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गाण्ड चुदवाई और चूत चोदी एक साथ -2

xxx story शीतल- हाँ.. वो तो हम लोग तुम्हारी नुन्नी की हालत देख कर ही समझ गए हैं कि तुम्हारी फट गई है.. हा हा हा… हा हा हा.. पर मैं यह भी जानती हूँ कि मुझे पाने के लिए तुम दीदी से अपने आपको चुदवा ही लोगे.. बोलो सच कहा ना मैंने?

मैं- हाँ.. शीतल बिल्कुल सच कहा.. अगर आज मुझे तुम मिलने वाली हो.. तो मैं जो कुछ भी तुम दोनों कहोगी.. वो सब कुछ करूँगा।
शीतल- वॉववव.. चलो हम कुछ हल्का-फुल्का ब्रेकफास्ट कर लेंगे.. जिससे थोड़ी ताक़त मिलेगी.. मैं बनाकर लाती हूँ.. तब तक.. तुम दीदी जो कहे वो करना.. ओके..
मैं- ठीक है..
दीदी- उठो और मेरे पैरों में बैठ जाओ..
मैंने वैसा ही किया.. फिर दीदी ने अपना पैर उठाया और मुझसे कहा।

दीदी- चल मेरे पैर चटाना शुरू कर दे..

मैंने दोनों हाथों से दीदी का पैर अपने हाथ में लिया और उंगलियों से घुटनों तक मेरी जीभ से.. मैं उनके पैर चाटने लगा।
जब वो एक पैर को चटवा कर संतुष्ट हो चुकीं.. तो उन्होंने मुझे रुकने को कहा और दूसरा पैर आगे बढ़ाया।
मैंने ठीक उसी तरह दूसरे पैर को भी चाटा।

जब वो पूरी तरह से इससे संतुष्ट हुईं तब उन्होंने मुझे रुकने के लिए कहा.. और अचानक से एक करारा चाँटा मेरे गालों पर खींच दिया।
मैं झुंझला गया- यह क्यों मारा.. मैंने तो वही किया.. जो आप ने करने को कहा..

दीदी- यह सज़ा नहीं.. शाबाशी थी.. मैं इसी तरह से शाबाशी देती हूँ।

मैं भौचक्का सा रह गया.. अजीब पागलपन था।
अब उन्होंने मुझे उनके सामने झुक कर मेरी गाण्ड उनकी तरफ करके खड़े होने को कहा। मैं सामने वाले तिपाई पर हाथ रख कर झुका और उनकी तरफ अपनी गाण्ड कर दी और झुक कर खड़ा हो गया।

उन्होंने शीतल को आवाज़ लगाकर तेल की बोतल मँगवाई.. जैसे ही शीतल आई और मुझे वैसे देखा.. वो समझ गई कि अब क्या होने वाला है.. वो बोतल दीदी को देकर.. मेरे कान में बोलने लगी- सॉरी डियर.. बट प्लीज़ कोऑपरेट विद हर..

इतना कहकर उसने मेरे गाल पर एक हल्का सा चुम्बन कर दिया.. मुझे बहुत अच्छा लगा.. पर उसी वक़्त उनकी दीदी ने अपना हाथ मेरे नितम्बों की दरार पर घुमाना शुरू कर दिया.. ये बिल्कुल वैसा ही स्पर्श था.. जैसा शीतल ने थोड़ी देर पहले दिया था, आखिर दोनों बहनें जो थीं।

फिर उन्होंने तेल की बोतल खोली और थोड़ा तेल बीच वाली उंगली में लिया और वो उंगली मेरी गाण्ड के छेद पर टिका दी।

अभी मैं कुछ समझ पाता.. तब तक उन्होंने ज़ोर से वो उंगली मेरे छेद में अन्दर तक घुसा दी.. तेल लगाने के कारण उंगली फट से अन्दर चली गई और एक दर्द भरी चीख मेरे मुँह से निकल पड़ी..
वो सुनकर दीदी बोलने लगीं- हा हा.. उंगली से ही ये आवाज़ निकली तेरी.. ये 10 इंच का डिल्डो जब अन्दर जाएगा.. तब क्या होगा तेरा.. हा हा आहा हा हा हा..

