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मौसी के लड़के की शादी में मिली लड़की

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मेरा नाम रंजन है मैं मुंबई का रहने वाला 30 वर्ष का युवक हूं, मैं बहुत ही खुले ख्यालातो का हूं और मेरे घर में भी सब लोग बहुत खुले ख्यालातो के हैं। मेरी जब से पढ़ाई हुई है उसके बाद से हीं मैंने अपना काम शुरू कर दिया था। मैंने जब अपना काम शुरू किया तो मुझे शुरुआत में थोडी समस्या हुई लेकिन धीरे-धीरे मेरा काम अच्छा चलने लगा। मेरे साथ में मेरी मौसी का लड़का भी काम करता है। हम दोनों ने ही पार्टनरशिप में एक कंपनी खोली है जो कि बहुत अच्छा से चल रही है। मेरी मौसी के लड़के का नाम शांतनु है, वह बहुत ही मेहनती और ईमानदार लड़का है। हम दोनों के बीच में बहुत अच्छी दोस्ती है क्योंकि हम दोनों एक ही कॉलेज से पढ़े हैं इसीलिए हम दोनों के बीच में कॉलेज के समय से ही बहुत अच्छी दोस्ती थी और उसके तुरंत बाद ही हमने अपना काम शुरू कर दिया।

हम लोगों ने जब अपना काम शुरू किया तो उस वक्त हम दोनों को ही बहुत समस्याएं झेलनी पड़ी परंतु धीरे-धीरे अब हमारा काम बहुत अच्छे से चलने लगा। शांतनु की हमारे कॉलेज में गर्लफ्रेंड थी। शांतनु और वह दोनों एक दूसरे को बहुत पसंद करते हैं इसीलिए शांतनु ने अपने घर पर उसके बारे में बात कर ली थी और उसके घर वाले भी मान गए। उन दोनों के घर वाले तैयार थे इसीलिए शांतनु की शादी उन दोनों के परिवार वालों ने करवाने का फैसला कर लिया। जब शांतनु की शादी थी तो उस वक्त मैं भी उसकी शादी में गया था और मैंने उसकी शादी में बहुत ही मदद की,  मुझसे जितना हो सकता था मैंने उसकी शादी में उतना काम किया। उसकी शादी में एक लड़की आई हुई थी जो मुझे बहुत ही अच्छी लग रही थी लेकिन मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मैं शादी के कामों में व्यस्त था इसलिए मैं उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाया। जब उन दोनों की शादी हो गई तो उसके बाद शांतनु अपने हनीमून पर चला गया और मैं ही उस वक्त काम संभाल रहा था।

उसी बीच में एक बहुत बड़ा सेमिनार होने वाला था, मैं उसके सिलसिले में  चला गया। मुझे सेमिनार में वही लड़की दिखाई दी जो मुझे शांतनु की शादी में मिली थी लेकिन मैं उसे जानता नहीं था इसलिए मैं उससे ज्यादा बात नहीं कर पाया और जब वह मेरे पास में आ कर बैठी तो मैंने उससे पूछा कि क्या आप शांतनु की शादी में आए थे। वो कहने लगी कि हां मैं शांतनु की शादी में आई थी, वह हमारे पड़ोस में ही रहते हैं। मैंने जब उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम मुझे बताया, उसका नाम शीतल है और उसका भी अपना एक बिजनेस है। वह सेमिनार में आई थी।

