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चूत मरवाने की आदत पड गई

Antarvasna, hindi sex story मैं बचपन से ही पढ़ने लिखने में बहुत अच्छी थी मेरे माता पिता मुझे बहुत प्यार करते हैं सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था। मैंने अपनी 12वीं की पढ़ाई भी पूरी कर ली थी लेकिन उसके बाद जब मैं बाहर के लोगों से मिलने लगी तो मुझे उनकी ओर खिंचाव सा महसूस होने लगा इन्हीं सब की वजह से मेरे कदम डगमगाने लगे थे और मैं घर भी देर से आया करती थी। मेरी मां मुझे हमेशा कहती तुम एक औरत जात हो तुम्हें घर समय पर पहुंच जाना चाहिए लेकिन ना जाने मेरे अंदर ऐसा परिवर्तन क्यों हुआ मैं 12वीं के बाद पूरी तरीके से बदल चुकी थी।

मैं अपनी सहेली मीना के भाई गौरव के चक्कर में फस गई और गौरव के साथ मेरा चक्कर चलने लगा हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत हंसी मजाक किया करते और एक दूसरे को बहुत अच्छा समय दिया करते थे। मेरे आस-पास सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था मुझे ऐसा लगता जैसे कि दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की मैं हूं लेकिन मेरी उम्मीदे जल्द ही फीकी पड़ने वाली थी। एक दिन मैं और गौरव साथ में बैठे हुए थे गौरव के मुझसे ना जाने क्यों इतने सवाल करता था। मैं कई बार उसे कहती कि तुम्हारे मन में मुझे लेकर क्या चलता रहता है लेकिन गौरव हमेशा मुझे कहता कि ऐसा तो कुछ भी नहीं है मैं सिर्फ तुमसे प्यार करता हूं और इससे ज्यादा कुछ नही है। मुझे गौरव पर हमेशा शक रहता था कि गौरव मुझसे प्यार करता भी है या सिर्फ वह मेरे साथ खिलवाड़ कर रहा है। एक दिन गौरव मुझसे पूछने लगा पूनम तुमने आगे क्या सोचा है तो मैंने गौरव को जवाब देते हुए कहा गौरव मैंने तो आगे अपनी पढ़ाई करने के बारे में सोचा है उसके बाद ही मैं देखूंगी कि क्या करना है। गौरव का कॉलेज पूरा हो चुका था और वह नौकरी की तलाश में था उसके मामा के पास वह काम करने लगा उसके मामा का बड़ा अच्छा बिजनेस है और वह गौरव को अच्छा भी मानते थे जिस वजह से गौरव ने उनके पास काम करना शुरू कर दिया। गौरव उन्ही के पास काम करता था लेकिन हम दोनों की फोन पर बातें होती रहती थी गौरव शाम को ऑफिस से फ्री होकर मुझसे मिलता जरूर था मैं गौरव से कहती थी तुम्हारा काम कैसा चल रहा है।

गौरव कहता मामा जी के साथ तो मुझे बहुत अच्छा लगता है और उनके साथ काम करना मुझे पसंद है। गौरव बहुत खुश था क्योंकि उसके मामा उसका पूरा ध्यान रखते थे और उसे अच्छे पैसे भी मिल जाया करते थे। एक दिन मुझे गौरव का फोन आया और वह कहने लगा क्या तुम घर पर हो मैंने उसे कहा हां मैं घर पर ही हूं आज तो रविवार है आज कहां जाऊंगी। गौरव मुझसे कहने लगा क्या हम लोग आज मिल सकते हैं मैंने गौरव से कहा क्यों नहीं बताओ तुम्हें कहां मिलना है गौरव कहने लगा तुम मुझे हमारे घर के पास के खेत में मिलना। मैं उससे मिलने के लिए वहां चली गई और जब मैं उससे मिलने गई तो उससे पहले ही गौरव वहां पहुंच चुका था मैंने गौरव को देखा वह किसी और लड़की से बात कर रहा था। मैं यह सब देख कर बहुत गुस्से में आ गई मेरा गुस्सा इतना ज्यादा बढ़ गया कि मैंने गौरव के हाथ को खींचते हुए कहा यह लड़की कौन है। वह लड़की वही खड़ी मेरे मुंह को ताक रही थी उसे मेरे और गौरव के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था गौरव ने शायद उसे धोखे में रखा था। मैंने जब उस लड़की को सारी बात बताई तो वह वहां से चली गई और उसने पलट कर एक बार भी नहीं देखा। मैंने गौरव से कहा तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया गौरव के पास मेरी बातों का कोई जवाब नहीं था और मैंने भी उस वक्त वहां से जाना ही मुनासिब समझा। मैं वहां से जा चुकी थी गौरव ने मुझे कई बार फोन किए लेकिन मैंने उसका फोन नहीं उठाया और ना हीं मैं उससे कोई बात करना चाहती थी। मुझे गौरव से बात करने में कोई इंटरेस्ट नहीं रह गया था इसीलिए मैंने उससे अपने सारे संबंध खत्म कर लिए मैं अब अपने घर के कमरे में ही रहती मेरा कमरा ही मेरे लिए अब सब कुछ था। मैं तो जैसे चारदीवारी में कैद हो चुकी थी मेरी मां मुझे कहती कि पूनम बेटा आजकल तुम घर से बाहर कहीं नहीं जाती हो मैंने अपनी मां से कहा मां बाहर की दुनिया बहुत खराब है।

