Best Hindi sex stories

Sab se achi Indian Hindi sex kahaniya!

जल्दी से इसका कुछ करो-1

desi sex kahani हैल्लो दोस्तों, सभी लंड वालों और चूत वालियों को मेरा सलाम, नमस्ते में छत्तीसगढ़ के शहर रायपुर का रहने वाला हूँ और बहुत दिनों से में कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और सोच रहा था कि क्यों ना में भी अपनी कहानी को लिखकर आप सभी को सुना दूँ, हो सकता है कि शायद आपको मेरी कहानी पसंद आ जाए। अब सबसे पहले में अपने बारे में बता देता दूँ, मेरा नाम सुनील है और में एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ। मेरी उम्र 28 साल, मेरी लम्बाई 5.4 इंच और मेरे लंड का आकार 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा। दोस्तों जब में 18 साल का हुआ तब मैंने सबसे पहले अपने घर की नौकरी को चोदना चाहा और मैंने हिम्मत करके उसको यह अपने मन की बात कही, लेकिन उसने मुझसे अपनी चुदाई करवाने से साफ मना कर दिया। फिर में बहुत डर गया और मन ही मन सोचने लगा कि कहीं वो यह बात मेरे घरवालों को ना बता दे और फिर में अपनी नौकरानी से माफी माँगने लगा। फिर इस डर की वजह से में बहुत दिनों तक किसी भी लड़की से बहुत दूर रहने लगा था, लेकिन इस वजह से मेरे पहचान वालों में मेरी एक शरीफ लड़के की छवि बन गई, वो सभी लोग मुझे बहुत सीधा अच्छा लड़का समझने लगे थे।

दोस्तों यह मेरी आज की कहानी मेरी शादी के बाद की एक सच्ची घटना है, जब मैंने पहली बार अपनी पत्नी को चोदा, लेकिन मेरी प्यास अब बुझने की जगह पहले से भी ज्यादा बढ़ गई और उस प्यास को बुझाने के लिए मैंने अपनी पत्नी को एक रात में कई बार लगातार चोदा। अब उस वजह से वो मेरी चुदाई से परेशान होने लगी थी, लेकिन तब भी में शांत नहीं हुआ और मेरी चुदाई करने की इच्छा पहले से भी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। फिर इस वजह से मैंने अब दूसरी लड़कियों की तरफ देखना शुरू कर दिया। में अब कोई ऐसी लड़की या औरत की तलाश में था जो मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर पूरी तरह से शांत कर दे और फिर सबसे पहले मेरी नज़र मेरी पत्नी की बड़ी बहन, जिसका नाम श्वेता है उसके ऊपर पड़ी। दोस्तों वो अपने नाम के बिल्कुल विपरीत एकदम काली थी, लेकिन थी वो बहुत सेक्सी, उसकी लम्बाई मेरी लम्बाई से 1.5 ज्यादा थी और उसके बूब्स बड़े ही सुडोल थे, जो हमेशा उसके बड़े गले के सूट से बाहर निकलकर उछल उछलकर मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने लगे थे। अब में उसकी तरफ खिंचता चला गया और उसकी वो गांड एकदम गोल आकार में थी, ना तो वो पतली थी और ना ही मोटी बिल्कुल मध्यम और इसलिए में जब भी उसको देखता, मुझे खजुराहो की सेक्स करती हुई वो मूर्तियाँ याद आ जाती थी।

दोस्तों धीरे धीरे मुझे अपनी पत्नी से पता चला कि उसकी अपने पति से बिल्कुल भी नहीं बनती थी और उसी वजह से यहाँ तक की उसके पति तो मेरी शादी में भी नहीं आए थे। फिर में जब भी अपने ससुराल जाता, वो मुझे वहीं पर नजर आती और वो मुझे ताने मारती रहती थी, क्योंकि उसकी सोच अब सभी आदमियों के लिए अपने पति की वजह से एक हो गई थी। अब उसका मानना था कि हम सभी आदमी एक जैसे मतलबी होते है। दोस्तों उसके इन सभी तानो को सुनकर मैंने भी एक दिन मन ही मन में सोच लिया था कि इसको तो एक दिन में चोदकर पूरी रंडी बनाकर ही रहूँगा और मुझे इसकी चुदाई करके अपनी बेज्जती का बदला एक दिन जरुर लेना है। अब में किसी अच्छे मौके की तलाश में रहने लगा था, में उस मौके की तलाश में था जिसका फायदा उठाकर में उसकी चुदाई कर सकता था और इसलिए में जानबूझ कर उसके सामने ऐसा बनकर रहने लगा था कि जैसे में उसके साथ बिल्कुल भी नाराज नहीं था। एक दिन मुझे अपनी पत्नी से पता चला कि उसका और उसके पति का विवाद अब अदालत तक जा पहुंचा है और अब श्वेता को उस केस की वजह से अपने पति के शहर तक जाना भी पड़ता था, लेकिन वो शहर बहुत दूर था और वहां आने जाने में करीब पांच घंटे का समय लगता था और हमेशा उनके साथ मेरा साला ही जाता था।

