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मैं अपनी बहन का प्रेमी-1

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मेरा नाम रमन है और मैं अपनी बहन का प्रेमी हूँ. ये मेरी कहानी आप पसंद करेंगे अगर आप इन्सेस्ट में दिलचस्पी रखते हैं. मेरी बहन आज मेरी पत्नी बन के रह रही है. मेरी कहानी आपको कैसी लगी इस बहन के यार को ज़रूर लिखना.

मेरा नाम रमन है . मैं नीता दीदी को जब से नहाते हुए देख चुका हूँ, मेरी ज़िंदगी ही बदल गयी. नीता दीदी उस वक्त साबुन मल के नहाने में लगी हुई थी जब मैने देखा की बाथरूम का डोर लॉक नहीं किया हुआ.

दीदी अपनी चूत को मल रही थी और बार बार उसकी कामुकता भरी सिसकी निकल जाती थी. मेरी दीदी का दूधिया जिस्म पानी की बूँदों से चमक रहा था और उनकी चुचि मुझे दीवाना बना रही थी. दीदी की आँखें बंद थी क्यों कि उन्हों ने चेहरे पर साबुन लगा रखा था.

मैने देखा कि दीदी अब चूत में उंगली कर रही थी. मेरी दीदी मस्ती में आ कर मॅसर्बेशन कर रही थी. मैने सोचा कि ज़रूर किसी मर्द के बारे कल्पना कर रही होगी. काश वो मर्द मैं होता!!! दीदी की साँसें तेज़ी से चल रही थी. उसकी सिसकी मुझे सुनाई पड़ रही थी.

तभी मेरा हाथ अपने आप मेरे लंड पर चला गया और मैं उसको अप्पर नीचे हिलाने लगा. दीदी अचानक मूडी और अब उसकी गांड मेरी तरफ आ गयी. गोल गोल गोरे चूतड़ मेरी नज़र के सामने थे और दीदी अब शवर के नीचे खड़ी थी और शवर की धारा सीधी दीदी की चूत पर गिर रही थी.

मेरा हाल बुरा हो रहा था और मैने अपना लंड बाहर निकाल कर मूठ मारनी शुरू कर दी. “ओह……….आआआअररर्रघ” की आवाज़ नीता दीदी के होंठों से निकली. मैं समझ गया कि दीदी झड़ गयी थी. मैं सीधा अपने रूम में गया और मूठ मारता रहा. जब मेरा लंड पिचकारी छोड़ रहा था तो नीता दीदी का जिस्म मेरी आँखों के सामने था. इतना लावा मेरे लंड से आज तक ना निकला था.

जब भी दीदी की शादी की बात चलती तो मैं उदास हो जाता. कई रिश्ते आए लेकिन राकेश जीजा जी का रिश्ता फाइनल कर लिया गया. मम्मी के कहने पर जीजा जी ने सुहागरात हमारे घर पर मनाई. मैने सोचा कि अगर अपनी बहन के साथ सुहागरात नहीं मना सका तो क्या हुआ, कम से कम अपनी बहन को सुहागरात मनाते हुए तो देख सकता हूँ.

बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला था जिसको जीजा जी बंद करना भूल गये. मेरी किस्मत अच्छी थी. रात के 10 बजे दीदी बेड पर जीजा जी की वेट कर रही थी. मेरी बहना रानी लाल जोड़े में सजी हुई किसी परी से कम नहीं लग रही थी. तभी जीजा जी ने परवेश किया.

लगता था कि उन्हों ने पी हुई थी. वो सीधा अपना पाजामा खोलते हुए अपना लंड नीता दीदी के होंठों से लगाने लगे और बोले,”जानेमन, बहुत दिल कर रहा है लंड चुसवाने के लिए, जल्दी से चूस कर झड़ दे इसको फिर चोदुन्गा तेरी चूत और गांड आज!!”

दीदी ने नफ़रत से मूह दूसरी तरफ मोड़ लिया. “ये क्या बद-तमीज़ी है? कितनी गंदी बात कर रहे हैं आप? पेशाब वाला…छ्ह्ही..और ये क्या बोल रहे हैं आप?” लेकिन जीजा जी ने दीदी को बालों से खींचा और अपना सूपड़ा दीदी के कंठ तक धकेल दिया, ”चल हरामजादि, नखरे करती है? साली शादी की है तेरे साथ. अच्छी तरह चूस और फिर मेरे लंड के मज़े लूटना अपनी चूत में”

दीदी के मुख से गूऊव….गूऊव की आवाज़ आ रही थी और वो लंड को मुख से बाहर निकालने की कोशिस कर रही थी. लेकिन जीजा जी ज़बरदस्ती अपने लंड की चुस्वाई करवा रहे थे. जीजा जी अपनी कमर हिला हिला कर दीदी के मूह में लंड धकेल रहे थे.

आख़िर दीदी के मूह में जीजा जी के लंड का फॉवरा छ्छूट पड़ा. दीदी के हलक से एक चीख निकली और जीजा जी के लंड रस की धारा दीदी के होंठों से उनके चेहरे पर फैल गयी. दीदी के मूह से लंड रस टपकने लगा और दीदी ने उल्टी करनी शुरू कर दी.
“ये क्या कर रहे थे? उफफफफ्फ़ मेरा मन खराब हो गया…..उफ़फ्फ़ कितना गंदा है……” दीदी बोल रही थी और जीजा जी हैरानी से देख रहे थे. “साली क्या हुआ? लंड चूसना तो औरत को बहुत अच्छा लगता है…तुझे क्यों पसंद नहीं?