मैंने जब उसे बताया कि शांतनु मेरे मौसी का लड़का है और हम दोनों बिजनेस में साथ ही पाटनर है। उसके बाद हम दोनों की बात काफी देर तक हुई और हम लोगों ने वहां सेमिनार अटेंड करने के बाद साथ में ही लंच किया। मैंने उससे पूछा कि आपके घर पर कौन-कौन है तो वह कहने लगी कि मेरे घर पर मेरे माता-पिता और मेरे बड़े भैया हैं, जिनकी शादी हो चुकी है  मुझे शीतल के साथ बात करते हुए बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि वह मुझसे बहुत ही कंफर्टेबल हो कर बात कर रही थी और जिस प्रकार से वह बात कर रही थी मैं उसे बस देखे ही जा रहा था। उसका बात करने का तरीका बहुत ही अच्छा है और मुझे भी बहुत अच्छा लगा वह जिस प्रकार से बात कर रही थी। हमने काफी देर तक बात की और उसके बाद वह कहने लगी कि मैं अभी चलती हूं आप मुझे अपना विजिटिंग कार्ड दे दीजिए, मैं आपको कॉल कर लूंगी। मैंने उसे अपना विजिटिंग कार्ड दे दिया और उसके बाद वह चली गई लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ शीतल का चेहरा ही आ रहा था और मुझे लगने लगा कि वह मेरे लिए एकदम सही लड़की है क्योंकि मैं जिस प्रकार की लड़की के बारे में सोचता हूं उसका नेचर बिल्कुल वैसा ही है लेकिन मैंने उसका नंबर नहीं लिया था इस वजह से मैं उससे बात नहीं कर सकता था। अब मैं अपने काम में ही लगा हुआ था और शांतनु भी अभी तक आया नहीं था क्योंकि उसने मुझे कह दिया था कि मैं एक महीने तक काम पर नहीं आ पाऊंगा इसी वजह से मुझे ही सारा काम देखना पड़ रहा था। उसी बीच में शीतल ने एक दिन मुझे फोन कर दिया और मुझसे कहने लगी कि मैं आपके ऑफिस के बाहर ही खड़ी हूं, जब वह हमारे ऑफिस में आई तो वह कहने लगी कि आपने ऑफिस तो बहुत ही अच्छे से डेकोरेट करवा रखा है।

मैंने उसे कहा कि इसमें बहुत समय लगा और बहुत मेहनत करनी पड़ी। हम दोनों ही साथ में बैठकर बातें कर रहे थे और वह मुझे कहने लगी कि यदि आपके पास समय हो तो हम लोग कहीं घूमने चलते हैं, मैंने उसे कहा ठीक है मैं थोड़ा अपना काम कर लेता हूं उसके बाद हम लोग घूमने के लिए चल पड़ेंगे। मैंने अपना पूरा काम किया और मैं शीतल के साथ घूमने के लिए चला गया। मैंने उसे पूछा कि हम लोग कहां जाने वाले हैं, वह कहने लगी कि मुझे मॉल में शॉपिंग करनी है और उसके बाद वहीं कुछ देर हम लोग बैठ कर बातें कर लेंगे। अब शीतल और मैं शॉपिंग करने के लिए चले गए। शीतल बहुत ही शॉपिंग कर रही थी। मैंने उससे पूछा कि तुम इतना सारा सामान किस के लिए खरीद रही हो, वह कहने लगी कि मुझे शॉपिंग करना बहुत अच्छा लगता है यह सब मैं अपने लिए ही ले रही हूं। उसने जब शॉपिंग खत्म कर ली तो हम लोग मॉल में ही बैठे हुए थे। वहां हमने काफी देर तक बात की, उसके बाद मैंने शीतल को उसके घर पर छोड़ दिया। उसका नंबर भी मेरे पास आ चुका था इसलिए मैं उसे फोन करने लगा। मैं शीतल को जब भी फोन करता तो वह बहुत खुश होती थी लेकिन हम दोनों ने एक दूसरे से अपने दिल की बात नहीं कही थी। वह मुझे बहुत अच्छी लगती थी परंतु ना तो शीतल ने मुझे कभी अपने दिल की बात कही और ना ही मैंने उसे कभी अपने दिल की बात कही थी।

