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चोरी छुपे मिलने का मजा

Anatarvasna, kamukta रविवार के दिन मेरी छुट्टी थी और उस दिन मैं घर पर ही था मैंने सोचा आज मैं अपनी फैमिली के साथ समय बिताता हूं इसलिए मैं उस दिन घर पर ही था। मेरे बच्चे टीवी देख रहे थे और मेरी पत्नी घर का काम कर रही थी तभी हमारे दरवाजे की बेल बजी, मैंने जब दरवाजा खोल कर देखा तो सामने राजीव खड़ा था राजीव का परिवार हमें काफी वर्षो से जानता है क्योंकि राजीव के पिताजी और मेरे पिताजी काफी अच्छे दोस्त हैं इसलिए हम लोगों के बीच फैमिली रिलेशन है राजीव का हमारे घर पर आना जाना लगा रहता है और हम लोग भी उनके घर पर किसी न किसी फंक्शन में चले जाते हैं। मैंने राजीव से कहा अरे राजीव आज तुम्हारा आना कैसे हुआ राजीव मुझे कहने लगा संजय भैया आपको मैं खुशखबरी देना चाहता हूं मैंने राजीव से कहा ऐसी क्या खुशखबरी है जो तुम मुझे बताना चाहते हो।

राजीव ने मुझे कहा की कोमल के लिए हम लोगों ने लड़का देख लिया है और उसी के बारे में मैं आपको बताने आया था मैंने राजीव से कहा यह तो बड़ी खुशी की बात है राजीव मुझे कहने लगा भैया मैं आपका मुँह मीठा कराता लेकिन इस वक्त मैं बड़ी जल्दी में हूं इसलिए सोचा आप से मिलता हुआ चलूँ। कुछ दिनों बाद आपको कोमल की सगाई में आना है और पापा ने भी आपको और अंकल को आने के लिए कहा है मैंने राजीव से कहा ठीक है राजीव हम लोग आ जाएंगे राजीव ज्यादा देर हमारे घर पर नहीं रुका और वह चला गया। मैंने जब यह बात पापा को बताई तो पापा कहने लगे चलो कोमल के लिए भी काफी समय से रिश्ता देख रहे थे लेकिन कोई लड़का समझ ही नहीं आ रहा था आखिरकार उसका रिश्ता हो ही गया है। पापा भी बहुत खुश थे जब पापा और मैं कोमल की सगाई में गए तो वहां पर उन्होंने बड़े अच्छे से अरेंजमेंट किया हुआ था मेरी पत्नी उस दिन हमारे साथ नहीं आ पाई क्योंकि उस दिन उसे अपने मायके जाना था इसलिए वह हमारे साथ नहीं आ पाई पापा और मैं ही कोमल की सगाई में गए थे। सब कुछ बड़े ही अच्छे से हुआ उस दौरान राजीव ने मुझे लड़के से भी मिलवाया मुझे लड़का काफी अच्छा लगा मैंने राजीव से कहा लड़का तो बहुत अच्छा है और उनका घर परिवार भी काफी अच्छा है राजीव कहने लगा हां भैया इसीलिए तो हम लोगों ने कोमल की रिश्ते की बात आगे बडाई।

