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चूत में वीर्य गिराने का फैसला

Hindi sex kahani, antarvasna: आकांक्षा मेरी क्लास में पढ़ा करती थी हम दोनों कॉलेज में साथ में पढ़ते थे आकांक्षा और मेरे बीच बहुत ही अच्छी दोस्ती है और हम दोनों एक ही ऑफिस में जॉब करते हैं। हम लोगों का कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट हुआ तो उसमे हमारा सलेक्शन हो गया और हम दोनों बहुत ज्यादा खुश थे। मेरे घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी क्योंकि पापा की तबीयत खराब होने की वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी और मेरे ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी आ गई थी। मैंने घर की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया उसमें कहीं ना कहीं मेरा साथ आकांक्षा ने दिया। आकांशा को मैं हमेशा ही अपने दोस्त के रूप में देखता हूं लेकिन अब समय बीतने के साथ साथ मेरे दिल में आकांक्षा को लेकर एक अलग ही हलचल चल रही थी।

मैं आकांक्षा को प्यार करने लगा था और वह भी मुझसे प्यार करने लगी लेकिन मैंने अपने दिल की बात उससे कही नहीं थी। एक दिन आकांक्षा और मैं साथ में ही थे उस दिन मैंने सोचा कि यह सही मौका है मैं आकांक्षा से अपने दिल की बात कह देता हूं। उस दिन मैंने आकांक्षा को अपने दिल की बात कह डाली और मैंने आकांक्षा से कहा कि मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं कि मैं तुम्हारे साथ हूं और मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं। आकांक्षा भी मेरी तरफ देखने लगी क्योंकि आकांक्षा के दिल में मेरे लिए प्यार था इसलिए वह मुझे मना ना कर सकी और हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे थे। मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं जिस तरीके से आकांशा और मैं एक दूसरे के साथ होते हैं और जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं तो हमें बहुत ही अच्छा लगता है।

हम दोनों का रिलेशन अच्छे से चल रहा है और मैं और आकांक्षा एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करते हैं। मैं जब भी आकांक्षा के साथ होता हूं तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है और उस दिन भी मैं आकांक्षा के साथ ही बैठा हुआ उससे बातें कर रहा था तो वह मुझे कहने लगी कि चलो आज मैं तुम्हें अपनी फैमिली से मिलवाती हूं। मैंने आकांशा को कहा कि आकांक्षा रहने दो लेकिन वह जिद करके मुझे अपने घर पर ले गयी। यह पहली बार ही था जब मैं आकांक्षा के घर पर जा रहा था और मैं आकांक्षा के पापा मम्मी से मिला। जब मैं आकांक्षा के पापा मम्मी से मिला तो मैंने उन लोगों से बातें की, मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब मैंने उन लोगों से बातें की। मैं आकांक्षा के साथ बातें कर रहा था आकांक्षा और मैं खुश थे।

आकांशा के परिवार वालों को यह बात पता चल चुकी थी कि हम दोनों के बीच में प्रेम संबंध है। आकांक्षा ने उन लोगों को हम दोनों के बारे में बता दिया था और यह हम दोनों के लिए अच्छा ही था। आकांक्षा के परिवार को मेरे और आकांशा के रिलेशन से कोई भी परेशानी नहीं थी और वह लोग बहुत खुश है की हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं। हम दोनों की जिंदगी बड़े अच्छे से चल रही है क्योंकि आकांक्षा के परिवार वालों ने हम दोनों के प्यार को स्वीकार कर लिया था। मैं भी अब अपने घर पर बात करना चाहता था और मैंने जब अपने पापा और मम्मी से इस बारे में बात की तो उन्हें भी इससे कोई परेशानी नहीं थी। मेरी भी शादी की उम्र हो चुकी थी और मुझे भी लग रहा था कि मुझे आकांक्षा से शादी कर लेनी चाहिए और जल्द ही हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था।

हम दोनों ने शादी कर ली जब हम दोनों की शादी हो गई तो उसके बाद मैं और आकांक्षा साथ में ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते हैं। हम दोनों की शादी के बाद आकांशा अभी भी जॉब करती है। मैंने कई बार आकांशा से कहा है कि तुम घर पर पापा मम्मी की देखभाल किया करो लेकिन वह मेरी बात मानती ही नहीं है इसलिए मैंने भी इस बारे में कहना छोड़ दिया था। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश हैं और मैं आकांशा से बहुत ज्यादा प्यार करता हूं। जब हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है। हमारी शादी को ज्यादा समय नहीं हुआ था हम दोनों की शादी को दो तीन महीने हो रहे थे और मेरा भी प्रमोशन हो चुका था। मेरा प्रमोशन हो जाने के बाद एक दिन मुझे अपने काम के सिलसिले में बेंगलुरु जाना था और मैंने जब आकांक्षा को यह बात बताई तो आकांक्षा कहने लगी कि मैं सोच रही थी कि हम लोग पापा मम्मी को मिल आते है।

