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चूत का पानी बढा दिया

Antarvasna, desi kahani: मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं उसी कॉलोनी में हमारे पड़ोस में सरिता का परिवार रहा करता है सरिता के परिवार और हमारे परिवार के बीच काफी अच्छी बातचीत थी। लेकिन जबसे सरिता और मेरी नजदीकियां बढ़ने लगी तो उसके पापा को यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। उसके पापा काफी पुराने ख्यालात के हैं इस वजह से सरिता और मैं एक दूसरे के हो ना सके और हम दोनों एक दूसरे से बात भी नहीं करते थे। सरिता को उसके पिताजी घर की चारदीवारी में ही कैद रखते हैं उसकी दुनिया जैसे घर की चारदीवारी में ही सिमट कर रह गई है मैंने भी उसके बाद सरिता को अपने दिलो दिमाग से भुलाने की कोशिश की। हालांकि मेरे लिए यह बड़ा ही मुश्किल था लेकिन फिर भी मैंने कोशिश की और अब मैं और सरिता एक दूसरे से अलग हो चुके हैं। मैं अब सरिता के बारे में भूल चुका हूं मुझे तो अपनी जिंदगी में कई बार ऐसा महसूस होता है कि जैसे मेरी जिंदगी में कुछ अच्छा हो ही नहीं सकता। सरिता का मेरी जिंदगी से चले जाना मेरे लिए बहुत ही तकलीफ देने वाला था लेकिन अब मेरे और सरिता के बीच की दूरियां तो बढ़ ही चुकी थी मैं अपनी जिंदगी में खुश था और मैंने अपनी जिंदगी को बस सीमित दायरे में ही कैद करके रख लिया था।

मेरे कुछ चुनिंदा दोस्त है जो कि मुझसे मिल लिया करते थे धीरे धीरे मैं अपने पुराने दोस्तों से कम ही मिला करता था सब कुछ बदलता चला गया लेकिन मेरी जिंदगी में एक चीज कभी बदलने वाली नहीं थी और वह था हमारी जिंदगी का अनुशासन। मैं अपनी सेहत के प्रति बहुत ही ज्यादा सजग था और अपनी सेहत का बहुत ही ध्यान रखता, मैं रोज सुबह जिम जाया करता। जब मैं जिम जाता था तो उस वक्त मेरी मुलाकात एक लड़की से हर रोज होती थी लेकिन उससे मेरी बात नहीं हो पाई थी मैं उसे हमेशा देखा करता था परंतु मेरी उससे बात नहीं हुई थी। एक दिन जब मैंने कविता से बात करने की सोची तो उस दिन मैंने कविता से बात कर ही ली, मैंने कविता से कहा कि आप क्या करती हैं तो कविता ने मुझे बताया कि वह अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं। हालांकि कविता की उम्र मुझसे काफी कम थी लेकिन फिर भी कविता मुझे अच्छी लगती और मुझे उसके साथ बात करना भी अच्छा लगता, अब हम दोनों की हर सुबह बात हो जाया करती थी।

एक दिन मैं अपने घर से बाहर निकल रहा था तो मैंने देखा कि कविता भी सामने से अपनी स्कूटी से आ रही थी जब मैंने कविता को देखा तो मैंने अपनी कार को रोकते हुए कविता को कहा तुम यहां कहां जा रही हो तो कविता ने मुझे बताया कि उसके मामा जी इसी कॉलोनी में रहते हैं। मैंने जब कविता से पूछा कि उसके मामा जी का नाम क्या है तो कविता ने मुझे अपने मामा जी का नाम बताया मेरे लिए शायद इससे बढ़कर खुशी की बात कुछ थी ही नहीं क्योंकि उसके मामा जी का परिवार कुछ दिनों पहले ही हमारे पड़ोस में रहने के लिए आया था और वह लोग हमारे सामने वाले घर में शिफ्ट हो गए थे मैं बहुत ज्यादा खुश था। मैंने कविता को कहा कि मैं तुम्हें छोड़ देता हूं कविता कहने लगी नहीं मैं चली जाऊंगी। कविता वहां से जा चुकी थी लेकिन मुझे इस बात की खुशी थी कि इस बहाने कविता से मेरी मुलाकात होती ही रहेगी और उसके बाद भी मेरी कविता से मुलाकात होती रही वह कई बार हमारी कॉलोनी में आ जाया करती थी। जब भी वह हमारी कॉलोनी में आती तो कविता से मेरी काफी बातचीत हो जाया करती थी। कविता और मेरी अक्सर बातचीत होने लगी थी हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी ज्यादा समय बिताने लगे थे और कविता को भी मेरा साथ अच्छा लगने लगा था हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे। एक दिन कविता और मैं साथ में मॉल में गए हुए थे उस दिन मैंने कविता से कहा कि आज तुमने मुझे मॉल में बुला लिया तो कविता मुझे कहने लगी कि मुझे तो शॉपिंग करनी थी इसलिए मैंने तुम्हें आज अपने साथ ही बुला लिया। कविता शॉपिंग कर रही थी और मैं कविता के साथ ही था लेकिन मैं बहुत बोर हो गया था क्योंकि मुझे ज्यादा देर कहीं पर भी रुकना बिल्कुल पसंद नहीं है इसलिए मैं बहुत ही ज्यादा बोर हो रहा था। कविता ने भी अपने लिए कपड़े खरीद लिए थे उसने शॉपिंग कर ली थी और शॉपिंग करने के बाद कविता और मैं शाम के वक्त घर लौट आए।

