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मैं तुम्हारी मामी हूं

Antarvasna, hindi sex kahani जब मैं स्कूल में पढ़ा करता था तो उस वक्त मैं सबसे शैतान था सब लोग मेरी शैतानी से परेशान रहा करते और मेरी टीचर तो मुझसे बहुत ज्यादा परेशान रहती थी लेकिन सिर्फ एक ही लड़की थी जो कि हमेशा मेरा साथ दिया करती थी उसका नाम राधिका है। राधिका मेरे साथ स्कूल में पढ़ती थी हम लोग बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे उस वक्त मेरी उम्र काफी कम थी लेकिन जब हमारा स्कूल पूरा हो चुका था तो अब मैं कॉलेज में आ गया था लेकिन अभी भी मेरी शैतानियां वैसे ही थी। मैं सब लोगों को परेशान किया करता था लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे साथ एक बड़ा हादसा हो जाएगा कॉलेज के दौरान मेरा एक एक्सीडेंट हुआ जिसके कारण मुझे घर पर ही रहना पड़ा।

काफी समय तक मैं कॉलेज नहीं जा पाया और ना ही मेरी किसी से मुलाकात हो पाई लेकिन उसी बीच शायद राधिका की शादी हो चुकी थी मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था की राधिका की शादी हो जाएगी। राधिका की शादी हो गई थी मैं जब ठीक होकर कॉलेज गया तो मुझे इस बात का पता तब चला कि राधिका की शादी हो चुकी है मैं इस बात से बहुत दुखी हो गया क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि राधिका की शादी इतनी जल्दी हो जाएगी। जब उसकी शादी हो गई तो मुझे  एहसास हुआ कि मैं राधिका से कितना प्यार करता हूँ उससे पहले तो मुझे कभी ऐसा लगा ही नहीं था लेकिन अब राधिका की शादी हो गई तो मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं राधिका से बहुत प्यार करता हूं। मैंने उसे अपने दिल की बात नहीं कही यह मुझसे सबसे बड़ी गलती हुई लेकिन अब तो राधिका की शादी हो चुकी थी इसलिए अब पछताने का कोई फायदा नहीं था और मैं अपने जीवन में आगे बढ़ने के बारे में सोचने लगा। मैं अपने जीवन में आगे बढ़ चुका था और फिर मेरा कॉलेज भी पूरा हो चुका था मैंने उसके बाद काफी मेहनत की जिससे कि मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब करने लगा। मेरी जॉब एक अच्छी कंपनी में लग चुकी थी और मैं इस बात से खुश था कि मेरे परिवार वाले अब मेरा सपोर्ट करने लगे थे क्योंकि वह लोग पहले मुझे काफी भला-बुरा कहा कहते थे लेकिन अब वह लोग मुझे समझने लगे थे।

मैं भी अपनी जिम्मेदारियों को समझने लगा था जिससे कि मेरे पिताजी और मेरी मम्मी मुझे कहते कि संजय बेटा अब तुम अपनी जिम्मेदारियों को समझने लगे हो हमें इस बात की बहुत खुशी है कि तुम अब बड़े हो चुके हो। अब मैं अपने काम में ही बिजी रहता था और ज्यादा समय मैं अपने काम में ही दिया करता था कुछ समय बाद मैंने जॉब छोड़ दी और अपना एक बिजनेस शुरू किया। हालांकि बिजनेस में मुझे काफी नुकसान हुआ लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और मैं अपनी हिम्मत के साथ आगे बढ़ता गया। एक समय ऐसा आया जब मेरे पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे थे परंतु मैंने काफी मेहनत की और दोबारा से अपने बिजनेस को अच्छे से चलाने लगा सब कुछ ठीक चल रहा था और मेरे जीवन में अब इस बात की खुशी है कि मेरा बिजनेस पूरी तरीके से सेटल हो चुका है। उसी दौरान मेरे पापा ने मेरे लिए एक लड़की देखी मैं उन्हें मना ना कर सका और मैंने उससे शादी करने का फैसला कर लिया मैंने सोचा कि चलो कम से कम इस बहाने पापा तो खुश हो जाएंगे। मैं जब उस लड़की से पहली बार मिला तो मुझे वह अच्छी लगी उसका नाम मीनाक्षी है मीनाक्षी को पहली नजर में देखते ही मुझे बहुत अच्छा लगा और उससे मैंने शादी करने का फैसला कर लिया। हम दोनों ने सगाई कर ली और उसके बाद एक दूसरे के साथ हम दोनों समय बिताया करते थे मुझे मीनाक्षी के साथ समय बिताना अच्छा लगता क्योंकि वह एक समझदार लड़की है और वह मुझे काफी सपोर्ट किया करती है। मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम मीनाक्षी तो मुझे सपोर्ट करती है मैं चाहता था कि वह मेरा साथ ऐसे ही दे। अब हम दोनों की शादी हो चुकी थी और हम दोनों बहुत खुश थे लेकिन तभी मेरे जीवन में एक बहुत बड़ा तूफान लाने वाला था जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मेरे साथ ऐसा हो सकता है।

