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चूत ने मुझे अपनी ओर आकर्षित कर लिया

Antarvasna, hindi sex kahani: मैं अपने दोस्त राजेश के घर काफी समय बाद गया था जब मैं राजेश के घर उससे मिलने के लिए गया तो उसकी मां ने दरवाजा खोला और मुझे कहने लगी मुकेश बेटा तुम काफी दिनों बाद करा रहे हो। मैंने आंटी से कहा कि आंटी दरअसल आजकल कुछ ज्यादा काम था इसलिए मैं आ नहीं पाया, मैंने उनसे कहा कि क्या राजेश घर पर है तो उन्होंने कहा कि नहीं बेटा वह तो घर पर नहीं है। मैंने उन्हें कहा कि लेकिन वह कब तक घर आएगा उन्होंने कहा कि बेटा राजेश आजकल बहुत ज्यादा परेशान दिखता है और वह घर पर किसी से भी बात नहीं करता है। मैं दरवाजे पर ही खड़ा था तो मुझे आंटी ने अंदर आने के लिए कहा और मैं अंदर चला गया वह काफी ज्यादा परेशान थी और कहने लगे कि राजेश कुछ दिनों से बहुत ही ज्यादा परेशान है और अपनी परेशानी को वह हमसे शेयर नहीं कर रहा है जिस वजह से हमें भी काफी ज्यादा बुरा लगता है। मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं था क्योंकि मैं राजेश के घर करीब दो महीने बाद जा रहा था मैं राजेश से मिलना चाहता था लेकिन राजेश घर पर नहीं था।

मुझे राजेश के बारे में जानकर बहुत ही बुरा लगा उसके बाद मैं अपने घर तो लौट आया था लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ राजेश के बारे में ही ख्याल चल रहा था। मैंने उसके बाद राजेश को फोन भी किया लेकिन उसने मेरा फोन नहीं उठाया राजेश मेरे बचपन का दोस्त है, काफी दिन हो गए थे मेरा राजेश के साथ कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था लेकिन जब उस दिन मैं राजेश को मिलने के लिए दोबारा से उसके घर गया तो उस दिन वह घर पर ही था। मैं राजेश को मिला और उससे बात करने लगा लेकिन वह काफी ज्यादा परेशान लग रहा था मैंने उससे पूछा कि आखिर तुम इतना परेशान क्यों हो। उस दिन राजेश ने मुझे सारी बात बताई और कहा कि मैंने बैंक से कुछ पैसे लिए थे जो कि मैं अभी तक चुका नहीं पाया हूं और मैं इस बात से बहुत ही ज्यादा परेशान हूं बैंक का नोटिस मुझे बार-बार आ रहा है मैं नहीं चाहता कि यह बात मेरे घर पर पता चले। राजेश ने अपना नया बिजनेस शुरू किया था जिसके चलते उसने बैंक से कुछ पैसे लोन पर भी लिए थे लेकिन राजेश वह लोन समय पर चुका नहीं पाया था इसलिए वह बहुत ज्यादा परेशान था।

मैंने राजेश को कहा कि यदि तुम्हें कोई मदद की जरूरत है तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं राजेश ने मुझे बताया कि उसने बैंक से दस लाख रुपये लिए थे। हालांकि इतनी बड़ी रकम मेरे लिए भी कहीं से जुटा पाना मुश्किल ही था लेकिन फिर भी मुझसे जितना बन सकता था मैंने राजेश की उतनी मदद की। राजेश का बिजनेस पूरी तरीके से डूब चुका था और वह बहुत ही ज्यादा परेशान था यह बात उसके घर में किसी को भी पता नहीं थी। मैंने राजेश को कहा कि ठीक है मैं तुम्हारी मदद करूंगा और फिर मैंने अपने मामा जी से कह कर राजेश को कुछ पैसे दिलवा दिए थे अब राजेश की सारी समस्या दूर हो गई थी। वह उसके बाद मुझे मिलने के लिए मेरे घर पर आया था उस दिन मैं अपने ऑफिस से घर लौटा ही था कि राजेश भी घर पर पहुंच  चुका था। राजेश और मैं मेरे रूम में बैठे हुए थे तो मैंने राजेश को कहा अब तो सब कुछ ठीक है तो वह कहने लगा हां अब तो सब कुछ ठीक है लेकिन फिर भी मुझे मामा जी को तो पैसे लौटाने ही हैं। मैंने राजेश को कहा ठीक है तुम मामा जी को पैसे लौटा देना और उसके बाद उसने मामाजी को धीरे धीरे कर के पैसे लौटाने भी शुरू कर दिए थे अब राजेश ने अपना नया काम शुरू किया जिससे कि उसका भी थोड़ा बहुत काम चलने लगा था। वह मामा जी को पैसे लौटाने लगा था और करीब एक साल में ही उसने मामा जी को पूरे पैसे लौटा दिए थे राजेश काफी ज्यादा खुश था और मैं भी बहुत खुश था मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम राजेश ने मामा जी को पैसे लौटा दिए हैं। राजेश उसके बाद मुझे मिला तो वह मुझे कहने लगा कि यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है यदि तुम मेरी मदद समय पर नहीं करते तो शायद इस मुसीबत से निकल पाना मेरे लिए असंभव था मैंने तो हिम्मत ही हार ली थी कि मैं कैसे इस मुसीबत से निकलूंगा लेकिन तुम्हारी वजह से अब सब कुछ ठीक हो चुका है। मैंने राजेश को कहा कि राजेश आखिर तुम मेरे दोस्त हो और मैंने तुम्हारी मदद की तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। राजेश की जिंदगी में सब कुछ सामान्य होने लगा था और जल्द ही उसने शादी करने का फैसला कर लिया और जब उसने शादी की तो उसके बाद राजेश और उसकी पत्नी बहुत ही ज्यादा खुश थे वह दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।