उल्टी क्यों कर दी? तुमने कभी लंड नहीं चूसा क्या?’ दीदी ने ना में सिर हिलाया. मैं समझ गया कि जीजा जी एक चालू इंसान हैं और दीदी भोली भली लड़की थी. जीजा जी शायद रंडीबाजी करने वाले थे और मेरी दीदी को भी एक रंडी की तरह चोदना चाहते थे.

दीदी ने मूह सॉफ किया और बाथरूम की तरफ बढ़ी. मैं जल्दी से खिसक गया. दीदी बाथरूम में पानी से अपना मूह सॉफ करती रही. मुझे जीजा जी पर बहुत गुस्सा आ रहा था और अपनी दीदी पर प्यार. उस रात नीता दीदी बहुत चिल्लाई और चीखी.

शायद जीजा जी ज़बरदस्ती दीदी को चोद रहे थे. “बस करो…भगवान के लिए छोड़ दो मुझे…मैं नहीं ले सकती इतना बड़ा…….आआहह….ऊओह..नाआआअ….बहुत दर्द होता है…..नाहीं…प्लीज़, छोड़ दो मुझे!!!!!” मैं दीदी की हालत देख कर सारी रात सो ना सका.
अगली सुबह दीदी का चेहरा उत्तरा हुआ था. मैने मम्मी को कहते हुए सुना,’नीता.मर्द सब कुछ करते हैं…..बस झेल ले राकेश का…थोड़ी देर की बात है…आदत पड़ जाए गी…बेटी बड़ा तो किस्मत वाली को मिलता है…..

मज़े करोगी..राकेश बहुत अमीर है..तेरी तो ऐश हो गी!!!” लेकिन मैने मन बना लिया. मेरी दीदी ऐश तो करेगी लेकिन जीजा जी के पैसे से और अपने भाई के लंड से. जीजा जी अपने शहर चले गये और मैं जीजा जी की जासूसी करने लग पड़ा.

मुझे पता चला कि जीजा जी दीदी को प्यार नहीं करते. अगर चोद्ते भी हैं तो ज़बरदस्ती. जीजा जी के ऑफीस में उनका चक्कर उनकी सेक्रेटरी के साथ चल रहा था. मुझे ये भी पता चला कि, जीजा जी की मौसी की लड़की नीता भी उनके घर में रहती थी जो कि शादी के बाद अपने पति से अलग हो कर जीजा जी के साथ ही रहती थी.

जीजा जी के घर के नौकर ने बताया कि जीजा जी ने अपनी मौसेरी बहन को रखैल बना रखा था. औरत सब कुछ बर्दाश्त कर लेती है लेकिन सौतन नहीं. अब मुझे अपनी दीदी को वापिस अपने पास बुलाना था. “जीजा जी, अगर अपनी दीदी को आप से वापिस ना ले लिया तो मेरा नाम राकेश नहीं” मैने अपने आप से वादा किया.

अब मैने जीजा जी के नौकर को रिश्वत दे कर जीजा जी और उनकी बहन के साथ चुदाई की तस्वीरें खींचने के लिए राज़ी किया. नौकर बड़ा हरामी था. फिर मैने जीजा जी के ऑफीस से पता लगाया कि जीजा जी हर शनि वार अपनी सेक्रेटरी के साथ कब रंग रलियाँ मनाने जाते हैं.

हर हफ्ते उनकी सेक्रेटरी मोना और जीजा जी बिज़्नेस ट्रिप का बहाना बना कर सुबा चले जाते थे और रात को वापिस लौट आते थे. एक बार मैने पीछा किया और देखा कि शाहर के बाहर एक होटेल संगम में उनका कमरा बुक होता था. कमरा नंबर था 439. मैं प्लान बना कर होटेल में गया और एक दिन पहले मैने 439 रूम बुक कर लिया.

रूम के अंदर कॅमरा फिट कर लिया और एक रिकोडर लगा दिया और फिर होटेल के मॅनेजर से बोला,’ मुझे 440 नंबर कमरा भी चाहिए. मनेजर बोला,”सर, 439 नंबर आपको खाली करना पड़ेगा. बस एक दिन के लिए. उसके बाद आप फिर कमरे रह सकते हैं” मैं भी यही चाहता था.

कमरा बिल्कुल बेड के सामने था और अपना काम ठीक करेगा. उस शनिवार को जब जीजा जी वापिस लौटे तो मैं 440 नुंबेर्र कमरे में बैठ कर जीजा जी की सारी फिल्म देख रहा था. अब वक्त था जीजा जी को 440 वॉल्ट का झटका देने का.

उधर जीजा जी का नौकर भी मेरे पास जीजा जी और उनकी मौसेरी बहन की फोटो ले आया. मैने उसको पैसे दिए और नीता दीदी को मिलने उनके घर चला गया. शाम का वक्त था. दीदी पिंक सारी पहने हुए थी. गुलाबी रेशमी सारी में दीदी का गुलाबी जिस्म बहुत मस्त लग रहा था.