एक दिन मीनाक्षी ने मुझे कहा कि मैं आपको अपने मामा जी से मिलाना चाहती हूं मैं जब उसके मामा से मिला तो उसके मामा काफ़ी जवान थे। मैंने उसके मामा से कहा आप की उम्र तो काफी कम है वह कहने लगे हां मेरी उम्र कुछ ज्यादा नहीं है। वह उस दिन हमारे घर पर आए हुए थे तो उन्होंने मुझे कहा आप भी कभी हमारे घर पर आइयेगा मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं, आप मामी जी को भी कभी हमारे घर पर लाइए तो वह कहने लगे ठीक है मैं देखता हूं यदि मुझे समय मिला तो मैं जरूर उन्हें घर पर लेकर आऊंगा। यह कहकर वह हमारे घर से चले गए मुझे उनसे मिलकर अच्छा लगा वह काफी सज्जन व्यक्ति हैं मैंने मीनाक्षी से कहा तुम्हारे मामा तो बहुत अच्छे हैं और उनकी उम्र भी अभी कम ही है। वह कहने लगी हां वह मम्मी से बहुत छोटे हैं और घर में सब से छोटे वही हैं सब लोग उनकी बड़ी तारीफ करते हैं कि वह काफी समझदार हैं। मैंने मीनाक्षी से कहा मैं कुछ दिनों के लिए काम के सिलसिले में बाहर जा रहा हूं तो तुम मम्मी-पापा का ख्याल रखना वह कहने लगी ठीक है लेकिन आप कब तक लौटेंगे तो मैंने मीनाक्षी से कहा मुझे वापस लौटने में एक हफ्ता तो लग ही जाएगा। वह कहने लगी ठीक है आप मुझे बता दीजिएगा जब आप वापस आएंगे मैंने मीनाक्षी को कहा मैं फोन कर दूंगा जब मैं वापस लौटूंगा और फिर मैं अपने काम से चला गया।

