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मेरे लंड का टोपा-1

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हैल्लो दोस्तों, सभी पढ़ने वालो को मेरा लंड उठाकर सलाम। दोस्तों अब में कहानी को शुरू करने से पहले थोड़ा सा मेरे बारे में भी बता देता हूँ उसके बाद में आज की कहानी को शुरू करूंगा। दोस्तों में गुजरात के जामनगर में रहता हूँ और में एक जवान और सुंदर लड़का हूँ। मेरा मोटा लंबा लंड किसी भी प्यासी तरसती हुई चूत को जमकर चोदकर पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए हमेशा तैयार रहता है।

यह आज से करीब दो महीने पहले की कहानी है, जिसमें मैंने अपनी एक नौकरानी को अपनी तरफ आकर्षित करके उसको मेरे साथ चुदाई करने के लिए तैयार किया। दोस्तों मेरे घर पर एक नौकरानी काम किया करती है, जिसकी उम्र 19 साल है, उसका नाम प्रीति है और वो दिखने में एकदम मस्त माल लगती है। दोस्तों मुझे पहले से ही पता था कि वो अभी तक वर्जिन (कुँवारी) है और वो साली अभी अभी जवान हुई थी, इसलिए उसके गोरे जिस्म ने अब अपने हर एक अंग का आकार बदलना शुरू कर दिया था। मैंने एक बाद उसको बहुत ध्यान से देखा तो उसके बूब्स एकदम तने हुए थे, जिनकी निप्पल भी खड़ी हुई थी और मुझे उसके गाल पर एक काला तिल था जो हमेशा अपनी तरफ बहुत आकर्षित करके हमेशा परेशान किया करता था और वैसे उसका फिगर भी दिखने के साथ साथ आकार में भी बड़ा मस्त सेक्सी लगता है, जिसकी वजह से उसके उभरे हुए बूब्स मुझे बड़े ही कमाल के नजर आते थे और पूरी तरह से वो एक हिरोइन जैसी लगती है, वो जब भी नीचे झुककर झाड़ू लगाया करती तो में अपनी चोर नजर से बस उसके कातिल बूब्स को ही देखा करता था। मेरी नजर हमेशा उसको घूर घूरकर देखा करती थी। दोस्तों में करीब पिछले दो महीनो से उस पर अपना जाल बिछा रहा था।

दोस्तों में कैसे भी करके उसकी चुदाई करने के अपने प्रयास कर रहा था और एक दिन उस भगवान ने मेरी मन की बात को सुनकर मुझे उसकी चुदाई का वो मौका दिया था। दोस्तों वो जब भी मेरे बेडरूम की सफाई किया करती है तो में उसको लगातार देखता रहता और वो भी मुझे अपनी तरफ घूरता हुआ देखकर मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं करती, बस हल्का सा मुस्कुरा देती। दोस्तों अब मेरी एक सोची समझी पहली चाल थी कि में सुबह बाथरूम में मुठ मारकर अपनी अंडरवियर को गीली करता और फिर में जानबूझ कर उस पर थोड़ा सा ठुक दिया करता था और उसके बाद में उस अंडरवियर को दरवाजे के पीछे लटका देता था जिसकी वजह से जब भी कपड़े ढोने के लिए प्रीति उस अंडरवियर को अपने हाथ में लेती थी। मेरी अंडरवियर को वो बहुत ध्यान से देखा करती थी। तो मेरे अब समझ में आ रहा था कि में एकदम सही जा रहा था और उसका भी व्यहवार अब मेरे लिए बहुत बदला बदला सा मुझे लगने लगा था वो मुझे अपने मन की बात छुपा रही थी और वो मेरी हरकतों का सही मतलब अब समझ चुकी थी।