डीप कट ब्लाउस से दीदी की चुचि का कटाव सॉफ दिखाई पड़ रहा था. दीदी का जिस्म कुछ भर चुका था और उनके नितंभ बहुत सेक्सी हो चुके थे. मुझे देख कर दीदी मेरी तरफ दौड़ कर चली आई. मैने दीदी को बाहों में भर लिया.

लेकिन अब मैने दीदी को बाहों में लिया जैसे एक आशिक बाहों में लेता है, भाई नहीं!! दीदी ने मेरे मूह चूम लिया और मुझ से लिपटने लगी,”राकेश, मेरे भाई!!इतनी देर से मुझे क्यों नहीं मिलने आया? अपनी बहन से नाराज़ हो क्या? तेरी बहुत याद आ रही थी, भाई!!” मेरे हाथ दीदी के बदन पर रेंग रहे थे और मैं भी दीदी को चूम रहा था. मेरे हाथ अचानक दीदी के नितंभों पर गये और मेरा लंड खड़ा हो गया. दीदी के नितंभ मानो रेशम हों.
जब हम अलग हुए तो मैने जान बुझ कर पुछा,”दीदी जीजा जी कहाँ हैं?” नीता के माथे पर थोड़े बल पड़े लेकिन वो मुस्कुराते हुए बोली,”ऑफीस में होंगे” मैं भाँप गया कि दीदी खुश नहीं है. दीदी शीशे के सामने अपने बॉल संवार रही थी और मेरी नज़र दीदी की गांड पर थी.

“दीदी, तुम खुश नहीं दिख रही. जीजा जी तेरा ख्याल भी रखते हैं या नहीं. मुझे तो जीजा जी का चल चलन ठीक नहीं लगता.” कहते हुए मैं दीदी की पीठ के साथ सॅट कर खड़ा हो गया. शीशे में दीदी की गोरी चुचि उप्पेर नीचे होती दिख रही थी.

मेरी दीदी मालिका शेरावत लग रही थी. मैने दीदी को पीछे से आलिंगन में ले लिया. मैने अपने होंठ दीदी की गर्दन में छुपाते हुए कहा,” कहीं जीजा जी तुमको धोखा तो नहीं दे रहे? मैने सुना है कि जीजा जी बहुत अयाश किस्म के आदमी हैं. उनका अपनी सेक्रेटरी के साथ अफेर चल रहा है और ……..”

दीदी के होंठ काँप रहे थे “और क्या?’ मैने दीदी की चुचि पर हाथ रख दिया और बोला,”सुना है कि जीजा जी का संबंध उनकी मौसेरी बहन के साथ भी है” दीदी मुझ से अलग होने लगी,” राकेश, क्या बक रहे हो? और तुम मेरे जिस्म को क्यों छेड़ रहे थे? राकेश, मैं तेरी बहन हूँ!!! मेरे पति के बारे में झूठ मूठ मत बोलो!!!”

मैने दीदी को फिर से आलिंगन में ले लिया और इस बारी उनके होठों पर होठ रख दिए क्यों कि मैं अब उनके सामने आ गया था. दीदी के जिस्म से भीनी भीनी इत्तर की खुश्बू मुझे पागल बना रही थी. उस वक्त अंधेरा सा हो रहा था और मैं हल्के अंधेरे में दीदी की आँखों में एक अजीब सी चमक देख रहा था. शायद दीदी का जिस्म मेरे आलिंगन में पिघलने लगा था और या फिर मेरे दिमाग़ का वेहम था.
“मैं नहीं मानती ये सब. रिंकी उनकी बहन है!!ये क्या बक रहे हो!!!” रिंकी जीजा जी की मौसेरी बहन का नाम था. मैने जीजा जी की अपनी सेक्रेटरी के साथ नंगी तस्वीरें दीदी के सामने फेंक डाली. “ये क्या है, राकेश?” लेकिन सवाल बे मतलब था. फोटोस में जीजा जी सेक्रेटरी की चुचि चूस रहे थे तो दूसरी फोटो में उसकी चूत चाट रहे थे.

जीजा जी की सेक्रेटरी थी बहुत ही मस्त. दीदी का चेहरा शरम और गुस्से से लाल हो गया. मैने दूसरा वार किया और उनके नौकर ने जो फोटो जीजा जी और रिंकी के साथ खेंची थी सामने रख दी. एक फोटो में रिंकी जीजा जी को रखी बाँध रही थी और दूसरे में उनका लंड चूस रही थी. फोटोस इतने क्लियर थे कि मेरा खुद का लंड खड़ा हो गया और मैने दीदी की चुचि को ज़ोर से भींच दिया.

अब मेरा लंड अकड़ कर दीदी के पेट से टकरा रहा था. दीदी खुद ब खुद मुझ से लिपटने लगी. औरत के अंदर ईर्षा की आग कैसे भड़कती है मैं जानता था. मेरा मन बोल उठा,”मेरी दीदी अब मेरी बन के रहेगी, राकेश बेटा!!”
तभी फोन बज उठा,”हेलो, कौन, क्या? नहीं आयोगे? क्या बात हुई? कहाँ हो तुम? अच्छा, ठीक है” दीदी ने फोन रखा और कहा,”तेरे जीजा जी आज घर नहीं आ रहे. किसी मीटिंग में देल्ही गये हुए हैं” मैं जानता था कि मीटिंग कौन सी है.

