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मेरी चूत मारते रहो ना सर

Antarvasna, hindi sex story सुधा के चेहरे पर मायूसी थी मुझे कुछ समझ नहीं आया कि वह इतनी उदास क्यों है वह हमेशा ही सबके साथ हंसी-खुशी मजाक करती रहती है और उसके चेहरे पर हमेशा एक प्यारी सी मुस्कान रहती है लेकिन आज सुधा काफी उदास थी। मैं सुधा के पास गया और मैंने सुधा से पूछा आज तुम कुछ परेशान दिखाई दे रही हो तभी सुधा ने मुझे कहा प्रकाश सर मैं आपको क्या बताऊं बस आज ऐसे ही मेरा मन ना जाने क्यों उदास है। मैंने उससे पूछा लेकिन कोई तो बात होगी सुधा ने मुझे कुछ नहीं बताया वह मेरी बड़ी इज़्ज़त करती है और मुझे यह बात अच्छे से मालूम है। मैं पिछले 3 वर्षों से सुधा को जानता हूं जब सुधा की शादी हुई थी तब भी मैं उसके घर पर गया था मैं सुधा के परिवार वालों से मिला था तो मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन सुधा उस दिन बहुत ज्यादा उदास थी मैंने उसे कहा कि तुम्हें उदास होने की जरूरत नहीं है तुम्हारे चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट ही अच्छी लगती है।

सुधा ने मुझे जवाब देते हुए कहा प्रकाश सर मुस्कुराहट मेरे चेहरे से जैसे गायब ही हो चुकी है मैंने उस दिन उससे कुछ पूछना उचित नहीं समझा और वह अपने घर चली गई। जब सुधा अपने घर गई तो मैं भी उसके पीछे पीछे अपनी कार लेकर चल रहा था वह मेरे आगे अपनी स्कूटी में जा रही थी मैंने देखा कि उसका ध्यान ना जाने कहां है। वह कुछ ही दूर जाकर एक कार वाले से टकरा गई और वही नीचे गिर पड़ी सुधा को काफी चोट आई थी मैंने सुधा को उठाया और उसकी स्कूटी को एक किनारे किया मैं सुधा को डॉक्टर के पास ले गया। सुधा मुझे कहने लगी सर आप मुझे डॉक्टर के पास क्यों लाए मैंने सुधा से कहा देखो सुधा मुझे नहीं लगता कि तुम बिल्कुल भी खुश हो कुछ तो बात है जो तुम मुझे बताना नहीं चाह रही हो। पर फिलहाल मैं उसकी स्थिति देखकर इतना तो समझ चुका था कि वह काफी परेशान है और उसकी परेशानी का कारण जरूर कोई है। डॉक्टर ने सुधा के हाथों पर पट्टी बांधी उसके हाथ से काफी खून आने लगा था और डॉक्टर ने एक एंटीबायोटिक इंजेक्शन भी सुधा को लगा दिया था। मैंने अस्पताल का बिल दिया और उसके बाद मैं सुधा को अपने साथ घर ले आया।

