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गलतियां कुछ ज्यादा होने लगी थीं

Hindi sex story, antarvasna: मैं पुणे में नौकरी करता था मैं काफी समय बाद अपने घर आया था मैं अपने घर चंडीगढ़ करीब दो महीने बाद आया था। उस वक्त पापा और मम्मी मुझे कहने लगे कि मनीष बेटा हम लोगों ने तुम्हारी बहन संजना के लिए एक लड़का देखा है। वह लोग चाहते थे कि मैं भी एक बार उससे मिल लूं मैं जब गगन को मिला तो मुझे उसे देख कर ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा कि वह इतने बड़े घर का लड़का है और वह घर में एकलौता ही था। गगन के पापा का बहुत बड़ा बिजनेस है वह मेरी बहन को पसंद कर चुका था इसलिए अब वह मेरी बहन से शादी करने के लिए तैयार था। मैं उस वक्त घर पर ही था जब संजना और गगन की सगाई हुई पापा चाहते थे कि जल्द ही हम लोग संजना की शादी करवा दे। पापा ने गगन के पिता जी से बात की तो वह लोग भी शादी के लिए तैयार हो चुके थे उन्हें भी कोई एतराज नहीं था और जल्द ही उन लोगों की शादी होने वाली थी। कुछ ही दिनों में मुझे पुणे लौटना पड़ा पुणे में करीब 4 महीने तक जॉब करने के बाद मैं वापस अपने घर चंडीगढ़ चला आया।

जब मैं चंडीगढ़ आया तो उस वक्त पापा ने संजना की शादी का दिन तय कर लिया था मैंने भी अपने दोस्तों को अपनी बहन की शादी में इनवाइट किया था संजना की शादी में मेरे काफी दोस्त आने वाले थे और मैं बहुत ज्यादा खुश था कि वह लोग संजना की शादी में आने वाले हैं। मेरे लगभग सारे दोस्त संजना की शादी में आए हुए थे और जब वह लोग संजना की शादी में आए तो उन लोगों की मेहमान नवाजी में मैंने कोई भी कमी नहीं की। मेरी बहन संजना की शादी बड़े अच्छे से हुई जब संजना की शादी हो गयी तो घर खाली खाली से लगने लगे था। थोड़े समय तक मैं घर पर रुका मुझे घर पर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि जब तक संजना घर पर थी तब तक तो घर में काफी शोर-शराबा रहता था लेकिन संजना की शादी हो जाने के बाद घर में काफी ज्यादा खालीपन सा लग रहा था उसकी कमी सबको खल रही थी। पापा और मम्मी मुझे कहने लगे कि हमें संजना की कमी बहुत खल रही है तो मैंने उन्हें कहा कि मुझे भी ऐसा ही लग रहा है। थोड़े दिनों बाद उन लोगों को भी संजना के बिना रहने की आदत होने लगी और मैं भी वापस पुणे लौट गया था।

