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चोदकर पल यादगार बन गया

Hindi sex story, antarvasna: हमारी कॉलोनी में सुरभि रहती है सुरभि को मैं कॉलेज के दिनों से ही पसंद करता हूं लेकिन कभी भी सुरभि से मैं बात नहीं कर पाया क्योंकि मेरे अंदर इतनी हिम्मत ही नहीं थी कि मैं सुरभि से कभी अपने दिल की बात कह पाता। सुरभि हमारे कॉलेज में ही पढ़ा करती थी और वह मुझसे एक क्लास जूनियर थी लेकिन फिर भी मैं कभी भी सुरभि से अपने दिल की बात नही कर पाया। सुरभि जब भी मेरे सामने आती तो ना जाने मुझे क्या हो जाता और मेरे अंदर हिम्मत ही नहीं होती कि मैं सुरभि से बात करूं। एक दिन मैं अपनी फैमिली के साथ अपने मामा जी के घर गया हुआ था उस दिन जब हम लोग वहां से घर लौटे तो मैंने देखा कि सुरभि कॉलोनी के पार्क में ही किसी से फोन पर बात कर रही थी। मैंने मेरे पापा मम्मी को घर छोड़ा और उसके बाद मैं कॉलोनी के पार्क में चला गया उस वक्त कॉलोनी के पार्क में कोई भी नहीं था। सुरभि फोन पर किसी से बात कर रही थी मैंने सोचा की मैं सुरभि के साथ बात करूं लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं सुरभि से बात करूं लेकिन फिर मैंने हिम्मत करते हुए सुरभि से बात कर ही ली। जब उस दिन मैंने सुरभि से बात की तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे कि मैंने सुरभि का दिल जीत लिया हो यह पहली ही बार था और हम दोनों की यह पहली बार ही बात हो रही थी।

सुरभि से बात कर के मुझे अच्छा लग रहा था और सुरभि भी काफी ज्यादा खुश थी कि हम दोनों एक दूसरे से बात कर पा रहे हैं। मैंने सुरभि से उस दिन काफी देर तक बात की मेरे अंदर ना जाने उस दिन कहां से इतनी हिम्मत आ गई कि मैं सुरभि से बात कर पाया। अगले दिन से मैं सुरभि से बातें करने लगा सुरभि मुझे फोन पर मैसेज भेजने लगी थी हम दोनों ने एक दूसरे से अपने नंबर एक्सचेंज कर लिए थे और अब हम दोनों के फोन पर खूब बातें होने लगी थी। सुरभि को मुझसे फोन पर बातें करना अच्छा लगता और मुझे भी सुरभि के साथ फोन पर बातें करना काफी ज्यादा अच्छा लगता था। मैं बहुत ही ज्यादा खुश रहता था जब भी मैं सुरभि से फोन पर बातें किया करता था। हम दोनों एक ही कॉलोनी में रहते थे इसलिए हम दोनों अक्सर मिल जाया करते थे मैंने जब सुरभि को डिनर पर अपने साथ चलने के लिए कहा तो सुरभि मेरे साथ डिनर पर चलने को तैयार हो गई। जब वह मेरे साथ डिनर पर आई तो उस दिन वह बहुत ही ज्यादा सुंदर लग रही थी उस दिन सुरभि और मैंने साथ में डिनर किया। सुरभि के साथ उस दिन समय का पता ही नहीं चला लेकिन मुझे काफी अच्छा लगा कि मैंने सुरभि के साथ डिनर किया और हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था कि मैंने सुरभि के साथ समय बिताया मेरे अंदर इस बात को लेकर काफी ज्यादा खुशी थी कि मैं सुरभि के साथ समय बीता पाया।

उसके अगले दिन से तो सुरभि और मेरी फोन पर अक्सर बातें होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे से फोन पर जब भी बातें करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता और हम दोनों ही बहुत ज्यादा खुश रहते। मैं सुरभि से मिल भी लिया करता था और सुरभि को भी मेरा साथ अच्छा लगने लगा था सुरभि को यह बात पता थी कि मेरे दिल में उसके लिए कुछ तो चल रहा है। वह ज्यादातर मेरे साथ ही रहा करती थी लेकिन सुरभि ने भी कभी इस बारे में कुछ नहीं कहा था और ना ही मैंने सुरभि से कभी इस बारे में कुछ कहा लेकिन मैं भी यह बात अच्छे से जानता था कि सुरभि के दिल में मेरे लिए बहुत प्यार है। एक दिन मैं सोचने लगा कि क्यों ना मैं सुरभि से अपने दिल की बात कह दूं और फिर मैंने सुरभि से अपने दिल की बात कह दी। सुरभि को काफी अच्छा लगा कि मैंने उसे अपने दिल की बात कह दी उसके बाद से हम दोनों एक दूसरे को समय देकर एक दूसरे को जानने की कोशिश करने लगे। धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे को काफी अच्छे से जानने लगे थे और हमारा रिलेशन भी अच्छे चलने लगा था। हम दोनों एक दूसरे के काफी ज्यादा करीब आ चुके थे इसलिए मैं बहुत ही ज्यादा खुश था और सुरभि भी काफी ज्यादा खुश थी कि वह मेरे साथ रिलेशन में है। मुझे जब भी लगता कि मुझे सुरभि से मिलना चाहिए तो मैं सुरभि को मिलने के लिए चला जाया करता और सुरभि भी मेरे साथ काफी ज्यादा खुश रहती थी।

