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मेरा लंड नौकरानी की गांड मे

Antarvasna, hindi sex stories: मेरी शादी को पांच वर्ष हो चुके हैं मेरी शादी हो जाने के बाद मेरी पत्नी की सरकारी नौकरी लग गई वह अध्यापिका के तौर पर स्कूल में पढ़ाने लगी लेकिन अभी कुछ समय पहले ही उसका ट्रांसफर बरेली हो गया जिस वजह से उसे बरेली जाना पड़ा घर पर मैं ही अकेला रह गया था। मैं लखनऊ में रहता हूं मेरी पत्नी कभी कबार लखनऊ आ जाया करती है हमारा एक बेटा है जिसकी उम्र तीन वर्ष है वह मेरे साथ ही रहता है मैंने उसकी देखभाल के लिए घर में एक मेड को रखा हुआ है। मैं भी सुबह के वक्त अपने ऑफिस निकल जाता हूं और शाम को घर लौट आता हूं मेरी एक जैसी ही दिनचर्या चल रही है। कुछ दिनों के लिए मेरी पत्नी घर आने वाली थी मेरी पत्नी चाहती थी कि वह कुछ समय हम लोगों के साथ बिताए। मेरी पत्नी माधुरी जब घर आई तो वह बहुत ही ज्यादा खुश थी वह मुझे कहने लगी कि कितने समय बाद मैं तुम लोगों के साथ अच्छा समय बिता पा रही हूं।

वह हमारे बेटे का भी ध्यान बड़े अच्छे से रखती लेकिन माधुरी मुझे कहने लगी कि रोहन क्यों ना तुम भी कुछ दिनों की छुट्टी ले लेते क्योकि मैं भी घर पर ही हूं। मैंने भी सोचा कि माधुरी बिल्कुल ठीक कह रही है मैं भी कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ही लेता हूं और मैंने कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली। मैंने जब अपने ऑफिस से छुट्टी ली तो मैं और माधुरी उसके मम्मी पापा के घर चले गए, माधुरी के पिता जी प्रिंसिपल रह चुके हैं लेकिन अब वह रिटायर हो चुके हैं और माधुरी के बड़े भैया जो कि विदेश में नौकरी करते हैं वह भी घर आए हुए थे इतने लंबे समय बाद पूरा परिवार एक साथ मिल रहा था और सब लोग बहुत खुश थे। माधुरी ने मुझे कहा कि रोहन हमने बहुत ही अच्छा किया जो कुछ दिनों के लिए पापा मम्मी के पास चले आए मैंने माधुरी से कहा माधुरी क्यों ना कुछ दिनों के लिए हम लोग मेरे पापा मम्मी के पास भी हो आते है। वह लोग गांव में ही रहते हैं पिताजी के रिटायर होने के कुछ वर्ष बाद पिता जी गांव में ही चले गए हमारा गांव लखनऊ से कुछ दूरी पर ही है।

