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भाई की एक साली -2

antarvasna sex kahani

मैं उसे हाँ बोलकर खाली मैदान की ओर बढ़ा और वहाँ एक एकांत जगह में जाकर अपना लंड निकाला और मुठ मारकर माल निकाला, फिर कपड़े ठीक कर स्नेहा की मौसी के घर की ओर बढ़ चला।

हम लोग यहाँ करीब आधा घंटा रूके। यहाँ से जाते समय मौसी-मौसा हमें बाहर तक छोड़ने आए।

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स्कूटी की ड्राइविंग सीट मैंने संभाला, स्नेहा पीछे बैठी। मौसी के घर से आगे जैसे ही गाड़ी मुड़ी, स्नेहा बोली- अब मुझे दीजिए ना ! मैं चलाऊंगी।

मैंने स्कूटी रोका और बोला- स्नेहा, एक बात बोलूँ, मानोगी?

उसने सामने आकर कहा- गाड़ी चलाने से रोकने की बात होगी तो नहीं मानूंगी, बाकी बात मानूंगी।

मैं बोला- तुम मेरी बात मान जाओगी इस आशा से बोल रहा हूँ, पर बात पसंद ना आए तो मुझे बोलना, घर में किसी से भी नहीं बोलना।

उसने हामी भरी और मैं बोला- आते समय जब मैं तुम्हारे पीछे बैठा था, तब तुमने देखा था कि मेरा नूनू कैसा तन गया था।

वो नादान बनते हुए बोली- यह क्या होता है?

मैं बोला- अरे वही जिसने मेरी फिटिंग बिगाड़ दिया था।

वो बोली- वो क्यूं तन गया था?

मैं बोला- वो तुम्हारी पुसी मांग रहा है।

वो बोली- तो?

मैं बोला- मैं समझता हूँ कि शादी से पहले लड़की अपनी पुसी नहीं देती, सो मैं तुमसे पुसी मांगूंगा नहीं, पर रिक्वेस्ट करूंगा कि मुझे एक बार अपनी पुसी को प्यार करने दो।

मैंने उसके चेहरे पर उत्तेजना की चमक देखी तो खुश हुआ और बोला- मेरा यह काम यदि तुमने आज कर दिया तो मैं तुम्हारा यह एहसान कभी भू्लूंगा नहीं।

स्नेहा ने मेरी इस बात के बाद मुझसे कई सवाल किए, पर आखरी में यह तय हुआ कि हम लोग रात में सबके सोने के बाद ऊपर छत पर मिलेंगे। मैं गाड़ी का हैंडल स्नेहा को देने के बाद उसके पीछे बैठ गया। अब मेरा हाथ उसकी चूत के ऊपर घूमने लगा।

स्नेहा बोली- अभी ऐसा मत करिए, नहीं तो घर पहुंचते तक फिर आपकी फिटिंग बिगड़ जाएगी और सब शक करेंगे।

मैंने कहा- खाली इसलिए ही हाथ हटाऊं या और कोई बात हैं?

स्नेहा बोली- आपके ऐसा करने से मेरी पुसी भी गीली हो गई है। अब मत करिए ना, रात में तो अपन मिल ही रहें हैं, तब कर लीजिएगा।

अब मुझे लग रहा था कि आग स्नेहा में भी लगी है और उसे भी आज रात का ही इंतजार है, मैं बोला- ठीक है।

घर के पास से मैंने स्कूटी ले लिया और स्नेहा पीछे बैठ गई।

घर पहुँचने के बाद स्नेहा की मां ने पूछा- इसने गाड़ी चलाने के लिए आपको परेशान तो नहीं किया ना?

मैं बोला- नहीं !

और अंदर आ गया। सामने ही भाभी मिल गई, उन्होंने पूछा- जस्सूजी, स्नेहा ने गांव की सभी अच्छी जगह भी दिखा दी ना?

मैंने कहा- नहीं, अच्छी चीज बाद में दिखाऊँगी, ऐसा बोली है।

भाभी ने हंसते हुए स्नेहा से कहा- अरे जब अभी साथ निकली थीं, तो अभी ही दिखा देना था ना अब बाद में फिर कब साथ में घूमना हो।

इसी तरह की बातें चलती रही। मुझे रात का ही इंतजार था, मैंने तय कर लिया था कि चाहे जो हो मैं इसे आज रात को चोदूँगा ही।

खैर रोज के सभी काम निपटने के बाद मैं अपने कमरे में बिस्तर पर यूं ही लेटा हुआ था, रात को करीब 11:30 पर अचानक मेरे कमरे की खिड़की पर थपकी पड़ी और सीढ़ी से किसी के छत पर जाने की आवाज सुनाई दी।

