गच चोद रहे हो. मै एकदम मस्त हो जाता था और मेनु के बारेमे सोंच सोंचकर अपनी बीवी रेणुके बुरमे हचा हच अपना लंड पेलने लगता था. वो अपने बहनका रोल प्ले करते हुवे कहती की हाए जीजू और कासके पेल … और .. और … और कासके. हाए पूरा लॉडा घुसेड दो … जीजू …. जीजू … और अंदर … और अंदर पेलो. चोद साले … चोद और कस कासके चोद…. इस तरह हम दोनो की मस्ती बढ़ती जातीथी और मै पूरे ताक़त से रेणु की बुरमे हुमच हुमचके पेलने लगता था और उसके बुरसे भी पानी निकालने लगता था जिससे हर धक्के के साथ चुभुर चुभुरकी आवाज़ निकालने लगती थी और बहुत मज़ा आता था.
लेकिन कोई भी फंटासी कितने दीनो तक काम आएगी. धीरे धीरे इन बातोंका असर घटने लगा तो एक दिन मै चोदाई करते वक़्त एक नया फंटासी आजमाया. रेणु के बुरमे अपना लंड डालते हुवे अचानक बोला की हाय भोंसड़ी किससे पेलवा रही है रे. तेरे बुरको हर रोज़ मै इतना जमके चोदता हूँ पर तेरे बुरकी ख़ाज़ नही मिटती है जो अपने भतारको छोड कर अपने यार का लंड पेल्वा रही हो? मेरी इन बातोंका असर उसपे ऐसा पड़ा कि उसकी कमर अचानक जोर जोरसे उछलने लगा और ऊसके बुरमे पानी भर गया. वो एकदमसे मस्त होगयी और मुझे जोरसे भींच कर मेरे होंठोंको चुमते हुवे बड़ी मस्त होकर चुदवाने लगी. मुझे भी काफी मजा आरहा था, इतना मजा जो पहले कभी नहीं मिला था. मै सोंचने लगा कि सायद ये किसी औरका लंड अपने बुरमे डलवाकर मज़ा लुटना चाहती है. मैंने ऊसके मनको टटोलने के लिए पुछा हाय साली यारके नाम हि से इतना मस्त हो रही हो तो अगर संचमुच वो अपना लंड तेरे बुरमे घुसेड़े तो क्या हाल होगा तेरे मस्ती का? इस पर वो बोली अबे भोंसड़ीके अभी जोर जोरसे मेरे बुरको बजा ये बात बादमे कर लेना. हाय पेलो और कास कसके पेलो. आज तेरा लंड छोटा क्यों लग रहा है और जोर से ठोक साले. चोद … हुमच हुमच्के चोद. चोद चोदके फाड़दो मेरा बुर. आह मेरे बुरको भोंस्डा बना दो. हुंको … और … और ….. और ……
मैंने बोला ले साली रंडी ले पूरा लंड अपने चुतमे. और खूब तेजिके साथ अपना पूरा लंड ऊसके बुरमे ताबड तोड़ गचा गच पेलने लगा. मै जिस रफ्तारसे लड़ पेलता वो उसी रफ्तारसे अपनी चुतड उछाल कर मेरे हर धक्कोंका भरपुर जवाब देती जारही थी. ऊसके बुरसे फचर फचर का आवाज़ आरहा था. वो जोर जोरसे चिल्ला चिल्लाकर चोदवा रही थी और मै घचा घच चोद रहा था. इसी तरह करीब दस मिनटके ताबड तोड़ चोदायीके बाद दोनो एक साथ खल्लाश होकर एक दुसरेको भींचे हुवे काफी देर तक पड़े रहे.
जब हमारी हालत सामान्य हुवा तो मैंने पुछा ‘क्या बात है यारके लंड़का नाम सुनते ही तुम्हारी चुत एक दमसे पगला गई थी? कौन है तेरा यार जिससे तुम चुदवाना चाहती हो?’