मेरी मां ने मुझे कहा हां बेटा तुम बिल्कुल सही कह रही हो बाहर की दुनिया बहुत खराब है और यह कहते ही मैं फफक फफक कर रोने लगी मेरी आंखों से आंसू निकल आए थे लेकिन तब तक मेरी मां भी कमरे से बाहर जा चुकी थी। मैंने अपने कमरे के दरवाजे को बंद किया और मैं बहुत ज्यादा रो रही थी मैंने अब सोच लिया था कि मैं गौरव से कभी भी बात नहीं करने वाली और इसी के चलते मैंने गौरव से अपने पूरे संबंध खत्म कर लिए। उसने मुझसे बात करने की बहुत कोशिश की लेकिन मैं अब उससे बिल्कुल बात नहीं करना चाहती थी उसने एक दिन मीना से भी कहा की मैं उसे फोन करूं लेकिन मैंने उसे फोन नहीं किया मैं अब अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने लगी थी। एक दिन गौरव ने मेरा रास्ता रोकते हुए कहा मैं तुमसे माफी मांगना चाहता हूं आगे से मैं कभी ऐसा नहीं करूंगा। मैंने गौरव से कहा देखो गौरव अब तुम मेरे बारे में ना ही सोचो तो ज्यादा अच्छा रहेगा और मैंने भी तुम्हें अब भुलाने की कोशिश करनी शुरू कर दी है मैं नहीं चाहती कि मैं अब तुमसे किसी भी प्रकार का कोई संपर्क रखूं। गौरव मुझे कहने लगा यार ऐसा मत कहो मुझे मालूम है कि मेरी गलती है लेकिन मैं उसके लिए तुमसे माफी तो मांग रहा हूं। मैंने गौरव से कहा देखो गौरव तुम यहां चार लोगों के बीच में बात का बखेड़ा मत बनाओ मुझे अभी यहां से जाने दो सब लोग हमारी तरफ ही देख रहे हैं।

आसपास की सारी नज़रें हमें ही देख रही थी और हम लोग उनके लिए जैसे हंसी का पात्र थे मैं वहां से रिक्शे में बैठी और अपने घर के लिए चली गई। मैंने उसके बाद गौरव से कोई भी संपर्क नहीं रखा और गौरव ने भी मुझ से अपने सारे संबंध खत्म कर लिए थे मैं अपने जीवन में अब आगे बढ़ चुकी थी। मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई की और उसके बाद मैंने बएड  किया बीएड करने के बाद मैंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया हालांकि मैं प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी लेकिन मैं अपनी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी भी कर रही थी। एक दिन मैंने देखा कि कुछ पद टीचरों के लिए आए हुए थे तो मैंने उसके लिए अप्लाई कर दिया और मेरा सिलेक्शन हो गया। मैं इस बात से बहुत खुश थी कि मैं अपने जीवन में अब आगे बड़ चुकी हूँ और मैं अब टीचर भी बन चुकी थी। मैं अपने बीते हुए कल को भूल चुकी थी और मैं कभी भी अब वह याद करना नहीं चाहती थी। मैंने अपनी जिंदगी में बहुत ही अच्छा सबक सीख लिया था कि गौरव जैसे लोगों से दूर रहना ही सही है इसलिए मैं सोच समझ कर लोगों से बात किया करती थी। मेरे जीवन में जब आकाश सर आए तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे सामने मेरा पुराना कल आ गया है मैं बहुत डरने लगी थी फिर भी मैंने आकाश जी के साथ बात करना जारी रखा। वह हमारे स्कूल में ही टीचर हैं मेरी उनसे बहुत अच्छी बनती थी एक दिन उन्होंने मुझे अपने दिल की बात कह दी मैं उस वक्त कोई भी जवाब ना दे सकी क्योंकि मेरे पास कोई जवाब नहीं था।

