Best Hindi sex stories

Sab se achi Indian Hindi sex kahaniya!

कल्पना की चूत से खून निकल आया

Sex stories in hindi, antarvasna: राजेश मुझसे मिलने के लिए घर पर आया हुआ था उस दिन रविवार का दिन था मैं घर पर ही था। सुबह के 9:00 बज रहे थे और राजेश और मैं साथ में बैठे हुए थे राजेश मुझसे काफी दिनों के बाद मिला था राजेश ने मुझे बताया कि उसने नई कंपनी ज्वाइन कर ली है। मैंने राजेश को उसके लिए बधाई दी और कहा कि चलो यह तो बड़ा ही अच्छा है। हम दोनों बातें कर रहे थे कि मां हम दोनों के लिए चाय बना कर ले आई और हम दोनों ने चाय पी। राजेश और मेरी उस दिन काफी देर तक बातें हुई मुझे काफी अच्छा लगा उस दिन राजेश से बातें कर के काफी लंबे समय के बाद वह घर पर आया था और मुझसे मिला था। जब राजेश घर गया तो उस वक्त 12:00 बज रहे थे और मैंने भी सोचा कि क्यों ना आज रोहित को मिल आऊं।

रोहित को मिलने के लिए मैं उस दिन उसकी शॉप पर चला गया था। मैं रोहित से मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा और रोहित भी काफी खुश था काफी दिनों के बाद मैं रोहित को मिल रहा था। रोहित ने मुझे बताया कि उसके भैया की शादी जल्द ही होने वाली है। हालांकि यह बात मुझे पहले से ही पता थी रोहित ने मुझे शादी का कार्ड दिया और कहा कि तुम्हें भैया की शादी में आना है। मैं रोहित के साथ करीब 3 घंटे तक बैठा रहा फिर मैं घर वापस लौट आया था। जब मैं घर वापस लौटा तो उसके बाद मैं अपने रूम चला गया और आराम करने लगा।  मुझे कुछ दिनों के बाद रोहित के भैया की शादी में जाना था और मैं जब रोहित के भैया की शादी में गया तो वहां पर मुझे काफी अच्छा लगा। रोहित को भी बड़ा अच्छा लगा था जिस तरीके से हम लोगों ने उस दिन शादी का इंजॉय किया। मैं रात के वक्त घर लौट आया था, जब मैं घर लौटा तो उस दिन मुझे काफी देर हो गई थी और मैं घर पर ही था। काफी दिन हो गए थे मैं जयपुर नहीं जा पाया था तो मैंने सोचा कि क्यों ना कुछ दिनों के लिए मैं जयपुर चला जाऊं।

जयपुर में मेरी बड़ी बहन रहती है और उनसे मिले हुए मुझे काफी समय हो चुका था इसलिए मैं जयपुर जाना चाहता था। मैंने उस दिन ऑनलाइन टिकट बुक करवा दी। जिस दिन मुझे जयपुर जाना था उस दिन मैंने दीदी को फोन किया। यह बात मैंने उनसे अभी तक नहीं कही थी की मैं जयपुर आ रहा हूँ। जब मैंने दीदी से इस बारे में कहा तो दीदी मुझे कहने लगी कि क्या तुम वाकई में जयपुर आ रहे हो मैंने दीदी से कहा कि हां मैं जयपुर आ रहा हूं। मैं रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था जैसे ही ट्रेन आई तो मैंने अपना सामान ट्रेन में रखा और मैं अपनी सीट पर बैठा गया था। उस दिन मुझे सफर का पता ही नहीं चला और मैं रात को जयपुर पहुंच चुका था। मैं जब रात के वक्त जयपुर पहुंचा तो वहां से मैंने टैक्सी ली और मैं दीदी के घर पर चला गया। दीदी से मिलकर मुझे बड़ा अच्छा लगा था और दीदी भी बड़ी खुश थी।

काफी लंबे समय बाद मैं दीदी को मिल रहा था और दीदी ने मुझे कहा कि तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम मुझसे मिलने के लिए आ गए। दीदी और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैंने दीदी से कहा कि दीदी जीजा जी नजर नहीं आ रहे हैं तो दीदी ने मुझे बताया कि वह अपने काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए कोलकाता गए हुए हैं। दीदी और जीजाजी जयपुर में रहते हैं और उनका परिवार अहमदाबाद में ही रहता है दीदी को जयपुर में रहते हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं। मैं जयपुर में 4 दिनों तक रुका और फिर मैं वापस अहमदाबाद लौट आया था। जब मैं अहमदाबाद वापस लौटा तो उस दिन मुझसे मां ने कहा कि बेटा आज मुझे पड़ोस में जाना है और मुझे आने में देर हो जाएगी। मैंने मां से कहा कि मां कोई बात नहीं मैं आज खाना बाहर से ही आर्डर करवा देता हूं मां ने कहा कि ठीक है बेटा तुम आज खाना बाहर से ही आर्डर करवा देना।