वो बोली, ‘अभी कोइ है तो नही, लेकिन अगर तुम बुरा नमानो और कोई मोटे लंडवाला मिल जाएतो मज़ा आजाए. वैसे तुम भी तो मेरे बुरमे मेरे यारके लंडके ख्यालसे एकदम मस्त होकर सांढ जैसे चोदने लगे थे. क्या तु चाहता है कि कोई अन्य मेरे बुरमे अपना मोटा लंड पेलकर चोदे.’
मै, ‘तु अगर चाहोतो मुझे कोई ऐतराज़ नही है, हां परंतु या तो तुम मेरे सामने चुद्वावोगी या फिर अपनि चुदायिकी पुरी कहानी खुलकर बयान करोगी और … अपनी बहन मेनु या मेरे मनपसंद अपने किसी मस्त सहेलिको चोदनेका मुझे भी अवसर प्रदान करनेमे मेरा सहयोग करोगी तब.’
रेणु मेरी पत्नी, ‘ठीक है दोनो मिलकर कुछ सोंचते हैं.’
मै, ‘तु बता तेरे खयालोंमे कौन है?’
रेणु, ‘कोई खास तो नही लेकिन मेनुका देवर मनोज कैसा रहेगा? मैंने सुना है कि वो अपने भाभी मेनुको भी चोदता है और उसका लंड काफी बड़ा और मोटा है. इस तरह उसके मदतसे हम दोनोका कम आसन होसकता है, मेरे बुरको मोटा लंड और तेरे लंडको अपने सपनोकी शहजादी मेनुकी चौड़ी चुतका स्वाद मिल जायेगा.’
मै, ‘तुम्हारी बातोंमे दम तो है लेकिन ये होगा कैसे?’
रेणु, ‘यह तुम मुझ पर छोड़ दो. मेनु बोल रही थी मनोज किसी कामसे एक महिनेके लिए इधर आनेवाला है. उसके ठहरनेके ठिकानेके बारेमे वो बात कर रही थी.’
मै, ‘बहुत खुब लगता है तुम्हारा काम जलदि ही बनने वाला है. महीने भर उसके मोटे और लम्बे लंद्से चोदवा चोद्वाकर तेरा बुर भोंस्डा और तु कामुक घरवालिसे चोदाक्कड़ रण्डी बन जाएगी, परन्तु मेरा क्या होगा?’
रेणु, ‘कुछ दिन तुम हमारे साथ ही मौज उडाना. सुरुके दिनोमे छुपकर मुझे रण्डी कि तरह चोदवाते देखनेका अपना हसरत पुरा कर लेना. उससे चोद्वानेके बाद मै तेरे लंड़का गर्मी झाडती रहूंगी, बादमे कुछ ऐसा प्लान बनायेंगेकी एकही बेड पर तीनो एक साथ मज़ा लुटेंगे और किसी बहाने मै मेनुको भी इधरही बुलानेका जोगाड़ सोंचती हूँ फिर चारों मिलकर मौज करेंगे.’
मै, ‘चलो ठीक है.’
रेणु फिरसे गरम होने लगी और मेरे लंडको पकड़ते हुवे बोली, ‘हाय लगता है अब कुछ खास होनेवाला है.’
मै भी धीरे धीरे उत्तेजित होने लगा था. मैंने रेणुकि एक चुंचिको एक हाथसे कसकर मसलते हुवे दुसरे हाथका उंगली गच्से उसके बुरमे पेलते हुवे कहा, ‘हां लगता है अब जरुर कुछ खास होकर रहेगा.’
रेणु, ‘तो सुरुवात कसे किजाय?’
मै रेणुके होंठोंको चुमते हुवे बोला, ‘मेनुसे बोलदो मनोज हमारेही घरपर जब तक चाहे रह सकता है और ये भी पुछलो कि वो कब आरहा है.’
बड़ी जबरदस्त ढंगसे मुझे किस करते हुवे मेरे लंडको जोरसे दबाते हुवे बोली, ‘हाय मेरे पेलु भतार मै अभी सेटिंग मिलाती हूँ.’
उसने तुरन्त मेनु का नंबर डायल किया और सामान्य फोर्मालिटी के बाद पुछा, ‘तु मनोजके आनेके बारेमे बोल रही थी. वह कब आना चाहता है?’