मुझे वो किसी राक्षसी सी लगने लगी थी.. पर मुझे शीतल की चूत का मोह था सो सब झेल रहा था।
शीतल तब तक खाने का सामान लेकर आ चुकी थी।

दीदी- शीतल.. तुम इससे आगे से फीड करो.. मैं पीछे से करती हूँ.. आज इसे दोनों तरफ से खिलाते हैं.. हा हा हा हा हा हा..

शीतल ने एक सैंडविच लिया और मेरे मुँह पर रख दिया.. उधर दीदी ने उंगली निकाल दी और डिल्डो मेरी गाण्ड के छेद पर रख दिया।

दीदी- शीतल जल्दी से वो सैंडविच इसके मुँह में ठूंस दे.. ताकि जब डिल्डो इसके पिछवाड़े में घुसे.. तो इसकी चीख ना निकले..
शीतल- और निकली भी तो क्या हुआ दीदी.. हम लोग 22 वें फ्लोर पर हैं.. सारे पड़ोसी वीकेंड होने के कारण बाहर गए हुए हैं.. इसकी चीख हवा में ही दब जाएगी.. .हा हा हा हा हा हा..

मैंने मुँह खोला और शीतल मुझे सैंडविच खिलाने लगी.. जैसे ही मेरा मुँह सैंडविच से भर गया.. दीदी ने कस कर मेरी कमर को पकड़ कर एक ज़ोर का झटका दे दिया, मेरी तो आँखों के सामने जैसे अंधेरा छा गया और मुझे दिन में तारे नज़र आने लगे।
मेरी चीख सैंडविच के कारण दब चुकी थी.. और शीतल मेरे बालों में और सिर पर अपना दूसरा हाथ फेर रही थी।
अब दीदी ने पीछे से हल्के-हल्के धक्के देने लगी.. पर पता नहीं क्यों.. वो आधे से ज़्यादा डिल्डो अन्दर नहीं डाल पा रही थीं.. इससे उन्हें गुस्सा आ रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से मेरे चूतड़ों को हाथों से मार रही थीं।
इधर मैं सैंडविच खत्म कर चुका था..
दीदी ने डिल्डो बाहर निकालते हुए कहा- शीतल.. बस कर.. वो बाजू में रख.. और इससे पानी पिला.. और यहाँ कारपेट पर सीधा लिटा दे.. इस अवस्था में तो ये डिल्डो 5-6 इंच से ज़्यादा अन्दर नहीं जा रहा है.. तू अपनी शॉर्ट और पैन्टी उतार दे.. और इसके मुँह पर बैठ जा.. जिसे ‘फेस सीटिंग’ बोलते हैं.. पूरा 10 इंच अन्दर जाएगा.. तो इसे बहुत दर्द होगा और ये भाग भी सकता है.. तू बैठी रहेगी तो ये मादरचोद हिल भी नहीं पाएगा.. तू अपनी चूत इसके होंठों पर रख दे.. इससे इसकी आवाज़ नहीं निकलेगी और तेरी चूत भी चट जाएगी..

मैं बेबस सा था.. मेरे कुछ बोलने का सवाल ही नहीं था.. मैंने कई ब्लू-फिल्म्स मे ‘फेस-सीटिंग’ देखी थी और मुझ पर यह प्रयोग होगा.. यह सोच कर मैं दूसरा होने वाला दर्द भूल चुका था।

मैंने जल्दी से पानी पी लिया और छत की तरफ मुँह करके नीचे लेट गया।

मैंने शीतल की आँखों में देखा.. एक हल्की सी शरम उसकी आँखों में थी.. शायद उसका भी ये पहला ‘फेस-सीटिंग’ होगा.. आप लोग भी सोचो कि एक औरत नंगी किसी मर्द के मुँह पर बैठ जाए तो क्या नज़ारा होगा।
शीतल ने थोड़ा शरमाते हुए ही अपनी शॉर्ट्स उतार दी.. अब एक छोटी सी काली पैन्टी उसके कमर पर चिपकी थी।

मेरी तरफ देख कर वो हल्के से मुस्कुराई और उसने नीचे झुकते हुए पैन्टी उतार दी.. मैं तो हक्का-बक्का रह गया.. वॉवववव.. क्या गुलाबी मरमरी चूत थी.. पूरी क्लीन शेव्ड.. जैसे फिल्मों में दिखाते हैं.. बिल्कुल वैसी.. मलाईदार और दूधिया.. ऊपर को फूली हुई..

मैं सोचने लगा.. शायद इसी वजह से मेरा दोस्त इससे इतना चोदता होगा..

अब शीतल मेरे जिस्म को दोनों पैरों के बीच में लेकर मेरी छाती तक चली आई.. और मुझसे कहा- अपने हाथ को सिर के पीछे मोड़ लो..

मैंने वैसा ही किया.. और वो घुटनों के बल नीचे बैठ गई.. उसकी खरगोश के जैसी मुलायम चूत मेरी छाती पर थी।
उसने मेरे हाथ घुटनों के नीचे क़ैद कर लिए.. फिर मुड़कर दीदी की तरफ देखा और आँखों से इशारा कर दिया।

मैं समझ गया था.. मैंने अपने पैर फोल्ड करके हवा में उठा लिए।

दीदी- शीतल तू एक काम कर.. उसकी तरफ नहीं.. मेरी तरफ मुँह करके बैठ जा.. 69 जैसी अवस्था में.. उसके हाथ खुले रहने दे.. ताकि वो तुम्हारे चूतड़ों को अपने मुँह पर सैट कर सके.. तू अपने हाथों से इसके पैर अपनी तरफ खींच ले.. इससे इसकी गाण्ड का छेद और खुल जाएगा।
शीतल ने बिल्कुल वैसा ही किया.. जैसा दीदी ने कहा।
अब मेरा गाण्ड का छेद ज़्यादा खुल चुका था.. दीदी मिशनरी अवस्था में तैयार थी।

उन्होंने डिल्डो मेरे छेद के द्वार पर टिका कर रखा था.. और इधर शीतल उसकी फूली हुई खरगोश सी चूत.. मेरे मुँह पर टिकाने वाली थी।

जैसे ही दीदी ने इशारा किया.. शीतल मेरे मुँह पर बैठ गई.. मैंने फट से अपना मुँह खोल दिया और अपनी जीभ को शीतल की चूत में घुसा दी।

शायद ‘फेस सीटिंग’ की सोच को लेकर उसकी चूत थोड़ी गीली हो चुकी थी.. तो मेरी जीभ को आराम से अन्दर का रास्ता मिल गया।

शीतल के चूतड़ मेरे चेहरे पर थे.. तो जाहिर है मेरा चेहरा ढक चुका था.. मेरी नाक उसकी नितंब की दरार में फंस चुकी थी.. पर दरार की वजह से मुझे सांस लेने की जगह मिल गई थी।
तभी.. दीदी ने एक ज़ोर का झटका नीचे लगा दिया.. पूरा का पूरा 10 इंच का डिल्डो अन्दर घुस चुका था.. बहुत दर्द हो रहा था.. पर शीतल की चूत में मेरी जीभ घूम रही थी तो मैं वो दर्द भूलने लगा।

अब मेरे लंड मे हरकत होने लगी.. दीदी ने वो नोटिस किया और वो अपने एक हाथ से उसे मारने लगीं।
शीतल की चूत का गीलापन मेरे लंड में और जान डाल रहा था।

दीदी- देख शीतल ये तेरा आशिक.. अपनी गाण्ड में पूरा 10 इंच का डिल्डो लिए है.. फिर भी लंड खड़ा करने से बाज़ नहीं आ रहा।
शीतल- दीदी समझा करो.. ये सब मेरी चूत का कमाल है.. अगर अभी उठ जाऊँ तो एक सेकेंड में ये टुन्नू सा छोटा हो जाएगा.. रुकिए मैं इसे संभाल लेती हूँ।

