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घनी झाड़ियों के बीच में चूत चुदाई

Antarvasna, hindi sex kahani: मैंने पहली बार अपने कॉलेज परिसर में कदम रखा स्कूल में बारह साल का छात्र-जीवन व्यतीत करने का यह अनुभव शब्दों में व्यक्त नहीं हो सकता है। पूरा परिसर मेरे लिए एक नई दुनिया की तरह दिख रहा था यह अगस्त का महीना था दोपहर में वर्षा हो रही थी और मैं क्लास रूम के बाहर था तभी मैंने एक आवाज सुनी अरे देखो कितनी बारिश हो रही है। मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक लड़की खड़ी थी मैंने पहले किसी लडकी से कभी बात नहीं कि थी मैं अभी भी उस लड़की की आंखों को देखने में संकोच करता रहा क्योंकि यह मेरे लिए काफी असामान्य बात थी। मैं एक छोटे से कस्बे का लड़का जो लडको के स्कूल में पढता था लेकिन मैं अपने सुनहरे भविष्य के सपने देखता। मैं वहीं खडा था जब तक बारिश बंद नहीं हुई वह भी वही थी लेकिन उसने मेरी तरफ देखा तक नही मुझे नहीं पता कि वह क्या सोच रही थी लेकिन मैं उससे कुछ कहना चाहता था। मेरे लिए यह सब कुछ नया था लेकिन मैं उस लड़की की तरफ देख ही नहीं पाया उस दिन बारिश भी बन्द नहीं हुई।

जब मैं अपने हॉस्टल में लौटा तो मेरे दोस्त ने मुझसे पूछा आज तुम्हारे कॉलेज का दिन कैसा था तो मैंने उससे कहा आज तो मेरा बहुत ही अच्छा दिन था। मैं और मेरा दोस्त आपस में बात कर रहे थे हम दोनों की दोस्ती को अभी कुछ समय ही बीता था। मेरे माता-पिता भी चाहते थे कि मैं पढ़ लिखकर अपने भविष्य को सुनहरा बनाऊं लेकिन उस दिन तो मेरे दिमाग में सिर्फ उसी लड़की की तस्वीर छप चुकी थी और मैं सिर्फ उसके बारे में ही सोचता रहा। अगले दिन जब मैं कॉलेज में गया तो मैं उस लड़की को ढूंढ रहा था लेकिन वह मुझे कहीं दिखाई नहीं दी काफी दिन हो गए मुझे वह दिखाई नहीं दी। एक दिन मैं कॉलेज की कैंटीन में बैठा हुआ था मुझे कॉलेज में एक महीने से ऊपर हो चुका था और मुझे वह लड़की कॉलेज की कैंटीन में दिखाई दी उसके साथ उसकी सहेलियां भी थी लेकिन मेरी अभी भी हिम्मत नहीं हुई कि मैं उस लड़की की तरफ देख सकूं।

