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घर पर रहने वाली लड़की को उसी के रूम में चोद डाला

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मेरा नाम सूरज है और मैं रोहतक का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है और मैं एक कंपनी में जॉब करता हूं। मेरे पापा रिटायर हो चुके हैं और वह घर पर ही रहते हैं। मेरे दो छोटे भाई हैं जो कि अभी कॉलेज कर रहे हैं। मेरे पापा हमेशा से ही हम तीनों भाइयों को बहुत ही अच्छा मानते हैं और मेरी मां भी हम लोगों को बहुत ही अच्छा मानती है क्योंकि हम तीनों हमेशा से ही अपने पापा की बात पर हां में हां मिलाते हैं और कभी भी उनकी बात को हमने किसी भी प्रकार से टाला नहीं है। मेरे पापा जब रिटायर हुए तो उसके बाद उन्होंने एक घर बना लिया और जो हमने अपना घर बनाया था उसमे पापा की सारी जमा पूंजी लग गई। उन्हें जितना भी पैसा मिला था वह सब घर के खर्चे में चला गया। हमारे पापा एक बहुत ही सीधे साधे व्यक्ति हैं और वह बहुत ही मेहनत ही भी हैं।

वह रिटायरमेंट के बाद भी कुछ ना कुछ काम करते रहते हैं जिससे कि घर में पैसे आ जाते हैं और वह हमेशा कहते हैं कि मुझे सिर्फ काम करना ही अच्छा लगता है। अब मैं रिटायरमेंट के बाद क्या करूं, इसी वजह से उन्होंने कुछ समय पहले ही एक दुकान खोली है और वह दुकान भी उनकी अच्छी चलने लगी। वह और मेरी मां दोनों दुकान का काम संभालते हैं और मैं अपने ऑफिस जाता हूं जिस दिन मेरी छुट्टी होती है उस दिन मैं दुकान में ही बैठ जाया करता हूं। एक दिन हमारे चाचा हमारे घर पर आए हुए थे और कहने लगे कि सूरज क्या कर रहा है। मेरे बाप ने कहा कि वह तो जॉब कर रहा है। चाचा हमारे पड़ोस में ही रहते थे इसी वजह से वह हमारे घर पर आ जाते थे और हमारा हाल-चाल पूछ लिया करते थे। जब भी चाचा घर पर आते तो वह मुझे हमेशा ही चिढ़ाते थे क्योंकि वह बचपन से मुझे बहुत अच्छा मानते हैं और मेरे साथ ही उनका उठना बैठना रहा है। हम दोनों एक साथ में बैठकर शराब भी पी लिया करते हैं और मेरे चाचा बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं, उनका हमारे घर पर अक्सर आना-जाना होता ही रहता है। हमारे पड़ोस में शर्मा जी रहते हैं उनके ही घर पर एक लड़की रहती थी, मैं उसे अक्सर देखा करता। वह भी कहीं जॉब करती है लेकिन उन लोगों के बीच में हमेशा ही कुछ न कुछ बात को लेकर झगड़ा होता रहता है। मैं उन्हें अच्छे से नहीं जानता था इसलिए मैं ज्यादा उन लोगों से बात नहीं किया करता था क्योंकि वह भी थोड़ा अजीब किस्म के व्यक्ति थे।

