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मेरा प्यार मेरी बाहों में था

Antarvasna, sex stories in hindi: मैं एक अच्छी फैमिली से बिलॉन्ग करता हूं मेरे पापा एक बड़े बिजनेसमैन है और उनका शहर में काफी अच्छा नाम है इसलिए उन्होंने मुझे विदेश पढ़ने के लिए भेजा। जब मैं विदेश से पढ़ाई करने के बाद वापस लौटा तो पापा चाहते थे कि मैं उनके बिजनेस को संभालूं लेकिन मैं फिलहाल बिजनेस संभालने के लिए तैयार नहीं था। मैं अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती किया करता जिससे कि पापा भी बहुत ज्यादा परेशान रहने लगे थे और उन्होंने एक दिन मुझे डांटते हुए कहा कि राहुल बेटा तुम्हें अब हमारे बिजनेस को संभाल लेना चाहिए। मुझे भी उस दिन लगा कि पापा शायद ठीक कह रहे हैं और फिर मैं उनके बिजनेस में हाथ बटाने लगा। मुझे पापा से काफी कुछ सीखने को मिलता है और मैं अब अपने आप को बदलने की कोशिश कर रहा था। मैं पूरी तरीके से बिजनेस पर ध्यान देने लगा था और सब कुछ ठीक होने लगा था। पापा भी मुझसे बहुत ज्यादा खुश रहने लगे थे और पापा मुझे हमेशा ही कहते कि राहुल बेटा अब तुम समझदार हो चुके हो। मैं बिजनेस को बखूबी संभालने लगा था इस बात से पापा बहुत ही ज्यादा खुश हो चुके थे। एक दिन मैं और पापा डिनर कर रहे थे उस दिन पापा ने मुझे कहा कि राहुल बेटा तुम कुछ दिनों के लिए दुबई चले जाओ। पापा का एक बड़ा प्रोजेक्ट था जिसे कि मुझे ही संभालना था और मैं कुछ दिनों के लिए दुबई चला गया। कुछ दिनों तक मैं दुबई में ही रहा उसके बाद मैं वहां से वापस मुंबई लौटा तो उस दिन मुझे हमारे ऑफिस में एक नई लड़की दिखी मैंने उसे पहली बार ही देखा था। वह उस दिन मेरे पास फाइल लेकर आई और मुझे कहने लगी कि सर आप यह फाइल देख लीजिए मैंने वह फाइल देखी तो मैंने उसको साइन कर दिया। उस लड़की का नाम आशा है आशा बहुत सिंपल और साधारण है आशा अपने काम के प्रति पूरी तरीके से समर्पित थी और मुझे आशा से मिलकर काफी अच्छा लगता। मुझे आशा के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था उसकी फैमिली के बारे में मैं कुछ भी नहीं जानता था। हालांकि आशा के साथ मैं ज्यादा बात तो नहीं कर पाता था लेकिन जब भी मैं उसे देखता तो मुझे काफी अच्छा लगता मुझे ऐसा लगता जैसे कि मैं उसे काफी पहले से जानता हूं।