पापा और मम्मी चाहते थे कि मैं चंडीगढ़ में रहकर ही जॉब करूं लेकिन मेरा चंडीगढ़ में रहने का बिल्कुल भी मन नहीं था और मैं चंडीगढ़ में रहकर जॉब नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने पापा और मम्मी को साफ तौर पर मना कर दिया था लेकिन वह लोग मेरी बात मानने को तैयार ही नहीं थे। उन्होंने मुझे कहा कि बेटा तुम अब हमारे साथ ही रहो और फिर मुझे चंडीगढ़ में ही नौकरी करनी पड़ी क्योंकि पापा की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी इस वजह से मैं अब चंडीगढ़ में ही नौकरी करने लगा था। चंडीगढ़ में नौकरी करने के दौरान मेरी मुलाकात पारुल के साथ हुई पारुल और मैं एक दूसरे को पहले से जानते तो थे लेकिन कभी हमारी बात नहीं हुई थी। पारुल हमारे पड़ोस में ही रहती थी और इत्तेफाकन वह मेरे ऑफिस में ही जॉब करने लगी मेरे लिए तो बड़ी खुशी की बात है कि पारुल मेरे ऑफिस में काम करने लगी है और अब हम दोनों की बातें भी होने लगी। एक दिन पारुल और मैं लंच टाइम में साथ में बैठे हुए थे उस दिन मैं टिफिन लेकर नहीं गया था मेरा टिफिन घर पर ही छूट गया था तो पारुल ने मुझे कहा कि आज तुम मेरे साथ ही टिफिन शेयर कर लो। मैंने भी पारुल के साथ लंच किया और उसके बाद जब हम दोनों लंच कर चुके थे तो थोड़ी देर हम दोनों साथ में बैठे रहे हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो पारुल ने मुझे बताया कि मनीष मुझे लगता था कि तुम से मेरी बात कभी हो ही नहीं पाएगी लेकिन अब मेरी बात तुमसे होने लगी है तो मुझे तुमसे बात कर के बहुत अच्छा लग रहा है। पारुल और मैं एक दूसरे से अपनी हर एक बातों को शेयर करने लगे थे मैंने पारुल उनको बताया कि मुझे चंडीगढ़ में जॉब करनी नहीं थी लेकिन पापा और मम्मी के चलते मुझे चंडीगढ़ में ही जॉब करनी पड़ रही है क्योंकि पापा की तबीयत भी ठीक नहीं रहती और मुझे भी लगने लगा था कि मैं चंडीगढ़ में ही जॉब करूं तो ज्यादा बेहतर होगा इसलिए मैं चंडीगढ़ में जॉब करने लगा।

पारुल मुझे कहने लगी कि तुमने यह बहुत ही अच्छा किया जो तुमने यहां पर जॉब करने का फैसला किया कम से कम इस बहाने तुम अपने परिवार के साथ तो रह पा रहे हो। पारुल और मैं लंच टाइम में अक्सर साथ में बैठा करते और घर भी हम लोग साथ ही आया करते थे। एक दिन पारुल और मैं शाम के वक्त घर लौट रहे थे पारुल और मैं जब हमारी कॉलोनी के अंदर आए तो पारुल मुझसे कहने लगी कि मनीष मैं कुछ दिनों के लिए अपने रिश्तेदार की शादी में जयपुर जा रही हूं। मैंने पारुल को कहा लेकिन तुमने तो मुझे इस बारे में कुछ बताया नहीं था और क्या तुमने ऑफिस से छुट्टी ले ली है तो पारुल कहने लगी कि हां मैंने ऑफिस से भी छुट्टी ले ली है और हो सकता है कि तीन-चार दिनों में मैं जयपुर चली जाऊंगी। मैंने पारुल से कहा चलो यह तो बड़ा अच्छा है कि तुम इस बहाने जयपुर भी घूम आओगी पारुल मुझे कहने लगी कि हां मैं भी यही सोच रही थी कि कम से कम इस बहाने मुझे जयपुर घूमने का मौका तो मिल जाएगा। मैं और पारुल एक दूसरे से बातें कर रहे थे तभी पारुल का घर आ गया और वह मुझे कहने लगी की अभी मैं चलती हूं और पारुल अपने घर चली गई।