राजेश अब अपने कारोबार और अपने काम में पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था और सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था। एक दिन राजेश ने मुझे अपने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया तो मैं उसके घर पर चला गया। जब मैं राजेश के घर पर गया तो उस वक्त शाम के 6:00 बज रहे थे मैं और राजेश हम दोनों राजेश के बैठक में बैठे हुए थे राजेश की पत्नी मीरा जो की रसोई में खाना तैयार कर रही थी और राजेश की मां अपने कमरे में थी उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी। मैंने राजेश को पूछा राजेश अब तो तुम्हारी जिंदगी में कोई परेशानी नहीं है तो वह कहने लगा नहीं मुकेश अब मेरी जिंदगी में कोई परेशानी नहीं है और अब सब कुछ ठीक चल रहा है। मैं और राजेश एक दूसरे से बात कर रहे थे। जब हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे तभी राजेश की डोरबेल पर बिजी राजेश दरवाजा खोलने के लिए गया राजेश ने जैसे ही दरवाजा खोला तो मैंने दरवाजे पर देखा सामने एक लड़की खड़ी थी उसने जींस और टाइट टॉप पहना हुआ था वह अंदर आई। जैसे ही वह अंदर आई तो राजेश ने उस से मेरी मुलाकात करवाई राजेश ने मुझे उसका नाम बताया उसका नाम माधवी है वह मीरा कि दोस्त हैं।

माधवी भी अब रसोई में मीरा का हाथ बटाने के लिए चली गई उसके बाद हम सब लोगों ने साथ में डिनर किया लेकिन माधवी का गदराया हुआ बदन देखकर मैं उसे चोदने के लिए उसी वक्त तैयार था उस दिन डिनर करने के बाद मैं अपने घर चला आया। उसके बाद जब मैं राजेश के घर जाता तो अक्सर मेरी मुलाकात माधवी से हो जाती माधवी राजेश के घर के बगल में ही रहती थी और वह मीरा से मिलने के लिए आती रहती थी। मैंने भी माधवी का नंबर ले लिया था एक दिन हम लोग घूमने के लिए साथ में गए हुए थे उस दिन माधुरी मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपक रही थी मुझे लगने लगा था कि उसे मेरे लंड की जरूरत है मैं उसे चोदने के लिए तैयार था उसने मुझे अपना नंबर दे दिया। अब मैं माधुरी के घर पर गया था मैं जब उसके घर पर गया तो मैंने उस दिन उसे चोदने का पूरा मन बना लिया था जब मैं उसके घर पर पहुंचा तो हम दोनों ने एक दूसरे के साथ चूत चुदाई का खेल शुरू कर दिया था। मैंने माधवी के बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था और उसको मैं बिस्तर पर लेटा चुका था। उसके नरम होंठ देख मेरा लंड पानी छोडने लगा मै उसके होठों को चूमता तो मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मुझे मजा आने लगा था। मैंने जिस प्रकार से उसके होठों का रसपान किया उससे मेरे अंदर की आग बढ़ चुकी थी मैं उसकी नरम चूत मारने के लिए तैयार था। मैंने उसके बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था वह भी मेरे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती थी।

उसने मेरे लंड को बाहर निकाला उसने उसे हिलाया वह मेरे लंड को अपने हाथों से ऊपर नीचे कर रही थी उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत ही अच्छा महसूस होने लगा था। मैंने उसके अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ाकर रख दिया था। वह मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूसती मेरे मोटे लंड को वह अपने मुंह के अंदर लेकर अच्छे से चूस रही मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था। मेरे अंदर की गरमाहट बढ़ने लगी थी वह मुझे कहती मेरे अंदर की गरमाहट बहुत ज्यादा ही बढ़ चुकी है। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए अब उसकी पैंटी ब्रा को उतारकर उसकी चूत को मैं चाटने लगा। जब मैं उसकी चूत को चाटने लगा तो मुझे इतना मजा आने लगा था कि मेरे अंदर की गर्मी बहुत बढ़ने लगी उसकी चूत से निकलता हुआ पानी पूरी तरीके से बढ़ चुका था। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता था मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया धीरे धीरे मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया वह जोर से चिल्लाई मुझे बहुत अच्छा लग रहा था वह जिस प्रकार से मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकडने की कोशिश करती। उसके अंदर की आग बढ़ने लगी थी मैंने उसके पैरों को ऊपर उठाकर अपने कंधों पर रखा अब मैंने उसे तेजी से धक्के मारने शुरू किए वह चिल्ला रही थी और चोदो मुझे।

बहुत देर की चुदाई का आनंद लेने के बाद मेरा माल बाहर गिर गया जैसे ही मेरा माल गिरा तो उसके बाद मैंने उसको कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती रहो। वह बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और मुझे बहुत ही अधिक मज़ा आने लगा था। मेरे लंड से पानी निकलने लगा था जो उसके मुंह मे गिर रहा था वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी बढ चुकी है मैने उसकी चूत को चाटा फिर मैंने उसे घोडी बना दिया। घोड़ी बनाने के बाद जब मेरा लंड उसकी चूत मे गया तो वह सिसकारिया लेती तो मुझे मजा आने लगता। उसकी चूत मारकर मुझे इतना मजा आने लगा था कि मैं एक पल भी अब रह नहीं पा रहा था मैंने उसे कहा मैं रह नहीं पा रहा हूं। मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदना शुरू किया मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था उसकी चूतडे लाल हो चुकी थी। उसका बदन और भी ज्यादा गर्म होने लगा था मैंने जैसे ही अपने वीर्य की पिचकारी को उसकी चूतडो पर गिराया तो वह खुश थी। हमने उसके बाद भी दो बार और चुदाई की।

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