मैने फोन में से वो नंबर पढ़ा जहाँ से फ़ोन आया था. जब मैने वो नंबर डाइयल किया ती एक लड़की की आवाज़ आई,” होटेल संगम! प्रिया स्पीकिंग” मैने फोन रख दिया. “नीता दीदी, देखोगी कि जीजा जी कौन सी मीटिंग में हैं? जीजा जी मीटिंग में नहीं रंग रलियाँ मना रहे हैं. दीदी तुम इनके साथ ज़िंदगी क्यों खराब कर रही हो? चलो मेरे साथ और आप ही फ़ैसला कर लो”

मैने दीदी को पहले तो बाहों में भर कर खूब प्यार किया. खूब चूमा, चॅटा. हमारे होंठ भीग गये किस करते हुए. मैने दीदी को बेड पेर लिटा लिया और उसकी जांघों पर हाथ फेरता रहा. जब मेरा हाथ दीदी की चूत पर गया तो उसने मुझे रोक दिया, ’नहीं भैया, नहीं. ये ठीक नहीं है. तुम मेरे भाई हो, बस. हम ये नहीं कर सकते”

मैं बोला,”दीदी, लेकिन जीजा जी….” दीदी बोली,”नहीं कह दिया तो मतलब नहीं”
लेकिन मैं दीदी को अपने मोटर साइकल पर बिठा कर संगम होटेल की तरफ़ चल पड़ा. दीदी मेरे पीछे सॅट कर बैठी थी और उसका हाथ बार बार मेरी जाँघ पर रेंग जाता था. मैने होटेल जा कर एक रूम बुक करवाया और अंदर जा कर विस्की ऑर्डर कर डाली.

दीदी पहले कुछ सक पकाई लेकिन उसके अंदर तनाव इतना था कि दो पेग एक साथ पी गयी. “बहनचोद कहीं का!!! मैं उसको नहीं छोड़ूँगी अगर तेरी बात सच निकली!!! राकेश तू जो कहे गा करूँगी मेरे भाई अगर तेरी बात साची हुई” मैने एक पेग और दिया दीदी को और उसको फिर चूमने लगा. दीदी भी अब गरम हो चुकी थी.

लेकिन जब मैने दीदी का हाथ अपने लंड पर रखा तो उसने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा,” राकेश अभी नहीं!! पहले दिखायो राकेश बहन्चोद किसके साथ है साला रंग रलियाँ मना रहा है” मैं दीदी को ले कर जीजा जी के रूम की तरफ ले गया और दरवाज़ा खोल दिया. किस्मत की बात थी कि उन लोगों ने लॉक नहीं किया था. बिस्तर पर नीता नंगी जीजा जी के नीचे पड़ी थी और जीजा जी उसका जिस्म चूम रहे थे.”

नीतू मेरी जान, जब से वो कुत्ति नीता आई है, हम को तो च्छूप च्छूप कर चुदाइ करनी पड़ रही है!! मेरा दिमाग़ खराब हो गया था जो मैने उस से शादी कर ली!! साली ढंग से चोदने भी नहीं देती और ना ही उसको चुदाई का कोई ज्ञान है.

और उसके सामने तुझे दीदी कहना पड़ता है, ये बात अलग है. असल में तो साली वो मेरी दीदी है और तू मेरा माल, नीतू मेरी रानी बहना मैं तो तुझे अपनी पत्नी मान चुका हूँ,सच!!” नीता जीजा जी के लंड को थाम कर बोली,”और भैया मैं आपको अपना पति मान चुकी हूँ. ऐसे छुप छुप कर कब तक मिलते रहेंगे भैया?”
“ओ बहन्चोद राकेश, तू इस मदारचोड़ रंडी को बना ले अपनी पत्नी!!! और नीता, तू इस बहन्चोद को बना लो अपना पति!! राकेश मैं जा रही हूँ और तुमको देखूँगी कोर्ट में तलाक़ के केस में!!!” दीदी की आवाज़ काँप रही थी. मैं उसको खींच कर रूम में ले गया और दीदी फिर से विस्की पीने लगी.

इस हालत में दीदी को घर नहीं ले जा सकता था. दीदी पी कर बेहोशी की हालत में सो गयी और अगले दिन मैं उसको घर ले आया. मा ने पुछा क्या बात हुई तो मैने कहा बाद में बताउन्गा. दीदी सारा दिन सोती रही.

दोपहर को मैने मा को सारी बात बताई,” मा, राकेश साला दीदी को कोई सुख नहीं दे सकता. रिंकी ही उसकी पत्नी है उसके लिए, मा!! दीदी को तो एक खिलौना बना कर रखा है उस कामीने ने. कल रात तो दीदी ने खुद देखा है …

उसको नीता के साथ बिस्तर में. अब मैं दीदी को राकेश के साथ नहीं रहने दूँगा. मेरी इतनी सुंदर बहन की ज़िंदगी बर्बाद नहीं होने दूँगा. आख़िर मैं दीदी से प्यार करता हूँ!!” मा मुझे गौर से देखती रही. ज़रूर मेरे चेहरे से वो मेरे मन को भाँप गयी थी.