मेरा बहुत जरूरी काम था जिस दिन मैं वापस लौटा था उस दिन मैंने मीनाक्षी को फोन किया तो मीनाक्षी कहने लगी कि मामा जी घर पर आए हुए हैं आप कब तक पहुंचेंगे मैंने मीनाक्षी से कहा बस कुछ देर बाद ही मैं घर पहुंच जाऊंगा। मैं करीब आधे घंटे बाद घर पहुंचा तो मैंने घर की डोर बैल बजाई मीनाक्षी ने दरवाजे खोला तो मैंने सामने देखा उसके मामा बैठे हुए थे उनके साथ एक महिला और थी मैंने अंदाजा लगा लिया कि वह उनकी पत्नी होगी। उन्होंने अपने सर पर दुपट्टा उड़ा हुआ था इसलिए मुझे उनका चेहरा नहीं दिखाई दिया मैं जैसे ही उसके मामा जी के पास गया तो मैंने उस महिला के चेहरे पर देखा उसे देखते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मैन देखा वह तो राधिका है राधिका ने भी मुझे देखा तो वह मेरी तरफ देखती रही मैं कुछ समझ नहीं पाया कि यह सब क्या हो गया है क्योंकि मैंने कभी भी कल्पना नहीं की थी कि ऐसा कभी मेरे साथ हो पाएगा। मीनाक्षी के मामा मुझे कहने लगे आप का टूर कैसा रहा तो मैंने उन्हें कहा मेरा टूर अच्छा रहा, आप लोग कब आए वह कहने लगे बस कुछ ही देर हुई है उन्होंने मुझे अपनी पत्नी से मिलवाया और कहने लगे यह मेरी पत्नी है। मैंने उन्हें कुछ नहीं कहा कि मैं राधिका को पहले से ही जानता हूं, उस दिन हम लोग साथ में ही थे लेकिन ना तो राधिका मुझसे नजर मिला पा रही थी और ना ही मैं उससे बात कर पा रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं की क्योंकि मुझे लगा यदि मैं इस बारे में मीनाक्षी के मामा को बताऊंगा तो शायद उन्हें बुरा लगेगा इसलिए मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया। हम लोगों ने साथ में लंच किया और उसके बाद वह लोग जाते जाते यह कहने लगे की आप दोनों भी कभी हमारे घर पर आइयेगा क्या मैं ही आपके घर पर आता रहूंगा। मैंने उसके मामा से कहा जी मामा जी हम लोग आपके घर पर जरूर आएंगे और वह लोग हमारे घर से चले गए लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ राधिका का चेहरा था।

हम लोग उसके बाद मीनाक्षी के मामा से भी मिले और उनसे मिलकर अच्छा लगा। एक दिन मुझे राधिका ने फोन किया और कहने लगी मैंने तुम्हारा नंबर अपने पति से लिया था मैंने राधिका से कहा तुमने शादी कब कि मुझे कुछ पता ही नहीं चला। वह कहने लगी बस ऐसे ही शादी हो गई मैं तो तुम्हें चाहती थी लेकिन ना जाने मेरे पापा क्या चाहते थे और उस वक्त तुम्हारा एक्सीडेंट भी हो चुका था, तुम से मेरा कोई संपर्क हो ही नहीं पाया। मैंने राधिका से कहा क्या हम लोग मिलकर बात करें तो वह कहने लगी तुम घर पर आ जाओ मैं राधिका से मिलने के लिए घर पर चला गया। जब मैं घर पर गया तो हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे लेकिन इतने सालों की तडप हमारे अंदर थी वह हम दोनों ही ना रोक सके। मैंने राधिका के होठों को चूमना शुरू किया उसके होठों उतने ही रसीले थे जितने कि पहले थे। मैंने उसके कपड़ों को उतारना शुरू किया जब मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसा तो उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आता। मैंने काफी देर तक उसके स्तनों का रसपान किया जैसे ही मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसे राधिका ने अपने मुंह में ले लिया और वह उसे चूसने लगी।

वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से सकिंग कर रही थी जिससे कि मुझे बड़ा मजा आता और मैं खुश हो जाता। हम दोनों ने ही एक दूसरे को पूरी तरीके से उत्तजित कर दिया था। मैंने राधिका को घोड़ी बनाकर उसकी योनि में अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाने लगी उसकी योनि में मेरा लंड जा चुका था और उसके मुंह से मादक आवाज निकलने लगी थी। मै उसे तेजी से धक्के देता जाता मैंने उसके साथ करीब 5 मिनट तक सेक्स का आनंद लिया और 5 मिनट बाद हम दोनों के अंदर से गर्मी बहार निकलने लगी। उसे हम दोनों ही बर्दाश्त ना कर सके मेरा वीर्य पतन हो गया जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने राधिका को गले लगा लिया। हम दोनों ने 2 घंटे साथ मे बिताए उसके बाद मे जब भी राधिका से मिलता तो उसके साथ में जरूर सेक्स करता। हम दोनों ने किसी को भी यह बात पता नहीं चलने दी कि हम दोनों साथ में पढ़ा करते थे और एक दूसरे को जानते हैं।

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