कुछ दिनों बाद पारुल जयपुर चली गई वह जयपुर चली गई तो उसके बाद उसका मुझे फोन आया उस वक्त मैं ऑफिस में ही था मैंने पारुल को कहा कि क्या तुम जयपुर पहुंच चुकी हो तो पारुल कहने लगी हां मैं जयपुर पहुंच चुकी हूं। मैंने पारुल को कहा कि चलो कम से कम तुम कुछ दिनों के लिए घूम तो आओगी। मैंने पारुल से कहा कि तुम्हें वहां पर कैसा लग रहा है वह मुझे कहने लगी मुझे यहां पर तो अच्छा लग रहा है और मैं सोच रही हूं कि कुछ दिन मैं यहीं पर रुकूं। मैंने पारुल को कहा कि यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुम लोग कुछ दिनों तक वहीं रुकने वाले हो। उस दिन मेरी पारुल से काफी देर तक बात हुई और उसके बाद पारुल ने फोन रख दिया अगले दिन मैं अपने ऑफिस जा रहा था तो उस दिन पारुल का मुझे फोन आया पारुल मुझे वहां के बारे में बता रही थी मैंने पारुल से कहा मैं तुम्हे शाम के वक्त फोन करता हूँ। मैंने उसके बाद जब शाम के वक्त पारुल को फोन किया तो मैंने पारुल से कहा कि तुम लोग वापस कब आ रहे हो। उसने मुझे बताया कि बस जल्द ही हम लोग वापस आ जाएंगे और थोड़े ही दिनों बाद पारुल वापस लौट आई थी। पारुल अब वापस लौट आई थी। एक दिन पारुल और मैं अपने ऑफिस से वापस लौट रहे थे तो उस दिन बारिश बहुत तेज हो रही थी। मैंने पारूल से कहा चलो आज तुम मेरे घर चलो। वह कहने लगी नहीं मनीष में कभी और आऊंगी मैंने उसे कहा तुम मेरे घर आ जाओ तो वह मेरे घर आ गई। उस दिन पापा मम्मी मेरी बहन के पास गए हुए थे इसलिए मैं घर पर अकेला ही था। पारूल के कपड़े भीग चुके थे मैंने पागल को तौलिया दिया और उसे कहा तुम्हें कपड़े चेंज करने है तो तुम कपड़े चेंज कर लो। पारुल कहने लगी नहीं मनीष। मैं उसको देखे जा रहा था उसके स्तनो का शेप मुझे दिखाई देने लगा था क्योंकि उसके कपड़ों में काफी पानी गिर चुका था जिस वजह से वह पूरी तरीके से भीग चुकी थी और उसकी ब्रा मुझे दिखाई देने लगी थी।

मैं और पारुल साथ में बैठे हुए थे लेकिन जैसे ही मैंने उसके हाथ को पकड़ा तो वह उत्तेजित होकर मुझे कहने लगी मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। मैंने उसके होठों को चूम लिया मैंने जब उसके होठों को चूम कर उसके होठों से खून निकाल दिया तो वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और मैं भी बिल्कुल नहीं रह पा रहा था। मैं उसके होठों को चूम रहा था अब हम दोनों के ही अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी। मैंने पारुल को कहा मुझे बड़ा ही अच्छा लगने लगा है वह मुझे कहने लगी मुझे भी बहुत अच्छा लगने लगा है। मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया तो पारुल ने उसे अपने हाथों से हिलाना शुरू किया जब वह लंड को हिला रही थी तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। पारूल को भी मजा आने लगा था मैंने उसको कहा मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा है। वह मुझसे कहने लगी मै तुम्हारे लंड को चूसना चाहती हूं। उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया तो उसको बड़ा ही अच्छा लगने लगा था और मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था।

मैं पारूल की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश कराना चाहता था। मैंने पारूल की चूत पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरफ धकेला और जैसे ही मेरा मोटा लंड पारुल की योनि के अंदर गया तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकल आया है। अब उसकी योनि से खून निकलने लगा था मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था मेरे अंदर कि गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मै उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के मारे जा रहा था मैं जिस तेज गति से पारुल की चूत के अंदर बाहर लंड को कर रहा था उससे उसे मज़ा आने लगा था और मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। वह बहुत ही ज्यादा जोर से सिसकारियां लेने लगी थी उसके अंदर की आग बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। वह मुझे कहने लगी अब मैं ज्यादा देर तक रह नहीं पाऊंगी मुझे भी लगने लगा था कि उसकी चूत के अंदर से ज्यादा ही गर्मी निकलने लगी है जिसे कि मैं बिल्कुल झेल नहीं पाऊंगा। मैंने उसकी योनि के अंदर अपने वीर्य को गिराकर पारूल की गर्मी को शांत कर दिया था उसके बाद हम दोनों के बीच अक्सर सेक्स संबध बनने लगे हालांकि यह सब गलती से हुआ था लेकिन अब यह गलती कुछ ज्यादा ही होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने लगे थे।

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