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मैं और मेरी पत्नी आशा

Hindi sex story, antarvasna मेरे दोस्त रजत ने मुझे अपने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया था मैं और मेरी पत्नी आशा हम दोनों जब रजत के घर गए तो रजत की पत्नी और रजत बड़े ही खुश थे। हम लोगों ने उनके साथ में काफी अच्छा समय बिताया उसके बाद हम लोग घर लौट आए थे। जब हम लोग घर लौटे तो उस वक्त काफी देर हो चुकी थी और काफी रात हो गई थी। हम लोग घर आए तो मुझे अगले दिन अपने ऑफिस जल्दी जाना था इसलिए मैं सो चुका था और अगले दिन मैं अपने ऑफिस जल्दी निकल गया था। जब मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन मुझे ऑफिस में काफी काम था और घर लौटने में मुझे काफी देर हो गई थी जिस वजह से मुझे मेरी पत्नी आशा ने कहा कि आज आप काफी देरी से घर आ रहे हैं। मैंने आशा को कहा कि ऑफिस में आज काफी ज्यादा काम था इस वजह से मुझे घर आने में देर हो गई। आशा और मेरे बीच काफी अच्छी बनती है और हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। मैं और आशा एक दूसरे के साथ जब भी होते हैं तो हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता है और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं।

जिस तरीके से मैं और आशा एक दूसरे के साथ अपने शादीशुदा जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं उससे हम दोनों की जिंदगी अच्छे से चल रही है और हमारे जीवन में बहुत ही खुशियां हैं। मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता हूं और मैं जिस कंपनी में जॉब करता हूं उस कंपनी में मुझे जॉब करते हुए करीब 5 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। इन 5 वर्षों में मेरे जीवन में काफी कुछ बदलाव आया है मेरी शादी को दो वर्ष हो चुके हैं और जब से मेरी जिंदगी में आशा आई है तब से मेरी जिंदगी में सब कुछ ठीक चलने लगा है और पापा मम्मी भी बड़े खुश हैं। हालांकि पापा मम्मी हम लोगों के साथ नहीं रहते हैं लेकिन फिर भी जब वह लोग मुंबई आते हैं तो उन लोगों को बड़ा ही अच्छा लगता है और मुझे भी बहुत अच्छा लगता है जब भी पापा मम्मी हम लोगों से मिलने के लिए मुंबई आया करते हैं। एक दिन मैं और आशा साथ में बैठे हुए थे तो उस दिन हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे आशा ने मुझे कहा कि क्यों ना हम लोग कुछ दिनों के लिए दिल्ली हो आए। मैंने भी आशा से कहा कि तुम ठीक कह रही हो कि हम लोगों को कुछ दिनों के लिए दिल्ली चले जाना चाहिए।

पापा और मम्मी से मिले हुए भी काफी टाइम हो चुका था इसलिए मैंने और आशा ने सोचा कि क्यों ना हम लोग कुछ दिनों के लिए दिल्ली हो आये। मैं जब अगले दिन अपने ऑफिस गया तो मैंने ऑफिस से ही ट्रेन की टिकट बुक कर दी थी और मैं कुछ दिनों के बाद अपनी पत्नी आशा के साथ दिल्ली जाने का प्लान बना चुका था। हम लोग कुछ दिनों के बाद जब दिल्ली गए तो पापा और मम्मी बड़े खुश थे। जब हम लोग पापा मम्मी को मिले तो वह लोग हमें कहने लगे कि तुम लोग कितने समय बाद हम लोगों से मिलने के लिए आ रहे हो। पापा अभी भी अपनी जॉब से रिटायर नहीं हुए हैं इसीलिए वह लोग दिल्ली में रहते हैं पापा एक वर्ष बाद रिटायर होने वाले हैं। पापा और मम्मी चाहते हैं कि जब वह रिटायर हो जाए तो उसके बाद वह लोग हमारे साथ मुंबई में ही रहे। मैं कुछ दिनों तक घर पर ही रहने वाला था। मैं काफी समय से अपनी बहन राधिका को भी नहीं मिल पाया था तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं राधिका को मिलने के लिए जाऊं। मैं और मेरी पत्नी आशा राधिका को मिलने के लिए चले गए।

राधिका मुझसे उम्र में 3 वर्ष छोटी है और उसकी शादी पिछले वर्ष ही हुई है। जब हम लोग राधिका से मिलने के लिए उसके घर पर गए तो वह काफी खुश थी और मुझे इस बात की बहुत खुशी थी की राधिका की जिंदगी अच्छे से चल रही है और उसके पति उसका बहुत ध्यान रखते हैं। उसकी जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा है राधिका से मिलकर मैं और आशा काफी खुश थे। काफी समय बाद मैं राधिका को मिला था इसलिए मुझे बड़ा ही अच्छा लगा था जिस तरीके से मैंने राधिका से मुलाकात की और राधिका भी बड़ी खुश थी। मैं और आशा घर लौट आए थे हम लोग जितने दिन भी दिल्ली में रहे उतने दिन हम लोग बड़े ही खुश थे और उसके बाद हम लोग मुंबई वापस लौट आए थे। जब हम लोग मुंबई लौटे तो एक दिन आशा की तबीयत अचानक खराब हो गयी उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं थी। आशा ने मुझे कहा कि आज आप ऑफिस से छुट्टी ले लीजिए तो मैंने भी उस दिन ऑफिस से छुट्टी ले ली थी।

