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दीदी के बदौलत लडके ने पाई चुदाई में सफलता

hindi sex story, kamukta हाय दोस्तों, मुझे मालूम है आप लोग आप के छेत्र में मस्त होंगे | मैं कार चलाता हूँ और मैं अपनी कार से स्कूल के बच्चो को छोड़ा करता था | रोजाना सुबह उठकर स्कूल के बच्चो को ले कर छोड़ना और उन्हे स्कूल से लाना ये मेरा कार्य था | जब मैं स्कूल के बच्चो को छोड़ा करता था तो कई सारी मैंडमो को देखा करता था | उन सारी मैंडमो से दोस्ती करने लिए मैं कोशिश करता था | अक्सर मेरी कोशिश रंग ले आती थी | मैंडमो से दोस्ती करना मेरे लिए सरल नही था | लेकिन मेरे द्वारा की गयी पहल मुझे सफलता दिलाती और मैंने कई सारी मैंडमो से दोस्ती कर भी ली थी | मेरी बहन का एक आफिस भी है जहा पर लोग उससे दातो में तकलीफ होने के कारण इलाज कराने के लिए आते थे | मेरी बहन के दवाई वाले आफिस में अन्य लडकियां भी कार्य करती थी | मैं जब कार नहीं चलाता था क्योकि उस वक्त मेरे पास कार नही थी तब मैं अपने दीदी के आफिस में सिर्फ घूमने के लिए जाता था | वहा पर एक सफाई और चपरासी था जिन से मैं दुनिया भर की बकचोदी करता था |

सफाई वाला कर्मचारी मुझे उसके जीवन से जुडी घटनाओ के बारे में मुझे बताता था | उसकी जीवन से जुडी घटनाए बड़ी रोचक थी | उन घटनाओ को सुनकर मुझे प्रोत्साहन मिलता था | वो उसके जावानी के किस्से मुझे सुनाता था | मैं उन किस्से से बहुत कुछ सीखता था | उस सफाई कर्मचारी ने मुझे एक राय दी | सफलता पाने के लिए सब कुछ आगे बढकर करना पडता है | जो लोग आगे बढ़ने की कोशिश में लगे रहते है उन्हे उनकी आदातो को बदलकर सब कुछ करना पडता है | पहले मैं आलसी था लेकिन उस सफाई वाले कर्मचारी के राय पर चलने लगा | मैं सुबह जल्दी उठकर मेरी दीदी के आफिस को खोल देता और सब कुछ अथावत कर देता |

दोपहर तक रुकने के बाद घर चला जाता था | मुझे रूपए की आवस्यकता होने लगी तो मैंने अपनी दीदी के आफिस में रिसेप्शनिस्ट का कार्य किया | मैं हमेश फोन पकडे रहता था और लोगो को इलाज का समय देता था जिस वक्त मेरी दीदी उनका इलाज कर सकती है | सफाई वाला कर्मचारी मुझे मेरी दीदी के आफिस में कार्य करने वाली लड़कियों को चोदने की सलाह देता था | मैं मेरे आफिस का एक तरह से मालिक था इसलिए उस सफाई वाले कर्मचारी के दिए हुए राय के अनुसार मैंने लड़कियों से पहचान बनाई | लड़कियों से दोस्ती करने लिए मैंने शुरुआत में उन्हे उनके काम में मदद की | सफाई कर्मचारी एक तरह से मेरे दोस्त हो चूका था | दोपहर में भोजन के वक्त मैं उन लड़कियों के लिए कुछ ख़ास घर का बना हुआ लाता था जैसे खीर पुडी, पुलाव, इत्यादि | लड़कियां मेरे भोजन को पसंद करती थी | मैं भी उन लड़कियों के भोजन को खाया करता था | हर महीने के शुरुआत को मैं  मेरे तरफ से उनके लिए पिकनिक का आयोजन किया करता था | पिकनिक में सारी लडकियां होती थी और वो सब पिकनिक में हसी मजाक करती थी | मैं भी मज़े लिए करता था | पिकनिक ने मेरे दोस्ती करने का अवसर सफल कर दिया | इन तरीको से मैं लड़कियों से दोस्ती करता था | मैं अपनी दीदी के आफिस में एक लड़की को पसंद करता था और शादी करने को तैयार था | उस लड़की से दोस्ती करने के बाद मैंने शादी का प्रस्ताव उस लड़की के सामने रखा लेकिन उस लड़की ने प्रस्ताव को नही अपनाया | मैंने उस लड़की को सिर्फ एक दोस्त का दर्जा दिया | मैं अब अन्य लड़कियों को अवसर देने लगा ताकि कोई मुझ से शादी करने को तैयार हो जाये |

