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मेरा लंड चूत के लिए पागल था

Antarvasna sex stories, desi kahani: पापा के रिटायर हो जाने के बाद पापा ज्यादातर घर पर ही रहा करते थे एक दिन पापा ने मुझे कहा कि राजेश बेटा मैं सोच रहा हूं कि हम लोग कभी फैमिली टूर पर जाएं। मैंने पापा से कहा कि पापा अगर आप कहें तो मैं कहीं जाने का प्लान बनाता हूं तभी मां रसोई से आई और कहने लगी बेटा क्यों ना हम लोग जयपुर चलें। मैंने मां से कहा हां मां वैसे तो तुम ठीक कह रही हो हम लोग जयपुर जा सकते हैं पापा ने कहा कि ठीक है बेटा तुम जयपुर जाने का प्लान बना लो। हम लोगों ने जयपुर जाने का प्लान बना लिया जब हम लोग जयपुर गए तो जयपुर में हम लोगों को काफी अच्छा लग रहा था और मैं काफी ज्यादा खुश भी था पापा मम्मी भी काफी खुश थे। हम लोग जयपुर में कुछ दिनों तक रहे और फिर उसके बाद हम लोग वापस मुंबई लौट आए जब मैं मुंबई लौटा तो मुझे अपने ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए कोलकाता जाना था और मैं कुछ दिनों के लिए कोलकाता चला गया।

जब मैं कोलकाता से वापस लौटा तो उस दिन मैं काफी ज्यादा थका हुआ था मैं सुबह ही घर पहुंच चुका था तो मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम बहुत थके हुए लग रहे हो तुम कुछ देर आराम कर लो तुम्हें अच्छा लगेगा। मैंने मां से कहा हां मां मैं भी यही सोच रहा हूं। मैं अपने रूम में सोने के लिए चला गया मैं जब अपने रूम में सोने के लिए गया तो मुझे काफी गहरी नींद आ गई और मैं सो चुका था। जब मैं उठा तो मां मेरे लिए खाना बनाकर ले आई थी मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम खाना खा लो मैंने मां से कहा कि हां मां मैं खाना खा लेता हूं। मां ने खाना टेबल पर रख दिया था और उसके बाद मै खाना खाने लगा। शाम के वक्त मैं अपनी कॉलोनी के पार्क में चला गया वहां पर मैं बैठा हुआ था तो मेरा दोस्त मोहन वहां पर आ गया मोहन ने मुझे कहा कि राजेश क्या तुम कुछ दिनों के लिए कहीं गए हुए थे। मैंने मोहन से कहा कि हां मैं कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में गया हुआ था मैं आज ही लौटा हूं। मैंने मोहन को कहा तुम बताओ तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है तो मोहन ने मुझे कहा कि मैंने तो अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया है मैंने मोहन को कहा लेकिन तुमने अपनी जॉब से रिजाइन क्यों दिया तो मोहन ने मुझे बताया कि वह कुछ समय में अपना बिजनेस शुरू करने वाला है।

मैंने मोहन को कहा चलो यह तो बहुत ही अच्छा है कि तुम अपना बिजनेस शुरू करने वाले हो। मैं और मोहन साथ में बैठे हुए थे तो मोहन ने मुझे कहा कि राजेश मैं चलता हूं मैंने मोहन को कहा ठीक है। राजेश वहां से जा चुका था उसके बाद मैं भी घर लौट आया मैं जब घर लौटा तो पापा भी अपने दोस्त के घर से लौट चुके थे वह अपने दोस्त से मिलने के लिए गए हुए थे। हम लोगों ने डिनर किया और डिनर करने के बाद मैं अपने रूम में लेटा हुआ था मैंने अपने फेसबुक को खोला तो मैंने देखा फेसबुक पर मुझे एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई हुई थी वह किसी लड़की की थी लेकिन मैं उसे जानता नहीं था। मैंने जब उसकी प्रोफाइल देखी तो मैं उस लड़की को पहचान नहीं पाया था लेकिन मैंने उसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली। कुछ दिनों बाद मुझे उस लड़की ने फेसबुक चैट पर मैसेज भेजना शुरू किया और हम दोनों की फेसबुक चैट पर बातें होने लगी अब हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे थे। उसने मुझे अपना नाम बताया और मैंने जब उससे पूछा कि क्या हम लोग इससे पहले भी कहीं मिले हैं तो सुनीता ने मुझे बताया कि हां हम लोग इससे पहले भी मिल चुके हैं। मैंने सुनीता को कहा लेकिन मुझे तो ध्यान नहीं है कि हम लोग कब मिले थे सुनीता ने मुझे कहा कि हम लोग दो वर्ष पहले मिले थे।