एक दिन मेरे साले को कुछ जरूरी काम था और इस वजह से मेरी सास ने मुझसे फोन करके आग्रह करते हुए कहा कि क्या आप कल श्वेता के साथ जा सकोगे? उनके मुहं से वो बात सुनकर मेरी तो मन की मुराद पूरी हो रही थी, इसलिए में मन ही मन बड़ा खुश हुआ, लेकिन मैंने बहाना बताने हुए उनको कहा कि में उनके साथ चला तो जाता, लेकिन मुझे भी अपना कुछ जरूरी काम है। अगर आपने मुझे पहले से बताया होता तो में अपने काम को सेट कर लेता। अब इस बात पर मेरी सास ने मुझसे कहा कि नहीं सुनील बाबू श्वेता को अकेले वहां पर भेजने की मेरी हिम्मत नहीं होती, लेकिन उसका वहां पर जाना भी बहुत जरूरी है और आज उसके भाई को भी बहुत जरूरी काम आ गया है और वो जाने से मना कर रहा है। अब इस वजह से मैंने आपसे यह बात कहीं है अगर आपको कोई इतना जरूरी काम ना हो तो आप उसके साथ चले जाए। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, आप कहती है तो में चला जाता हूँ, लेकिन आप अगली बार से ध्यान रखना और मुझे ऐसा कोई भी काम एक दिन पहले ही बता देना, में कल ठीक समय पर पहुँच जाऊंगा आप उनको कहना वो मुझे तैयार मिले।

अब उन्होंने कहा कि हाँ ठीक है, में उसको तैयार रहने के लिए कह दूंगी और आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपने हमारी बहुत बड़ी समस्या को हल कर दिया, वरना हम सभी घर वाले इस बात को लेकर बड़ा चिंतित थे। फिर मैंने उनको कहा कि आपको मुझे धन्यवाद नहीं कहना चाहिए, आप लोगों की मदद करना मेरा भी तो एक फर्ज है और फिर अगले दिन में अपनी पत्नी को बताकर अपने ससुराल ठीक समय पर पहुंच गया। फिर उसके बाद में और श्वेता साथ उसके काम के लिए घर से निकल गये और पूरे रास्ते हम लोग तरह तरह की बातें कर रहे थे, तब मैंने उनसे बातों ही बातों में पूछा कि आपकी अपने पति के साथ सेक्स लाइफ कैसी थी? इस बात पर उन्होंने मुझे बताया कि सब कुछ ठीकठाक ही था, लेकिन वो इतना सा जवाब देकर चुप हो गई। दोस्तों उसने सेक्स की बातों में अपनी तरफ से ज़रा भी रूचि नहीं दिखाई और अब में बड़ी गहरी सोच में पढ़ गया कि कैसे इसकी सेक्स में रूचि पैदा की जाए? सबसे पहले मैंने सोचा कि कोई नशीली गोली को में इसकी चाय में डाल दूँ, जिसको पीकर यह नशे में आकर मेरा साथ देने लगे, लेकिन फिर मैंने सोचा कि नहीं क्यों ऐसा करके जोखिम लिया जाए? दोस्तों उस दिन मैंने उसके साथ जाकर उसका काम खत्म करने के बाद जानबूझ कर अपनी तरफ से देर कर दी।