जिस तरह मैने दीदी को थाम रखा था मा से छुपा नहीं था.”राकेश, सच बता क्या बात है? तू अपनी बहन का घर बर्बाद करने पर क्यों तुला हुया हो? तुम अपनी बहन के साथ लिपटाए हुए थे जब वो घर आई. कहीं तुम खुद ही तो अपनी बहन से प्यार नहीं करते?” मैं मा की बात सुन कर बोला, ”अगर मैं दीदी से प्यार करता हूँ तो क्या फरक पड़ता है?

राकेश ने तो पहले दिन ही दीदी को एक जानवर की तरह चोद डाला था. मा, तुम नहीं जानती कि दीदी उस रात कितना रोई थी!! कितनी पीड़ा हुई थी मेरी बहन को!! मैं उसका भाई हूँ……उसको सुख देना चाहता हूँ….मा मैं उसको प्यार करता हूँ और दीदी का अनुभव जो जीजा जी के साथ हुआ है दीदी पर बहुत बुरा असर डाल चुका है… दीदी सभी मर्दों से नफ़रत करने लगी है… सेक्स भी उसको अच्छा नहीं लगता… मैं दीदी को सही रास्ते पर ला सकता हूँ”.

मा मेरे पास आई और बोली”बेटा मैं तेरी बात समझती हूँ. लेकिन ये समाज नहीं समझेगा. तुम अपनी दीदी के पति तो नहीं बन सकते? सभी जानते हैं कि तुम भाई बहन हो!!” मा की बात ठीक थी लेकिन मेरी प्लान भी थी, मैं दीदी का तलाक़ करवाने वाला था.

इस गेम में हम जीजा जी को ब्लॅकमेल करने वाले थे. मेरे पास जीजा जी की फोटोस थी. हम जीजा जी से बड़ी रकम हासिल कर लेंगे और फिर हम तीनो इस शहर को छोड़ देंगे. मैं और दीदी प्यार से ज़िंदगी बसर करेंगे, मा मेरी बात सुन कर सोचने पर मज़बूर हो गयी.

मा मेरे गले लग गयी और बोली,”तुमने नीता से पूछ लिया है क्या? उसको पसंद है तेरा प्लान?” “मा, दीदी को अभी तक सेक्स का मज़ा नहीं मिला…जब मिलेगा तो दीदी खिल उठेगी….और दीदी की सेक्स की शुरुआत मैं करूँगा…एक सुहावानी सेक्स की शुरुआत…मुझे तुम सहयोग देने का वादा करो….मुझे और दीदी को अकेले छोड़ दो…मुझे दीदी को सेक्स का सुखद अनुभव करने में मदद करो,…नीता दीदी ज़रूर पट जाएगी, मा”
मा ने खुश हो कर मुझे होंठों पर किस कर लिया और जब मैने मा को वापिस किस किया तो मेरी मा भी गरम हो उठी और अपनी चूत मेरे खड़े लंड पर रगड़ने लगी. लेकिन मैने मा को अपने आप से अलग किया और दीदी के कमरे की तरफ बढ़ गया.

दीदी बिस्तर में थी लेकिन जाग रही थी. मैने उसको बाहों में भर कर ज़ोर से होंठों पर किस किया और चुचि भी मसल डाली. अब नाटक करने का वक्त नहीं था. अब मेरी प्यारी दीदी को पता चल जाना चाहिए था कि उसका भाई अब उसकी चूत का दिवाना है और अपने जीजा जी जगह लेना चाहता है.

दीदी को खूब चूमने के बाद मैं उतेज़ित हो गया. दीदी नहाने चली गयी. जब वो बाहर निकली तो एक सफेद नाइटी पहने हुई थी और नीचे कोई ब्रा या पॅंटी नहीं थी. “आज रात अपने भाई के रूम में ही सोना, देखना कितना मज़ा आता है!!!” कह कर मैं अपनी अलमारी से एक अडल्ट कहानी वाली बुक दीदी को देते हुए बोला, ”इस किताब को पढ़ लेना. पता चलेगा कि प्यार क्या होता है और कैसे किया जाता है.

रात को विस्की ले कर आउन्गा…मम्मी से चोरी…हम थोड़ी सी पी लेंगे अगर मेरी प्यारी दीदी चाहेगी तो…सच दीदी, बहुत सुंदर हो तुम….तेरा हुसन मेरे दिल का क्या हाल बना रहा है, मुझ से पुछो!!!” दीदी शरम से लाल हो रही थी. जो किताब मैने दीदी को दी थी वो रमन की कहानियो का एक भाई बहन की चुदाई का मस्त किस्सा था.

अगर दीदी ने वो किताब पढ़ ली तो मेरे आने तक उसकी चूत मचल रही होगी चुदने के लिए. बाहर जाते हुए मैने मा को सारा प्लान बता दिया और वो शरारती ढंग से मुस्कुराने लगी.
रात जब मैं वापिस लौटा तो दीदी मेरा इंतज़ार कर रही थी जैसे कोई पत्नी अपने पति का इंतज़ार करती हो.

