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भाभी ने तन बदन महका दिया

Hindi sex kahani, Antarvasna: मैं मुंबई में एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता हूं मेरी शादी को अभी सिर्फ 6 महीने ही हुए हैं मेरी शादी बबीता से हुई। बबीता और मैं पहली बार जब एक दूसरे को मेरे मामा जी के घर पर मिले तो वहीं मैंने बबीता को पसंद कर लिया था। मैं चाहता था कि बबीता से मैं शादी करूं लेकिन बबीता से मेरी कई समय तक तो बात हो ही नहीं पाई फिर मैंने अपने मामा जी के लड़के रोहन से मदद ली और किसी प्रकार से मैंने बबीता का नंबर ले लिया। बबीता का नंबर मुझे मिल जाने के बाद मैंने उससे फोन पर बात करनी शुरू की। मैं बबीता से बातें करने लगा तो उसे भी अच्छा लगने लगा और जब एक दिन मैंने बबीता से अपने दिल की बात शेयर की तो वह भी मुझे चाहने लगी वह मुझे कहने लगी कि मैं आपसे प्यार करने लगी हूं। मेरे लिए तो यह बड़ा ही अच्छा था कि बबीता मुझसे प्यार करने लगी है और हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे। काफी समय तक हम दोनों एक दूसरे को डेट करते रहे और फिर हम दोनों की शादी हो गई।

जब हम दोनों की शादी हो गई तो उसके बाद मेरी जिंदगी बहुत ही अच्छे से चल रही है मुझे मुंबई में 5 वर्ष हो चुके है। 5 वर्ष पहले मैं मुंबई में जॉब करने के लिए आया था और आज मैं एक अच्छे मुकाम पर हूं, मेरी बबीता से शादी हो चुकी है और मेरे जीवन में सब कुछ अच्छे से चल रहा है। मैं एक दिन अपने ऑफिस से घर लौटा जब मैं अपने ऑफिस से घर लौटा तो उस दिन मुझे मां का फोन आया और वह कहने लगे कि राजेश बेटा तुम कुछ दिनों के लिए घर आ जाओ हम तुम्हारी बहन के लिए कोई लड़का देख रहे हैं। मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं जल्दी घर आ जाऊंगा। मेरी मां और मेरी बहन सूरत में रहते हैं उन लोगों को मैंने कई बार अपने पास आने के लिए कहा लेकिन वह लोग मेरे साथ नहीं रहते। पापा का देहांत काफी वर्ष पहले हो गया था जिसके बाद मां ने ही हमारी देखभाल की और मां ने ही हम दोनो भाई बहनों को पाला पोषा। मैंने यह बात बबीता को बताई तो बबीता कहने लगी कि राजेश हम लोग कुछ दिनों के लिए घर हो आते हैं मैंने भी बबीता से कहा ठीक है।