अब जिसकी वजह से हमारी आखरी बस चली गई और उसके बाद हमे वापस अपने घर आने के लिए कोई भी साधन अब दूसरे दिन सुबह तक ही मिलना था। फिर वो मुझे वहीं पर सभी से सामने बुरा भला कहने लगी और में चुपचाप अपने गुस्से को शांत करने की कोशिश करते हुए वो सभी बातें श्वेता के ताने सुनता रहा। दोस्तों क्योंकि यह तो मेरे सोचे समझे प्लान का एक हिस्सा था और आखिर में हम दोनों एक होटल में रुकने के लिए चले गये। फिर मैंने वहां पर पहुंचकर जानबूझ कर दो कमरे के लिए बोला क्योंकि में बहुत अच्छी तरह से जानता था कि वो मेरी बात को नहीं चलने देगी और फिर ठीक वैसा ही हुआ। अब उसने कहा कि दो कमरों की क्या जरूरत है? हम दोनों को बस एक रात ही तो रुकना है, फिर हम दो कमरों का किराया क्यों दे? हम दोनों एक ही कमरे में सो जाएँगे। फिर उसके कहने पर मैंने एक कमरा हमारे नाम से ले लिया और हम दोनों उस कमरे में चले गये, लेकिन उसने होटल वाले से कहकर दोनों पलंग को अलग अलग करवा दिया था। अब मेरे प्लान का दूसरा हिस्सा शुरू होने जा रहा था। फिर मैंने उसको किसी बात को लेकर बहस करनी शुरू कर दी और जैसा कि बहस का नतीज़ा होता है ठीक वैसे ही अंत में वो रोने लगी।

अब वो मुझसे रोते हुए कहने लगी कि एक तो में वैसे ही कम परेशान नहीं रहती हूँ और इस पर तुम मेरा साथ देने की जगह मुझसे लड़ रहे हो, तुम तो मेरे अपने हो तुम्हे तो मेरी परेशानी मेरे दुख को सबसे पहले समझना चाहिए और तुम यह सब नहीं समझोगे तो और कौन समझेगा? एक तुम ही तो मेरे अपने हो। फिर बस अब में अंत में उसको मुझे माफ करने के लिए कहने लगा और में उसको कहने लगा कि नहीं श्वेता जी आप मत रोए, आगे से अगली बार ऐसा कुछ भी नहीं होगा, प्लीज आप मुझे मेरी गलतियों के लिए माफ़ कर दो, मैंने आपका बहुत दिल दुखाया है। फिर में आगे बढ़कर उसके आँसू साफ करने लगा, मेरा एक हाथ उसके नरम गालों से छूते ही वो एकदम से चौंक पड़ी, लेकिन वो तब भी अपनी नजरे नीचे झुकाए खड़ी थी और उसकी आँखों से आँसू बाहर निकल रहे थे। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे में किसी अप्सरा को देख रहा हूँ। पहले मैंने उसके आँसू साफ किए और फिर मैंने सही मौका देखकर उसको कहा कि श्वेता जी आज के बाद में आपको कभी भी बुरा भला नहीं कहूँगा, लेकिन अब भी उसकी आँखों से आँसू नहीं रुक रहे थे।

अब मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके अपने दोनों हाथों से उसके उदास चेहरे को पकड़ लिया और अपने दोनों हाथों के अंगूठे से उसकी आँखों को साफ किया, लेकिन मेरे ऐसा करने से वो थोड़ा सा सकपका गई और इसलिए वो अब मेरी तरफ देखने लगी। फिर मैंने उसको बड़े ही प्यार से देखा और में करीब एक मिनट तक लगातार उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसकी तरफ देखता ही रहा और अब उसने कुछ देर बाद अपनी आखें नीचे कर ली और जैसे ही उसने आखें झुका ली। फिर मैंने उसके चेहरे को अपने बिल्कुल पास लाकर उसकी आँखों को चूम लिया। अब वो तुरंत मुझे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगी थी, लेकिन मैंने भी तुरंत अपना संतुलन बनाते हुए उसको सामने की तरफ से पीछे की दीवार पर टिका दिया और अब में उसकी पीठ गर्दन को चूमने लगा था, लेकिन वो अब भी मुझे अपने से दूर करने की कोशिश करते हुए लगातार मेरा विरोध कर रही थी, लेकिन वो चीख नहीं रही थी, वो बस अपने हाथ पैर चला रही थी। दोस्तों उसने अभी तक कपड़े नहीं बदले थे, इस वजह से उसके कपड़ो से मुझे उसके पसीने की मंद मंद भीनी खुशबू आ रही थी, जो मुझे अब और भी ज्यादा उत्तेजित किए जा रही थी।

Best Hindi sex stories © 2017
error: