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मेरा लंड उछलने लगा था

Antarvasna, desi kahani: कुछ समय के लिए में अपनी जॉब से रेस्ट लेने के बाद अपने घर दिल्ली जाता हूं। मैं मुंबई में नौकरी करता हूं और पिछले 5 सालों से मैं मुंबई की एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहा हूं। जब मैं अपने घर गया तो उस वक्त पापा घर पर नहीं थे मैं सुबह के वक्त ही घर पहुंच गया था। मैंने मां से पूछा पापा कहां है? वह कहने लगी वह अभी ऑफिस गए हुए हैं। मैंने मां से कहा ठीक है उसके बाद मैं कुछ देर के लिए अपने रूम में आराम करने के लिए चला गया। माँ काफी ज्यादा खुश थी उन्होंने मेरे लिए नाश्ता बनाया लेकिन मुझे काफी गहरी नींद आ रही थी इसलिए मैंने उन्हें कहा मेरा नाश्ता करने का मन नहीं है। मैंने नाश्ता तो नहीं किया लेकिन दोपहर के वक्त मां और मैंने साथ में ही लांच किया  मां ने मुझसे पूछा बेटा तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है? मैंने उन्हें बताया मेरी जॉब अच्छी चल रही है काफी लंबे समय बाद में मां से मिला था तो मैंने उनसे काफी बातें की समय का पता ही नहीं चला अब शाम के 5:00 बज चुके थे। मां ने मुझे कहा मैं अभी पड़ोस में जा रही हूं थोड़ी देर बाद आती हूं और यह कहकर मां चली गई। मां पड़ोस की आंटी के घर गई हुई थी मैं घर पर ही था। अभी तक वहां से माँ लौटी नहीं थी मैंने जब मां को फोन किया तो वह मुझे कहने लगी बेटा मैं थोड़ी देर बाद आ रही हूं। मैं घर पर ही था जब डोरबेल बजी तो मैंने तुरंत ही दरवाजा खोला।

मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो पापा आ चुके थे। पापा से मिलकर मैं काफी खुश था उन्होंने मुझसे पूछा बेटा तुम कब आए? मैंने उन्हें बताया मैं तो सुबह आ गया था। पापा ने मुझे कहा लेकिन तुमने तो मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताया। मैंने पापा से कहा बस ऐसे ही आप लोगों से मिलने का मन था तो सोचा कुछ समय के लिए अपनी जॉब से छुट्टी ले लू और आप लोगों से मिल लू, आप लोगों से मिलकर काफी अच्छा लग रहा है। पापा और मैं साथ में बैठे हुए थे अब माँ भी आ चुकी थी। हम सब लोग साथ में बैठे हुए थे मां ने मुझे कहा तुम्हारे मामा की बेटी की शादी 2 दिन बाद है। मैंने मां से कहा माँ लेकिन मुझे तो इस बारे में कुछ पता ही नहीं था। माँ ने कहा बेटा अब तुम अपने काम में इतने बिजी रहते हो तुम्हें बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता है मैंने मां से कहा कि मां यह तो तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो की मुझे अपने काम से बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता है।

मैं पापा और मम्मी साथ में बैठे हुए थे, काफी समय हो चुका था तो मां रसोई में चली गई और वह खाना बनाने की तैयारी करने लगी। मैं और पापा साथ में बैठकर बातें कर रहे थे पापा ने मेरी जॉब को लेकर बातें की और उन्होंने मुझसे कहा कि आगे तुम क्या सोच रहे हो। मैंने पापा से कहा कि मैं तो मुंबई में ही नौकरी करना चाहता हूं पापा चाहते थे कि मैं दिल्ली की किसी कंपनी में जॉब करूं लेकिन मैं मुंबई में ही रह कर काम करना चाहता था। मां ने भी अब खाना बना दिया था और जब मां ने खाना बनाया तो हम सब लोगों ने डिनर किया पापा और मम्मी के साथ लंबे समय बाद मैं डिनर कर रहा था और मैं काफी खुश भी था। हम लोगों ने डिनर किया और उसके बाद मैं अपने रूम में चला गया मैं जब अपने रूम में गया तो मैं अपने मोबाइल को टटोलने लगा। मुझे काफी अच्छा लग रहा था और मैं बहुत ज्यादा खुश था पापा और मम्मी भी बहुत ज्यादा खुश थे। दो दिन के बाद हम लोग मेरे मामा के लड़के की शादी में गए जब मैं शादी में गया तो वहां पर मुझे राधिका दिखी राधिका मेरे साथ कॉलेज में ही पढ़ा करती थी लेकिन यह भी बड़ा अजीब इत्तेफाक था कि राधिका मेरे मामा के लड़के की शादी में आई हुई थी। मैं राधिका से मिलकर बहुत खुश था मैंने राधिका से पूछा कि तुम क्या कर रही हो तो उसने मुझे बताया कि वह दिल्ली में ही जॉब करती है। मैंने राधिका से कहा चलो यह तो बहुत ही अच्छी बात है, देखो तुम से आज मेरी मुलाकात भी हो गई। राधिका भी बहुत खुश थी वह मुझसे बातें कर रही थी हम दोनों साथ में बैठे हुए थे जब पापा और मम्मी मेरे पास आए तो मैंने राधिका को उन लोगों से मिलाया। पापा और मम्मी को राधिका से मिलकर अच्छा लगा और उन्होंने कुछ देर राधिका से बात की उसके बाद पापा और मम्मी चले गए। जब वह लोग चले गए तो मैं और राधिका आपस में बात कर रहे थे हम दोनों अपनी पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे और मुझे राधिका से बात कर के बहुत अच्छा लग रहा था और वह भी काफी ज्यादा खुश थी। हम दोनों ने एक दूसरे से बहुत बातें की मैंने उस दिन राधिका से उसका नंबर भी ले लिया।