मेरी पत्नी भी सुधा को बड़े अच्छे से पहचानती है मेरी पत्नी सुधा को देखकर खुश हो गई वह कहने लगी आज आप सुधा को घर ले आए मैंने अपनी पत्नी से कहा तुम फिलहाल हमारे लिए कुछ खाने के लिए बना दो। मेरी पत्नी सुधा के हाथ पर पट्टी देखकर शॉक हो गयी वह मुझसे सवाल करने लगी मैंने  अपनी पत्नी से कहा फिलहाल तुम अभी कुछ भी सवाल ना करो सुधा काफी परेशान है। उसके बाद मेरी पत्नी ने हम दोनों के लिए खीर बना दी क्योंकि शाम हो चुकी थी और ना ही अभी खाने का समय हुआ था।  सुधा सोफे पर चुपचाप बैठी हुई थी वह कुछ बात भी नहीं कर रही थी मैंने और मेरी पत्नी ने सुधा से पूछ लिया कि तुम इतनी परेशान क्यों हो। सुधा भी बड़ी तेजी से रोने लगी और उसकी आंखों से आंसू छलक आए थे उसके आंसू देखकर मैंने सुधा से कहा तुम रो मत। मेरी पत्नी ने सुधा को कहा तुम बहुत हिम्मत वाली लड़की हो सुधा ने मेरी पत्नी से कहा भाभी बस आप पूछो मत मेरी हिम्मत अब जवाब दे चुकी है मैं बहुत ज्यादा परेशान रहने लगी हूं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि सुधा क्यों इतनी परेशान है लेकिन जब सुधा ने अपनी आप बीती हम दोनों को सुनाई तो हमें भी बहुत बुरा लगा सुधा के पति जो कि एक अच्छे पद पर हैं वह उसके बावजूद भी सुधा से दहेज की मांग कर रहे थे। सुधा ने जब हमें बताया कि उसके पिताजी ने उन्हें काफी दहेज दिया है उसके बाद अब उनके पास देने के लिए कुछ भी नहीं रह गया है तो सुधा इस बात से बहुत परेशान थी और उसके पति और उसके ससुराल पक्ष वाले उसे हमेशा ही परेशान किया करते थे। मैंने जब यह बात सुनी तो मैं भी बहुत दुखी हुआ मैंने सुधा को समझाया और कहा देखो सुधा तुम इस बात से कैसे टूट गई तुम्हें तो उसका डटकर सामना करना चाहिए था और तुम्हें अपने पिताजी को भी समझाना चाहिए था कि दहेज नहीं देना चाहिए लेकिन अब तुम्हें ही अपने परिवार को सपोर्ट करना पड़ेगा और अपने ससुराल वालों को कहना पड़ेगा कि अब हम तुम्हें दहेज नहीं देने वाले हैं। सुधा को मेरी बात से हिम्मत मिली और सुधा ने कहा कि आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।

मेरी पत्नी ने भी सुधा को समझाया और कहने लगी तुम्हें उन लोगों को बिल्कुल भी दहेज नहीं देना चाहिए और वह तो इतने अच्छे परिवार से हैं और उनका खानदान भी बड़ा अच्छा है। वह लोग दहेज के लालची हैं इस बात से तो मुझे भी बहुत बुरा लग रहा था सुधा उस दिन अपने घर चली गई लेकिन जब वह घर गई। मेरी पत्नी ने मुझे कहा सुधा कितनी अच्छी लड़की है लेकिन उसके परिवार वालों ने उसकी जिंदगी पूरी तरीके से बर्बाद कर दी है उसके ससुराल पक्ष दहेज के बड़े लालची हैं मैंने अपनी पत्नी से कहा आजकल माहौल भी ऐसा ही चल रहा है। हम दोनों दहेज को लेकर चर्चा करने लगे और अगले दिन जब सुधा ऑफिस आई तो सुधा ने मुझे धन्यवाद कहा और कहने लगी सर कल आप की वजह से मुझे काफी हिम्मत मिली और मैंने अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ पुलिस में याचिका दायर कर दी है मुझे पुलिस का भी बहुत सहयोग मिला। मैंने सुधा से कहा मैं तो तुम्हें पहले ही कहता था कि तुम ऐसा कुछ करो कि जिससे तुम्हारे ससुराल वालों को सबक मिल सके। वह लोग सुधा को कुछ भी नहीं कहते थे लेकिन इससे सुधा के पति और उसके बीच में दरार पैदा होने लगी थी और अब वह दोनों एक दूसरे से अलग होने लगे थे इस बात को लेकर भी सुधा ने मुझसे एक बार बात की थी तो मैंने सुधा से कहा तुम अपने पति को समझा सकती हो।