उसी वक्त शांतनु भी वापिस आ गया और मैंने जब उससे पूछा कि तुम्हारा हनिमून कैसा रहा, तो वह कहने लगा मेरा हनीमून तो बहुत ही अच्छा था। हम दोनों ने बहुत एंजॉय किया और जमकर मस्ती की। शांतनु मुझे अपनी फोटुएं दिखाने लगा और कहने लगा कि यह हमने अपने हनीमून के समय में ली थी। वह मुझे कहने लगा कि तुम भी जल्दी से शादी कर लो, मैंने उसे कहा मैं भी सोच रहा हूं मैं जल्दी शादी कर लूं। जब मैंने उसे शीतल के बारे में बताया तो वह मुझे कहने लगा कि तुमने तो बहुत जल्दी छलांग मार ली, मैं तो सोच रहा था तुम काम कर रहे हो परंतु तुम तो आशिकी कर रहे हो। मैंने उसे कहा ऐसी कोई भी बात नहीं है, हम दोनों की मुलाकात तुम्हारी शादी के वक्त ही हुई थी, उसके बाद मेरी मुलाकात एक सेमिनार में उससे हो गई और उसके बाद हम दोनों की बातें आगे बढ़ने लगी। मैंने जब शांतनु से शीतल के बारे में पूछा तो वह कहने लगा कि वह बहुत ही अच्छी लड़की है और मैंने आज तक उसे कभी भी किसी लड़की के साथ नहीं देखा और ना ही उसके बारे में मैंने कभी किसी के मुंह से कुछ गलत सुना है। शांतनु कहने लगा कि एक दिन तुम शीतल को ऑफिस में ही बुला लो, उस दिन मैं भी उससे मुलाकात कर लूंगा। मैंने जब शीतल को फोन किया तो वह अगले दिन ही हमारे ऑफिस में आ गई। शांतनु के साथ वह पहले से ही बात करती थी इसलिए वह दोनों आपस में बहुत बात कर रहे थे। जब शांतनु ने ऐसे ही शीतल से पूछा कि तुम दोनों बात करते हो  और यह बात तुमने मुझे बिल्कुल भी नहीं बताई। थोड़ी देर बाद शांतनु यह कहते हुए ऑफिस से चला गया और कहने लगा कि मैं घर जा रहा हूं, तुम लोग आपस में बैठकर बातें करो, अब हम दोनों बैठ कर बात कर रहे थे।  मैं और शीतल आपस में बैठकर बात कर रहे थे तब मेरा हाथ शीतल ने पकड़ लिया और मैंने भी उसके हाथों को जोर से दबा दिया उसका शरीर पूरा गर्म होने लगा था और उसके हाथों से पसीना बाहर की तरफ निकल रहा था।

मैंने जैसे ही उसके होठो को अपने होठों में लिया तो उसने भी मुझे अच्छे से किस करना शुरू कर दिया और मैंने उसके होठों पर अपने दांत के निशान भी मार दिए। उसे बहुत अच्छा महसूस होने लगा जब मैंने उसके होठों पर दांत के निशान मारे। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए शीतल के मुंह में डाल दिया। वह मेरे लंड को चूसने लगी और मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी उसने मेरे लंड को अपने गले तक उतार लिया। मैंने जब उसके कपड़े खोले तो उसने नेट वाली पैंटी और ब्रा पहनी हुई थी। उसके गोरे गोरे स्तनों को जब मैंने अपने मुंह में लिया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने काफी देर तक उसके स्तनों को अपने मुंह में लिया। मैंने उसे अपने सोफे में लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को खोला दिया तो उसकी योनि से चिपचिपा पदार्थ निकलने लगा। मैंने जब उसकी योनि में लंड डाला तो वह चिल्लाने लगी और उसकी चूत से खून की पिचकारी मेरे लंड पर आ गिरी। मैंने उसके दोनों पैरों को कस कर पकड लिया और बड़ी तेज गति से मैं उसे चोदे जा रहा था। जिससे कि उसका पूरा शरीर गरम होने लगा और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और उसकी गांड को चाटने लगा। मैंने उसकी गांड को चाट चाट को मुलायम बना दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी गांड में घुसा तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी तुमने तो मेरी गांड फाड़ कर रख दिया है। मैंने उसकी चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेजी से मैं उसे झटके दे रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसकी गांड म धक्का मारता जाता। उसका शरीर बहुत ज्यादा मस्त था और मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा जब मैं उसे धक्के मारता उन्ही झटको के बीच में ना जाने कब मेरा वीर्य पतन हो गया और मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

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