मैं भी जल्दी-जल्दी ऊपर बढ़ा। ऊपर स्नेहा ही आई थी। उसने गाउन पहना हुआ था। हम दोनों कमरे में पहुँचे, वह बोली- लीजिए, मैं आ गई हूँ, जो करना हैं जल्दी कीजिए।

मैं बोला- हाँ जल्दी ही करते हैं।

कहते हुए मैंने उसके स्तन दबाना शु्रू कर दिया। फिर उसके होठों से चिपक कर लंबा चुम्बन लिया। अपने हाथ उसके गाउन के अंदर कर यह पता लगा लिया था कि उसने ब्रा व पैन्टी पहनी हुई हैं, सो गाउन को खोल दिया। गाउन उतारते समय उसने एतराज किया, पर बाद में मान गई।

अब उसने कहा- आपका नूनू तो अब शांत हैं ना।

मैं बोला- यह पुसी की किस्सी लिए बिना नहीं मानेगा।

उसने कहा- अच्छा? दिखाओ तो इसे?

मैंने कहा- लो देख लो।

वह मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लौड़े को पकड़ने का प्रयास करने लगी, तभी मैंने अपनी टी-शर्ट, पजामे और अंडरवियर को उतार दिया, अब उससे चिपककर मैंने ब्रा का हुक खोला और एक निप्पल को मुँह व दूसरे को उंगलियों से सहलाता रहा। उसके मुँह से अब बेहद मदहोश आवाजें भी निकल रही थी।

मैंने अब उसकी पैन्टी को खींचकर नीचे सरका दिया। हम दोनों अब एकदम नंगे थे।

स्नेहा की चूत पर छोटे-छोटे बाल थे, मैंने कहा- शेव नहीं की क्या?

उसने कहा- नहीं, इस हफ्ते नहीं कर पाई।

मैं उसे पलंग पर लाया और लिटा दिया। अब मैंने उसकी नाभि में जीभ डालकर हिलाया फिर नाभि से होकर जीभ को उसकी चूत में ले गया। अब उसकी कमर उछलने लगी और मैं भी उसकी चूत के छेद में जीभ डालकर आगे-पीछे करने लगा। उसकी सनसनाती आवाज मुझमें और शक्ति भर रही थी।उसकी चूत को चाटते हुए ही मैं उल्टा घूम गया, और अपने लौड़े को उसके मुँह के पास कर दिया। थोड़ी देर बाद उसने मेरे लंड को पहले छुआ, फिर जीभ लगाई पर बाद में लंड को उसने अपने मुँह के अंदर ले लिया और चूसने लगी। यानि अब हम लोग 69 की स्टाईल में पहुंच गए थे।

थोड़ी देर बाद मैं सीधा हुआ और पूछा- ठीक लगा?

उसने हाँ में मुंडी हिलाई और मेरे लंड को फिर मुंह में ले लिया।

मैंने कहा- अब असली मजा लो।

और उसकी दोनों टांगों को फैला दिया। अब उसकी चूत पर अपना लंड रखकर जैसे ही अंदर की ओर धक्का दिया, वह जोर से चीखी, मुझे लगा कि अब इसकी सील टूटी है।उसकी चीख को दबाने के लिए मैंने उसके मुँह पर अपना मुँह लगा दिया, पर लंड की स्पीड को कम नहीं किया। थोड़ी देर बाद ही उसकी चीख और लंड के चूत में घुसने की वजह से आती कराह की जगह अब उसके मुँह से चुदाई के आनन्द की सिसकारियाँ निकल रही थी। कुछ देर बाद ही उसकी गति में और भी ज्यादा तेजी आई व बड़बड़ाने लगी- साले, फाड़ दे चूत को। बहुत परेशान करके रखा है इसने मुझे, फाड़ दे साली को और ए ए ए मैं गई।

यह बोलकर वो झड़ गई।

इसके थोड़ी देर बाद ही मैं भी खल्लास हो गया।

दोस्तो, आज आपको सही बताऊँगा कि स्नेहा कि सील तोड़ चुदाई में मेरा 3 बार गिरा पर उसे चोदने की खुशी और उसे सैक्स का पूरा आनन्द देने की चाह में मैंने उसके झड़ते तक चुदाई को उसी क्रम में जारी रखा, ताकि स्नेहा को मेरे ढीले पड़ने का अहसास न हो।

हमारी मौज मस्ती की खबर घर में किसी को नहीं लगी।

अगले ही साल स्नेहा से मेरी शादी हो गई। हम आज भी कई बार चुदाई करते समय उस पहले मजे को ही याद करते हैं।

स्नेहा अब भी कहती है- उस दिन जैसा ही करो ना।

खैर ये तो हुई शादी से पहले की चुदाई की बात। शादी के बाद सुहागरात हमने कैसे मनाई, इसे अगली बार पर जल्द ही बताऊंगा। तब तक के लिए विदा।

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