अगले दिन मैंने ट्रेन की टिकट करवा ली थी और मैंने जब ट्रेन की टिकट करवा ली तो उसके कुछ दिनों बाद हम दोनों ही घर जाने वाले थे मैंने ऑफिस से भी छुट्टी ले ली थी। जब मैं अपने घर सूरत पहुंचा तो मां और मेरी छोटी बहन सुहानी बहुत खुश हुए वह लोग इस बात से खुश थे कि मैं काफी दिनों बाद घर आ रहा हूं मुझे भी उनसे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा और बबीता भी बहुत खुश थी। मां ने मुझे बताया कि हम लोगों ने सुहानी के लिए एक लड़का देखा है मैंने मां से कहा कि लेकिन आपको क्या उस लड़के के बारे में सब कुछ पता है। मां कहने लगी कि बेटा तुम्हारे पापा के दोस्त सुहानी के लिए गौतम का रिश्ता लेकर आए थे और मैं जब गौतम के परिवार से मिली तो मुझे अच्छा लगा। मां कहने लगी कि राजेश बेटा एक बार तुम भी गौतम के परिवार से मिल लो और एक बार गौतम से भी मिल लो क्योंकि तुम्हारी रजामंदी के बिना हम लोग सुहानी की शादी उससे नहीं करवाएंगे। मैंने मां से कहा ठीक है मां और मैं जब उसी शाम अपनी बहन सुहानी के साथ बैठा हुआ था तो मैंने सुहानी से कहा कि सुहानी तुम इस रिश्ते से खुश तो हो ना। सुहानी कहने लगी कि भैया मुझे शादी तो करनी ही है और अगर आप गौतम और मेरे रिश्ते के लिए हामी भर देंगे तो मैं गौतम से शादी कर लूंगी। मैंने सुहानी को कहा कि सुहानी पहले मैं गौतम से मिलूंगा उसके बाद ही हम लोग इस बारे में कुछ फैसला कर पाएंगे तो वह मुझे कहने लगी हां भैया। मैं सुहानी के साथ काफी देर तक बैठा रहा उसके बाद मैं और बबीता रूम में साथ में बैठे हुए थे तो बबीता मुझे कहने लगी कि राजेश एक बार आप गौतम से भी मिल लीजिए। मैंने बबीता को कहा कि हां मैं कल ही गौतम से मिलूंगा और गौतम के परिवार वालों से भी मैं एक बार मुलाकात कर लूंगा उसके बाद ही हम लोग कोई फैसला करेंगे बबीता कहने लगी कि हां यह तो बिल्कुल ठीक रहेगा। मैंने बबीता से कहा कि चलो अब सो जाते हैं काफी देर भी हो चुकी है और कल मैं गौतम के परिवार से मिल लेता हूं और गौतम से भी मुलाकात कर लेता हूं। अगले दिन मैं गौतम के परिवार से मिला तो गौतम के परिवार के बारे में मुझे पता चला गौतम के परिवार का काफी पुराना बिजनेस है और गौतम के परिवार से मिलकर मुझे अच्छा लगा। गौतम से जब मैं मिला तो मुझे पता चला कि गौतम अपने परिवार का बिजनेस सम्भालता है और गौतम मुझे काफी अच्छा लगा तो मैंने भी इस रिश्ते के लिए हां कहने के लिए कह दिया था।

सुहानी और गौतम की सगाई हो गई और मां जल्द ही उसकी शादी गौतम के साथ करवाना चाहती थी, मैंने मां से कहा कि मां हम लोग जल्दी ही सुहानी की शादी गौतम से करवा देंगे। मां कहने लगी बेटा कुछ महीनों तक हम लोग रुक जाते हैं फिर उसके बाद सुहानी और गौतम की शादी करवा देंगे। मैंने भी मां से कहा मां मैं और बबीता अभी मुंबई जा रहे हैं फिर जब तुम्हें लगेगा कि हमें सुहानी की शादी करवा देनी चाहिए तो तुम मुझे बता देना, वैसे कुछ महीनों बाद हम लोग सुहानी की शादी करवा देंगे। मैं और बबीता वापस मुंबई लौट आए थे मुंबई में मैं अपने काम में बिजी था और बबीता घर का काम अच्छे से संभालती थी। समय बीतता चला गया और पता ही नहीं चला कि कब 4 महीने बीत गए और 4 महीने बाद एक दिन मां ने मुझे कहा कि बेटा हम लोग सुहानी और गौतम की शादी करवा देते हैं। मुझे भी इस बात से कोई एतराज नहीं था गौतम के परिवार वाले भी इस बात के लिए तैयार थे। मैंने भी अपने ऑफिस से कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले ली फिर मैं और बबीता अपने घर चले गए, सुहानी और गौतम की शादी की सारी तैयारियां मुझे ही करवानी थी और मैंने सुहानी की शादी की पूरी तैयारी करवा दी थी।