एक दिन मैंने सुरभि को अपने साथ मूवी चलने के लिए कहा तो सुरभि भी मेरे साथ आ गई और यह पहली बार था जब हम दोनों साथ में मूवी देखने के लिए गए थे। सुरभि को मूवी देखना पसंद नहीं था इसलिए वह मेरे साथ आती नहीं थी लेकिन उस दिन जब वह मेरे साथ मूवी देखने के लिए आई तो मुझे काफी अच्छा लगा और सुरभि को भी बहुत अच्छा लगा कि उसने मेरे साथ मूवी देखी। हम दोनों ने उस दिन साथ में मूवी देखी और फिर हम लोग घर लौट आये थे जब हम लोग घर लौटे तो उसके बाद देर रात तक सुरभि और मैंने फोन पर बातें की। हम दोनों की फोन पर काफी देर तक बातें हुई और मुझे मालूम भी नहीं पड़ा कि कब मेरी आंख लग गई और मुझे नींद आ गई। मुझे अब नींद आ चुकी थी हम दोनों एक दूसरे को तो हर रोज मिला करते थे। जब पहली बार मेरे और सुरभि के बीच किस हुआ तो मैं काफी ज्यादा खुश हो गया था और सुरभि भी बहुत ज्यादा खुश थी। हम दोनों के बीच पहली बार ही किस हुआ था उस दिन हम दोनों के बीच सिर्फ किस हो पाया था। उस दिन हम दोनों इससे आगे बढ़ नहीं पाए उस दिन मुझे लगने लगा था उसे मेरे साथ सेक्स करना चाहिए और सुरभि भी मेरे साथ सेक्स करने के लिए बहुत ज्यादा तड़प रही थी। मैंने जब सुरभि को अपने घर पर बुलाया तो सुरभि मेरे घर पर आ गई उस दिन घर पर कोई भी नहीं था।

सुरभि जब घर पर आई तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था और सुरभि भी बहुत ज्यादा खुश थी। जब सुरभि घर पर आई तो मैंने उसे अपने रूम में चलने के लिए कहा और वह मेरे रूम में चली आई। वह मेरे रूम में चली आई जब वह मेरे रूम में आई तो मैंने सुरभि से कहा तुम अपने कपड़े उतार दो। सुरभि ने अपने कपड़े उतारे। मैं उसके नंगे बदन को देख रहा था उसका नंगा बदन मुझे अपनी और खीच रहा था। उसके बदन से गर्मी निकल रही थी मैंने अपने कपड़े खोलकर सुरभि से कहा तुम मेरे लंड को चूसो। उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया जब वह मेरे लंड को चूसने लगी तो मेरा लंड कठोर होता चला गया। वह मेरे लंड को अच्छे से चूस रही थी। मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था जब मैंने उससे कहा तुम मेरे लंड को चूसती जाओ। सुरभि के अंदर से निकलती हुई गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने सुरभि को कहा तुम्हारी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है। सुरभि मुझे कहने लगी मुझे लगने लगा है हम रह नहीं पाएंगे। जब सुरभि को मैंने बिस्तर पर लेटाया तो सुरभि खुश हो गई थी। मैंने अपनी उंगली का स्पर्श सुरभि की चूत पर किया सुरभि की चूत पर मैंने जब उंगली का स्पर्श किया तो मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आने लगा था और सुरभि को भी बड़ा मजा आ रहा था।

जब मैंने सुरभि की चूत को चाटना शुरू किया तो वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ने की कोशिश करने लगी। जब वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ रही थी तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ रही थी। मैंने सुरभि को कहा तुमने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया है। सुरभि मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। सुरभि को बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था मैंने जब सुरभि की चूत के अंदर अपने मोटे लंड को धीरे धीरे घुसाना शुरू किया तो उसकी योनि के अंदर लंड जा चुका था। उसकी चूत के अंदर मेरा मोटा लंड जाते ही वह बहुत ज्यादा जोर से चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। मैंने सुरभि की चूत के अंदर बाहर अपने मोटे लंड को करना शुरू कर दिया था जिससे कि सुरभि को बहुत मजा आने लगा। जब मैं सुरभि की योनि के अंदर बाहर अपने मोटे लंड को किए जाता तो वह खुश हो रही थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। सुरभि ने मुझे अपने पैरों के बीच में जकडना शुरू कर दिया था जब वह ऐसा करती तो मैं उसे और भी ज्यादा तेज गति से धक्के मारता जिससे कि सुरभि और मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था।

सुरभि को बहुत ज्यादा मजा आने लगा था हम दोनों कि गर्मी बहुत ही ज्यादा बढने लगी थी। हम दोनों को ही मजा आने लगा था जिस प्रकार से हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा ले रहे थे और एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे उससे हम दोनों बहुत ही ज्यादा मजे में आ गए थे। मुझे लगने लगा था मैं ज्यादा देर तक सुरभि की चूत का मजा नहीं ले पाऊंगा। मैंने उसकी योनि में अपने माल को गिराकर अपनी इच्छा को पूरा कर दिया। जब मैंने अपने लंड को सुरभि की चूत से बाहर निकाला तो उसकी योनि से खून बाहर निकल रहा था और उसकी चूत से इतना ज्यादा खून और मेरा वीर्य बाहर निकल रहा था कि मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था क्योंकि पहली बार ही मैंने सुरभि के साथ सेक्स किया और यह बड़ा ही अच्छा पल था।

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