जब सुनीता ने मुझे याद दिलाया कि वह मुझे मेरे ऑफिस में ही मिली थी तो मैंने सुनीता को कहा कि हां मुझे अब ध्यान आया तुम मुझे ऑफिस में ही मिली थी तुम से मेरी मुलाकात पायल ने करवाई थी। पायल हमारे ऑफिस में अभी भी जॉब करती है सुनीता पायल की दोस्त है लेकिन सुनीता से जब मैंने बात की तो मुझे भी काफी ज्यादा अच्छा लगा और फिर मैं सुनीता से बातें करने लगा था। मैं यदि सुनीता से बातें करता तो मुझे अच्छा लगता हम लोगों की मुलाकात हो नहीं पाई थी लेकिन एक दिन मैंने सुनीता को फोन कर के कहा कि क्या हम लोग मिल सकते हैं तो सुनीता ने मुझे कहा कि हां क्यों नहीं। उस दिन हम लोगों ने मिलने का फैसला कर लिया था, उस दिन जब पहली बार मैं सुनीता को मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत अच्छा लगा। मैंने सुनीता को देखा तो मैं काफी ज्यादा खुश हुआ सुनीता बहुत ही ज्यादा सुंदर है और पहली ही नजर में मुझे ऐसा लगा कि जैसे सुनीता को मैं प्यार कर बैठा हूं। दो साल पहले जब सुनीता मुझे दिखी थी तो वह बहुत ही सिंपल सी थी लेकिन अब वह पूरी तरीके से बदल चुकी है। सुनीता मेरे बिल्कुल सामने बैठी हुई थी और मैं उसे देख रहा था मैंने सुनीता को कहा कि क्या तुम कुछ लोगी तो सुनीता ने मुझे कहा कि मेरे लिए कोल्ड कॉफी मंगा दीजिए। मैंने आर्डर कर के दो कोल्ड कॉफी मंगवा दी थी अब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और हम दोनों बातें कर रहे थे तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था।

मैंने सुनीता से उस दिन काफी देर तक बात की और उसके बाद मैं वापस घर लौट आया लेकिन मेरे सामने बार-बार सुनीता का चेहरा आ रहा था और मैं काफी ज्यादा खुश था मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा भी लग रहा था। मैंने सुनीता को फोन किया और सुनीता से मैंने काफी देर तक फोन पर बातें की, मैं जब सुनीता से बात करता तो मुझे अच्छा लगता और जिस दिन हम दोनों की बातें नहीं होती तो मुझे ऐसा लगता जैसे मेरा दिन ही अधूरा रह गया हो। सुनीता से बातें करना मुझे बहुत अच्छा लगता था हम दोनों की बातें बहुत होती और हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की सोचा करते थे। सुनीता भी मुझसे प्यार करने लगी थी और हम दोनों के बीच प्यार अब बहुत ज्यादा बढ़ने लगा था जिस वजह से सुनीता चाहती थी कि हम दोनों अपने परिवार वालों से अपने रिश्ते के बारे में बात कर ले। मैंने सुनीता को कहा कि सुनीता मुझे कुछ समय चाहिए होगा क्योंकि मैं नहीं चाहता कि अभी मैं शादी के बंधन में बंध जाऊं सुनीता ने कहा कि कोई बात नहीं। हम दोनों रिलेशन में थे और एक दूसरे के साथ काफी ज्यादा खुश भी हैं। एक रात मैंने सुनीता के साथ फोन पर बड़ी ही अश्लील बातें की और हम दोनों उस दिन बहुत ज्यादा गरम हो गए थे।

सुनीता ने मेरे लंड से भी पानी निकाल दिया था अब मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लगा था और मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुका था इसलिए मैंने सुनीता से कहा क्या हम लोग कल एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बना सकते हैं? सुनीता भी इस बात के लिए तैयार हो चुकी थी और अगले दिन जब हम दोनों मेरे घर पर मिले तो मैंने सुनीता को देखते ही उसकी जांघों को सहलाने शुरू कर दिया। उसके नरम होंठों को मैंने चूमना शुरू किया तो सुनीता को बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था। वह अब इतने ज्यादा गर्म होने लगे थे कि वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहे थे ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था। सुनीता के सामने मैंने जब अपने मोटे लंड को निकाल कर उसे हिलाना शुरू किया तो वह मेरे लंड को देखकर कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ही ज्यादा मोटा है। मैंने सुनीता को कहा तुम इसे अब अपने मुंह के अंदर लेकर तब तक चूसो जब तक मेरे लंड से पूरी तरीके से पानी बाहर ना आ जाए। सुनीता ने भी मेरी बात मान ली उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया उसे भी मजा आने लगा था। वह मेरे लंड को अपने गले के अंदर लेकर चूसती तो उसे आनंद आ रहा था और वह जब मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी तो मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आने लगा था। मेरे अंदर की भी गर्मी बढ़ने लगी थी। मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ने लगी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था और मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया। मैंने सुनीता के मुंह के अंदर ही अपने माल को गिराकर उसके मुंह को अपने माल से भर दिया था।

अब मुझे लग गया था मुझे सुनीता को चोदना चाहिए मैंने जब सुनीता की चूत को चाटना शुरू किया तो सुनीता की चूत चाटकर मुझे मज़ा आ रहा था और वह मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। मैंने सुनीता की योनि के अंदर लंड घुसाया और उसे चोदना शुरू किया। वह पूरी तरीके से गरम हो गई थी वह कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। मुझे भी बहुत ज्यादा आ रहा था अब मैंने सुनीता की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया था। जब मैंने ऐसा करना शुरू किया तो सुनीता की चूत से निकलता हुआ खून मेरी गर्मी को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था। मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा। मेरा मोटा लंड सुनीता की चूतडो से टकराने लगा था जिस से कि वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रही थी और अपनी मादक आवाज में वह सिसकारियां लेकर मुझे कहती तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते रहो। मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था मैंने सुनीता को तब तक चोदा जब तक मेरे अंदर की गर्मी बुझ नहीं गई। सुनीता की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ी हुई थी। मैंने सुनीता की चोदकर अपने माल को गिराकर उसकी इच्छा को पूरा कर दिया। वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिराकर उसकी इच्छा को पूरा कर दिया।

 

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