हमारे जितने भी रिश्तेदार थे उन सबको हमने सुहानी की शादी में बुलाया और सब लोग बड़े ही खुश थे। सुहानी की शादी हम लोग बड़े ही धूमधाम से करवाना चाहते थे तो सुहानी की शादी बड़े अच्छे से हुई सब कुछ बहुत ही अच्छे से सम्पूर्ण हुआ और फिर सुहानी अपने ससुराल जा चुकी थी। मां को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए उस दिन मैं मां के साथ ही बैठा हुआ था मैंने उन्हें कहा कि अब आप हमारे साथ मुंबई आ जाइए। बबीता ने भी मां से कहा तो मां कहने लगी कि हां बेटा मैं तुम्हारे साथ ही आ जाऊंगी और मां अब हमारे साथ मुंबई आना चाहती थी और वह हमारे साथ मुंबई आ गई। हम लोग अब काफी खुश हैं बबीता के साथ मेरा जीवन तो अच्छे से चल रहा था। जब मेरा मन होता तो मैं बबीता को चोद लिया करता लेकिन जब से हमारे पड़ोस में रहने के लिए सिमरन भाभी आई है उन्हें देखकर मुझे ऐसा लगता है कि कब उन्हें मैं अपनी बाहों में समा लूं। जब उन्हे मैं देखता हूं तो मेरे लंड से पानी बाहर निकाल आता। मैं चाहता था कि सिमरन भाभी के बदन को मैं अपना बना लूं लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था वह मुझसे बात नहीं करती थी हालांकि वह हमारे पड़ोस में रहती थी लेकिन उसके बावजूद भी हम लोगों की बात नहीं हो पाती। मै सिमरन भाभी को किसी भी तरीके से हासिल करना चाहता था। एक दिन हम लोग लिफ्ट मे थे लिफ्ट मे जब हम दोनों थे तो हम लोगों के बीच बातें हो गई। हम लोग अब बात करने लगे सिमरन भाभी भी कहीं ना कहीं अपने पति से काफी परेशान थी। यह मेरे लिए बड़ा ही अच्छा मौका था मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए सिमरन भाभी को अपने कंधे पर सर रखने का मौका दे दिया वह मुझसे बातें करने लगी।

अब हम दोनों खुलकर बातें करने लगे हम लोगों की मैसेज चैट के माध्यम से बातें भी होने लगी थी। उन्होंने कहा कभी हमारे घर पर आइए तो मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं जब आप बुलाएंगे तो मैं जरूर आऊंगा। उस दिन मैं भाभी के पास चाय पीने के लिए गया चाय पीना तो सिर्फ एक बहाना था। मैने चाय पीते पीते जब भाभी का हाथ पकड़ लिया तो हम दोनों बहुत ही ज्यादा गर्म होने लगे और हमारी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि हम दोनों ही रह ना पाए और हम दोनों ने एक दूसरे से अपने होठों को टकराना शुरू कर दिया। अब हम दोनों के होठ एक दूसरे से लगने लगे थे जिस वजह से हमारी शरीर मे आग पैदा होने लगी थी। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो भाभी ने उसे अपने हाथों में लेते हुए हिलाना शुरू किया और थोड़ी देर तक हिलाने के बाद उन्होने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया।

वह जिस प्रकार से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी उससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और उन्हें भी आनंद आने लगा था। मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी मेरी गर्मी अब इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने सिमरन भाभी से कहा कि अब मैं आपकी चूत में अपने मोटे लंड को डालना चाहता हूं। उन्होंने भी अपनी साड़ी को ऊपर करते हुए मुझे कहा कि लो तुम मेरी चूत मार लो। मैंने भी उनकी चूत में अपने लंड को घुसेड दिया उनकी गुलाबी चूत मारने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था। जब मैं उनको धक्के देता तो वह मचलती मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया था जिसके बाद मैने उनकी ब्रा को खोलते हुए किनारे रख दिया। अब मैं उनके स्तनों को चूसने लगा मैं जब उनके स्तनों को चूस रहा था तो मुझे मजा आने लगा मैंने उन्हें कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। अब वह बहुत ही ज्यादा मचलने लगी थी मैंने उन्हें इतनी तेज गति से धक्के मारने शुरू किया कि वह मुझे कहने लगी बस मुझे ऐसे ही चोदते जाओ। मैंने उनकी गुलाबी चूत का मजा 15 मिनट तक लिया फिर उनकी चूत मे माल गिर दिया। जब मेरा वीर्य उनकी चूत में गिरा तो मैं उनके ऊपर ही लेटा हुआ था।

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