माधुरी भी मुझे कहने लगी कि क्यों नहीं, हम लोग उनके पास भी मिलने के लिए जाएंगे लेकिन फिलहाल तो हम उस वक्त माधुरी के माता-पिता के साथ ही रहने वाले थे। मैं इस बात से खुश भी था कि चलो कम से कम माधुरी के चेहरे पर खुशी है माधुरी बहुत ही ज्यादा खुश थी। हम लोग दो दिन उनके घर पर रुके तो हमें बहुत ही अच्छा लगा और दो दिन बाद हम लोग अपने घर लौट आए थे। माधुरी ने मुझसे कहा कि रोहन तुम्हारे साथ समय बिता कर बहुत अच्छा लगता है मुझे तो लगता है कि मुझे अपनी नौकरी ही छोड़ देनी चाहिए और तुम्हारे साथ ही रहना चाहिए। मैंने माधुरी को कहा माधुरी यदि तुम ऐसा सोचती हो तो तुम अपने जॉब से रिजाइन भी दे सकती हो लेकिन मुझे मालूम है कि माधुरी जॉब से रिजाइन देने वाली नहीं है। मैं और माधुरी साथ में बैठे थे तो माधुरी ने मुझसे कहा कि क्यों ना हम लोग घर का सामान खरीद आते हैं। हमारे घर के पास ही एक सुपरमार्केट है हम लोग वहां चले गए और जब हम लोग वहां गए तो हम लोग सामान खरीदने लगे क्योंकि घर में राशन भी खत्म हो चुकी थी। माधुरी मुझे कहने लगी कि हम लोग राशन ले आते हैं अब हम लोग सुपर मार्केट से घर का सारा सामान खरीद लाए थे। जब हम लोग घर लौटे तो मेरे पापा का फोन मुझे आया और वह मेरे हाल चाल पूछने लगे उन्होंने मुझे कहा कि रोहन बेटा तुम कैसे हो तो मैंने उन्हें कहा पापा मैं तो बहुत अच्छा हूं। मैंने पापा से कहा आप लोग कुछ दिनों के लिए यहां क्यों नहीं आ जाते तो वह कहने लगे कि नहीं बेटा हम लोग अब यही खुश हैं। गांव में भी हमारी काफी संपत्ति है जिस वजह से पापा और मम्मी गांव में ही रहने लगे थे। माधुरी और मैं कुछ दिनों बाद मेरे पापा और मम्मी से मिलने के लिए गांव चले गए जब हम लोग गांव में गए तो गांव का माहौल बड़ा ही सुखद एहसास दिलाने वाला था और इतने समय बाद मैं गांव आया था तो पापा और मम्मी दोनों ही बहुत खुश थे। वह दोनों मुझे कहने लगे कि रोहन बेटा तुम यहां कितने दिन रुकने वाले हो मैंने उन्हें कहा अभी तो मुझे इस बारे में नहीं पता कि हम लोग यहां कितने दिन रुकने वाले हैं लेकिन फिलहाल तो मैं आप लोगों के साथ अच्छा समय बिताना चाहता हूं और कुछ दिन हम लोग गांव में ही है इस बात से पापा और मम्मी बड़े खुश थे। कुछ दिनों बाद हम लोग लखनऊ वापस लौट आए थे और जब हम लोग लखनऊ वापस लौटे तो माधुरी की छुट्टियां भी खत्म होने वाली थी और माधुरी मुझे कहने लगी कि मुझे बरेली वापस जाना पड़ेगा।

मैंने माधुरी को कहा क्या तुम कुछ और दिनों की छुट्टी नहीं ले सकती माधुरी ने कुछ और दिनों की छुट्टी तो नहीं ली लेकिन वह बरेली वापस जाने वाली थी। मैं माधुरी को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन तक गया मैं जब माधुरी को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन गया तो माधुरी और मैं साथ में रेलवे स्टेशन पर बैठे हुए थे ट्रेन अभी तक आई नहीं थी और हम दोनों ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। मैंने माधुरी को कहा तुम अब दोबारा कब आओगी तो माधुरी कहने लगी अभी तो मुझे लगता है कि शायद मैं रुक कर ही आऊंगी क्योंकि इतनी जल्दी अब छुट्टी मिल पाना मुश्किल ही होगा मैंने माधुरी को कहा ठीक है। माधुरी अपनी सहेली के साथ बरेली में रहती है हम दोनों बात कर रहे थे कि थोड़ी देर बाद ट्रेन आ गई। जब ट्रेन आई तो मैंने माधुरी का सामान उसकी सीट पर रख दिया मैं माधुरी के साथ ही बैठा हुआ था और थोड़ी ही देर बाद ट्रेन के चलने का समय हो गया तो मैं ट्रेन से उतरा और माधुरी बरेली के लिए निकल चुकी थी।

