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चूत का भोसडा बनाकर मजा आ गया

Antarvasna, hindi sex kahani: कॉलेज में मैं और महिमा एक दूसरे से प्यार तो कर बैठे थे लेकिन मुझे नहीं मालूम था की महिमा और मैं एक दूसरे से कुछ ज्यादा ही प्यार करने लगेंगे की मैं महिमा के बिना एक पल भी रह नहीं पाऊंगा। महिमा के पापा प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं और वह अच्छे खासे पैसे वाले हैं महिमा एक अच्छे घराने से है इसलिए मुझे हमेशा यह डर सताता रहता कि महिमा को मैं कभी अपना बना पाऊंगा या नहीं। मैंने तो महिमा को अपने प्यार का इजहार कर दिया था लेकिन मुझे नहीं पता था कि हमारे रिश्ते का क्या भविष्य होगा। शुरुआत में जब मैं और महिमा एक दूसरे से मिले तो मैं महिमा से अपने दिल की बात कह ही नहीं पाया मैं अपने प्यार का इजहार करने में हमेशा ही डरता रहता था इसलिए मैं महिमा को कुछ कह नहीं पाया था। मेरा मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगता था लेकिन अब महिमा की वजह से मैं पढ़ने भी लगा था और मेरा मन पढ़ाई में भी लगने लगा था।

महिमा और मैं एक दूसरे को प्यार करने लगे थे लेकिन शुरुआत में यह सब इतना आसान नहीं था मैं सोचता था कि क्या मैं कभी महिमा से अपने दिल की बात कह पाऊंगा या नहीं। मेरे मन में ना जाने कितने ही सवाल थे लेकिन फिर भी मैंने महिमा से अपने प्यार का इजहार कर ही दिया। समय बीतता चला गया और हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आते चले गए। कॉलेज का भी आखिरी दिन था और कॉलेज खत्म होने वाला था मुझे तो यह चिंता सता रही थी कि क्या मैं उसके बाद महिमा से कभी मिल पाऊंगा या नहीं क्योंकि कॉलेज खत्म हो जाने के बाद मेरे ऊपर घर की सारी जिम्मेदारियां आने वाली थी इसलिए मैं बहुत परेशान हो गया था। उस दिन महिमा और मैं हमारे कॉलेज की कैंटीन में बैठे हुए थे हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो मैंने महिमा से कहा की महिमा क्या हम दोनों एक दूसरे के बिना रह पाएंगे तो महिमा के पास कोई जवाब नहीं था। मैंने महिमा से कहा कि मैं तुम्हारे बिना एक पल भी रह नहीं पाऊंगा महिमा मुझे कहने लगी कि संजय यह तो मुझे मालूम है।