उस दिन मैंने खाने का आर्डर बाहर से ही करवा दिया था। जब मैंने खाने का आर्डर करवाया तो उस वक्त मां भी घर पर आ चुकी थी और हम लोगों ने उस दिन साथ में डिनर किया डिनर करने के बाद मैं अपने रूम में चला गया। मुझे उस दिन कल्पना का फोन आया और जब मुझे उसका फोन आया तो मैंने उससे फोन पर काफी देर तक बातें की। कल्पना से मेरी काफी लंबे समय के बाद बातें हो रही थी। हम दोनों एक दूसरे को काफी लंबे समय से मिले भी नहीं थे। उस दिन जब मेरी और उसकी बातें हुई तो हम लोगों को बड़ा ही अच्छा लगा और हम दोनों बड़े खुश थे जिस तरीके से हम दोनों की बातें हुई। एक दिन मैं और कल्पना साथ में थे हम दोनों ने उस दिन मिलने का फैसला किया था। कल्पना मेरे साथ मेरे ऑफिस में जॉब किया करती थी लेकिन अब वह ऑफिस से रिजाइन दे चुकी है और उसने अपने घर के नजदीकी एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया है और वह उसी स्कूल में पढ़ाती है। मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस तरीके से मैं और कल्पना एक दूसरे से बातें कर रहे थे और हम दोनों की बातें काफी देर तक हुई।

उस दिन हम दोनों एक दूसरे को मिलकर बड़े खुश थे और फिर मैं घर लौट आया था। कुछ ही दिनों में मुझे अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में मुंबई जाना था और मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में मुंबई चला गया। जब मैं मुंबई गया तो वहां पर मुझे कुछ दिनों तक रहना पड़ा और मैं कुछ दिनों तक मुंबई में ही रहा उसके बाद मैं वहां से वापस लौट आया था। जब मैं वापस लौटा तो उस दिन मुझे कल्पना ने मिलने के लिए बुलाया और हम दोनों की मुलाकात हुई। हम दोनों की मुलाकात बड़ी ही अच्छी रही। हम दोनों एक दूसरे को मिले तो हम दोनों बड़े ही खुश थे मैं बहुत ज्यादा खुश था जिस तरीके से मेरी और कल्पना की मुलाकात हुई थी और हम दोनों एक दूसरे को मिले थे। हालांकि पहले हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन अब हम दोनों के बीच प्यार पनपने लगा था और हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे थे। इसी वजह से तो मेरे और कल्पना के बीच की नजदीकियां बढ़ती ही जा रही थी और हम दोनों बड़े खुश है जिस तरीके से हम दोनों के बीच की नजदीकियां बढ़ने लगी थी।

हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे मैंने कभी भी कल्पना के बारे में ऐसा नहीं सोचा था लेकिन अब हम दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे थे। हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही खुश हैं जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं और एक दूसरे के साथ में टाइम स्पेंड किया करते हैं। कल्पना और मै जब भी फोन पर बाते करते तो हमारी बात गरमा गरमा हो ही जाती थी। जिस से हम दोनो को ही अच्छा लगता और हम दोनो एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तडप रहे थे। जब मैंने एक दिन कल्पना को कहा आज हम लोग सेक्स कर लेते है तो मै भी तडप रहा था और कल्पना भी तडप रही थी। वह भी मेरे साथ सेक्स करने के लिए तडप रही थी और मैं भी कल्पना को चोदना चाहता था। जब हम दोनो उस दिन साथ मे थे तो मैं कल्पना के होंठो को चूम रहा था वह भी तडप रही थी और मैं भी तडप रहा था।

अब मैं अपने आप पर काबू नही कर पा रहा था और वह भी रह नहीं पा रही थी। वह मुझसे अपने नरम होंठो को टकरा रही थी और मेरी आग को बढा रही थी। जब हम दोनो गरम होने लगे तो मैंने उसे कहा तुम अपने कपडे उतार दो और उसने अपने कपडे उतार दिए थे जिस से वह रह नहीं पा रही थी। मैंने अब कल्पना के स्तनो को भी दबाया और कल्पना के नरम और गोल स्तन मुझे दबाने मे मजा आ रहा था वह मादक आवाज मे सिसकारिया ले रही थी और मुझे गरम खर रही थी। कल्पना की चूत से पानी बहुत निकल रहा था वह अपने पैरो को आपस मे मिलाने लगी थी और उसकी गर्मी बढने लगी थी। मेरी आग भी बढ चुकी थी और मैंने कल्पना की पैंटी को खोलते हुए उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था।

अब वह चिल्ला रही थी और मुझे भी मजा आ रहा था जब वह जोर से सिसकारियां ले रही थी और मेरा साथ देती। मैंने देखा कल्पना की चूत से पानी बहुत ज्यादा मात्रा मे निकल रहा है इस वजह से उसे मजा आ रहा था और मुझे भी मजा आ रहा था। कुछ देर धक्के मारने के बाद मेरा लंड उसकी चूत मे गिर चुका था। मैंने लंड को बाहर निकाला तो मैंने देखा कल्पना की चूत से खून भी निकल रहा था। मैं बढा खुश था और कल्पना भी बहुत खुश थी जिस तरह से मैंने कल्पना को चोदा था पर वह चाहती थी हम दोनो दोबारा सेक्स करे और हम दोनो ने दोबारा सेक्स करना शुरू किया। मैं कल्पना की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किए जा रहा था। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी। मै और कल्पना बहुत ही अच्छे से एक दूसरे का साथ दे रहे थे। मेरा माल अब कल्पना की चूत मे गिर चुका था और मैं खुश था जिस तरह से मैंने कल्पना की चूत के मजे लिए थे।

Best Hindi sex stories © 2017