हम दोनों के बीच अब धीरे धीरे अच्छी दोस्ती भी होने लगी थी और मैं चाहता था कि मैं आशा के साथ समय बिताऊं आशा और मैं साथ में अब समय बिताने लगे थे। आशा के बारे में मैं जानने लगा था और उसके बारे में जानकर मुझे काफी अच्छा लगा कि वह काफी स्वाभिमानी किस्म की है और उसके परिवार की जिम्मेदारी सब उसके ऊपर ही है। आशा यह बात अच्छे से जानती थी कि मैं उसका बॉस हूं इसलिए वह हमेशा ही अपनी मर्यादाओं में रहती है लेकिन मैं चाहता था कि आशा मेरे साथ एक दोस्त की तरह रहे। हम दोनों को एक दूसरे का साथ तो अच्छा लगता ही था लेकिन मुझे यह बात नहीं मालूम थी कि मुझे आशा से प्यार हो जाएगा। मुझे आशा से प्यार होने लगा था यह बात जब पापा को पता चली तो पापा ने आशा को ऑफिस से निकाल दिया। पापा कभी भी नहीं चाहते थे कि मैं आशा से मिलूँ। आशा की नौकरी चले जाने के बाद मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया था मैंने आशा से फोन पर बात करने की कोशिश भी की लेकिन उससे मेरा कोई संपर्क हो नहीं पाया था फिर मैंने किसी प्रकार से आशा का एड्रेस लिया और उसके घर पर चला गया। मैं जब आशा के घर गया तो आशा ने मुझे अपने परिवार वालों से मिलवाया। मैंने आशा की फैमिली को देखा तो मुझे भी पता चल चुका था कि आशा के ऊपर ही उसके घर की सारी जिम्मेदारी है और उसे वह बखूबी निभा रही थी लेकिन पापा की वजह से आशा को नौकरी से निकाल दिया गया। मैं चाहता था कि मैं आशा की मदद करूं, मैंने आशा को पैसे देने की कोशिश की लेकिन आशा ने पैसे लेने से मना कर दिया।

मेरे दिल में आशा को लेकर और भी ज्यादा प्यार उभरने लगा था और मुझे इस बात की बहुत ज्यादा खुशी थी कि मैं जिस लड़की को पसंद करता हूं वह बहुत ही अच्छी है और बहुत स्वाभिमानी भी है। मेरे दिल में आशा को लेकर और भी ज्यादा रिस्पेक्ट बढ़ने लगी थी। मैं आशा की मदद करना चाहता था इसलिए मैंने आशा की जॉब अपने दोस्त से कहकर उसकी कंपनी में लगवा दी। हालांकि आशा को यह बात बिल्कुल भी पता नहीं थी कि मेरे कहने पर ही उसकी जॉब लगी है अगर मैं यह बात आशा को बताता या उसे कहीं से भी इस बारे में पता चलता तो शायद वह जॉब छोड़ देती। मैंने भी उसके बाद आशा से बात करने की कोशिश की और धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे से दोबारा बात करने लगे। पापा को यह बात पता नहीं थी की मैं आशा से चोरी छुपे मिला करता हूं और जब भी मैं आशा को मिलता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता। आशा और मैं एक दूसरे के साथ बहुत खुश है और मैं आशा के साथ जब भी होता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है। आशा भी समझने लगी थी कि मैं उसे प्यार करने लगा हूं लेकिन मैं आशा को अभी तक अपने दिल की बात कह नहीं पाया था। मैंने कोशिश की कि मैं आशा को अपने दिल की बात कह दूं। एक दिन मैंने सोचा लिया था कि मैं आशा से अपने दिल की बात कह दूंगा और फिर मैंने आशा से अपने दिल की बात कह दी। मैंने आशा को अपने दिल की बात बता दी तो आशा ने भी मुझे स्वीकार कर लिया लेकिन अब यह बात पापा को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी और उन्होंने मुझसे कहा कि तुम आशा से दूर हो जाओ। मैंने भी उसके बाद पापा के बिजनेस को छोड़ने का फैसला कर लिया था और मैं एक साधारण जिंदगी जीने लगा था। आशा को यह बात अच्छी नहीं लगी और वह मुझे कहने लगी कि राहुल तुम मेरी वजह से यह सब मत करो लेकिन मैंने आशा को कहा कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।

