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मैं तो आपको चाहती हूं

Kamukta, antarvasna मैं अपने ऑफिस में मैनेजर के पद पर कार्यरत हूं और मुझे इसी ऑफिस में काम करते हुए 12 वर्ष हो चुके हैं मैंने अब तक कई स्टाफ को देखा है और कई नए लोग आए,  कई लोग चले गए लेकिन मेरा डिसीप्लिन बिल्कुल वैसा का वैसा ही है। जो भी हमारे ऑफिस में काम करता है मैं उन्हें पहले ही कह देता हूं कि कोई भी ऑफिस के डिसिप्लिन को नहीं तोड़ेगा और बहुत ही अच्छे तरीके से सब लोग काम करेंगे लेकिन एक दिन हमारे ऑफिस में काम करने वाली लड़की जो की अभी कुछ दिनों पहले ही आई थी उसका नाम प्रियंका है।

एक दिन उसने अपनी फाइल को कहीं गुम कर दिया उसके बाद वह फाइल मिल ही नहीं रही थी मैंने उसे कहा कि वह फाइल कहां चली गई तो उसने मुझे कोई जवाब नहीं दिया मैंने उसे उस दिन बहुत डांटा मैंने उसे कहा यदि कुछ दिनों बाद वह फाइल नहीं मिली तो मैं तुम्हें नौकरी से निकाल दूंगा। मैंने उसे इतना डांटा कि वह रोने तक लगी लेकिन मुझे कभी इस बात का फर्क ही नहीं पड़ता था क्योंकि मैं हर जगह अपने हिसाब से चला करता था और मेरे इस रवैया की वजह से शायद सब लोग मुझसे नफरत करते थे। यह बात मुझे उस वक्त पता चली जब उस लड़की ने मुझे एहसास दिलाया कि इसमें मेरी भी गलती थी मुझे पता नहीं चला कि मेरी गलती क्या थी लेकिन वह फाइल उसके साथ में काम करने वाली लड़की ने छुपा दी थी क्योंकि प्रियंका ऑफिस में अपना सौ प्रतिशत देती थी इसी वजह से उसके साथ कि लड़कियां उससे बहुत ज्यादा नफरत करती थी और एक लड़की ने वह फाइल कहीं छुपा दी थी। जब मुझे इस बात का पता चला तो मैंने प्रियंका को अपने कैबिन में बुलाया और उसे कहा तुमने अपने ऑफिस में बहुत सारे दुश्मन बना रखे हैं वह मुझे कहने लगी सर मैं आपकी बात को नहीं समझी वह चुपचाप मेरे सामने खड़ी थी मैंने उसे कहा तुम चेयर पर बैठ जाओ वह बैठ गई जब वह बैठी तो मैंने उसे कहा तुम्हें मालूम है तुम्हारी फाइल कहां है वह मुझे कहने लगी सर मुझे अभी तक वह फाइल मिल ही नहीं रही है मैं पूरी कोशिश कर रही हूं कि मुझे फाइल मिल जाए लेकिन अभी तक मुझे फाइल नहीं मिल पाई है।