एक दिन सुधा ने अपने पति को मुझसे मिलवाया तो मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की कि वह एक पढ़े-लिखे युवक हैं और एक अच्छे पद पर भी हैं उन्हें सुधा के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए लेकिन वह मेरी बात बिलकुल भी नहीं समझे और उन्होंने मुझे ही भला बुरा कहना शुरू कर दिया वह गुस्से में वहां से चले गए। सुधा ने मुझसे उसके लिए माफी मांगी और कहने लगी सर मुझे अपने पति को आपसे नहीं मिलवाना चाहिए था। मैंने सुधा से कहा तुमने तो कुछ अच्छा सोचकर ही मुझे उससे मिलवाया था लेकिन उनकी सोच बिल्कुल ही छोटी और संगीन है उन्हें समझा पाना शायद मुश्किल ही है। मैंने सुधा से कहा मैं चलता हूं तो सुधा भी कहने लगी सर आप मुझे घर छोड़ दीजिएगा मैंने सुधा को उसके घर छोड़ा और मैं वहां से अपने घर लौट आया। सुधा की परेशानियां बढ़ती जा रही थी उसके पति से उसकी दूरिया बढ़ती ही जा रही थी जिस वजह से वह बहुत परेशान रहने लगी थी। मैं उसे हमेशा समझाने का प्रयास करता रहता एक दिन रात के वक्त वह घर पर आ गई। उस दिन मेरी पत्नी अपने मायके गई हुई थी जब वह रात को घर पर आई तो बहुत परेशान नजर आ रही थी। मैंने उसे पानी पिलाया और कहां तुम कुछ खाओगी? वह कहने लगी मेरा कुछ खाने का मन नहीं है बस अकेला सा महसूस हो रहा था तो सोचा आप से मिलू। मैंने उसे आराम से बैठाया और उसके बगल में जाकर में बैठ गया। मैंने उसे पूछा क्या हुआ तो सुधा कहने लगी बस वही मेरे पति और मेरे बीच में झगड़े हुए हैं इस वजह से मैं काफी परेशान हो गई थी और अकेलापन महसूस हो रहा था।

मैंने सुधा कि जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह मेरी तरफ अपनी प्यासी नजरों से देखने लगी। मैंने सुधा के बारे में ऐसा नहीं सोचा था लेकिन उस रात मेरा मन सुधा को देखकर मचलने लगा। मैंने ना चाहते हुए भी उसके गुलाबी होठों पर चुंबन कर ही लिया जैसे ही मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया तो वह भी पूरे जोश में आने लगी। काफी देर तक मैं उसका नरम और गुलाबी होठों का रसपान करता रहा। जब मैंने उसके कपड़े उतारकर उसकी ब्रा के हुक को खोला तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी। मैंने उसे वही सोफे पर लेटाते हुए उसके स्तनों का भरपूर तरीके से रसपान करना शुरू किया उसे बड़ा मजा आ रहा था। वह काफी देर तक मेरा साथ देती रही मैंने जैसे ही अपने मोटे लंड को बाहर निकाला तो वह भी उसे हिलाने लगी उसने मेरे लंड को अपने मुंह के ले लिया और उसे सकिंग करने लगी। मेरी इच्छा भी पूरी हो रही थी मुझे बड़ा आनंद आ रहा था काफी देर तक ऐसा चलता रहा।

उसके बाद मैंने सुधा की योनि के अंदर लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाने लगी धीरे-धीरे मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था। मै समझ चुका था वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी मैंने उसके दोनों पैरों को उठाते हुए बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए। मेर धक्के इतने तेज होते कि वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी वह मुझे कहने लगी सर मुझे बड़ा मजा आ रहा है। वह अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकियां लेने लगी लेकिन मेरा वीर्य गिरने का नाम ही नहीं ले रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं सिर्फ उसे धक्के देता रहूं, मैंने उसे घोड़ी बना दिया घोडी बनाते हुए जब मैंने उसे धक्के देना प्रारंभ किया तो वह पूरी तरीके से मचलने लगी। वह इतनी ज्यादा जोश में आ चुकी थी कि अब मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। उसकी चूतडे मेरे अंडकोष से टकराने लगी थी मेरे वीर्य की पिचकारी बाहर आने को तैयार हो चुकी थी। जैसे ही मेरे वीर्य की पिचकारी बाहर की तरफ निकली तो मैंने अपने वीर्य को सुधा की चूतडो पर गिरा दिया जिससे कि वह खुश हो गई। उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे के साथ उस रात जमकर सेक्स का आनंद लिया और सुधा को मैंने अपना बना लिया।

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