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माल गिराने की खुशी

Sex stories in hindi, antarvasna: पापा चाहते थे कि मैं उनकी गारमेंट शॉप का बिजनेस संभालू लेकिन मेरा उनकी शॉप को संभालने का कोई भी मन नहीं था इसलिए मैं जॉब कर रहा था लेकिन पापा की जिद के आगे मेरी एक न चली और उन्होंने मुझे कहा कि बेटा तुम्हें शॉप का काम संभालना ही पड़ेगा। मैं उसके बाद पापा की शॉप का काम संभालने लगा था मुझे अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था क्योंकि पापा की तबीयत खराब रहती थी और घर में मैं ही इकलौता हूं इस वजह से मुझे ही घर का सारा काम देखना पड़ रहा था। मैं शॉप का काम संभाल रहा था तो एक दिन मैं शॉप में बैठा हुआ था उस दिन एक लड़की शॉप में आई और वह मुझसे कहने लगी कि क्या आपका नाम रोहित है। मैंने उसे कहा हां मेरा नाम रोहित है लेकिन मैंने उसे पहचाना नहीं था उसने मुझे बताया कि वह हम लोगों की कॉलोनी में ही रहा करती थी और उसका नाम सरिता है। मुझे भी ध्यान आया और मैंने सरिता से कहा आज तुम इतने वर्षों बाद मिल रही हो। सरिता पूरी तरीके से बदल चुकी थी वह हमारे पड़ोस में ही रहा करती थी उस वक्त मैं आठवीं कक्षा में पढ़ता था। मैंने सरिता से बैठने के लिए कहा और फिर वह मुझसे बात करने लगी वह मुझसे मेरे बारे में पूछने लगी तो मुझे भी अच्छा लग रहा था और उसे भी बहुत अच्छा लगने लगा था। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे सरिता के लिए मैंने कोल्ड ड्रिंक मंगाई और वह कोल्ड ड्रिंक पीने लगी उसके बाद वह चली गई। जब भी सरिता दुकान में आती तो मैं उससे बात करता और मुझे बहुत अच्छा भी लगता।

एक दिन सरिता शॉप में आई हुई थी उसने अपनी बहन की शादी का कार्ड देते हुए मुझे कहा कि अगले महीने मेरी बहन की शादी है और तुम्हें शादी में जरूर आना है। मैंने सरिता को कहा हां मैं तुम्हारी बहन की शादी में जरूर आऊंगा। मैं सरिता की बहन की शादी में जाना चाहता था मैं जब सरिता की बहन की शादी में गया तो उस दिन मुझे काफी अच्छा लगा और उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। हम दोनों साथ में ही थे सरिता ने मुझे अपनी फैमिली से मिलाया उसके परिवार से मिलकर मुझे अच्छा लगा। सरिता मेरे साथ बहुत ही खुश थी मुझे नहीं मालूम था कि सरिता मुझसे प्यार करने लगी है और उस दिन सरिता ने मुझे अपने दिल की बात कह दी तो मैं भी उसे मना ना कर सका और मैंने सरिता के प्रपोज को स्वीकार कर लिया। हम दोनों अब एक दूसरे से प्यार करने लगे थे और हम दोनों को ही एक दूसरे का साथ अब अच्छा लगने लगा था। सरिता जब भी मेरे साथ होती तो मुझे काफी अच्छा लगता लेकिन कुछ दिनों के लिए सरिता आप अपने काम के सिलसिले में पुणे चली गई थी। वह जिस कंपनी में जॉब करती है उसी कंपनी के माध्यम से वह पुणे चली गई और कुछ दिनों तक वह पुणे में रही। मैं सरिता को बहुत मिस कर रहा था और इस दौझरान मैंने उसे काफी फोन भी किया हम दोनों की फोन पर ही बातें हो पा रही थी। हम दोनों को ही साथ में बात कर के अच्छा लगता जब भी मैं और सरिता साथ में होते तो हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताया करते। एक दिन सरिता का मुझे फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि रोहित तुम मुझे लेने के लिए एयरपोर्ट पर आ जाना मैंने सरिता को कहा ठीक है मैं तुम्हें लेने के लिए एयरपोर्ट पर आ जाऊंगा।

मैं उसे लेने के लिए चला गया मैं जब सरिता को लेने के लिए एयरपोर्ट पर गया तो सरिता और मैं साथ में ही थे और हम दोनों ने साथ में अच्छा समय बिताया। काफी समय बाद हम दोनों ने साथ में अच्छा समय बिताया और उसके बाद मैंने सरिता को उसके घर छोड़ दिया और सरिता अपने घर जा चुकी थी। मुझे इस बात की बहुत खुशी थी कि सरिता वापस लौट चुकी है अगले दिन मैंने सरिता को मिलने के लिए कहा तो वह मुझे मिलने के लिए आ गई। जब वह मुझे मिलने के लिए आई तो हम दोनों ही एक दूसरे के साथ एक कॉफी शॉप में बैठे हुए थे। मेरे सामने सरिता बैठी हुई थी और मैं उसे कहने लगा कि मैं तुम्हें बहुत मिस कर रहा था तो वह मुझे कहने लगी कि मुझे भी तो तुम्हारी बहुत याद आ रही थी। सरिता और मैं एक दूसरे के साथ दो घंटे तक रहे, दो घंटों का पता ही नहीं चला की कब दो घंटे बीत गए। सरिता ने मुझे कहा कि मुझे अब चलना चाहिए सरिता को उस दिन घर जल्दी जाना था तो मैंने सरिता को घर छोड़ दिया और वह घर चली गई। मेरी और सरिता की मुलाकात होती ही रहती थी। एक दिन मैं सरिता को मिलने के लिए गया हुआ था मैं उस दिन सरिता के घर पर ही था और हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा टाइम स्पेंड किया। सरिता की फैमिली को भी मेरे और सरिता के रिलेशन के बारे में पता चल चुका था और उन लोगों को मेरे और सरिता के रिलेशन से कोई भी ऐतराज नहीं था। हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया और हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों ने साथ में अच्छा टाइम स्पेंड किया। मैं उसके बाद घर लौट आया था, जब उस दिन मैं घर लौटा तो मेरी फैमिली में भी सब लोग यह चाहते थे कि मैं अब शादी कर लूं।