मैं उस दिन आशा के साथ ही समय बिताना चाहता था और आशा को मैं डॉक्टर के पास भी लेकर गया था। डॉक्टर ने आशा को कुछ दवाइयां दी और वह अब ठीक हो चुकी थी। आशा का बुखार ठीक हो चुका था और अगले दिन से मैं अपने ऑफिस जाने लगा था जब आशा की तबियत ठीक हो गयी तो मैं बड़ा ही खुश था और आशा भी बहुत ज्यादा खुश थी। हम दोनों के जीवन में बड़ी ही खुशियां हैं और हम दोनों बहुत ही अच्छे तरीके से एक दूसरे के साथ में समय बिताते हैं। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं तो हम दोनों को बड़ा अच्छा लगता है। काफी दिन हो गए थे मैं अपने दोस्त रजत को भी नहीं मिला था। मैं जब अपने दोस्त रजत को मिलने के लिए उसके घर पर गया तो रजत काफी परेशान था मैंने रजत को उसकी परेशानी का कारण पूछा तो उसने मुझे बताया कि उसकी बहन और उसके पति के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। इस वजह से रजत काफी ज्यादा परेशान था और उसकी फैमिली में भी काफी ज्यादा तनाव था। मैंने रजत को समझाया और कहा कि तुम्हें अपनी बहन और उसके पति से इस बारे में बात करनी चाहिए तो रजत ने भी कहा कि हां तुम ठीक कह रहे हो।

अगले दिन जब रजत ने उन लोगों से बात की तो उन लोगों के बीच में कुछ भी ठीक नहीं था लेकिन धीरे धीरे अब उन लोगों के बीच में सब कुछ ठीक होने लगा था जिससे कि रजत भी काफी खुश था। रजत मुझे कहने लगा कि यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है। मैंने रजत को कहा कि मेरी वजह से कुछ भी नहीं हुआ है अगर तुम अपनी बहन और उसके पति से बात नहीं करते तो शायद उन लोगों के बीच और भी ज्यादा झगड़े बढ़ जाते जो कि बाद में ठीक नहीं हो पाते तुमने बहुत ही सही किया जो तुमने अपनी बहन और उसके पति से इस बारे में बात की। अब रजत बड़ा खुश था वह हमारे घर पर भी अक्सर आता रहता है। जब भी वह घर पर आता है तो मुझे काफी अच्छा लगता है और वह भी बहुत खुश रहता है जब भी वह मुझसे मिलता है। आशा और मैं एक दिन आशा की दीदी के घर पर गए हुए थे। जब हम लोग आशा की दीदी के घर गए तो उस दिन आशा और मैं रात के वक्त एक दूसरे के साथ लेटे हुए थे। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे मेरा हाथ आशा के स्तनों पर था।

जब मैं आशा के स्तनों को दबाने लगा तो मुझे मज़ा आ रहा था और आशा को भी मजा आने लगा था। मैंने आशा के होंठो को चूमना शुरू कर दिया था जब मैं उसके नरम होठों को चूम रहा था वह पूरी तरीके से गर्म हो रही थी मैं भी गरम होता जा रहा था। मैं और आशा एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे जब मैंने आशा के कपड़ों को खोल कर उसकी गर्मी को बढ़ाने लगा तो वह रह नहीं पाई। मैंने आशा के निप्पल को चूसना शुरू किया और आशा के निप्पलो का चूस कर मुझे बहुत ही आनंद आने लगा था। मैं जिस तरीके से उसके निप्पलो का रसपान कर रहा था उससे वह गरम होती जा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आने लगा है आशा और मैं एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे। मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा था। आशा ने मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया वह उसे हिलाने लगी। थोड़ी देर तक आशा ने मेरी लंड को हिलाया जब उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा था और आशा को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते चले गए हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे।

मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा था आशा भी अपने आप पर काबू नहीं कर पाई। मैंने जब आशा के दोनों पैरो को खोलकर उसकी योनि में अपने लंड को घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे बोली मेरी चूत में दर्द होने लगा है। अब मैं आशा को तेजी से धक्के मारने लगा था आशा और मैं एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे वह अपने पैरों को खोल रही थी ताकि मेरा लंड आसानी से उसकी योनि में जा सके। जब मैं अपने लंड को आशा की योनि के अंदर बाहर करता तो वह जोर से चिल्ला रही थी और मुझे कहती मुझे मजा आ रहा है तुम मुझे ऐसे ही धक्के देते जाओ। मैंने आशा को तेजी से धक्के दिए।

अब आशा और मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे हम दोनों की गर्मी बढ़ चुकी थी। मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था मैंने आशा के पैरों को अपने कंधे पर रख लिया था। मैंने आशा को तेजी से धक्के मारने शुरू किए। मैं उसकी चूतड़ों से पर तेजी से प्रहार कर रहा था और उसकी चूतडो से आवाज आ रही थी जो मेरी गर्मी को बढ़ाती जा रही थी। अब आशा ने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था। मैंने जैसे ही आशा की योनि के अंदर अपने माल को गिराया तो वह खुश हो गई थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने जब अपने लंड को आशा की योनि से बाहर निकाला तो आशा की योनि से मेरा माल टपक रहा था। आशा बहुत ज्यादा खुश थी उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों ने सेक्स के मज़े लिए है।

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