मेरी दीदी के आफिस की सारी लड़कियों ने प्रस्ताव को नही अपनाया | मैंने फिर कभी उन लड़कियों को शादी का प्रस्ताव नही दिया | मेरे सफाई वाले दोस्त ने बताया तुम अब बड़े हो चुके हो इसलिए तुम्हे शादी के लिए कुछ ख़ास करना पड़ेगा ताकि लडकियां तुम से शादी करने के लिए तैयार हो जाये | रिसेप्शनिस्ट कि नौकरी उन लड़कियों  के लिए एक छोटी नौकरी की तरह लगती थी और वे लडकियां  मुझे कोई ऐसा लड़का समझती थी जो सिर्फ उसकी दीदी के बदौलत है | मुझे कुछ ख़ास करना था इसलिए मैं ने अपनी दीदी से कार खरीदवाया ताकि मैं  अलग कार्य कर सकू | मेरी दीदी ने मेरे लिए एक कार खरीदकर दी और मैं ने स्कूल का कार्य शुरु किया | अब वो लडकियां  मुझे मेरे पहचान से मुझे पहचानती है | मैं  अब अपने दीदी के डेन्टल क्लीनिक में जाता हूँ और लडकियां  अब मुझे शादी से इनकार नहीं करती है |

मेरी दादी भी मुझे पर गर्व करती है | जब मैं ने एक लडकी को पटा लिया था तब मैं ने अवसर पाकर उस लडकी को चोदा था | चलो अब मैं  सुनाता हूँ की मैं ने उस लडकी को कैसे चोदा था | जब चुदाई चल रही थी तब पहले मैं उस लडकी को मैंदान लेकर गया था | उसकी गांड को अपने हाथ से पकडकर मैं ने अपना लंड उसकी गांड के अन्दर घुसेड दिया था | उसके बाद मैं  उस लडकी को दक्के दे रहा था | लेकिन उस दिन मुझे कुछ नया करना था इसलिए मैं ने अपने लंड को उस लडकी को चूसने के लिए दिया वो लडकी मेरे लंड को लेकर चूस रही थी | मैंदान पर एक जगह पर फर्स था इसलिए मैं  उस फर्स पर जा कर लेट गया तभी वो लडकी आई और वो मेरे उपर आकर बैट गयी उसके बाद जब वो मेरे मुह पर बैठी हुई थी तब मैं उस लडकी के चूत को अपने जीब से चाट रहा था | उसके बाद उस लडकी ने मेरे लंड के उपर बैठकर आगे पीछे होने लगी ताकि मेरा लंड उस लडकी के चूत के अन्दर आसानी से घुसता रहा | जब वो लडकी थक गयी तब एक जगह पर जा कर बैठ गयी | लेकिन मैं थका नही था इसलिए मैं ने उस लडकी को अपने उपर लेटने के लिए कहा | लेकिन वो लडकी थक चुकी थी इसलिए वो लडकी मेरे उपर लेटने के लिए तैयार नही हो रही थी तब मैं ने पहले उस लडकी को फर्श पर लिटा दिया और मैं उसके उपर जा कर लेट गया उसके बाद मैने अपना लंड उसकी चूत के अन्दर घुसेड दिया |

जब मैंने अपना लंड अन्दर डाला तो वो उछलने लगी क्यूंकि उसकी चूत सील पैक थी | मुझे इतना मज़ा उसकी चूत चोदने में मै आपको बता नही सकता | वो रोते हुए कहने लगी प्लीज मत चोदो मुझे दर्द हो रहा है | मैनेकः जान यही तो मज़ा है और उसकी चोदता गया | थोड़ी देर बाद उसकी जलन शांत हुयी और अब वो आराम से चुदवा रही थी | मुझे भी अपने लंड में कुछ कड़क और टाइट सा महसूस हो रहा था और मैंने उसकी चूत को निरंतर चोदना चालु रखा था | पर न जाने क्यूँ मुझे उसकी गांड मारने की इच्छा हुई और मैंने कहा सुनो ना जानेमन पलट जाओ | अब उसकी गांड छोटी सी मेरा लंड एक बार में उसकी गांड के अन्दर और उसकी हलक में जुबां अटक गयी | पर अपन चोदते गए और थोड़ी देर बाद वो आराम से चुदवाने लगी |