उस दिन हम दोनों अपने अपने घर चले गए मैं जब घर पहुंचा तो मुझे महिमा की याद आ रही थी तो मैंने रात में ही महिमा से काफी देर तक फोन पर बात की। हम लोगों का ग्रेजुएशन तो पूरा हो चुका था और मैं अब नौकरी की तलाश में था क्योंकि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए पापा चाहते थे कि मैं अब आगे की पढ़ाई ना करूं बल्कि घर की जिम्मेदारी संभालूँ। मैंने भी यही ठीक समझा और मैं नौकरी की तलाश में भटक रहा था लेकिन दूसरी ओर महिमा के पिताजी ने उसे उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने का फैसला कर लिया था। यह बात मुझे महिमा महिमा ने बताई, उसने जब मुझे इस बारे में बताया तो मुझे यह सुनकर बड़ा अजीब सा महसूस होने लगा और मैं महिमा से मिलना चाहता था लेकिन महिमा अमेरिका चली गई थी। उस दिन मैं महिमा के बारे में ही सोचता रह गया लेकिन महिमा मुझसे मिलो दूर थी और मुझे तो यह भी नहीं पता था कि क्या कभी हमारी मुलाकात हो भी पाएगी या नहीं। कुछ दिनों तक तो मैं यही सोचता रहा लेकिन अब मुझे मेरे परिवार के बारे में भी तो सोचना था शायद मेरी किस्मत में महिमा नहीं थी यह सोचकर मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया। मेरी जॉब लग चुकी थी जब मेरी जॉब लगी तो मैं उस वक्त काफी ज्यादा खुश था मेरी जॉब एक बड़ी कंपनी में लगी और वहां पर मेरी तनख्वाह भी काफी अच्छी थी लेकिन मैं सिर्फ महिमा के बारे में ही सोचता रहता था। जिस ऑफिस में मैं काम करता था उसी ऑफिस में एक लड़की और काम करती थी उसका नाम भी महिमा ही था जब भी मैं उसे महिमा कहकर पुकारता तो मुझे महिमा की याद आ जाती और मुझे ऐसा लगता कि जैसे मैं उसी महिमा से बात कर रहा हूं जो कि मेरे साथ पढ़ा करती थी। मैं महिमा के ख्यालों में ही डूबा हुआ था और मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि महिमा मुझे कभी मिलने भी वाली है। एक दिन मुझे मेरे ही दोस्त ने बताया कि महिमा की शादी तो विदेश में ही हो चुकी है, यह बात सुनकर मैं पूरी तरीके से टूट चुका था मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि महिमा वहीं शादी कर लेगी। महिमा मुझसे दूर थी और महिमा ने विदेश में ही शादी कर ली थी महिमा की शादी हो जाने के बाद हमारे ऑफिस में काम करने वाली  महिमा की ओर मैं खींचा चला गया और महिमा से ही मैं प्यार करने लगा था।

महिमा को मैं पसंद करने लगा था और मुझे महिमा बहुत पसंद थी शायद यही वजह थी कि मैं और महिमा एक दूसरे के करीब आते चले गए। महिमा को जब मैंने अपने प्यार के बारे में बताया तो महिमा को इससे कोई भी एतराज नहीं था मुझे नहीं पता था कि महिमा मेरा साथ देने लगेगी। हम दोनों साथ में ही जॉब करते थे और हम दोनों की अंडरस्टैंडिंग भी बहुत अच्छी हो चुकी थी मैं महिमा को अच्छी तरीके से समझने लगा था और महिमा भी मुझे बहुत ही अच्छे से समझने लगी थी। हम दोनों एक दूसरे के बिना एक पल भी रह नहीं पाते थे महिमा और मैं एक दूसरे के इतने ज्यादा करीब आ चुके थे कि हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे थे और महिमा ने भी मेरे बारे में अपने परिवार को बता दिया था। महिमा ने अपने परिवार में मेरे बारे में बता दिया था इसलिए महिमा और मैं एक दूसरे के और भी ज्यादा करीब आते चले गए और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे थे।