मुझ पर हवस का भूत सवार था. मैने दीदी को बाहों में भर लिया और चूमने लगा. दीदी के जिस्म पर मेरे हाथों का स्पर्श उस पर जादू कर रहा था. फिर मैने ग्लास में विस्की डाली और दीदी को ग्लास पकड़ा दिया. दीदी बिना कुछ बोले पी गयी.

थोड़ी देर में नशा होने की वजह से दीदी के अंदर वासना ने ज़ोर पकड़ लिया लगता था. मैने अपना हाथ दीदी की चूत पर रखा और उसको रगड़ने लगा.”दीदी, मैं जानता हूँ की जीजा जी ने तुझे प्यार नहीं किया.

इस वक्त भी राकेश रिंकी के साथ चुदाई में व्यस्त है. तुम अपने पति से उसकी बे वफाई का बदला नहीं लोगि? और दीदी मेरी किताब पढ़ी आपने कैसी लगी? ” दीदी मुस्कुराते हुए बोली ,”अच्छी थी लेकिन क्या भाई अपनी बहन के साथ ऐसा करते हैं?” मैं भी मुस्कुराता हुआ बोला”ज़रूर करते हैं अगर बहन आप जैसी सेक्सी हो और भाई मुझ जैसा प्यार करने वाला हो”
दूसरा पेग पी कर मैने दीदी को अपने आगोश में बिठाया और उसके जिस्म को नाइटी के उप्पेर से सहलाने लगा. दीदी के मस्त चुट्टर बहुत गुदाज़ थे और मेरा लंड उनके चूतर में घुसने लगा,”राकेश मुझे तेरा….चुभ रहा है…. उई…..बस कर…”

मैं आनी दीदी को लंड से प्यार करना सीखाना चाहता था. ‘दीदी, तुझे किताब वाली कहानी कैसी लगी…कहानी में भाई का लंड,,,तुझे पसंद आया? कहानी में बहन अपने भाई के लंड को कितना प्यार करती है ना? तुम मेरे लंड को प्यार करोगी? इसको सहलायोगी? दीदी मैं भी तेरे जिस्म को चुमुन्गा, चाटूँगा, इतने प्यार से जितने प्यार से राकेश ने भीनही चूमा होगा”

मैं अब नीता दीदी के जिस्म के हर अंग को प्यार से सहला रहा था. और दीदी भी गरम हो रही थी.”राकेश कुत्ते का नाम मत लो, मेरे भाई. उसने मुझे इतना दर्द दिया है कि बता नहीं सकती. मुझे इस प्यार से भी दूर लगने लगा है. राकेश मुझे दर्द ना पहुँचना, मेरे भाई”
मैने देखा कि दीदी गरम है और अब उसको तैयार करने का वक्त आ गया है. मैने दीदी की नाइटी उप्पेर उठाई और उसके जिस्म नंगा कर दिया. मेरी बहन का गुलाबी जिस्म बहुत कातिलाना लगता था. नीता दीदी की जंघें केले की तरह मुलायम थी और उसके नितंभ बहुत सेक्सी थे.

सफेद ब्रा और पॅंटी में दीदी बिल्कुल हेरोयिन लग रही थी. मैने अपना मुख दीदी के सीने पर रख कर उसकी चुचि को किस करने लगा. दीदी ने आँखें बंद की हुई थी और वो सिसकियाँ भरने लगी, मैने दीदी का हाथ अपने दहक रहे लंड पर रख दिया.

दीदी अपना हाथ खींचने लगी तो मैं बोला,”दीदी, इसको मत छोड़ो. पकड़ लो अपने भाई के लंड को. ये तुझे दर्द नहीं देगा, सुख देगा. जिसस तरह किताब में बहन अपने भाई की प्रेमिका बन कर मज़े लूटती है, उससी तरह तुम मेरी प्रेमिका बन जाओ और फिर जवानी के मज़े लूट लो आज की रात.

मेरा लंड अपनी बहन की प्यारी चूत को स्वर्ग के मज़े देगा. अगर मैने तुझे दर्द होने दिया तो कभी मुझ से बात मत करना. मेरी रानी बहना ये लंड तुझे हमेशा खुश रखेगा!!” दीदी कुछ ना बोली लेकिन उसने मेरा लंड पकड़े रखा.

मेरा लंड किसी कबूतर की तर्रह फाड़ फाडा रहा था अपनी बहन के हाथ में. मैने फिर दीदी की ब्रा को खोल दिया और उसकी चुचि मस्ती से भर के मेरे हाथों में झूल उठी. दीदी के स्तन बहुत मस्त हैं,”अहह….ऊऊहह…राकेश क्या कर रहे हो?”वो सिसकी. “क्यों दीदी, अपने भाई का स्पर्श अच्छा नहीं लगा?”मैने दीदी के गुलाबी स्तन पर काली निपल को रगड़ कर कहा.
“अच्छा लगा, राकेश, लेकिन ऐसा पहले कभी महसूस ना हुआ है मुझे. ऐसा अनुभव पहली बार हो रहा है!!!” मैने हैरानी से पूछ लिया,”क्यों दीदी, क्या जीजा जी एस नहीं करते थे तुझे प्यार?”अब मेरा दूसरा हाथ दीदी की फूली हुई चूत सहला रहा था और दीदी अपनी चूत मेरे हाथ पर ज़ोर से रगड़ रही थी.