पापा और मैं जल्दी घर आ गए लेकिन फिर भी हमें घर आते हुए काफी लेट हो चुकी थी मेरी पत्नी मायके गई हुई थी तो मैंने उसे फोन किया और कहा मैं घर आ चुका हूं वह कहने लगी हम लोग कल सुबह आ जाएंगे आप सुबह कुछ नाश्ता कर लेना। मैंने उसे कहा तुम चिंता मत करो मैं सुबह नाश्ता बना लूंगा और पापा को भी मैं नाश्ता करवा दूंगा दोपहर तक तो तुम आ ही जाओगी वह कहने लगी हां मैं दोपहर तक आ जाऊंगी उसके बाद मैं सो गया अगली सुबह मैंने नाश्ता बनाया और मैंने पापा से कहा आप नाश्ता कर लीजिएगा मैं ऑफिस के लिए निकल रहा हूं मैंने भी थोड़ा बहुत नाश्ता किया और मैं ऑफिस के लिए निकल पड़ा। मैं जब ऑफिस के लिए निकला तो रास्ते में मेरी गाड़ी में कुछ खराबी आ गई जिस वजह से मुझे कार को वहीं छोड़ना पड़ा और अपने ऑफिस ऑटो से जाना पड़ा शाम के वक्त मैं जब लौटा तो मैंने सोचा किसी मैकेनिक को अपने साथ ले चलता हूं। मैं एक मैंकेनिक को अपने साथ ले आया उसने गाड़ी खोलकर देखी तो वह कहने लगा सर कुछ देर आपको इंतजार करना पड़ेगा मैंने उससे कहा कोई बात नहीं, मैं वहीं बैठा हुआ था और उस मैकेनिक ने कुछ देर बाद गाड़ी को ठीक कर दिया। मैं वहां से घर चला आया मुझे घर आने में देर हो चुकी थी मैंने अपनी पत्नी को फोन कर के इसकी जानकारी दे दी थी कि मुझे आने में देर हो जाएगी मेरी पत्नी ने खाना बना दिया था और हम लोगों ने रात का डिनर साथ में किया उसके बाद मैं सो गया। अगली सुबह मैं ऑफिस के लिए निकल गया और जब मैं ऑफिस के लिए निकला तो उस दिन मुझे राजीव मिल गया राजीव मुझे कहने लगा और भैया कैसे हो? मैंने राजीव से कहा मैं तो ठीक हूं तुम बताओ तुम कहां जा रहे हो तो वह कहने लगा बस कोमल की शादी की तैयारियां चल रही है। मैंने राजीव से कहा हां मुझे पापा ने बताया था कि कोमल की शादी इसी महीने हैं राजीव कहने लगा हां भैया इसी महीने कोमल की शादी है मैंने राजीव से कहा यदि मेरी कोई जरूरत हो तो तुम मुझे बेझिझक कहना राजीव कहने लगा यदि मुझे आप की कोई जरूरत होगी तो मैं जरूर आपको बोलूंगा।

मैंने राजीव से कहा तुम मुझसे बेझिझक कहना यदि कोई भी जरूरत हो तो और मैंने उसे कहा अभी तो मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है लेकिन मैं तुमसे फोन में बात करता हूं राजीव मेरी बहुत ज्यादा इज्जत करता है और वह कहने लगा ठीक है भैया आपको ऑफिस के लिए लेट हो रही होगी और फिर मैं वहां से अपने ऑफिस चला गया। जब मैं ऑफिस में फ्री हुआ तो मैंने सोचा राजीव को फोन कर देता हूं मैंने राजीव को फोन किया और राजीव से कहा शादी की सारी तैयारियां हो चुकी है वह कहने लगा सारी तैयारियां हो चुकी है और हम लोग नहीं चाहते की शादी में कोई कमी रह जाए क्योंकि हमारे घर में पहली शादी है और कोमल की शादी पापा बड़े धूमधाम से कराना चाहते हैं। राजीव मुझसे कहने लगा भैया मुझे यदि कुछ पैसों की आवश्यकता होगी तो आप क्या मेरी मदद कर देंगे मैंने राजीव से कहा इसमें कोई पूछने वाली बात है तुम्हे जब भी पैसों की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना मैं तुम्हें तुरंत पैसे दे दूंगा और उसके बाद राजीव ने मुझसे कुछ पैसे उधार ले लिए। मैंने भी राजीव को पैसे दे दिए क्योंकि मुझे मालूम था शादी में खर्चा होता है इसलिए मैंने राजीव को पैसे दे दिये।