इतना कहकर शीतल पूरी तरह से मेरे पैरों पर झुक गई और मेरे पैर उसनी बगलों के नीचे क़ैद कर लिए.. अब उसके हाथ फ्री हो चुके थे.. उसने मेरा लंड और अण्डकोष हाथ में लेकर खींच लिए.. फिर उसने लंड को मुँह में ले लिया और चूसना शुरू किया।

अब दोनों हाथों से वो मेरे अण्डकोष खींचने लगी.. और लंड को पूरा का पूरा अपने मुँह में ले लिया था।

दीदी का डिल्डो और मेरा गाण्ड के छेद को इस खेल से निकाल दें.. तो मैं पूरा का पूरा जन्नत में था।
नीचे मेरा गाण्ड के छेद को बुरी तरह से चोदा जा रहा था.. पर शीतल की मुलायम चूत की वजह से में सब कुछ भूल रहा था।
शीतल अपने चूतड़ों को बहुत अच्छी तरह से घुमा रही थी.. मैं मेरी उंगलियाँ उसकी नितम्बों की दरार में घुमा रहा था।
वो उसे और ज़्यादा उछाल रही थी.. और पूरे ज़ोर के साथ अपनी चूत मेरे मुँह पर दबा रही थी।

मेरी जीभ बहुत अच्छी तरह से उसकी चूत में अन्दर तक घूम रही थी.. करीब 10-15 मिनट में शायद वो पहली बार झड़ गई थी। मैं उसकी चूत के अन्दर उसका रस महसूस कर रहा था.. उसका गरम पानी मेरी जीभ के ऊपर आ गया था.. मैं पूरा का पूरा पी गया और मैंने उस रस की चुसाई चालू रखी.. शीतल के पानी का बहुत मस्त स्वाद था।

अब शायद मेरी बारी थी झड़ने की.. एक ज़ोर का झटका शीतल ने मेरे मुँह पर अपने नितम्बों से लगा दिया और मैं छूट गया.. मेरा पूरा रस मैंने शीतल के मुँह में निकाल दिया और उसने उतनी ही अच्छे तरह से पूरा माल गटक लिया।

अब मेरा लंड सिकुड़ गया था.. पर उधर दीदी के झटके चालू ही थे.. इसलिए शीतल मेरे सोए हुए लंड को वैसे ही मुँह में लेकर छेड़ रही थी और इधर मेरे मुँह पर उसके नितम्बों का घिसना चालू था।
हम दोनों झड़ चुके थे.. पर दीदी रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।

अधिक तेल लग जाने की वजह से उनके झटके लगातार चालू ही थे.. डिल्डो होने के कारण उसके झड़ने की बात ही नहीं थी.. तो जाहिर था.. जब दीदी का मन करेगा.. तब ही वो रुकने वाली थी।

मैंने इधर शीतल की गाण्ड के छेद को चूसना शुरू कर दिया था.. उसके छोटे से गाण्ड के छेद को चूसने से मेरा लंड फिर से शीतल के मुँह में तन गया।

आख़िरकार लगभग 50-55 मिनट के बाद दीदी ने फाइनली दो झटके ज़ोर-ज़ोर से मारे और डिल्डो मेरी गाण्ड से निकाल लिया।
डिल्डो के निकलते ही शीतल बोली- बाप रे दीदी.. आपने तो इसकी पूरी फाड़ ही दी.. डिल्डो डालने से इसका छेद पहले कितना सा था.. और अब देखो कितना लग रहा है..!!