मैंने उस लड़की की तरफ देखा भी नहीं परंतु ना जाने मेरे दिल में उस लड़की को लेकर क्या ख्याल चल रहे थे जो कि मैं उससे बात करना चाहता था परंतु मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है वह लड़की मेरे सामने वाली टेबल में बैठी थी उसके साथ जो लड़कियां बैठी थी वह बार-बार मेरी तरफ देख रही थी मैं बहुत शरमा रहा था फिर मैं वहां से उठ कर चला गया। उस दिन जब शाम के वक्त मैं कॉलेज से हॉस्टल की तरफ जा रहा था तो मैंने देखा मेरे आगे वही लड़की जा रही है उसने भी पीछे पलट कर देखा तो मैंने अपनी नजरें झुका ली मैं उससे कुछ बात कर ही नहीं पाया। मुझे नहीं पता था की यह सब क्या हो रहा है परंतु जब भी मैं उस लड़की को देखता तो मैं बहुत ही घबरा जाता। मैंने जब यह बात अपने दोस्त को बताई तो उसने मुझे कहा लगता है तुम्हें उस लड़की से प्यार हो गया है मैंने उसे कहा लेकिन मैं उसके बारे में कुछ जानता भी तो नहीं हूं और ना ही मुझे उसका नाम पता है मुझे तो यह भी पता नही है कि वह कहां रहती है। मेरे दोस्त ने मुझे कहा कि मैं तुम्हारी मदद करूंगा और उसने मेरी मदद की उसने उस लड़की का नाम पता किया उसका नाम सुमन है। जब मुझे पता चला कि सुमन के पिताजी एक अधिकारी हैं तो मुझे लगा कि शायद मेरी दाल सुमन के साथ नहीं गलने वाली परंतु मैं अपनी पढ़ाई में भी पूरा ध्यान दे रहा था। जब भी मुझे सुमन दिखती तो मैं अपनी नजरें झुका लिया करता और मैं सोचता कि ना जाने मैं उससे कभी बात कर भी पाऊंगा या नहीं। मैं हर दिन सोचता रहता लेकिन अभी तक मैंने उससे बात नहीं की थी और ना ही मुझे ऐसी कोई उम्मीद थी इसी बीच हमारे कॉलेज के एग्जाम नजदीक आने वाले थे सब लोग पढ़ाई में जुटे हुए थे और मैं भी पढ़ाई कर रहा था। मैं चाहता था कि कॉलेज के प्रथम वर्ष में मेरे अच्छे नंबर आए और मैं पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रहा था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि उसी दौरान मेरी सुमन से बात होने लगेगी। हम लोगों के कॉलेज के एग्जाम चल रहे थे और सुमन भी मुझे दिखाई दी एग्जाम हॉल में वह बड़ी तेजी से आ रही थी लेकिन उसका पर्स नीचे गिर गया उसे शायद इस बात का पता नहीं था।

मैंने उसका पर्स उठाया और उसे आवाज लगाई तो उसने पीछे मुड़कर देखा, जब उसने पीछे मुड़कर देखा तो मैंने उसे कहा आपका पर्स गिर गया था। मैंने उसका पर्स उसे दिया और मैं उसकी तरफ देखता रहा मैं भी एग्जाम हॉल के अंदर गया और एग्जाम देने के बाद जब मैं बाहर निकला तो सुमन ने मुझसे बात की और कहा कि उस वक्त मैं आपसे बात नहीं कर पाई। मैंने उसे अपना नाम बताया मैंने उसे कहा मेरा नाम रोहन है मैंने जब उसे अपना नाम बताया तो वह कहने लगी आप तो शायद हॉस्टल में रहते हैं मैंने उसे कहा हां मैं हॉस्टल में रहता हूं। हम लोगों की ज्यादा बात ना हो सकी और हम लोग वहां से चले गए कॉलेज के एग्जाम खत्म हो चुके थे और उसके बाद छुट्टियां पड़ी हुई थी मैं भी अपने घर चला गया। काफी दिनों तक मैं अपने घर में रहा लेकिन मेरा मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था मैं सोचने लगा कि क्या मुझे वापस अपने हॉस्टल चले जाना चाहिए लेकिन इस वक्त तो कोई भी कॉलेज में नहीं होगा। करीब एक महीने तक मैं घर में रहा और उसके बाद मैं अपने हॉस्टल वापस लौट गया।