कोमल की शादी का दिन अब नजदीक आने लगा जिस दिन कोमल की शादी थी उस दिन हम लोग उसकी शादी में चले गए मेरी पत्नी और मेरे बच्चे भी सब साथ में हीं थे। मैंने अपनी पत्नी से कहा तुम पापा का ध्यान रखना क्योंकि मुझे शादी में मेरे पुराने दोस्त मिल गए थे इसलिए मैं उनके साथ बैठा हुआ था और उनसे बात कर रहा था मेरे कुछ दोस्त अपनी फैमिली को भी साथ में लाए हुए थे तो उन्होंने मुझे उनसे मिलवाया मैंने भी अपनी फैमिली से अपने दोस्तों को मिलवाया। कॉलेज के बाद तो सब एक दूसरे से अलग ही हो चुके थे बहुत कम ही सब लोगों का मिलना होता है लेकिन शादी में मैं यह मौका गवाना नहीं चाहता था इसलिए मैं अपने दोस्तों के साथ जमकर एंजॉय कर रहा था और उनसे अपने पुराने दिनों की यादों को ताजा कर रहा था। मेरी पत्नी पापा के साथ बैठी हुई थी पापा को भी उनके कुछ पुराने दोस्त मिल गए तो पापा उनके साथ चले गए मेरी पत्नी अकेली थी मैंने सोचा मैं उसे कंपनी देता हूं, मैं उसके साथ में बैठ गया। तभी मेरा दोस्त सुरेश आया और कहने लगा आप लोग यहां अकेले बैठे हैं मैंने सुरेश से कहा दरअसल मेरी पत्नी अकेली थी तो मैंने सोचा उसे मैं कंपनी दे देता हूं इसलिए मैं उसके साथ ही बैठा हुआ था सुरेश मुझे कहने लगा तुम हमारे साथ चलो मैं अपनी पत्नी को भाभी के साथ भेजता हूं। सुरेश अपनी पत्नी को ले आया उसकी पत्नी का नाम मंजू है, मेरी पत्नी और मंजू साथ में थे। हम लोग अपने दोस्तों के साथ बैठे हुए थे और अपनी पुरानी बातें कर रहे थे। मैंने सुरेश से कहा मैं अभी आता हूं मैं जब अपनी पत्नी के पास जा रहा तो वह कहने लगा तुम कहां जा रहे हो। मैंने उससे कहा मैं अपनी पत्नी के पास जा रहा हूं मैं जब अपनी पत्नी के पास गया तो वहां पर सिर्फ मंजू बैठी हुई थी।

मैंने मंजू से पूछा रेखा कहां है वह कहने लगी अभी तो यही थी, मैं मंजू के साथ बैठ गया। मैं जब मंजू के साथ बैठा था तो वह अपने पैरो से मेरे पैर को टकराने लगी जब वह मेरे पैर से अपने पैर को टकराती तो मेरे अंदर की उत्तेजना बढ़ जाती। मैंने मंजू से कहा तुम मुझे अंदर मिलना वह मुझे कहने लगी ठीक है मैंने अपना नंबर मंजू को दे दिया। जब रेखा आ गई तो मैं वहां से चला गया और थोड़ी देर बाद मंजू मेरे पीछे पीछे आ गई हम दोनों एक कोने मे चले गए वहां पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने मंजू के बदन को महसूस करना शुरू कर दिया मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके ब्लाउज को मैंने जब उतरा तो उसके बड़े स्तन बाहर की तरफ को निकल पडे। मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसने लगा उसके स्तनों को चूसकर मुझे बड़ा मजा आ रहा था जैसे ही मैंने उसकी योनि को अपनी उंगलियों से सहलाना शुरु किया तो उसके अंदर उत्तेजना बढ़ने लगी उसे बड़ा मजा आने लगा।

मैंने मंजू से कहा तुम घोड़ी बन जाओ वह घोडी बन गई मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया उसके मुंह से चीख निकल पडी। उसके बाद में उसे लगातार तेजी से धक्के देने लगा मैं तेज गति से धक्का मारता उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही चिपचिपा पदार्थ बाहर की तरफ को निकालने लगता। मुझे उसे धक्के मारने में बहुत मजा आता मैं उसे तेजी से धक्के मारता रहता मेरे लंड की गर्मी को मै बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। जैसे ही मेरा वीर्य मंजू की योनि में गिरा तो वह मुझे कहने लगी मैं चलती हूं उसने अपनी योनि को साफ किया और वहां से चली गई। मुझे नहीं पता था कि मंजू सेक्स की इतनी ज्यादा भूखी होगी लेकिन मुझे तो एक टाइट माल मिल गया था मंजू को चोदने में मुझे बड़ा मजा आया उसकी योनि को मैंने बड़े अच्छे से मारा। हम सबने साथ में खाना खाया मंजू मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी और मैं भी उसे देखकर खुश हो रहा था। यह सिलसिला अब भी चल रहा है हम दोनों चोरी छुपे मिला करते हैं यह बात आज तक किसी को भी पता नहीं चल पाई।

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