जब उनका मूड होता तो वह हमसे बात कर लिया करते थे और जब उनका मूड नहीं होता तो वह हमसे बिल्कुल भी बात नहीं करते थे इसलिए मैं भी उनसे ज्यादा बात करना पसंद नहीं करता था। वो लड़की मुझे अच्छी लगती थी लेकिन उससे भी मैंने कभी बात नहीं की। अब हम लोगो ने सोचा कि क्यों ना हमारे घर का ऊपर वाला फ्लोर किराए पर दे दिया जाए, वैसे भी वो खाली ही पड़ा हुआ था और उसी दौरान शर्मा जी के घर पर जो लड़की रहती थी उनसे शर्मा जी की बहुत ज्यादा झगड़ा हो गया। उस लड़की ने कहा कि मैं कुछ दिनों में घर खाली कर दूंगी और वह लड़की हमारे घर पर पूछने के लिए आ गई की क्या आप लोग अपना घर किराए पर देना चाहते हैं। मेरी मम्मी ने उन्हें हां कर दी। जब मेरी मम्मी ने हां कह दिया तो वह लड़की हमारे घर पर सामान शिफ्ट करने लगी और उसी दौरान शर्मा जी की पत्नी ने मेरी मम्मी के साथ भी झगड़ा कर लिया और कहने लगे कि तुमने उस लड़की को भड़काया था कि तुम्हारा घर किराए पर चढ़ जाए। मेरी मम्मी कहने लगी कि इन लोगों की मानसिकता किस प्रकार की है। उसके बाद मेरी मम्मी ने भी उनसे बात नहीं की और मेरे पापा भी हम लोगों से ज्यादा बात नहीं करते थे। जब वो लड़की हमारे घर पर रहने आई तो उसका व्यवहार बहुत ही अच्छा था। मेरी मम्मी उसकी बहुत तारीफ करती थी। वो एक अच्छी जॉब करती थी और एक अच्छे घर से थी। मेरी उससे काफी समय तक बात नहीं हुई थी लेकिन अब जब वह हमारे घर पर रहने लगी तो मेरी उससे कभी कबार बात हो जाया करती थी। वह हमारे घर पर बैठने के लिए आई हुई थी तो वह मम्मी के साथ बात कर रही थी और उसने मम्मी को बताया कि शर्मा आंटी बहुत ही खराब है, मैंने उन्हें समय पर किराया दे दिया था उसके बावजूद भी वह कहने लगी कि तुमने तो मुझे किराया समय पर नहीं दिया है और उनका व्यवहार मेरे साथ शुरू से ही अच्छा नहीं था लेकिन मैं नौकरी करती हूं और दूसरे शहर में रहती हूं इस वजह से वह लोग मुझसे इस प्रकार का बर्ताव कर रहे थे।

उस लड़की का नाम गीता है और वह मेरी मम्मी की बहुत ही तारीफ करने लगी और कहने लगी कि आपका नेचर तो बहुत ही अच्छा है। शर्मा आंटी ने मेरा जीना ही मुश्किल कर दिया था। मैं अपना काम भी अच्छे से नहीं कर पाती थी क्योंकि मेरा ध्यान सिर्फ मेरे घर पर ही लगा रहता था इसी वजह से मैं बिल्कुल भी अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रही थी। जब मेरी मम्मी ने उससे पूछा कि तुम क्या करती हो तो वो कहने लगी कि मैं हॉस्पिटल में हूं इसी वजह से मेरी यहां पर पोस्टिंग हुई है। वह कोलकाता की रहने वाली थी। अब गीता से मेरी बात हो जाया करती थी और जब भी मैं शाम को छत पर टहलने जाता तो वह मुझे मिल जाती थी। एक बार मैं अपने ऑफिस से घर आ रहा था उसी समय गीता भी मुझे मिल गयी, मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें घर ले चलता हूं, मैं भी घर ही जा रहा हूं। उसने कहा ठीक है मैं तुम्हारे साथ ही घर चल पड़ती हूं। अब मैं उसे घर ले आया। जब मैं उसके साथ घर आ रहा था तो उस वक्त मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी टाइमिंग क्या है। वह कहने लगी कि मैं शाम को 6 बजे ऑफिस से फ्री हो जाती हूं। मैंने उसे कहा कि मैं भी 6 बजे ही फ्री हो जाता हूं और उसी वक्त मैं ऑफिस से आता हूं।