फिर एक दिन में रात को जानबूझ कर अपनी पेंट की चैन को खोलकर सो गया और उस दिन रात को में करीब 8.45 पर ही सो गया था और फिर मैंने कुछ देर बाद मेरे लंड को आंड के साथ ही अपने पजामे से बाहर निकाल लिया और में पेट के बल सोने का नाटक करने लगा, जिसकी वजह से मेरे लंड के साथ साथ मेरे आंड भी मेरे दोनों पैरों के बीच से साफ साफ दिख रहे थे। फिर सुबह करीब 9:15 को प्रीति मेरे बेडरूम में आ गई और उसी समय अचानक से उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और वो मेरे बड़े आकार के मोटे लंड को अपनी चकित नजरों से देखती रही। उसकी नजर हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी और मुझे यह सब पास वाली अलमारी के अंदर के उस कांच में सब कुछ साफ दिख रहा था, उसने करीब दो मिनट तक मेरे लंड को घूरकर देखा।

फिर वो थोड़ा सा पास आ गई और अब उसने ज्यादा गौर से देखा। उसके बाद उसने इधर उधर का अंदाज लेकर अपने एक बूब्स को दबाना शुरू किया। फिर कुछ देर बाद जब वो गरम होकर जोश में आ गई और तब उसने अपने एक हाथ को आगे बढ़ाया और अब उसने मेरे आंड को अपने हाथ से छूना चाहा, लेकिन फिर उसने कुछ बात सोचकर अपने हाथ को पीछे हटा लिया और उसके बाद वो मेरे कमरे से बाहर निकलकर तुरंत नीचे चली गयी। अब में उठा बाथरूम में जाकर मैंने अपना हर दिन का काम किया, दोस्तों उस दिन में बहुत खुश था, क्योंकि आज मैंने उसके जिस्म की आग को पहले से ज्यादा भड़का दिया था और में आगे भी ऐसा ही कुछ करने की बात सोच रहा था और ब्रश करने के बाद नीचे जाकर मैंने उससे चाय पी और उससे गरम पानी करके मुझे बाथरूम में लाकर देने को कहा और तब मैंने देखा कि वो मुझसे अपनी नज़रे नहीं मिला रही थी।

फिर में बाथरूम में चला गया और मैंने शेविंग की तभी एकदम से मुझे एक नया विचार आ गया और मैंने मेरे लंड पर शेविंग क्रीम लगाई और अब में उसके आने की राह देखता रहा और उस समय मैंने सिर्फ़ मेरी कमर पर एक टावल लपेटा हुआ था और मुझे जैसे ही उसके आने की आहट सुनाई दी तो मैंने मेरा हाथ उठाया और शेविंग करना शुरू कर दिया। उसी समय उसने गरम पानी की बाल्टी को नीचे रखते हुए मुझसे कहा कि सर यह लीजिए गरम पानी और वो शरमाकर भाग गयी। मैंने उसके बाद शरमाने का नाटक किया और यह सब मुझे अच्छा लग रहा था। फिर दो दिन तक मैंने उसको किसी ना किसी तरह से गरम नहीं किया, जिसकी वजह से प्रीति में अब धीरे धीरे बहुत बदलाव आ रहे थे और वो अब सजकर के आने लगी थी। तब में समझ चुका था कि यह चिड़िया अब मेरे जाल में फंस रही है और मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था कि इसके आगे मुझे क्या करना है? मेरे पास सेक्सी फिल्मे सेक्सी किताबे और कुछ सीडी थी। उसमे से दो बहुत गंदी किताबे मैंने जानबूझ कर मेरी शर्ट के नीचे रख दी, ऐसा लग रहा था जैसे मैंने उनको वहां पर छुपाई हो और मैंने उनको बड़े ध्यान से रखा और उसके एक पेज को खोलकर रखा था।