”तेरा जीजा मदर्चोद तो बस मेरे मूह में डाल देता था अपना बदबू दार लंड और बाद में मेरी चूत में धकेल देता था. मेरे भाई मैं दर्द से चीखती रहती थी और वो मेरे उप्पेर सवार हो जाता था. लेकिन तू तो प्यार करता है मेरे भाई… मुझे आनंद आ रहा है… तेरा लंड भी बहुत खुश्बुदार है… बहुत सुंदर है.. तेरा स्पर्श बहुत सेक्सी है..

राकेश यार तेरे हाथ मेरे अंदर एक मज़ेदार आग भड़का रहे हैं…तेरी उंगलियाँ मेरी चूत में खलबली मचा रही हैं….मेरी चूत से रस टपक रहा है…तेरा स्पर्श ही मुझे औरत होने का एहसास करा रहा है…मैं तेरे अंदर समा जाना चाहती हूँ….चाहती हूँ कि तू मेरे अंदर समा जाए…. मेरे जिस्म का हर हिस्सा चूम लो मेरे भाई…मुझे अपने जिस्म का हर हिस्सा चूम लेने दो!!!!!”

 

मैं जान गया था कि दीदी अब तैयार है. मैने एक पेग और बनाया और हम दोनो ने पी लिया. मैं नहीं चाहता था कि दीदी अपना फ़ैसला बदल ले. आज मैं दीदी को चोद कर सदा के लिया अपना बना लेना चाहता था. दीदी ने अपनी पॅंटी अपने आप उतार डाली और मेरे लंड से खुलेआम खेलने लगी.

एक हाथ दीदी अपनी चूत पर हाथ फेर रही थी. मैने झुक कर दीदी के निपल्स चूसना शुरू कर दिया और दीदी मेरे बालों में उंगलियाँ फेरने लगी. दीदी की चुचि कठोर हो चुकी थी और अब मैने अपने होंठ नीचे सरकने शुरू कर दिए.

जब मेरे होंठ दीदी की चूत के नज़दीक गये तो वो उतेज्ना से चीख पड़ी,” राकेश, मेरे भाई…क्यों पागल कर रहे हो अपनी बहन को? मुझे चोद डालो मेरे भाई…तेरी बहन की चूत का प्यार मैने तेरे लंड के लिया संभाल रखा है… डाल दो इसको मेरी चूत में!!!”

मैं अपने सारे कपड़े खोलते हुआ दीदी के उप्पेर चढ़ गया. दीदी का नंगा जिस्म मेरे नीचे था और उसने बाँहे खोल कर मुझे आलिंगन में भर लिया. दीदी की चूत रो रही थी, आँसू बहा रही थी. मैने प्यार से अपना सूपड़ा दीदी की चूत की लंबाई पर रगड़ना शुरू कर दिया. हम भाई बहन की कामुकता हद पार कर गयी और दीदी ने बिनति की,”भैया, अब रहा नहीं जाता..घुसेड दो मेरी चूत में…होने दो दर्द मुझे परवाह मत करो, पेलो मेरी चूत में अपना लंड!!”

लेकिन मैने अपना सूपड़ा चूत के मुख पर टिका कर हल्का धक्का मारा. चूत रस के कारण सूपड़ा आसानी से घुस गया और दीदी तड़प उठी, जिस में दर्द कम और मज़ा अधिक था”है भैया…मर गई…आआआः…..है…बहुत मज़ा दे रहे हो तुम…. और धकेल दो अंदर…पेलते रहो भैया…ऊऊहह..मेरी चूत प्यासी है…. आज पहली बार चुद रही है……बहुत प्यारे हो तुम मेरे भाई………डाल दो पूरा!!!!”

मैने लंड धीरे धीरे आगे बढ़ाना शुरू कर दिया. दीदी को तकलीफ़ नहीं देना चाहता था मैं. दीदी का मन जीजा जी की ज़बरदस्ती से की गयी चुदाई से जो डर बन गया था उसको मज़े में बदल देना चाहता था. चूत गीली होने से लंड ऐसे अंदर घुस गया जैसे माखन में च्छुरी.

नीता दीदी की चूत क्या थी बिल्कुल आग की भट्टी. मैं भी नशे में था. दीदी के निपल्स चूस्ते हुए मैने पूरा लंड थेल दिया अंदर. दीदी की सिसकारियाँ उँची आवाज़ में गूँज रही थी. मुझे शक था कि मा ना सुन ले. लेकिन मेरे मन ने कहा,”अगर मा सुन लेती है तो सुन ले..उसकी बेटी पहली बार चुदाई के मज़े लूट रही है…आख़िर मेरी दीदी को भी तो लंड का सुख चाहिए ही ना!!अगर उसका पति नहीं दे सका तो भाई का फ़र्ज़ है उसको वो मज़ा देना!!”