मैंने सरिता के बारे में अभी तक घर पर नहीं बताया था लेकिन उस दिन मुझे सरिता के बारे में अपने घर पर बताना पड़ा और सरिता को भी अपनी फैमिली से मिलवाना पड़ा। सरिता मेरे परिवार वालों से मिल चुकी थी और उसे भी उन लोगों से मिलकर अच्छा लगा। मेरे और सरिता के रिश्ते को हमारे घर वालों की मंजूरी मिल चुकी थी अब हम दोनों इस बात से बहुत ही खुश थे। सरिता और मैं एक रात फोन पर बातें कर रहे थे जब उस दिन हम दोनों बातें कर रहे थे तो हम दोनों के बीच सेक्स को लेकर बातें होने लगी। मैंने सरिता को फोन पर इतना गर्म कर दिया था उसने अपनी योनि में उंगली डालकर अपनी इच्छा को शांत किया। मैं चाहता था सरिता और मैं एक दूसरे के साथ सेक्स करें। मैंने अगले दिन सरिता को कहा मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है। सरिता भी मेरे साथ सेक्स करने के लिए उतावली थी वह मेरे लिए तड़प रही थी। मैंने सरिता को घर पर बुला लिया सरिता और मैं साथ में बैठे हुए थे। मैंने सरिता की जांघों को सहलाना शुरु किया और उसे अपनी बाहों में ले लिया। जब वह मेरी बाहों में आई तो मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया और उसके नरम होठों को चूमकर मुझे अच्छा लग रहा था जिस तरीके से मैं उसके नरम होठों का रसपान कर रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा मजे में आ गई थी। वह मुझे कहने लगी उस से अब रहा नहीं जाएगा। मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया। जब वह बिस्तर पर लेट गई तो मैंने अपनी लंड को बाहर निकाला। मेरा लंड सरिता की चूत के अंदर जाने के लिए तड़प रहा था। मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू किया। जब मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा। सरिता ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया था वह उसे बड़े अच्छे तरीके से चूस रही थी। वह जिस प्रकार से मेरे लंड को चूस रही थी उससे मुझे मज़ा आ रहा था और उसको भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। मैंने सरिता को कहा तुम मेरे लंड को ऐसे ही चूसती रहो।

हम दोनो एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे तरीके से सेक्स के मजे लेना चाहते थे। मैंने सरिता के स्तनों का रसपान करना शुरू कर दिया मैं उसके स्तनों को चूस रहा था मुझे मजा आने लगा था। सरिता और मै एक दूसरे के लिए इतना ज्यादा गरम हो चुके थे मैं अब एक पल के लिए भी रह नहीं पा रहा था। मैंने सरिता को कहा मैं तुम्हारी योनि में अब लंड डालना चाहता हूं। मैंने सरिता की चूत को चाटना शुरू किया। सरिता की चूत को चाटकर मुझे अच्छा लग रहा था उसकी योनि से निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था। उसकी चूत का पानी बाहर आ चुका था। मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाया। मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर लगाया और अंदर की तरफ डाला। जब मैंने उसकी चूत मे अपने मोटे लंड को घुसाया तो मुझे मजा आने लगा और सरिता को भी मजा आने लगा। मैं और सरिता एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। मैंने सरिता के दोनों पैरों को खोल लिया था सरिता मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैंने सरिता के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था और सरिता को मैं तेज गति से चोदने लगा।

मैं उसे जिस तेज गति से धक्के मार रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा मजे मे आ गई थी वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर की गर्मी को तुमने पूरी तरीके से बढा कर रख दिया है। मैंने सरिता की चूत में अपने माल को गिरा दिया था। सरिता खुश हो चुकी थी और सरिता चाहती थी हम दोनों एक बार और शारीरिक संबंध बनाए। मैंने अपने लंड को सरिता की चूत मे दोबारा से घुसा दिया मेरा लंड सरिता की चूत में घुस चुका था। मैं उसकी चूत बड़े ही अच्छे तरीके से मार रहा था मै जिस प्रकार से सरिता की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था उससे मुझे मजा आने लगा था। सरिता को भी बड़ा मजा आ रहा था अब हम दोनों एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स के मजे ले रहे थे। मैंने सरिता के दोनों पैरों को खोला हुआ था वह जोर से चिल्ला रही थी। वह मुझे कहती मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है हम दोनों एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स के मजे ले रहे थे और मैं सरिता की योनि के अंदर अपने माल को गिरा चुका था।

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