फिर में मेरे ऑफिस के लिए चला गया। उस दिन में 6.45 बजे ऑफिस से अपने घर पर आ गया था मैंने दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया, लेकिन दरवाजा खोलने में उसको कुछ देर लगी और में उस बात को सोचकर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था। तो दरवाजा खुलते ही मैंने प्रीति को बहुत ध्यान से देखा वो जैसे कोई भी गरम औरत एकदम ठंडी होने पर दिखती है वैसी दिख रही थी। मैंने उससे पूछा क्या तुम सो रही थी क्या? तब उसने कहा कि हाँ में लेट रही थी। अब में सीधा अपने बेडरूम में चला गया मैंने अपनी उस किताब को देखा तो तब मुझे पता चला कि किताब को किसी ने हड़बड़ी में रखा था, मैंने दरवाजे के एक कोने से नीचे की तरफ देखा तो वो उस समय मेरे बेडरूम के बाहर खड़ी होकर अंदर का अंदाज़ा ले रही थी। फिर में उसी समय वापस घर से बाहर चला गया और में करीब पांच बजे वापस आ गया। तब मैंने देखा कि अब वो किताबे ठीक तरह से रखी हुई थी और प्रीति भी अब पहले से ज्यादा शांत नजर आ रही थी।

दोस्तों अब में हर रोज वहां पर किताबे रखने लगा और उसको वो दिखा दिखाकर तड़पाने लगा। इसका मुझे आगे जाकर फायदा हुआ, क्योंकि उस किताब में सब तरह की गरम करने वाली तस्वीरे थी, जैसे दो लेस्बियन, चूत की चुदाई, गांड की चुदाई, लंड को चाटना, चूत को चटाना, बूब्स को पीना, लंड को चूसना और भी सब कुछ उसमें था। अब में एक दिन दोपहर को अपने घर पर ही अपने ऑफिस का काम करने लगा। ऐसा मैंने कुछ दिन तक लगातार किया, जिसकी वजह से प्रीति तड़प उठी और मुझे उसकी बैचेनी, तड़प बहुत अच्छी तरह से महसूस हो रही थी, क्योंकि वो अब किताबे नहीं देख पा रही थी। अब में अपने पीसी पर दोपहर में सेक्सी फिल्म की सीडी लगाकर उसको देखता था और मुठ भी मारता था और मैंने ही ऐसा बंदोबस्त किया था कि प्रीति यह सब चुपके से देखे मुझे पूरी तरह से विश्वास था कि प्रीति मेरे इस जाल में भी जरुर फंसेगी, लेकिन इसके लिए मुझे पूरे तीन दिन तक का इंतजार करना पड़ा।

फिर उस दिन मैंने महसूस किया कि प्रीति भी दरवाजे की उस छूटी हुई थोड़ी सी जगह से अंदर की तरफ झांककर देख रही थी और उस दिन में गांड मारने वाली सेक्सी फिल्म देख रहा था। कुछ देर बाद प्रीति ने मेरे लंड से मेरे वीर्य को बाहर निकलते हुए देखा मैंने मेरा वीर्य जानबूझ कर अपनी छाती पर लगा लिया और उसके बाद मैंने थोड़ा सा उसको चाटने का नाटक किया और उसके बाद मैंने अपने पीसी को बंद किया, अपने कपड़े ठीक किए और में अब अपने ऑफिस के लिए चल पड़ा। तो नीचे आते ही मैंने गौर किया कि वो मेरे लंड की जगह को चोरी से देख रही थी। अब एक दिन बाद मैंने अपनी इस मेहनत के मीठे फल को चखने का फ़ैसला किया और उस दिन में सुबह करीब आठ बजे सोकर उठ गया, जिसके बाद प्रीति भी करीब 8:15 को आ गई। फिर मैंने ब्रश करके उससे चाय लेकर पीने लगा और में आखरी बार उसको गरम करके अब उस पर चढ़ने के लिए बेताब था। अब मैंने मेरा ट्रिमर चालू करके मेरी झांट के बाल काट लिए और उनको मैंने जानबूझ कर टॉयलेट पर गिरा दिया था और उसके बाद में बाथरूम में आकर नहाया, नीचे आकर प्रीति से नाश्ता लिया और नाश्ता करने के बाद मैंने प्रीति को कहा कि में आज ऑफिस नहीं जाऊँगा ऊपर कंप्यूटर पर काम करूँगा, उसके बाद ऊपर के कमरे में आते ही मैंने दरवाजे क़े स्टॉपर को और मेरे कंप्यूटर की कुर्सी को एक धागे से बाँध दिया ताकि जब भी में कुर्सी को हिलाऊंगा तो दरवाजा खुल जाए।

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