फिर मैने धक्को की स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी. दीदी भी अपने चूतड़ उप्पेर उठाने लग पड़ी. उसको लंड का मज़ा मिल रहा था. दीदी ने अपनी टाँगें मेरी कमर पर कस दी और मुझ से पागलों की तरह लिपटने लगी.

मेरा लंड तूफ़ानी गति से चुदाई कर रहा था. दीदी के हाथ मेरे नितंभों पर कस चुके थे,” दीदी कैसा लगा ये चुदाई का मज़ा? मेरा लंड? तेरी चूत में दर्द तो नहीं हो रहा? मेरी बहना तेरा भाई आज पहली बार चोद रहा है किसी लड़की को और वो भी अपनी सग़ी बहन को!!”

दीदी नीचे से धक्के मारती हुई बोली,”राकेश मुझे क्या पता था कि चुदाई ऐसी होती है..इतनी मज़ेदार!!भाई मेरे अंदर कुछ हो रहा है…मेरी चूत पानी छोड़ने वाली है…मैं झड़ने को हूँ…ज़ोर से…और ज़ोर से चोद मेरे भाई…उूउउफफफ्फ़…ज़ोर से भैय्ाआआ!!!”

मैं भी तेज़ चुदाई कर रहा था. मेरा लंड चूत की गहराई में जा कर चोद रहा था और मुझे भी झरने में टाइम नहीं लगाने वाला था”फ़चा फ़च “की आवाज़ें आ रही थी. तभी मेरे लंड की पिचकारी निकल पड़ी”आआआआहह…..डिदीईईई…मैं भी गया…..मैं गयाआअ” दीदी की चूत से रस की धारा गिरने लगी और हम दोनो झार गये. हम इस बात से अंजान थे कि दो आँखें हमारी चुदाई देख चुकी थी.

मा हम भाई बहन को देख रही थी. लेकिन हम इस बात से अंजान थे. मैं नीता दीदी के साथ लिपट कर सो गया. चुदाई इतनी ज़ोरदार थी कि मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब तक सोता रहा. जब नींद खुली तो दोपहर के 12 बज चुके थे.

दीदी मेरे बिस्तर में नहीं थी. उठ कर कपड़े पहने और मैं नहाने चला गया. पिच्छले दिन की शराब का नशा मुझे कुछ सोचने से रोक रहा था.. सिर भारी था. नहा कर जब बाहर निकला तो मैं चुस्त महसूस करने लगा.

दीदी के साथ चुदाई की याद मुझे अभी भी उतेज़ित कर रही थी. रात के बाद दीदी क्या अपना मन तो ना बदल लेगी? कहीं मा इस संबंध से नाराज़ तो ना होगी? ये सवाल मेरे दिमाग़ में कौंध रहे थे|

जब में मा के रूम से गुज़र रहा था तो मुझे मा और दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी,” मा, राकेश ने मुझे ज़िंदगी का असल आनंद दिया है कल रात. सच मा, राकेश ने तो जितना दर्द दिया सब भुला दिया भाई ने!!

चाहे दुनिया इस प्यार को जो चाहे नाम दे, या पाप कहे लेकिन मेरे लिए राकेश किसी भगवान से कम नहीं है. मैं तो अपने भाई के साथ ये ज़िंदगी बिताने के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ. कल तक लंड, चूत चुदाई जैसे शब्द मुझे गाली लगते थे, लेकिन आज ये सब मेरी ज़िंदगी हैं!!

मा तू तो मेरी मा है. तुझे तो मेरी खुशी की प्रार्थना करनी चाहिए. अब तो तुझे भी मर्द का सुख ना मिलने पर दुख हो रहा होगा. मा मुझे राकेश से मिला दो, प्लीज़. हमारी शादी करवा दो!! भाई बहन को पति पत्नी बना दो, मा!!!!!!!!” मुझे खुशी थी कि नीता दीदी खुद मुझ से शादी करने के लिए मा को मना रही थी. वाह!!बहन हो तो ऐसी!!!

 

नीता दीदी और मा को अकेले छोड़ कर मैं अपने रूम में चला गया. कपड़े चेंज किए और घर से निकल गया. शाम को जब वापिस आया तो मा मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी. मा ने भी आज लो कट गले वाली कमीज़ और सलवार पहनी हुई थी.

मेरे सामने मा आटा गूंधने लगी. जब वो आगे झुकती तो उसकी चुचि लग भाग पूरी झलक जाती मेरी नज़र के सामने. मेरा लंड खड़ा होने लगा. सोचा कि चलो दीदी को कमरे में ले जा कर चोद्ता हूँ. तभी मा फिर से आगे झुकी और मेरी तरफ देखने लगी.

उसकी नज़र से नहीं छुपा था कि मैं मा की गोरी चुचियो को घूर रहा हूँ. तभी उसकी नज़र मेरी पॅंट के सामने वाले उभार पर पड़ी. मेरी प्यारी मा मुस्कुरा पड़ी. मा की मुस्कुराहट को देख कर मेरे मन में आया कि उसको बाहों में भर लूँ और प्यार करूँ. “मा, नीता दीदी कहाँ है? दिखाई नहीं पड़ रही कहीं भी!!”
कहानी आगे जारी है…… पूरा पढने के लिए अगला भाग पढ़े…………

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