कविता मुझे कहने लगी कि माधव आज तुम बोर हो गए रहे होंगे मैंने कविता से कहा ऐसा कुछ भी नहीं है कविता मुझे कहने लगी कि मुझे साफ पता चल रहा था कि तुम बोर हो रहे हो। मैंने कविता को कहा नहीं कविता ऐसा कुछ भी नहीं है तुम गलत समझ रही हो तो कविता मुझे कहने लगी कि अगर ऐसी बात नहीं है तो तुम यह बताओ कि जब मैं कपड़े खरीद रही थी तो तुम मुझसे बात क्यो नहीं कर रहे थे। मैंने कविता को कहा अब इस बारे में हम लोग बात ना करें तो ही ठीक रहेगा कविता ने भी इस बात को नजरअंदाज कर दिया और फिर हम दोनों घर चले आये। मैंने कविता को उसके घर पर छोड़ा और उसके बाद मैं अपने घर चला आया, जब मैं कविता के घर से अपने घर पहुंचा तो मेरी बड़ी दीदी घर पर आई हुई थी। वह घर पर आई थी तो वह मुझे कहने लगी कि माधव तुम कहां थे तो मैंने दीदी से कहा कि दीदी मैं अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए गया हुआ था। मैंने दीदी को कविता के बारे में नहीं बताया और ना हीं मैं कविता के बारे में किसी को बताना चाहता था। दीदी मुझे कहने लगी कि माधव काफी दिन हो गए हैं तुम हमारे घर भी नहीं आए।

मैंने दीदी से कहा कि नहीं दीदी आप तो जानते ही हैं कि समय का कितना भाव रहता है और मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता इस वजह से मैं आपसे मिलने के लिए आ नहीं पाया दीदी कहने लगी चलो कोई बात नहीं। उस रात हम लोगों ने साथ में डिनर किया और अगले दिन मुझे ही दीदी को छोड़ने के लिए उनके घर पर जाना पड़ा। मैं दीदी को छोड़ने के लिए उनके घर पर चला गया जब मैं दीदी को छोड़ने के लिए उनके घर पर गया तो दीदी मुझे कहने लगी कि माधव तुम आज हमारे घर पर ही रुक जाओ। मैंने दीदी से कहा नहीं दीदी मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रही है मुझे अभी जाना होगा। दीदी कहने लगी चलो कोई बात नहीं उसके बाद मैं अपने ऑफिस चला गया। एक रात कविता और मैं फोन पर बात कर रहे थे जब हम दोनों फोन पर बातें कर रहे थे तो उस वक्त कविता ने मुझे कहा माधव मुझे तुमसे कुछ कहना है। मैंने कविता का कहो क्या कहना है कविता ने मुझे कहा वह मेरे साथ किस करना चाहती है उसने कभी भी किस नहीं किया था। यह बात सुनकर मैंने कविता से कहा हम लोग कल ही मिलते हैं और अगले दिन हम दोनों एक दूसरे को मिले। जब हम दोनों एक दूसरे से मिले तो मैंने कविता के होठों को चूम लिया और कविता को अपना दीवाना बना दिया वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा हम दोनों एक दूसरे के लिए तडपने लगे थे। मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था ना कविता अपने आपको रोक पा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने कविता के सामने अपने लंड को निकालकर हिलाना शुरू किया। वह मेरे लंड को हिलाकर कहने लगी तुम्हारा लंड कितना मोटा है। मैंने कविता को कहा तुम अपने मुंह में लेकर इसका स्वाद चख लो। वह कहने लगी ठीक है अभी मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेकर तुम्हारे लंड का स्वाद चख लेती हूं। कविता ने अपने मुंह को खोलकर मेरे लंड को चूसना शुरु कर दिया। जब उसने ऐसा किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और उसको बहुत ज्यादा मजा आने लगा। वह मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक ले रही थी।

जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मजा आने लगा कविता मेरे लंड को अच्छे से सकिंग कर रही थी। मुझे उसने पूरे मजे दिए मैंने कविता को कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा कविता कहने लगी मैं तुम्हारे लिए बहुत ज्यादा तड़पने लगी हूं। मैंने कविता को कहा मैं तुम्हारी चूत में लंड घुसा देता हूं और मैंने कविता के पैरों को खोलकर उसकी योनि के अंदर लंड घुसा दिया। वह मुझे कहने लगी मेरी योनि के अंदर लंड डाल दो मैंने भी एक जोरदार झटके के साथ कविता की योनि के अंदर अपने मोटे लंड को घुसा दिया। कविता की योनि से खून की पिचकारी बाहर निकाला आई कविता की योनि से खून की पिचकारी बाहर निकल आई तो कविता जोर से चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी मुझे आज मजा आ गया। मैंने कविता से कहा मजा तो मुझे भी बड़ा आ रहा है अब कविता ने मुझे बड़ी उत्तेजित करते हुए कहा मुझे और भी तेजी से धक्के मारो।

मैंने कविता की योनि के अंदर बड़ी तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए। कविता की योनि के अंदर बाहर मे धक्के मार रहा था कविता उत्तेजित होती जा रही थी। वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर की आग को तुमने पूरी तरीके से बढा कर रख दिया है मैं बिल्कुल भी तुम्हारी गर्मी को झेल नहीं पाऊंगी। मैंने कविता को कहा तुम्हारी चूत से निकलता हुआ खून बहुत ही ज्यादा बढ़ चुका है। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल नहीं रहा जा रहा है। मैंने कविता को घोड़ी बना दिया कविता को घोडी बनाने के बाद जब मैंने उसे चोदना शुरू किया तो उसकी योनि से पानी और खून दोनों ही बाहर निकल रहा था। उसकी चूत मेरे वीर्य को बाहर की तरफ खींचने लगी मैंने कविता की चूत को अपने वीर्य की पिचकारी से नहला दिया वह खुश हो गई। वह कहने लगी अब मुझे मजा आ गया मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि मेरी इच्छा पूरी हो गई है।

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