मैंने प्रियंका से कहा देखो प्रियंका वह फाइल तुम्हें शायद अब मिलने भी नहीं वाली है क्योंकि वह फ़ाइल तुम्हारे साथ की एक लड़की ने कहीं रख दी है और मुझे वह फाइल मिल भी चुकी है लेकिन मैं तुमसे यही कहना चाहता हूं कि अपने आसपास के लोगों को देख कर उनसे दोस्ती किया करो। मैंने उस दिन प्रियंका को बहुत समझाया प्रियंका मुझे कहने लगी सर मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि आप इतने अच्छे हैं मैं तो आपके बारे में हमेशा गलत धारणा ही अपने दिमाग में पाले बैठी थी। मैंने प्रियंका से कहा देखो प्रियंका हो सकता है कि मैं सब लोगों को डांटता हूं लेकिन मैं इतना गलत नहीं हूं कि मेरे सामने कोई सही होगा तो मैं उसे भी डाटूंगा। प्रियंका मेरी बातों से बहुत इंप्रेस हो गई और वह कहने लगी सर आपके बारे में पूरा ऑफिस गलत सोचता है मैंने उसे कहा मुझे मालूम है लेकिन मैं किसी को भी बेवजह की छूट नहीं दे सकता और यदि कोई गलत करेगा तो उसे भी मैं कभी नहीं छोड़ सकता मैंने प्रियंका से कहा तुम अब काम कर लो। वह चली गई लेकिन जिसने उसकी फाइल छुपाई थी उसे मैं कभी माफ नहीं कर सकता था इसलिए मैंने उसे नौकरी से निकाल दिया प्रियंका मेरे पास आई और कहने लगी सर आप रहने दीजिए लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और कहा देखो जो गलत करेगा उसे इसका अंजाम तो भुगतना ही पड़ेगा। उसके बाद प्रियंका मेरी बहुत रेस्पेक्ट किया करती थी ऑफिस में सिर्फ वही थी जो मेरी इज्जत करती थी और जितने भी लोग थे वह सब लोग मुझसे डरते थे मुझे यह बात मालूम थी कि सब लोग मुझसे डरकर ही काम करते हैं लेकिन मुझे उन्हें डराना भी जरूरी था यदि मैं सख्त नहीं रहता तो शायद वह लोग कभी भी अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पाते। यह सब काफी समय तक चलता रहा अब हमारे ऑफिस में कुछ नए स्टाफ़ भी आ चुके थे जो की काम करने में बिल्कुल ही आलसी थे प्रियंका का भी प्रमोशन हो चुका था और वहीं अब सारा काम संभाला करती थी।

मैं कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर था क्योंकि मुझे अपनी फैमिली के साथ फैमिली टूर पर जाना था काफी समय से मैं अपनी फैमिली को टाइम नहीं दे पाया था इसलिए मैंने सोचा अपनी फैमिली के साथ कहीं घूम आता हूं, मैं उन्हें दुबई लेकर चला गया। दुबई में हम लोग 10 दिन तक रहने वाले थे 10 दिन का टूर हम लोगों ने वहां का बनाया था मेरे साथ मेरी पूरी फैमिली थी मेरे माता-पिता, मेरी पत्नी और बच्चे थे इतने समय बाद मुझे भी अपनी फैमिली के साथ एक अच्छा समय बिताने का मौका मिल पाया था इसलिए मैं उसे गवाना नहीं चाहता था। मैंने अपना फोन भी बंद कर दिया था ताकि ऑफिस से बेवजह फोन ना आए मैं पूरा समय अपनी फैमिली को देना चाहता था उन लोगों के चेहरे पर जो खुशी थी उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता उनकी खुशी देखकर मैं भी खुश हो जाता। मेरी पत्नी मुझे कहने लगी आपने बहुत अच्छा किया जो बच्चों को घुमाने ले आए बच्चे काफी समय से कह रहे थे कि पापा हमें कहीं घुमाने नहीं लेकर जाते लेकिन आपने उन्हें इस बार अच्छा सरप्राइस दिया और वह लोग बहुत खुश है। मैंने अपनी पत्नी से कहा बच्चों को तो सरप्राइस देना ही था क्योंकि उन्हें काफी समय से मैं कहीं लेकर नहीं जा पाया था और अपने ऑफिस के चलते मैं इतना बिजी हो गया हूं कि मुझे तुम लोगों के साथ भी समय बिताने का मौका नहीं मिल पाता मेरी पत्नी कहने लगी हमें मालूम है कि आप ऑफिस में कितना बिजी रहते हैं हम लोग इस बात को अच्छे से समझते हैं।