मैं भी वापस घर लौट आया था अगले दिन से मैं अपने ऑफिस सुबह चला जाता और शाम को घर लौट आता। माधुरी को काफी समय हो गया था जब वह घर नहीं आई थी मेरे और माधुरी के बीच फोन पर बात होती ही रहती थी। रविवार के दिन में घर पर ही था हमारे घर पर काम करने वाली मेड आ चुकी थी लेकिन मेरा बेटा बहुत ज्यादा रो रहा था मैंने उसे कहा तुम बच्चे को देखना वह बहुत ज्यादा रो रहा है। वह जब बच्चे को देख रही थी तो मैं उसकी तरफ देखने लगा मैं उसके स्तनों की तरफ अपनी नजर मार रहा था। मैंने कहा तुम मेरे पास आना, मैंने जब अपने घर में काम करने वाली मेड कांता को अपने पास बुलाया तो वह मेरे पास आकर बैठी और मैंने उसे कहा मुझे बहुत दिन हो गए हैं मैंने किसी के साथ मजे नहीं किए है तो क्या तुम मेरे साथ सेक्स करोगी। वह कहने लगी साहब यह सब ठीक नहीं है कांता की उम्र 28 वर्ष की है और कांता ने मुझे कहा साहब यदि किसी को इस बारे में पता चल गया। मैंने उसे कहा यह बात तुम्हारे और मेरे बीच ही रहेगी आखिरकार मैंने कांता को मना ही लिया। हम दोनो एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थे हम दोनो एक साथ बिस्तर पर लेटे हुए थे। मैंने कांता को कहा तुम अपने कपड़े उतार दो कांता ने अपने कपड़े उतार दिए कांता के सुडौल स्तनों को देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा था। मैं कांता की तरफ देख रहा था मैंने कांता से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लो उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया वह बड़े अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी। मैंने कांता से कहा देखो तुम थोड़ा और अच्छे से करो तो कांता बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को मुंह के अंदर बाहर ले रही थी वह मेरे गर्मी को बढ़ाती जा रही थी।

मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैंने भी कांता के स्तनों को अपने मुंह में ले लिया। जब मैंने उसके सुडौल स्तनों को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया तो वह भी इस कदर गर्म होने लगी कि अपनी चूत के अंदर उंगली डालने लगी। मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसा दिया मेरी उंगली जैसे ही उसकी चूत में घुसी तो मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मैं तुम्हारी चूत में उंगली को घुसा रहा हूं। वह मुझे कहने लगी साहब अब आप अपने मोटे लंड को मेरी चूत में डाल दो। मैंने भी कांता की चूत के अंदर अपने मोटे लंड को प्रवेश करवा दिया और कांता की चूत के अंदर मेरा मोटा लंड जाते ही वह मुझे कहने लगी सहाब और तेजी से चोदो। मैंने उसे बड़ी तेजी से चोदना शुरू किया और उसकी चूत के अंदर बाहर मे अपने लंड को बड़ी तेज गति से कर रहा था तो वह भी मुझे कहती ऐसे ही मुझे चोदते जाओ।

वह पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी और उसके अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी शायद वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी मैं भी अपने आपको रोक नहीं पा रहा था। कांता की चूत के अंदर बाहर मेरा लंड आसानी से हो रहा था और कांता की चूत से निकलता हुआ पानी इस कदर बढ़ चुका था कि वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकडने लगी क्योंकि वह अब झड़ चुकी थी इसलिए मुझे भी लगा मेरा वीर्य भी थोड़े समय बाद बाहर गिर ही जाएगा और थोड़े समय बाद मेरा वीर्य बाहर की तरफ गिर चुका था। मेरा वीर्य जैसे ही गिरा तो मैने कांता से कहा मेरा वीर्य अंदर ही गिर चुका है। वह कहने लगी कोई बात नहीं साहब मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश करते हुए कांता की गांड के अंदर भी अपने लंड को घुसा दिया और लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। कांता की बड़ी गांड मार कर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था मैंने बहुत देर तक कांता की गांड के मजे लिए जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मै बहुत ज्यादा खुश हो गया और कांता भी बहुत ज्यादा खुश थी। मेरी पत्नी की दूरी की वजह से ही मेरे और कांता के बीच सेक्स संबंध बने लेकिन कांता मेरा पूरा ध्यान रखती है और वह मुझे हमेशा ही खुश रखने की कोशिश करती है।

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