हम दोनों एक दूसरे के बिना एक पल भी रह नहीं पाते थे महिमा भी इस बात से काफी खुश थी और अब मैंने भी पूरा फैसला कर लिया था कि मैं महिमा से ही शादी करूँगा। हम दोनों ने अब शादी करने का फैसला कर लिया था मेरे परिवार को भी महिमा से कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि महिमा बहुत ही अच्छी लड़की है मैंने अपने पापा मम्मी को इस बारे में बता दिया था। कुछ ही समय मे महिमा और मैंने शादी कर ली, मेरी और महिमा की शादी हो चुकी थी हम दोनों पति-पत्नी बन गए और मैं महिमा के साथ ही अपनी जिंदगी बिताना चाहता था। हम दोनों की सुहागरात की पहली रात थी। महिमा बेडरूम में बैठी हुई थी मैं जब बेडरूम में गया तो मैंने महिमा को गिफ्ट दिया। मैने महिमा को गिफ्ट दिया फिर हम दोनों बातें करने लगे। हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे थे हम दोनों ने एक दूसरे से बात की फिर मैंने महिमा से कहा मैं तुमसे शादी कर के बड़ा खुश हूं। महिमा के चेहरे पर भी खुशी थी वह मुझे कहने लगी मैं बहुत ज्यादा खुश हूं हम दोनों एक दूसरे की बाहों में आ गए। जब हम दोनों एक दूसरे की बाहों में आए तो मैं महिमा को महसूस करने लगा महिमा बड़ी खुश हो गई थी। हम दोनों बहुत ज्यादा खुश हो गए थे। महिमा तो इतनी खुश थी की वह मुझसे कहने लगी संजय तुमसे शादी कर के मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई हूं। मैंने महिमा के नरम होठों को चूमना शुरू किया मैं जब महिमा के होंठो को चूमने लगा तो मुझे मजा आने लगा। महिमा भी बहुत ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी महिमा की उत्तेजना इस कदर बढ़ने लगी थी कि वह मुझे अब किस करने लगी। मेरा हाथ जब माहिमा के स्तनों पर लगने लगा तो मैं उसके स्तनों को दबाने लगा वह बहुत ही खुश हो गई थी। महिमा ने मुझे कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मेरे अंदर की आग अब बढ़ चुकी थी महिमा भी बिल्कुल रह नहीं पा रही थी। मैंने महिमा को कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मैंने महिमा की चूत को चाटना शुरु कर दिया था मैंने महिमा के कपडो को उतार दिया था। मैने महिमा की चूत को चाट कर पूरी तरीके से उसे गीला बना दिया।

महिमा की योनि से पानी बाहर निकलने लगा था वह बहुत ही ज्यादा तड़पने लगी थी उसकी तडप अब इतनी ज्यादा बढ़ने लगी कि वह मुझे कहने लगी मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैंने महिमा से कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने जैसे ही महिमा कि योनि के अंदर अपनी उंगली को डालने की कोशिश कि तो मेरे उंगली महिमा के चूत के अंदर नहीं गई। महिमा ने अपने पैरों को खोल लिया मैंने महिमा की चूत को बहुत देर तक चाटा। मैंने महिमा को पूरी तरीके से नंगा कर दिया था जिससे कि मुझे उसके स्तनों को चूसने मे मजा आने लगा था। महिमा को बड़ा अच्छा लग रहा था मैंने महिमा की चूत पर अपने लंड को लगाया तो महिमा तड़पने लगी। महिमा की चूत से बहुत ही ज्यादा पानी बाहर निकालने लगा। मैने महिमा की योनि के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया तो महिमा कि चूत के अंदर मेरा लंड घुस चुका था। महिमा की योनि के अंदर जैसे ही मेरा लंड घुसा तो मुझे मजा आने लगा महिमा को भी बड़ा अच्छा लगने लगा था।

वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है महिमा की योनि से खून निकल आया था। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने महिमा को कहा बस थोड़ी देर की ही बात है। मैंने उसके दोनों पैरो को अपने कंधे पर रख लिया था और मैं महिमा को बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा। महिमा की योनि से खून निकलता ही जा रहा था और महिमा को बड़ा अच्छा लग रहा था। मै अपने लंड को महिमा की चूत के अंदर बाहर कर रहा था। महिमा मुझे कहने लगी मेरे अंदर की आग बहुत ही ज्यादा बढ़ने लगी है मुझे अब बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लगा था और महिमा को भी बहुत मजा आने लगा था। मेरे लंड और महिमा की चूत की टक्कर से महिमा की चूत की गर्मी बाहर निकल आई थी। मैंने अपने माल को महिमा की चूत मे गिराकर अपनी सुहागरात को सफल बना दिया। हम दोनों बड़े ही खुश थे हम दोनों एक दूसरे के साथ अपना जीवन बड़े ही अच्छे तरीके से बिता रहे हैं।

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