मैं उसके दूध को पीछे से दबाते हुए और उसकी गांड पे थप्पड़ मारते हुए उसको चोद रहा था | उसके बाद मैंने उसकी चूत को भी पीछे से मारा और हम दोनों को बहुत मज़ा आया पर मुझे बाप बनने का भय था इसलिए मैंने उसकी चूत में माल नही गिराया |

जब मैं क्लीनिक में घुसता हूँ तो मुझे लड़कियों  के तरफ से सम्मान मिलता है | मुझे अपने जीवन में आगे बड़ने में सफाई वाले कर्मचारी दोस्त ने सहायता किया | एक लड़की मुझे पसंद करती थी लेकिन वो मुझे इसलिए पसंद करती थी क्योकि मैं  सफल बंदा था और किसी के सहारे नही था | उस लड़की ने मुझे एक अवसर दिया ताकि मैं  उसे एक होटल में ले जा कर कुछ खिला सकू | वो लड़की एक होटल के सामने उसकी एक सहेली के साथ आई और उसके बाद मैं  कार ले कर आये | मैं  कार से उतरकर उन लड़कियों  से हाथ मिलाया और उन लड़की के साथ होटल में बैटकर हमने नास्ता किया | नसते में हमने पिज़्ज़ा और बर्गर खाया | उसके बाद मंगोड़े और भजिया खाया | उस दिन मैं ने पहेली बार एक लड़की को अपने करीब पाया था जो मुझ पर पूरा भरोसा करती थी | अगले दिन जब कार्य से मुझे फुरसत मिला तो मैं ने उस लड़की से मिलने के लिए अपनी दीदी के डेन्टल क्लीनिक गया | उस दिन मुझे एक मौका मिला उस लड़की ने मुझे एक तौफा दिया |

तौफे में उसने मुझे एक सफेद रंग का कोट दिया | कुछ दिन बाद मैं ने उस लड़की के लिए बड़ा सा तौफा जैसे एक गले की चैन | इस तरह तौफे ने मेरा कार्य सफल कर दिया था | मैं ने उस लड़की को एक दिन गाल में पप्पी ले लिया | अगले दिन मैं ने उसके होट की पप्पी ले ली | मैं ने एक दिन जब मेरी दीदी ने मुझे डेन्टल क्लीनिक को दस दिन के लिए सम्भालने का मौका दिया मेरी दीदी उस वक्त शहर से बाहर चली गयी | उस दिन मैं ने आफिस को एकांत वाले कमरे में ले जाकर उसकी चुदाई कर दी | मैं ने उस लड़की की चुदाई देर तक किया | अब मैं  उस लड़की को कही बाहर ले जा कर भी चोद सकता था | लेकिन उस लड़की ने मुझे इनकार कर दिया ताकि वो बदनामी से बच सके | मैं  उस लड़की को सिर्फ अभी तक अपने दीदी के आफिस में ही चोद पाया हूँ | जब भी एक दिन के लिए मुझे मेरी दीदी आफिस को सम्भालने को कह देती और शहर से बहर जाती थी तो मैं  उस लड़की को बहला फुसलाकर उसकी चुदाई किया करता था | एक बार मुझे मौका मिला जब मेरी दीदी को एक महीने के लिए कोई खास कार्यकर्म से बाहर जाना था | मेरे पास एक बड़ा मौका था और मैं ने उसे एक महीने तक चोदा | मुझे उस लड़की को कुछ ख़ास देना था क्योकि उसने मुझ पर भरोसा किया और मैं ने एक दिन कपडे उपहार के रूप में दिया | वो लड़की मेरे दवारा दिए गए उपहार को पाकर बेहद खुस थी | मैंने अगली लड़की से दोस्ती बढाने के लिए उसके जन्मदिन दिन का आयोजन मेरे तरफ से किया | उस जन्मदिन पर मैं ने सिर्फ मेरी दीदी के क्लीनिक में कार्य करने वाले लोगो को बुलाया था | उसके बाद सब सही हो गया और अपनी इज्ज़त बन गयी |

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