मैंने उन्हें अपने बीते हुए कल के बारे में बताया तो वह मेरे चेहरे की तरफ आश्चर्यचकित हो कर देखने लगे और कहने लगे मैडम ऐसा तो जीवन में होता ही रहता है लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं है कि हम अपने जीवन में जीना छोड़ दें आपको भी अपनी पुरानी जिंदगी को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए। मैं आकाश जी की बातों से पूरी सहमत थी मैंने उनके साथ अपने जीवन के कुछ अच्छे पल बिताने शुरू किए लेकिन मेरे दिल में अब भी वही डर बैठा हुआ था कि कहीं आकाश जी भी मेरे साथ कुछ गलत ना कर दें। उन्होंने मुझे पूरा भरोसा दिलाया और मैं उनके भरोसे मैं पूरी तरीके से आ गई। मैंने आकाश जी के साथ अपने आगे का जीवन बिताने के बारे में सोच लिया था। एक दिन जब आकाश जी ने मुझे अपने घर पर बुलाया तो उस दिन हम दोनों के बीच अंतरंग संबंध बन गए। यह पहला ही मौका था जब मैंने किसी के साथ अंतरंग संबंध बनाए थे आकाश सर ने मेरे स्तनों को अपने हाथों से छुआ तो मैं भी अपने आपको ना रोक सकी। जैसे ही उन्होंने मेरी जांघ को सहलाना शुरू किया तो मैं भी पूरी तरीके से मचलने लगी मै पूरे जोश मे आ चुका था उन्होंने मुझे बिस्तर पर लेटाते हुए मेरे कपड़ों को उतार दिया मैंने उस दिन लाल रंग की पैंटी और ब्रा पहनी हुई थी जिसमें कि मैं बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

उन्होंने जैसे ही मेरे पैंटी ब्रा उतारते हुए मेरे होठों को और मेरे स्तनों को चूमना शुरू किया तो मै उत्तेजित हो गई। मेरी योनि पर जब उन्होंने अपने लंड को सटाकर अंदर की तरफ डालने की कोशिश की तो मेरे मुंह से चीख निकलने लगी। यह पहला ही मौका था जब किसी ने मेरे योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया था जैसे ही मेरी योनि में अकाश सर का लंड प्रवेश हुआ तो मेरे मुंह से तेज चीख निकल पडी। उसके बाद उन्होंने मुझे बहुत देर तक धक्के दिए वह मेरे पैरों को चौड़ा करते जिससे कि मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होती चली गई। काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन जब मैं झड़ने वाली थी तो मैंने अपने दोनों पैरों के बीच में अकाश जी को जकड़ लिया जिससे कि वह हिल भी नहीं पा रहे थे परंतु जैसे ही उन्होंने अपने वीर्य की पिचकारी से मेरे स्तनों को नहला दिया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। कुछ ही दिनों बाद उनकी असलियत मेरे सामने आ गई मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे साथ दोबारा वही धोखा हुआ है। अब मैं इन सब लोगों को अच्छे से पहचानने लगी थी मुझे सिर्फ और सिर्फ अपने सेक्स की इच्छा पूरी करने के लिए किसी की जरूरत थी तो वह में अब अपने आस पडोस से कर लेती थी। मै किसी भी व्यक्ति के साथ में सेक्स करने लगी थी।

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