मेनुने कुछ कहा जिसे सुननेके बाद रेणु बोली, ‘तुम उसके ठहरनेका चिन्ता छोड़दो, अगर वो चाहे तो हमारे घर परही ठहर सकता है. मैंने तुम्हारे जीजुसे भी बात करली है. वो कह रहे थे मनुका देवर है तो हमारा भी तो अपना ही हुवा न, वह जब तक चाहे बेहिचक हमारे साथ रह सकता है.’
रेणु फिर मेनुकी बात सुनने लगी फिर बोली, ‘तु अपने जिजुकोतो जनातिही हो. वो अगर यहाँ आकर कहीं और ठहरा तो उन्हें ठीक नही लगेगा. वो यहीं हैं, मै उन्हें फोन देती हूँ तुम खुद ही बात करलो.’ कहते हुवे रेनुने फोन मुझे थमा दिया.
मै बोला, ‘हेल्लो.’
मेनु, ‘नमस्ते जीजु’
मै, ‘नमस्ते सालीजी, कैसी हो?’
मेनु, ‘सब ठीक है, आप लोग कैसे हैं?’
मै, ‘हमभी बिलकुल ठीक हैं. हां रेणु कह रही थी तुम्हारा देवर इधर आने वाला है? वह कब आरहा है? देख तु ऊसके रहने सहने का फिक्र छोडदे, वो आरामसे हमारे यहाँ रह सकता है. हम उसका पुरा कयल रखेंगे. उसे कोई दिक्कत नही होगी.’ कहते हुवे मैने रेणुको आँख मारते हुवे ऊसके बुरमे पुरे ताक़त के साथ उंगली पेल दिया.
मेनु, ‘अरे जीजु आप क्यों परेसान हो रहे हो वो किसी होटलमे भी तो ठहर सकता है.’
मै, ‘अबे साली ज्यादा नखरे मत दिखा, अब बस ये बता वो कब आरहा है?’ और मै अपनि उंगली रेणुके बुरमे अन्दर बाहर करने लगा.
मेनु, ‘ठीक है आप जैसा चाहें, वो दो तिन दिन बाद जाना है कह रहा था. अभी रिजर्वेशन के चक्करमे ही गया हुवा है. लौटनेके बाद मै फाइनल डेट आपको बता दूंगी.’
रेणुके बुरको अपनि उन्गलिसे चोदते हुवे मैंने कहा, ‘तुमभी उसीके साथ आजाओना तुम्हारी दरसन भी हो जाएगी और बेचारेको अकेलापन भी महसुश नही होगा.’ मै रेणुके बुरमे लगातार उंगली पेले जरह था, अब रेणु अपना गांड उठा उठाकर अपने बुरमे उंगली पेलवा रही थी.
मेनु, ‘आप लोगोंसे मिलनेका मेरा भी बहुत मन हो रहा है लेकिन मेरे पतिको तो आप जानते हि हो वो मुझे आसानीसे कही जानेका मौका नही देते. वैसे दस बारह दिनोके लिये उनका कम्पनीके कामसे दुबई जानेका प्लान है. वह फाइनल होजाए तो कहके देखती हूँ, कहीं वो मान गयेतो देखती हूँ. हमारी बातोंसे रेणु समझ गईथी के मै मेनुको चोदनेका अपना प्लान सेट कर रहा हूँ और वो उत्तेजित होते हुवे झुक कर मेरा लंड अपने मुंहमे लेकर चुसने लगी थी.
मै बोला, ‘ठीक है ट्राई करके देखो, तुम चाहोतो मै और रेणु भी आग्रह करके तुम्हारी मद्दत कर देते हैं.’
मेनु, ‘पहले मै बात करलूं फिर जरुरत पडितो आपको बताउंगी. अच्छातो अब रखती हूँ, बाय !’
‘बाय, बात जरुर कर लेना, एक बार आजवो बहुत मज़ा आएगा.’ मै अपने होठोंको चबाते हुवे बोला और फोन रख दिया.

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