हम लोगों ने दुबई में पूरे 10 दिन बिताये 10 दिन का टूर मेरा बहुत ही अच्छा रहा जिस दिन हम लोग वापस लौटे उस दिन हमे सोने में देर हो चुकी थी इसलिए हम लोग देर से उठे सुबह मुझे ऑफिस जाना था लेकिन मुझे मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी इसलिए मैंने सोचा कि आज ऑफिस नहीं जाता उस दिन मैं घर पर ही रुक गया। मैं घर पर ही था लेकिन मैंने ऑफिस में फोन कर दिया था और मैंने ऑफिस में फोन करके पूछा कि सब कुछ ठीक चल रहा है वह कहने लगे सब कुछ ठीक चल रहा है। मैंने प्रियंका को भी फोन किया था वह कहने लगी सर ऑफिस में काम ठीक चल रहा है मैंने उसे कहा कल से मैं आ जाऊंगा और यदि कोई भी काम पेंडिंग है तो तुम उसे आज करवा लेना मैंने प्रियंका से जब यह कहा तो वह कहने लगी सर मैं काम करवा दूंगी आप चिंता ना करें। मैं जब अगले दिन ऑफिस गया तो सबसे पहले मैंने प्रियंका को रूम में बुलाया और उसे कहा क्या तुमने ऑफिस का सारा काम करवा लिया है वह कहने लगी हां सर जितना भी काम पेंडिंग था वह सब हो चुका है और काम बढ़िया चल रहा है। मैंने कहा ठीक है फिर वह अपना काम करने लगी मुझे पता ही नहीं चला कि कब इतनी जल्दी शाम हो गई मैं जल्दी से अपने घर के लिए निकला क्योंकि मुझे उस दिन घर टाइम पर पहुंचना था हमारे कुछ मेहमान घर पर आने वाले थे मैं कुछ ही देर बाद अपने घर पहुंच गया और जैसे ही मैं घर पहुंचा तो वह लोग भी आ चुके थे। उस दिन वह लोग हमारे घर पर ही रुकने वाले थे मैंने भी कपड़े चेंज किये और उनके साथ बैठ गया रात को हम सब लोगों ने साथ में डिनर किया और सुबह के वक्त वह लोग चले गए।

मैं हमेशा की तरह ऑफिस टाइम पर चले जाया करता था प्रियंका की नजदीकिया मुझसे बढ़ती जा रही थी और वह ऑफिस में मेरी बहुत ही नजदीक आ चुकी थी हम दोनों के बीच ना जाने ऐसी क्या रिश्ता था मुझे भी पता नहीं चला लेकिन प्रियंका शायद मुझे मन ही मन चाहने लगी थी और वह इशारों में मुझे कई बार बता दिया करती थी, मैंने कभी भी उसकी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। एक दिन प्रियंका ने मुझे कहा सर मेरा बर्थडे है और मुझे आपके साथ ही सेलिब्रेट करना है मैं उसे मना नहीं कर सकता था और हम दोनों उस दिन साथ मे चले गए। उसने सारी व्यवस्था की हुई थी लेकिन जिस जगह उसने हाँल बुक किया था वह पूरा खाली था मैंने उसे कहा तुम्हारे और गेस्ट कहां है तो वह कहने लगी सर आप ही मेरे लिए सबसे खास है और आप ही के लिए मैंने यह पार्टी रखी थी। मैंने उसे कहा तुम्हारा दिमाग सही है वह कहने लगी सर मैं आपकी बातों से बहुत ज्यादा प्रभावित हूं और आपको दिल ही दिल चाहने लगी हूं मैंने उसे कहा मैं शादीशुदा हूं लेकिन वह मेरी बात न मानी और वह मेरे गले मिलने लगी। मैंने भी उसे अपनी बाहों में ले लिया जब हम दोनों के अंदर से गर्मी बढ़ने लगी तो मैंने प्रियंका के स्तनों को उसके ड्रेस से बाहर निकालते हुए अपने मुंह के अंदर ले लिया और उन्हें चूसने लगा।

उसके स्तनो को रसपान करने में जो आनंद मुझे आ रहा था वह मेरे लिए एक अलग ही थी। मैंने उसे वही जमीन पर लेटा कर उसके ऊपर लेट गया और उसकी चूत को चाटना शुरू किया लेकिन उसको चाटने में जो मजा आया वह मेरे लिए एक अलग ही अनुभूति थी। मैंने काफी देर तक उसकी चूत को चाटा जब मैंने अपने लंड को उसकी योनि में घुसाया तो वह चिल्लाते हुए मुझसे लिपट गई उसने मेरी कमर पर अपने नाखूनों के निशान भी मार दिए थे। मुझे उसे धक्के देने में बड़ा मजा आ रहा था मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेज गति से उसे चोद रहा था वह अपने मुंह से सिसकिया ले रही थी और मुझे पूरे मजे दे रही थी। जब मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने उसके बड़े स्तनों पर अपने वीर्य को गिरा दिया और उसने अपने स्तनों को साफ किया। हम दोनों ने साथ में केक काटा और उसके बाद वह मेरी बहुत ही खास हो गई जब भी मुझे उसकी जरूरत होती तो वह मेरे एक बार कहने पर मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाती।

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