मैं जब अपने हॉस्टल वापस लौटा तो मेरे दोस्त भी वापस आ चुके थे और करीब एक महीने की छुट्टी के बाद मैं बहुत ही ज्यादा खुश था। मेरी नजरें तो सिर्फ सुमन को ढूंढ रही थी लेकिन शायद सुमन से मिल पाना मुश्किल था सुमन हमारे कॉलेज में मुझसे एक वर्ष सीनियर थी लेकिन मेरा दिल तो सुमन पर आ गया था और अब सुमन और मैं अच्छे दोस्त भी बन चुके थे। जब सुमन मुझसे मिलती तो वह मुझसे बातें जरूर किया करती और हम दोनों की जितनी भी बातें हुई उससे मुझे यही लगा कि सुमन को मेरे साथ बात करना अच्छा लगता है। सुमन ने मुझे कहा कि तुम इतना शरमाया मत करो मैंने उसे कहा मैंने अपनी 12वीं की पढ़ाई लड़कों के स्कूल से ही की है इस वजह से शायद मैंने जब तुम्हें पहली बार देखा तो मैं घबरा गया था और मैं किसी भी लड़की से आज तक बात नहीं कर पाया हूं। सुमन ही पहली ऐसी लड़की थी जिससे कि मैंने बात की थी हम दोनों अच्छे दोस्त बन चुके थे और इसी बीच हमारे कॉलेज का टूर मनाली जाने वाला था। हम सब लोग मनाली टूर के लिए तैयार थे मैं भी मनाली जाने के लिए तैयार था और मैं इस बात से खुश था कि मैं सुमन के साथ कुछ वक्त बिता पाऊंगा। जब हम लोग मनाली पहुंचे तो मनाली की वादियों में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हम लोग घूमने के लिए गए हुए थे और उसी दौरान जब हम लोग घूम रहे थे सुमन का पैर फिसला और सुमन गिर पड़ी लेकिन मैंने सुमन को किसी तरह संभाल लिया सुमन मेरी बाहों में थी। सुमन और मेरी आंखें एक दूसरे से टकरा रही थी पहली बार मेरे बाहों में कोई लड़की थी और सुमन के दिल में भी कुछ चल रहा था। उसके बाद सुमन और मेरे बीच बहुत नजदीकिया बढ़ गई। हम लोग ट्रैकिंग पर गए हुए थे उस दौरान सब लोग बहुत आगे निकल चुके थे सुमन और मैं एक साथ बात करते करते दूसरे रास्ते पर निकल गए रास्ते में बहुत झाड़ियां थी और हम दोनों वहां पर ही बैठे हुए थे। सुमन ने मेरे होठों को चूम लिया वह मुझे किस करने लगी वह मुझे किस कर रही थी तो मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैंने भी उसे बहुत देर तक किस किया। मैंने सुमन को वही लेटा दिया था जब मैंने सुमन से कहा कि तुम अपने कपड़े उतारो तो सुमन ने अपने कपड़े उतारे उसका नंगा बदन देख मेरा लंड खड़ा हो चुका था। आज से पहले मैं सिर्फ हस्तमैथुन से ही काम चला रहा था लेकिन अब मैं किसी लड़की की चूत में लंड घुसाने वाला था।

मैंने जैसे ही सुमन के स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो वह उत्तेजित हो गई और मेरे लंड को हिलाने लगी अब वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेने के लिए बड़ी बेताब थी। उसने जब मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे बहुत मजा आने लगा वह मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक लेकर चूस रही थी मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने गले के अंदर लेकर चूसती रहो उसने काफी देर तक मेरे लंड को चूसा। मैंने उसकी पैंटी को नीचे उतारा और उसकी चूत को मैंने चाटना शुरू किया उसकी चूत से निकलता हुआ पानी अब कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा लेकिन मैंने जैसे ही उसकी चूत पर अपने लंड को सटाया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने सुमन को कहा तुम डरो मत और मैंने सुमन की चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया मैंने सुमन की चूत मे लंड सटाया और अंदर की तरफ डाला तो उसकी चूत से खून निकलने लगा।

हम दोनों घनी झाड़ियों के बीच में थे और वहां पर कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था आसपास इतना पेड़ थे कि मैं सुमन को बड़े अच्छे से चोद रहा था। मै जब सुमन की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था सुमन भी बड़ी खुश थी। सुमन जिस प्रकार से मेरा साथ दे रही थी उससे मैं भी उसे कहता कि तुम मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही हो। मैं सुमन की चूतडो पर प्रहार करता रहा उससे वह बहुत ही ज्यादा खुश थी और वो मुझे कहने लगी कि मुझे तुमसे अपनी चूत मरवाकर बड़ा मजा आ रहा है। अब हमारी गर्मी बढ़ने लगी थी और मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा था मेरा वीर्य बाहर आने के लिए बेताब था। जब मेरा वीर्य गिरा तो मैंने अपने लंड को साफ किया। हम लोग वही बैठे रहे थोड़ी देर बाद मेरे क्लास में पढ़ने वाले लड़के मुझे दिखाई दिए और वह कहने लगे तुम यहां क्या कर रहे हो? मैंने उन्हें कहा हम लोग रास्ता भटक गए थे। अब हम लोग वापस लौट आए थे मनाली का टूर बड़ा ही शानदार रहा मुझे सुमन के साथ सेक्स करने का मौका मिला मुझे बहुत मजा आया, मैंने पहली बार सील पैक चूत मारी।

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