अब मै आशा से बहुत ज्यादा प्यार करने लगा था और इसी के चलते पापा ने हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार कर लिया था। पापा ने मुझे घर आने के लिए कहा तो मैं घर चला गया। आशा के साथ में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करता। मुझे आशा के साथ बहुत ही अच्छा लगता और आशा को भी मेरे साथ अच्छा लगता। एक दिन शाम को मैने आशा को घर पर बुलाया। उस दिन आशा घर पर आई और बोली राहुल तुम्हारा घर कितना बड़ा है आज पहली बार ही मैने तुम्हारा घर देखा था। वह मेरे साथ बैठी हुई थी आशा और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे लेकिन तभी मैंने आशा के होठों को किस कर लिया। मै उसके होठों को चूमने लगा उसे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा। आशा मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया था उसने मेरा साथ दिया और कहने लगी मुझे तुम्हारे साथ अच्छा लग रहा है। मैंने आशा के कपड़े उतार दिए थे मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया था। मैंने आशा को बिस्तर पर लेटा दिया मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जब मैं उसके स्तनों का रसपान कर रहा था। मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा। मैने जब आशा के स्तनों के बीच में अपने लंड को लगाकर रगड़ना शुरू किया तो आशा मुझे कहने लगी राहुल मुझे डर लग रहा है लेकिन आशा को मुझ पर पूरा भरोसा था। मैंने आशा को कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो पहले वह घबरा रही थी लेकिन फिर उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और वह उसे चूसने लगी। वह जिस तरीके से मेरे लंड को चूस रही थी उससे मुझे अच्छा लग रहा था और आशा को भी बड़ा मजा आ रहा था। वह मेरे लंड को चूसती तो मैं उसे कहता मुझे अच्छा लग रहा है।

आशा और मुझे बड़ा मजा आने लगा था हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी। हम दोनों इतने ज्यादा उत्तेजित होने लगे थे मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैं उसकी चूत को सहलाने लगा मैं अपने मोटे लंड को आशा की चूत पर लग रहा था तो उसकी योनि से पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था। मैंने जब आशा की योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो आशा जोर से चिल्ला कर मुझे बोली मेरी चूत से बहुत ज्यादा खून निकलने लगा है। आशा की सिल टूट चुकी थी मैंने देखा उसकी चूत से पानी निकल रहा है वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी और मुझे कहती तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था। वह मेरा साथ बड़े अच्छे तरीके से दे रही थी मैंने आशा को बहुत देर तक चोदा और आशा की चूत मार कर मैं खुश हो गया था। मैने अपने माल को गिरा दिया था। आशा और मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गए थे हम दोनों ने उसके बाद दोबारा से सेक्स करने का फैसला किया। आशा ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया था। वह मेरे मोटे लंड को जिस तरीके से चूस रही थी उससे मुझे मज़ा आ रहा था और आशा को भी बड़ा अच्छा लगने लगा था। आशा मुझे कहती मुझे तुम्हारे मोटे लंड को चूसने में अच्छा लग रहा है आशा ने मेरे लंड को तब तक सकिंग किया जब तक उसने मेरे लंड से पानी बाहर नहीं निकाल दिया था। उसके बाद तो आशा इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि आशा की तडप दोबारा बढने लगी थी। मैने अपने मोटे लंड को उसकी योनि मे प्रवेश करवा दिया था। मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर जा चुका था मुझे बड़ा मजा आ रहा था जब मैं आशा को चोद रहा था। आशा की चूत के अंदर बाहर मेरा लंड हो रहा था। मैंने आशा से कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है।

आशा और मैं एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे वह बहुत जोर से सिसकारियां ले रही थी उसके बाद आशा मुझे अपनी और खींच रही थी और मेरे अंदर की गर्मी को बढ़ाए जा रही थी। मैंने आशा को कहा मैं अब तुम्हारी चूत में अपने माल को गिराना चाहता हूं। आशा ने कहा तुम अपने माल को मेरी चूत मे गिरा दो। मैंने आशा की चूत में अपने माल को गिरा दिया और आशा बड़ी ही खुश थी जिस प्रकार से हम दोनों ने सेक्स संबंध बनाए थे। अब हम दोनों की शादी हो चुकी है और हम दोनों एक दूसरे के साथ हमेशा शारीरिक सुख का मजा लेते हैं।

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