मैंने आकांशा को कहा कि तुम्हें तो पता ही है कि अब मुझे बेंगलुरु जाना पड़ेगा उसके बाद हम लोग पापा मम्मी को मिलने जाएंगे। उस वक्त हम लोग ऑफिस से घर लौट आए थे और जब हम लोग घर लौटे तो मैंने अपना सामान पैक किया और मैं अगले दिन बेंगलुरु चला गया था। बेंगलुरु से मैं करीब एक हफ्ते बाद वापस लौट आया था और उसके बाद हम लोग पापा मम्मी को मिलने के लिए चले गए। आकांक्षा बहुत ही ज्यादा खुश थी जब वह अपने पापा मम्मी को मिली, काफी समय के बाद आकांक्षा अपने घर पर गयी थी। और हम लोग वहां पर करीब दो दिन तक रहे और दो दिन के बाद हम लोग वापस लौट आए थे फिर हम लोग ऑफिस जाने लगे थे। एक दिन मैं और आकांक्षा अपने ऑफिस से वापस लौट रहे थे तो आकांक्षा ने मुझे कहा कि चलो आज हम लोग कहीं घूम आते हैं।

उस दिन हम लोग घूमने के लिए चले गए आकांशा ने मुझसे कहा कि मैं चाहती हूं कि हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर चले। मैंने आकांक्षा को कहा कि ठीक है अगर तुम्हें लगता है तो हम कुछ दिनों के लिए ऑफिस से छुट्टी ले लेते हैं। थोड़े ही दिनों बाद हम लोगों ने ऑफिस से छुट्टी ले ली और हम लोग साथ में कहीं जाना चाहते थे। हम लोग घूमने के लिए माउंट आबू चले गए थे। शादी के काफी लंबे समय के बाद हम लोग कहीं घूमने के लिए गए थे और हम लोगों को माउंट आबू में बहुत ही अच्छा लग रहा था। हम लोगों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया अब हम माउंट आबू से वापस लौट चुके थे। ऑफिस के काम की वजह से मैं ज्यादा ही बिजी रहने लगा था और यह बात आकांक्षा को भी मालूम थी क्योंकि हम दोनों साथ में ही जॉब करते हैं। एक शाम हम दोनों ऑफिस से घर लौट रहे थे अगले दिन हम दोनों की छुट्टी थी। उस दिन हम दोनों साथ में बैठे हुए एक दूसरे से बातें कर रहे थे। मैं आकांक्षा से बात कर रहा था तभी मैंने उसके बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था।

मैं उसके होठों को महसूस कर रहा था। मैंने उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया था और जिस तरीके से मैं उसकी जांघों को सहला रहा था उससे मुझे मज़ा आ रहा था और आकांक्षा को भी मजा आने लगा था। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहा है। जब मैं और आकांक्षा एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे तो हम दोनों को ही मजा आने लगा था। मैंने आकांक्षा से कहा तुम मेरे लंड को सकिंग करो। आकांक्षा ने मेरे मोटे लंड को अच्छे से चूसना शुरु किया। मुझे मजा आ रहा था जिस तरीके से हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे। हम दोनों को बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे। आकांक्षा ने मुझे कहा मैं चाहती हूं तुम मेरी चूत में लंड को घुसा दो। मैंने उसके कपड़ों को खोला और उसकी चूत गरम हो चुकी थी। मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था मैंने जैसे ही आकांक्षा की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लगने लगा है। मेरा लंड आकांक्षा की चूत के अंदर तक जा चुका था उसे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था।

मैं उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था मुझे आकांक्षा को चोदने में बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। अब मैं उसे लगातार तेजी से धक्के मार रहा था और उसकी गर्मी को बढ़ता जा रहा था। वह मुझे कहने लगी मुझे तुम ऐसे ही धक्के देते जाओ। मैंने आकांक्षा को बहुत तेजी से धक्के दिए जिससे वह गर्म होती जा रही थी। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था जिसके बाद मेरे धक्कों में तेजी आने लगी थी और मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। मैं आकांक्षा को तेजी से धक्के दिए जा रहा था। उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थी और उसकी चूत से निकलता हुआ पानी भी बहुत अधिक हो चुका था। मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और आकांक्षा को भी अच्छा लग रहा था जब वह मेरा साथ दे रही थी। मैंने आकांक्षा से कहा मुझे तुम्हें चोदने मे मजा आ रहा है।

मैंने उसकी चूत में अपने वीर्य को गिराने का फैसला कर लिया था मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी और मैंने जैसे ही आकांक्षा की चूत में अपने वीर्य को गिराया तो आकांक्षा खुश हो चुकी थी। मैं बहुत ज्यादा खुश था मैंने अपने मोटे लंड को आकांक्षा की चूत से बाहर निकाल लिया था। जब मैंने उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकाला तो आकांक्षा मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। हम दोनों को बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था और हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए बातें कर रहे थे। मैंने आकांक्षा से कहा अब मैं बहुत ज्यादा थक चुका हूं क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा थकान महसूस हो रही थी मैं अब सो चुका था। हम दोनो एक दूसरे की बाहों में लेटे हुए थे मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब उस दिन मैंने आकांक्षा के साथ सेक्स के मजे लिए थे।

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