मैंने उसे कह दिया कि मैं तुम्हें रिसीव कर लिया करूंगा और तुम मेरे साथ ही ऑफिस से घर आ जाया करो। अब मैं उसे अपने साथ ऑफिस से घर लाने लगा और हम दोनों के बीच काफी बाते होने लगी थी। धीरे-धीरे हम दोनों के बीच में दोस्ती हो गई और मुझे नहीं पता था कि वह एक बहुत ही चुलबुली किस्म की लड़की है क्योंकि वह हमारे घर पर बहुत ही शांत बनकर रहती थी लेकिन धीरे-धीरे उसका नेचर मेरे सामने खुलने लगा था और वो कहने लगी कि मेरा नेचर इसी प्रकार का है। मैंने भी उसे कहा कि जब तुम्हारे पास समय हो तो तुम मेरे साथ घूमने चल दिया करो, हम दोनों घूमने चले जाया करेंगे और जब उसके पास समय होता तो वह मेरे साथ ही घूमने जाती थी। एक दिन मैंने उसे पूछ लिया क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है, वह कहने लगी नहीं मेरा कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं है। अब ना चाहते हुए भी गीता मुझे अच्छी लगने लगी थी और शायद कहीं ना कहीं वह भी मुझसे बहुत प्रभावित थी। वह मुझसे हमेशा कहती थी कि तुम बहुत ही अच्छे लड़के हो और तुम्हारा व्यवहार बहुत ही अच्छा है। तुम्हारे घर वाले बहुत अच्छे हैं। मैं कभी कबार उसके कमरे में चले जाया करता था, वह भी हमारे घर पर आ जाया करती थी। जब भी मुझे समय मिलता तो मैं गीता से बात कर लिया करता था। उससे बात करना मुझे बहुत ही अच्छा लगता था। हम दोनों काफी देर तक बात किया करते थे। मुझे ऐसा लगता था कि मैं उससे बात करता ही रहूं क्योंकि उससे बात करते हुए समय कट जाता था और मुझे पता ही नहीं चलता था।

गीता मुझे कहने लगी कि आज तुम मेरे रूम में आ जाओ मैंने उसे कहा कि क्या कोई बात हो गई। वह कहने लगी कि बस ऐसे ही हम लोग वहां बैठ कर बातें करते हैं। जब मैं उसके रूम में गया तो वह पूरा बिखरा हुआ था मैंने उसे कहा कि तुमने यह रूम की स्थिति क्या कर रखी है तुम साफ सफाई नहीं करती हो। वह कहने लगी कि मैं साफ सफाई तो करती हूं लेकिन आज कल मुझे समय नहीं मिल पा रहा है। अब वह मेरे पास में आकर बैठ गई उसकी चूतडे मुझसे टकरा रही थी मैंने जैसे ही उसके स्तनों को पकड़ा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। वह भी पूरे मूड में आ गई मैंने उसके कपड़ों को खोल दिया और जब मैने उसके हठो को किस किया तो वह पूरे मजे में आ गई। मुझे बहुत मजा आ रहा था मैंने अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाल दिया। जैसे ही उसने मेरा लंड अपने मुंह में लिया तो वह बहुत ज्यादा खुश होने लगी उसे बड़ा मजा आ रहा था जब वह मेरे लंड को चूस रही थी।

मैंने भी उसे लेटाते हुए उसकी योनि को बहुत अच्छे से चाटा उसके बाद उसकी चूत से पानी निकलने लगा था। मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था जब मैं उसकी योनि को चाट रहा था मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा गया और मैंने तुरंत ही अपने लंड को निकालते हुए उसकी योनि में डाल दिया। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और उसे बड़ी तेज झटके मारने शुरू कर दिए। मैं उसे इतनी तेजी से झटके मार रहा था कि उसका शरीर पूरा हिल रहा था मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था वह मेरा पूरा साथ दे रही और मैं भी उसे झटके मारता जाता। मैंने उसे उल्टा लेटा दिया मैने उसके चूतड़ों को कसकर पकड़ लिया और मैं उसे इतनी तेज चोद रहा था कि उसका पूरा शरीर गरम होने लगा और उसे बहुत ही मजा आने लगा। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसे धक्के मारता। उसकी चूतडे पूरी लाल चुकी थी और वह अपने मुंह से आवाजे निकाल रही थी। मुझसे भी बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था मैंने उसे तेज तेज झटके मारे की उन्ही झटको बीच में मेरा वीर्य पतन हो गया। जब मेरा माल उसकी योनि में गया तो वह बहुत ही खुश हो गई।

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