मैंने इधर शीतल के नितम्बों को हाथ में उठा लिया- शीतल, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।

शीतल- हाँ मेरे राजा.. मैं तो दीदी के खत्म होने का इंतजार कर रही थी।

इतना कहकर शीतल मेरे मुँह से उठ गई और नीचे पैर फैलाकर चुदासी मुद्रा में लेट गई.. मैं सीधा होकर शीतल के बदन पर चढ़ गया और उसका टॉप निकाल दिया.. उसके वो गजब के गुब्बारे अब हवा में उड़ रहे थे।
मैंने उसकी चूचियां मुँह में ले लीं और चूसने लगा.. उसकी मुलायम चूचियां थोड़ी देर चूसते ही मेरा लंड पूरी तरह से तैयार हो गया.. मैंने खुद को चूत पर सैट कर लिया और लंड शीतल की चूत पर टिका दिया।

शीतल ने नीचे से हाथ डाल कर मेरा लंड चूत में घुसा दिया.. चूत गीली होने के कारण लंड सट से अन्दर चला गया.. पर अन्दर जाते ही शीतल ने उसकी पकड़ मजबूत कर ली।
इससे मुझे एक अद्भुत आनन्द मिल रहा था।
शीतल बोले जा रही थी- फक मी हार्ड आशीष.. फक मी हार्डर..

दस मिनट तक उसकी चूत में मेरे झटके चालू थे और अचानक मेरी गाण्ड पर फिर हमला हुआ..

दीदी ज़ोर-ज़ोर से मेरी गाण्ड पर चपत मार रही थीं.. थोड़ी देर मारने के बाद उन्होंने फिर से तेल को डिल्डो पर लगाया और मुझे कहा- रुक जा भोसड़ी के.. एक मिनट के लिए.. अब हम तेरा सैंडविच बनाएँगे।
इतना कहते ही दीदी ने डिल्डो को मेरी गाण्ड के छेद पर रखा और एक ज़ोर का झटका दे दिया.. उन्होंने जान-बूझकर आधा डिल्डो ही मेरे अन्दर डाला था।

अब ये अजीब खेल शुरू हो गया था.. जैसे ही मैं झटका मारने के लिए पीछे हो जाता.. डिल्डो मेरे अन्दर और घुस जाता.. दीदी डिल्डो से मेरी गांड की चुदाई कर रही थीं और मैं शीतल को चोद रहा था।

लगभग 20 मिनट बाद मैंने कहा- शीतल मेरा छूटने वाला है।
उसने मुझे अन्दर छूटने की अनुमति दे दी.. और एक-दो ज़ोर के झटके मार कर मैंने पूरा लौड़ा शीतल की चूत में पेल दिया।
अब दीदी ने भी मेरी चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी थी.. और 5-6 ज़ोर के झटके देकर डिल्डो निकाल दिया।

थोड़ी देर तक हम लोग वैसे ही पड़े हुए थे.. फिर वे दोनों उठीं और फ्रेश होकर कुछ कपड़े पहन कर आईं।
मैं भी फ्रेश होकर आया.. पर उन्होंने मुझे पहनने के लिए कुछ नहीं दिया क्योंकि मुझे तो पूरा दिन उनके सामने नंगा रहना था।

मेरी गाण्ड का छेद सूज गया था और मैं ठीक से बैठ भी नहीं पा रहा था। शीतल ने मुझे सोफे पर अपनी दीदी की जाँघों पर उलटा लेटने को कहा।

अब मेरा सिर दीदी की जाँघों पर था.. तो गाण्ड शीतल की जाँघों पर थी।

उसने एक क्रीम निकाली और वो मेरी गाण्ड के छेद पर लगाने लगी.. ठंडी क्रीम लगते ही मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा।
शीतल ने थोड़ी देर अपनी उंगली से क्रीम लगाकर मुझे गाण्ड के छेद पर अच्छा मसाज दिया.. जिससे मुझे अच्छा लगने लगा।

दीदी बोली- आज तुझे 2 बार ही फक किया है.. अगली बार तुझे इतनी जल्दी नहीं छोड़ने वाली हूँ।

हम तीनों लोग हंस पड़े.. वास्तव में यह अद्भुत चुदाई हुई थी जिसमें मैं चूत चोदने के साथ अपनी गाण्ड भी चुदवा रहा था
दोस्तो.. कैसी लगी कहानी.. जरूर बताना..

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