मैंने राधिका का नंबर ले लिया था, राधिका और मैं जब भी फोन पर बातें किया करते तो मुझे अच्छा लगता लेकिन अब मैं कुछ समय बाद मुंबई लौट आया था और हम दोनों की बातें काफी समय तक हो नहीं पाई थी। मैं अपने ऑफिस के काम में बहुत ज्यादा बिजी था और जब एक दिन मुझे राधिका का फोन आया तो मैं उसका फोन रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मैं अपने ऑफिस में काम कर रहा था और अपने काम में मैं ज्यादा बिजी था इसलिए राधिका का फोन मैं रिसीव नहीं कर पाया था। परंतु जब मैंने शाम के वक्त राधिका को फोन किया तो मैंने राधिका से बात की और हम दोनों ने एक दूसरे से काफी बातें की। राधिका ने मुझे कहा कि तुमने मुझे काफी दिनों से फोन नहीं किया था तो मैंने सोचा कि आज तुमसे बात कर लेती हूं। मैंने और राधिका ने एक दूसरे से काफी बातें की और हम दोनों बहुत ज्यादा खुश थे उसके बाद मैंने फोन रख दिया था। राधिका और मै एक दूसरे से बात करते तो हमे अच्छा लगता था। हम दोनो एक दूसरे से बहुत खुश थे मैने उसके साथ एक रात सेक्सी बाते की तो मुझे अच्छा लगा और मैने राधिका को मिलने की बात कही। मै दिल्ली गया तो मैने राधिका को घर पर बुला लिया था। वह घर पर आ गई अब वह घर पर आ गई थी।

जब राधिका घर पर आ गई तो हम दोनों ही दूसरे के साथ बैठे हुए थे। जब मैंने राधिका की जांघों को सहलाना शुरु किया तो मुझे अच्छा लगने लगा था। राधिका को भी मजा आने लगा था उसके अंदर की गर्मी भी पूरी तरीके से बढ़ चली थी। वह अपने आपको एक पल के लिए भी रोक नहीं पा रही थी मैं समझ चुका था कि उसके अंदर की आग बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है और वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाएगी। मैंने अपने मोटे लंड को बाहर निकाला तो उसने तुरंत ही मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया। वह काफी देर तक ऐसे ही मेरे मोटे लंड को हिलाती रही जिससे कि उसे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लग रहा था। अब हम दोनों ही पूरी तरीके से उत्तेजित हो गए थे। राधिका ने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर ही समा लिया था और वह उसे सकिंग करने लगी तो उसे बहुत ज्यादा अच्छा लगने लगा था और मुझे भी बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था। मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा था। मैंने राधिका से कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं। वह मुझे कहने लगी मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है। मैंने राधिका को कहा क्यों ना मैं तुम्हारी योनि के अंदर अपने मोटे लंड घुसा दूं। राधिका मेरी बात सुनकर खुश हो चुकी थी। मैंने राधिका के कपड़े उतारने शुरू किए उसे अच्छा लग रहा था। मैंने राधिका की चूत को चाटना शुरु कर दिया था राधिका को मजा आ रहा था और मेरे अंदर भी गर्मी पैदा हो रही थी। मुझे मालूम था वह बिल्कुल भी रह नहीं पाएंगे। उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकल आया था। मैंने राधिका से कहा मैं तुम्हारी योनि में अपने लंड को डालना चाहता हूं। राधिका ने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया था।

जब राधिका ने अपने पैरों को चौड़ा किया तो मैंने राधिका की योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था राधिका की चूत के अंदर मैंने अपनी लंड को डाला तो वह जोर से चिल्लाई राधिका की चूत से खून बाहर की तरफ आ गया था। अब मुझे बहुत मज़ा आने लगा था। मैंने राधिका को तेजी से चोदना शुरु कर दिया था। जब मैं राधिका की योनि के अंदर बाहर लंड को करता तो मुझे अब और भी मजा आता। राधिका बहुत जोर से सिसकारियां ले रही थी उसके अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ चुकी थी। और मेरे अंदर की गर्मी भी अब बढ रही थी। मैंने राधिका से कहा मुझे लग रहा है मेरा वीर्य गिरने वाला है। राधिका ने कहा तुम मेरी चूत के अंदर ही अपने माल को गिरा दो। मैंने राधिका की चूत के अंदर ही अपने माल को गिरा दिया था। उसके बाद मैंने राधिका को दोबारा चोदना शुरू किया। राधिका की चूतडो को मैंने अपनी तरफ कर लिया था जिस से कि मुझे उसे चोदने में मजा आ रहा था।

मुझे इतना ज्यादा मजा आने लगा था कि मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और राधिका के अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैं जब राधिका के चूत के अंदर धक्के मारता तो राधिका को मजा आता और वह जोर से चिल्लाती। राधिका कहती मुझे ऐसे ही बस तुम धक्के देते जाओ। मैंने राधिका को बहुत देर तक ऐसे ही चोदा। जब मुझे लगने लगा मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका है और मेरा माल बाहर की तरफ आने वाला है तो मैंने अपने वीर्य से राधिका की चूत को नहला दिया था। राधिका की चूत को नहलाने के बाद मैं बहुत ज्यादा खुश था और राधिका भी बड़ी खुश हो गई थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ उसके बाद भी सेक्स का मजा लेते रहे। अब मैं मुंबई लौट आया था लेकिन जब भी मुझे राधिका की याद आती तो मैं उसे मिलने के लिए चला जाता। हम दोनों एक दूसरे के साथ शारीरिक सुख का पूरी तरीके से मजा लेते मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता था जब भी मैं राधिका के साथ शारीरिक सुख का मजा लिया करता था।

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